कब सुधरी भोजपुरी फिल्मउ़द्योग ?

खास करि के नवहियन खातिर बनावल भोजुपरी फिल्म ‘राजा जी’ के बिहार आ मुंबई में बंपर ओपनिंग मिलल बा. एह फिल्म के बिहार के 55 गो आ मुंबई के 32 गो सिनेमाघर में रिलीज कइल गइल.

पिछला महीना भोजुपरी के महानायक मनोज तिवारी के फिल्म ‘भईया हमार दयावान’ बिहार में 22 गो सिनेमाघर में रिलीज कइल गइल रहे त दिनेशलाल यादव के फिल्म ‘विदेसिया’ 20 गो सिनेमाघर में. आजु के नयका स्टार खेसारी लाल यादव के जान तेरे नाम 40 गो सिनेमाघर में रिलीज भइल रहे, आ मनोज पाण्डेय के फिल्म ‘राजा जी’ 55 गो सिनेमाघर में रिलीज भइल. देखल जाव त अब दू गो पुरनका स्टारन के समय उतार पर बा आ उनुकर जगह लेबे मनोज पाण्डेय आ खेसारी लाल यादव आ गइल बाड़े. अब मनोज तिवारी आ दिनेश लाल यादव बड़का अभिनेता त हइये ह लोग बाकिर ओह लोग के फिल्म अब चलत नइखे. फेर निर्माता ओह लोग के फिलिम देत काहे बाड़ें ? हमरा मालूम नइखे. हँ अतना जरूर कहब कि फिलिम बनावे से पहिले बिहार आ मुंबई के वितरकन से जरूर पूछे के चाहीं कि केकरा के लेके फिलिम बनाईं ? बहरहाल ! रवि किशन त भोजपुरी फिलिम छोड़िये दिहले बाड़न काहे कि उनुका अब भोजपुरी फिलिम मिलते नइखे. ऊ आजु काल्हु हिन्दी फिलिमन में आपन ठौर खोजत बाड़े. आखिर काहे ना खोजसु ? भोजपुरी निर्माता-निर्देशक पूछत नइखन. आजु भोजपुरी इंडस्ट्री में अनेके नया अभिनेता आ गइल बाड़े. एह लोग के अइला से भोजपुरी सिनेमा के बाजार अउरी उपर उठी. हँ अतना जरूर कहब कि अगर भोजपुरी सिनेमा के आगे बढ़त देखे के बा त आपन दाम सोच समुझ के लगावें लोग ना त ऊ फेरु पटा जाई.

पवन सिंह, विराज भट्ट, विनय आनंद, सुदीप पाण्डेय, पंकज केसरी, शुभम तिवारी, विक्रांत सिंह, कलुआ, प्रवेश लाल, धीरज पण्डित, विजयलाल यादव, अविनाश शाही जइसन अनेके अभिनेता बाड़ें जिनकर फिलिम खरीदला से शायद भोजपुरी इंडस्ट्री आ फिल्म वितरकन के समय बदल सकी. काहे कि एह लोग के कम दाम पर ले के निकहा बिजनेस कइल जा सकेला. जानत बानी कि ई लेख पढ़ के अनेके लोग हमरा के गरियावत होई. बाकिर का करीं, हमार कलम बिकाऊ नइखे.

हम सगरी निर्माता-निर्देशकन से निहोरा करब कि एह स्टारन के दाम पर काबू राखल जाव जेहसे निर्माता आपन अगिलो फिलिम बनावे के सोच सकसु. एह साल जतना बड़की भोजपुरी फिलिम रिलीज भइली सभकर बिजनेस टेबल पर बढ़िया ना रहला से सगरी निर्माता दुखी बाड़ें. हम त अपना बड़का निर्माता लोगन, अभय सिन्हा, दुर्गा प्रसाद, अनूप जलोटा, आलोक कुमार, रामाकांत प्रसाद, जितेश दुबे, डॉ. सुनील कुमार, दिलीप जायसवाल, राजकुमार आर पाण्डेय, हरीश गुप्ता, जे. पी. सिंह, टी. पी. अग्रवाल वगैरह सभे से पूछब कि कहे क त रउरा लोग कह दिहिलें कि फिलम सुपरहिट बा बाकिर का साचहू रउरा आपन लागत निकाल पाइलें ?


(संजय भूषण पटियाला के रपट)

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2 thoughts on “कब सुधरी भोजपुरी फिल्मउ़द्योग ?

  1. अंजोरिया के नीति रहल बा कि दोसरा केहू पर निजी लांछन ना लगावल जाव, भा दोसरा के टाँग खिचाईं मत होखे. ई लेख ओह नीति के लाँघत नइखे काहे कि एकर मकसद कवनो व्यक्ति विशेष के खिंचाई ना करि के भोजपुरी सिनेमा के आगा बढ़ावे के बा. रउरा एहसे सहमत होखीं भा ना बाकिर सच्चाई कुछ अइसने बा.
    एहिजा प्रकाशित होखे वाला अधिकतर रपट प्रचार करे खातिर होला. आ एह प्रचार के कुछ खासियत बा. कवनो स्टार सुपर स्टार से कम ना होखे, कवनो अदाकारा नंबर वन से नीचे ना रहसु. सगरी फिलिम “कमाल” के बनेली सँ, सगरी अभिनेता “कमाल” के अभिनय करेलें, सगरी निर्माता निर्देशको “कमाल” के होखेलें बाकिर फिलिमवा चले ना, काहे कि दर्शको आपन “कमाल” देखा देलें.
    हम बलिया में रहिके मुंबई फिल्म उद्योग के सही खबर ना त जान पाईं ना जाने के समय बा. हम त बस भोजपुरी के प्रचार खातिर लागल रहीलें. आपन धनदाह करत लोगन के धंधा चलावत रहीलें. दुख त एह बात के होला कि कवनो दर्शक भा आम पाठक आपन बाति कहे के जहमत ना उठावे. कई बेर कोशिश कइनी कि कुछ समीक्षक अइसन मिल जाव जे सही कह सको. बाउर के बाउर बता सको.
    नइखीं जानत कि संजय भूषण का सोच के ई हड्डा के छत्ता खरकोंचले बाड़े. बाकिर हम एह खरकोंचे में उनुकर साथ एह से दे दिहनी कि रोज मीठ मीठ खात जीभ सुन्न पड़ गइल बा, कुछ नमकीन, कुछ मिर्चाई जरूरी बा. हम त चाहब कि एही तरह लोग आपन ना सही त दोसरे का बारे में सही बात बतावल करे. उदाहरण खातिर फिलिम बिदेसिया का बारे में बहुते सुनलीं, प्रकाशित कइली बाकिर पता लगवनी त सुने में आवत बा कि फिलिम के बिजनेस बढ़िया ना रहल. फिलिम के दुनिया ग्लेमर के होला. एहिजा केहू शाश्वत ना होखे. जे आजु चढ़ाव पर बा से काल्हु उतार पर आ सकेला. जेकर नाम केहू नइखे सुनले से काल्हु बहार पर आ सकेला.
    रहल सवाल भोजपुरी के त अब हमहू हारल थाकत जात बानी. कतना दिन ले केहू अकेले लुकारी भाँजत रही. जंगल में मोर नाचल के देखल? अतना मेहनत से, आपन धनदाह करत लागल बानी आ पढ़े वालन के अतनो नइखे लागत कि दू लाइन लिखत जाईं. अगर एकतरफे संवाद करे क बा त काहे खातिर ई इन्टरएक्टिव साइट चलाईं? पुरनके स्टेटिक साइट ओह हाल में निमन रही. हमार अलविदा कहे के समय नियरात जात बा. जेकरा बैटन सम्हारे के बा से आगे आवे बढ़ि जाव. हमार शुभकामना ओकरा साथे रही.
    अलग बाति बा कि अबहीं हम सरेण्डर करे नइखीं जात. अबहीं लागल रहब. जब ले जाँगर बा तबले जांगर ठेठावत रहब.
    संपादक,
    अँजोरिया समूह

  2. राजी जी मुंबई में ३२ सिनेमाघर में ना तेरहे गो में लागल रहे. अगर संजय भूषण में दम होखे त ओह बत्तीस गो सिनेमा घर के नाम बतावसु ना त एह धंधा से हट जासु.

    एगो प्रचारके से मिलल चुनौती

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