गुदगुदी कि बेहयाई

– पाण्डेय हरिराम


फिल्म अभिनेत्री रेखा के नाम राज्य सभा खातिर सरकार मनोनीत कइले बिया आ जया बच्चन ओहिजा पहिले से चुना के आइल बाड़ी. एकरा के लेके मीडिया में बहुते चरचा बा. रसगर मजगर कहानी गढ़ाए लागल बा. ऊ कहाँ बइठी लोग, एक संगे बइठी लोग कि ना, बइठी लोग त बतियाई कि ना, वगैरह वगैरह.

एह सिलसिला में एगो प्रसंग बतावे पड़त बा. ओह जमाना में ना त ‘पिपली लाइव’ रहे ना ही बटुकनाथ एपीसोड. जमाना रहे जब सन्मार्ग के सम्पादक यशस्वी सम्पादक रामअवतार जी गुप्त रहनी. ओहि घरी सन्मार्ग में एक दिन एगो ‘बोल्ड’ तस्वीर छप गइल. अब पूरा स्टाफ के खिंचाई हो गइल. गु्प्त जी अपना डिप्टी के आदेश दिहनी कि दुबारा अइसन ना होखे. ओह दिन एकर कारण समुझ में ना आइल रहे. बस अतने समुझल गइल कि ‘नैतिकता के प्रति बेहद निष्ठावान आदमी हईं एहसे ई आदेश दिहनी.’ ओकरा कुछ दिन का बाद के घटना ह जब प्रोफेसर मटुकनाथ के प्रेमिका जूली के उनुकर पत्नी सरेआम पीटत रही आ टेलीविजऩ चैनल वाला सभ कवनो प्रायोजित कार्यक्रम जइसन ओकर लाइव प्रसारण करत रहलें. फेर बाद में लूप में डालके बेर-बेर देखवलें. अचरज ना पिटाई में रहल ना टीवी चैनलन का बेहयाई में. अचरज ओह गुदगुदी में रहल, जवन मन के भितरे होत रहुवे. अचरज रहे कि ई सब देखि के मन ना पसीजे, दुख ना उपजे. चरमसुख जइसन कुछ मिलत अस लागेला. अइसने सुख तबो मिलत रहे जब अखबारन में आ बाद में पत्रिकन में “तस्वीर” देखल करीं सँ. बार-बार देखल करीं सँ.

याद बा रउरा? घर के बड़की पतोहु सोनिया गांधी के दिवंगत देवर के पत्नी आ घर के छोटकी पतोहु मेनका गांधी के घर से निकाल दिहल गइल रहे. सामान सड़क पर फेंकाइल पड़ल रहे. एगो छोट लड़िका सामानन का साथे खड़ा रहुवे. याद बा आपके मन कइसन मुदित होत रहे ई तस्वीर देखि के? मन बावरा ह. तरह-तरह के कल्पना करत रहेला. अबही ले ऊ तस्वीर मन में बा. अबहियो ऊ आँख लगवले रहेला कि संसद का भीतर दुनु पतोहियन का नजर कबो मिलेला कि ना. खबरन पर नजर रहेला, छोटकी पतोहु का घरे पतोहु आवत बिया त बड़की पतोहु के कहना कइसन बा?

अचरज होला कि बेगानी शादी में अब्दुल्ला काहे दीवाना हो जाला. अरे शादी में होखे त होखे, शादी टूटे-बिखरे लागेले तबहियो चटखारा लेबे में मजा आवेला. केहु फुसफुसा के कहले रहल, देश के सबले बड़का औद्योगिक घराना के पतोहु एगो मिस इंडिया रहल से नाराज बाड़ी. बाड़ी त रहसु, हमरा बला से. लेकिन अचरज बा कि मन में गुदगुदी भइल. दिल में एगो लहर उठल. ऊ फुसफुसाहट एक कान से सुननी आ फेर तुरते दोसरको कान लगा दिहनी. परमानंद एकरे के कहल जात होखी. अब सभे केहू अखबार के कोना वाला कॉलम में पढ़त रहुवे कि मिसेस शाहरुख खान माने कि गौरी एह घरी प्रियंका चोपड़ा नाम के एगो फिल्म अभिनेत्री से नाराज बाड़ी. सुनत बानी कि ऊ कुछ अउरी अभिनेता पत्नियन के अपना नाराजगी में साझेदार बना लिहले बाड़ी. बावे त खराब. लेकिन का करीं कि मन मंद-मंद मुसुकाता. पुरान खाज के खजुलावे जइसन सुख मिलत बा. सवतिया डाह के खबर जइसन सुख परनिंदो में ना मिले. अब फेर बात आवत बा संसद में. जया बच्चन के घर के सामने वाला आंगन में बइठल बोफोर्स नाम के भूत 25 साल बाद ले- देके टरल. राहत के सांस लिहले दुइयो दिन ना बीतल कि आपन पत्रकार भाई-बहन लोग उनुका पिछवाड़ा वाला अँगना के फोटो लेबे लगलें. पुछनी त कहल कि पिछला दरवाजा से एगो अउर भूत घुस आइल बा. रेखा नाम के. रेखा जी, कुछ ही दिन में माननीय सांसद हो जइहें. बस शपथ लिहला के देर बा. लेकिन लोग का-का चुटकुला सुनावत बाड़े. एगो आदरणीय मित्र लिखलन, जवन अमिताभो ना कर पवलन से सरकार कर दिहलसि, जया आ रेखा अब एके “हाउस” में बाड़ी. बाद में देखनी कि मित्र के कल्पनाशीलता फेसबुक नाम के जंजाल में पसर गइल बा. सभे अइसने कुछ ना कुछ लिखत बा साथ ही एगो इस्माइली चिपका देत बा.

गुदगुदी असर देखावत बिया. केहू कहल, ‘जे अमिताभ के बोफोर्स में झूठे फंसवले रहुवे, ओही लोगन के करतूत बा कि अब बोफोर्स से छूटले त राज्यसभा में फंसा दिहलें.’

लोग इन्तजार करत बा कि कवना दिने दुनु देवी आमने-सामने होंखीहें. एगो कल्पनाशील पत्रकार मित्र के सलाह मिलल, ‘राज्यसभा के सिटिंग अरेंजमेंट के ग्राफिक बनवाकर ओहमें देखावऽ कि जया कहां बइठीहन आ रेखा कहवाँ बइठीहन. ओकरा के वेबसाइट पर लगवाव. देखऽ कइसन हिट होखत बा.’ कल्पना के घोड़ा धावत बाड़ें. लोग आंख मूंदले मंद-मंद मुसुकात बा. एह महंगाई के जमाना में लोगन के फोकटिया सुख मिलत बा. अचरज बा कि केहू दुखी नइखे. रउरा अगर दुख बा, त आपन इलाज करवाईं. ई मटुकनाथ उर्फ चौराहा पर प्रेम के गलीज जमाना ह. हमनी के मीडिया का लगे इहे सब सुनावे लायक बा आ इहे हमनी के मूल्यबोध हो गइल बा. हो सकेला हमार एह विरोध के हमार पाठक विरोध करसु बाकिर ई त तय बा कि आज पीढ़ी मूल्यहीनता के गहिरा गर्त में गिर चुकल बा आ खास किस्म के बेहयाई के हमनी का तरक्की के चोला पहिरावत बानी.
(४ मई २०१२)



पाण्डेय हरिराम जी कोलकाता से प्रकाशित होखे वाला लोकप्रिय हिन्दी अखबार “सन्मार्ग” के संपादक हईं आ उहाँ का अपना ब्लॉग पर हिन्दी में लिखल करेनी.

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