भोजपुरी भाषा के मजाक मत बनाई – रवि भूषण

भोजपुरी सिनेमा में बिजनेस देखत इंडस्ट्रीज के बड़का-बड़का फिल्म मेकरो एह भाषा में फिल्म बनावे लगले लेकिन भोजपुरी भाषा के मिठास के अहसास दिलावे में असफल रहल लोग. भोजपुरी के मिठासे त एकर असली खूशबू ह. अइसना में रवि भूषण एगो अइसन नाम ह जेकरा नसनस में भोजपुरी माटी के खून दउड़त बा. इहे कारण बा कि उनुका फिलिमन में पूरा भोजपुरियत के अहसास होला जवना के लोग खूब पंसद करेला. पिछला दिने लेखक निर्देशक रवि भूषण से भइल बातचीत से जानकारी पेश बा.

रवि भूषण सासाराम के एगो मध्यमवर्गीय परिवार से आवेले. उनुकर शुरूआती पढ़ाई लिखाई पंश्चिम चंपारण में भइल. पटना में फिल्म बाबू के काम करत दूरदर्शन से जुड़ले आ फेर साल 1987 में मुंबई आ गइलन. मुंबई में कुमार नाखी, शिशिर के मिश्रा, महेश भट्ट का साथे सहायक बनि के काम शुरू कइलन आ टाडा, साथी, दिल है कि मानता नहीं, स़ड़क, हम हैं राही प्यार के जइसन फिलिम कइले. एकरा अलावे अनेकन फिलिम आ सीरियल खातिर लिखबो कइलन. भोजपुरी सिनेमा में शुरूआत कइलन सुधाकर पाण्डे “प्रोडक्शन नंबर चार” खातिर बाकिर उनुका मरला का बाद ई फिल्म बनबे ना कइल निर्माता-निर्देशक के तौर पर रविभूषण के पहिला फिल्म रहल “रखीहऽ सेनुरवा आबाद” जवना के दर्शक खूब पंसद कइले. रविभूषण लेखक के तौर पर रंगीला बाबू, लोफर आ छेदी गंगा किनारे वाला कइलन.

लेखक आ निर्देशक का तौर पर रवि भूषण के अपना फिल्म ‘गुंडईराज’ से बड़हन कामयाबी मिलल. आ एह फिल्म के सफलता से दर्शक पवन सिंह के गंभीरता से देखे लगले. काहे कि एहसे पहिले पवन सिंह के जवन फिलिम आइल रहली सँ तवनन में लव एंगल आ इमोशन भरल रहे. गुंडईराज से पवन सिंह पहिला बेर एक्शन हीरो बनि के उभरलन. रवि भूषण के सोशल इमोशनल आ एक्शन फिल्म “डकैत” रिलीज होखे वाली बा. एह फिल्म में समाज में बैकवर्ड आ फारवर्ड जइसन कुप्रथा पर चोट कइल गइल बा. देखावे के कोशिश भइल बा कि कइसे गरीबनो के समाज में बरोबरी के हक दिहल जाव. जब अइसन होखे लागी तब केहु डकैत ना बनी. पवन सिंह एहु फिल्म में एगो खास किरदार कइले बाड़े.

हालही में भइल छठवाँ भोजपुरी अवार्ड समारोह में “लोफर” फिल्म खातिर रविभूषण के बेस्ट डॉयलॉग राइटर अवार्ड के घोषणा भइल. बाकिर रवि भूषण नाराज बाड़े कि पहिले त उनुका के एकर जानकारिये ना दिहल गइल कि ऊ नामनीओ बाड़े. फेर समारोह में उनुकर नाम गलत बोलल गइल आ रवि भूषण का जगहा भूषण श्रीवास्तव बोलल गइल. आ अबही ले ट्राफिओ के अतापता नइखे. कहलन कि ई उनुकर पहिला ट्राफी हवे आ आयोजकन से निवेदन बा कि एकर ख्याल राखे लोग.

एह बातचीत में रविभूषण खास कर के कहलन कि भोजपुरिया लोग अपना भाषा के मजाक मत उड़ावे. एकरा के बस कमाई के जरिया मत बनावे. हमेशा ध्यान राखे के चाहीं कि दोसरो इलाका के लोग का सोझा मूड़ी उठावे के बा.


(संजय भूषण पटियाला के रपट)

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