राह आसान नइखे आ मंजिल अबही फरदवला बा : युगांत बद्री पाण्डेय

सोना जतने तपावल जाला ओतने निखरल जाला. ओही तरह अबही हमार तपल बाकी बा. अबहीं त बस शुरूआत भइल बा. ” कहलन युगांत बद्री पाण्डेय. युगांत बद्री पांडे अबही ले दू गो फिलिम, ‘‘बगावत एगो बदला’’ अउर ‘‘धरती गगन के प्रीत’’ में खलनायक रह चुकल बाड़न,

नवोदित अभिनेता युगांत बद्री आ अभिनय के रिश्ता दस साल पुरान ह. एकरा अलावे रंगमंच पर नाहियो त दू सौ नाटक खेल चुकल बाड़न बद्री पाण्डेय. झारखंड के डाल्टनगंज शहर से आइल युगांत के सामना मुंबई नगरी में संघर्ष से भइल. शुरूआत मिलल टेलीविजन से बाकिर निगाह सिनेमा के मंजिल पर टिकल रहल, जइसहीं मौका मिलल अपना के साबित कर दिहलन.

तबहियों युगांत के कहना बा कि राह आसान नइखे आ मंजिल अबहियों बहुत दूर बा. बाकिर उमीद नइखन छोड़ले आ प्रण बा कि एक ना एक दिन मंजिल हासिल कर के रहीहन.

चलत-चलत एगो बात अउर बतावत चलीं, युगांत तय कइले रहले कि जब मौका मिली सिनेमा में आवे क त अपना नाम में आपन आदर्श आ गुरू-पिता के नाम जोड़ लीहें आ इहे कइलन आ युगांत से युगांत बद्री पांडे बन गइलन.


(दिनेश यादव के रपट)

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