भोजपुरीः एगो परिचय

– डा. राजेन्द्र भारती

‘भाषा भोजपुरी परिभाषा से पूरी ह
बोले से पहिले एके जानल जरुरी ह
न गवना पूरी ना सुहागन के चूड़ी ह
साँचि मान त
दुश्मन के गरदन पर चले वाली छूरी ह
कहत धुरान बुरा मति माने केहू
सभ भाषा के उपर हमार भाषा भोजपुरी ह’

भारत के एगो प्रान्त उत्तर प्रदेश के बलिया जिला के बसन्तपुर गांव के कवि, लोकगीत गायक, ब्यास बीरेन्द्र सिंह धुरान के कहल इ कविता आजु केतना सार्थक बा एहकर अहसास तबे हो सकेला जब भोजपुरिहा भाई लोगन के आपन मातृभाषा भोजपुरी से नेह जागी.

भोजपुरिहा सरल सुभाव के होखेलन, एह बाति के नाजायज फायदा सरकार हमेशा से उठावत आईल बा. आ हमनी के माडर्न बने का फेर में आपन मूल संस्कृति के भुलावल जात बानी. हमनी से एक चौथाई भाषा संविधान का आठवीं सूची में दर्ज हो गइली स आ हमनी का टुकुर-टुकुर ताकते रह गईलीं जा.

आजु का तारीख में भोजपुरी करीब आठ करोड़ भोजपुरिहन के भाषा बा. भोजपुरिहा लोग बिहार, उत्तर प्रदेश, आ छतीसगढ़ के एगो बड़हन क्षेत्र में फईलल बाड़न. एकरा अलावे भारत का हर नगर महानगर में भोजपुरिहन के नीमन तायदाद बा. ई लोग हर जगह भोजपुरी के संस्था कायम क के भोजपुरी के अलख जगवले बाड़न. विदेशन में भी भोजपुरिहा भाई पीछे नईखन. मारीशस के आजादी के लड़ाई में भोजपुरी में आजादी के गीत गावल जात रहे. सूरीनाम, त्रिनिडाड, गुयाना में भी भोजपुरी के बड़ा आदर बा. भोजपुरी बोलेवालन के संख्या आ सीमा विस्तार के देखल जाव त भोजपुरी एगो अर्न्तराष्ट्रीय भाषा लेख लउके लागी.

भोजपुरी भाषा के कुछ अद्भुत विशेषता बा. सही मायने में देखल जाव त इ व्यवसाय आ व्यवहार के भाषा ह. एक मायने में भोजपुरी व्याकरण से जकड़ल नइखे बाकिर साहित्य सिरजन में धेयान जरुर दिहल जाला. इ भाषा के ध्वनि रागात्मक ह.

भोजपुरी भाषा में संस्कृत शब्दन के समावेश बा एकरा अलावे भारत के कई गो भाषा के शब्द आ विदेशी भाषा जइसे अंग्रेजी, फारसी आदि के शब्द भी समाहित बा.

भोजपुरी भाषा में साहित्य के सब विधा बिराजमान बा. भोजपुरी लोकगाथा, लोकगीत, लोकोक्ति, मुहावरा, कहावत, पहेली से भरपूर बा. वर्तमान में भोजपुरी साहित्य समृध हो गइल बा. भोजपुरी के केतने विधा आ विषयन पर शोध भइल बा आउर हो रहल बा. केतने विदेशी लोग भोजपुरी के केतने विषय पर शोध करले बाड़न आ करि रहल बाड़न. भोजपुरी के कइगो उत्कृष्ट पत्र पत्रिका प्रकाशित हो रहल बा. केतने शोध ग्रन्थ, उपन्यास, कहानी संग्रह, कविता संग्रह, गीत, गजल संग्रह इहंवा तकले कि कइयों विधा के भी भोजपुरी में लेखन कार्य चलि रहल बा.

भोजपुरी भाषा के उत्थान खतिर देश में कइगों भोजपुरी के संस्था कार्यरत बा. बिहार के विश्वविद्यालय में भोजपुरी में एम॰ए॰ तक के पढ़ाई चलि रहल बा. रेडियों, टी॰वी॰ भी भोजपुरी के अहमियत दे ता.

भोजपुरिहा सरल स्वभव के होलन, इनकर कहनी आ करनी में फरक ना होला. ई आपन स्वार्थ के परवाह ना करसु. बेझिझक मुंह पर जवाब देवे में माहिर होलन.

भोजपुरी भाषी के देवी-देवता में शिव, राम, हनुमान, कृष्ण, दुर्गा, काली, शीतलामाई विशेष रूप से पूजल जाला. समूचा बिहार के लोग जहवां भी बाड़न आ एकरे अलावे पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सा में छठ पूजा व्रत के प्रचलन बा.

भारत के स्वतन्त्रता आन्दोलन में भोजपुरी भाषी तन-मन-धन से लागल रहे लोग. अंग्रेज विद्वान ग्रियर्सन भोजपुरिहा लोगन के उल्लेख ऐह तरे कइले बाड़न ‘ई हिन्दुस्तान के लड़ाकू जाति में से एक ह लोग. ई सतर्क आ सक्रिय जाति ह. भोजपुरिहा युद्ध खातिर युद्ध के प्यार करेलन. ई समूचा भारत में फइलल बाड़न. एह जाति के प्रत्येक व्यक्ति कवनो स्वतः आईल सुअवसर से आपन भाग्य बनावे खतिर तइयार रहेले. पूर्वकाल में ई लोग हिन्दुस्तानी सेना में भरती होके मजबूती प्रदान कइले रहन,. साथ हीं 1857 के क्रान्ति में महत्वपूर्ण भगीदारी कइले रहन. लाठी से प्रेम करेवाला, मजबूत हड्डीवाला, लम्बा-तगड़ा भोजपुरिया के हाथ में लाठी लेके घर से दूर खेत में जात देखल जा सकऽता’.

भोजपुरिया आपन जनम भूमि के प्रति बड़ा श्रधा राखेले, देश-विदेश कहीं होखस आपन सभ्यता ना भूलास. कहीं रहस फगुआ चईता जरूर गइहें, आल्हा उदल के गीत जरूर होई. सोरठी बिरजा भानो गावल जाई. जनेउ, मुण्डन, तिलक, बिआह, छठिआर, ब्रत, तेवहार आ कवनो संस्कार के समय भोजपुरी के गीत गूंज उठेला. भोजपुरिया लोग के तिलक, बिआह, व्रत-त्योहार भा कवनो संस्कार के एगो अलग पहचान बा.

मारिशस, गुयाना, सुरीनाम, त्रिनिडाड में भोजपुरी बोले वाला पुजाला. आपन भोजपुरिया संस्कृति के बचाईं, भोजपुरी बोली, भोजपुरी पढ़ी, भोजपुरी लिखी, भोजपुरी गाईं, भोजपुरी के अलख जगाई.

जय भोजपुरी, जय भोजपुरिहा.

डा॰ राजेन्द्र भारती
सम्पादक, अंजोरिया.काम
कदम चौराहा, बलिया-277001


(श्रावण अंजोरिया 2060 विक्रमी / अगस्त 2003 ईस्वी सालः1 अंकः1 से )
ई संपादकीय अँजोरिया के संस्थापक संपादक डा॰ राजेन्द्र भारती अगस्त 2003 में प्रकाशित पहिला अंक में लिखले रहले. अँजोरिया के पुरनका पन्ना जोगावे खातिर एकरा के नयका संस्करण में प्रकाशित कइल जात बा. धीरे धीरे सगरी पुरनकी रचना एह तरफ ले आवल जाई.

Advertisements

One thought on “भोजपुरीः एगो परिचय

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s