आपन तऽ कवनो स्टैंडर्ड ना दोसरा के ‘पुअर’ बतावत बाड़े

– जयंती पांडेय

रामचेला दुपहरिया में बाबा लस्टमानंद के दुअरा मुंह लटकवले अइले आ कहले, अमरीका के एगो कम्पनी बा ऊ तऽ हमनी के देश के कंगाल बता के कहि देता कि ओकर कवनो साख नइखे. ई खबर से भारत के रेटिंग घट गइल. बाबा लस्टमानंद कहले, हँ हो ई खबरिया तऽ हमहु पढ़ले बानी, लेकिन तूं तनी गलती बूझलऽ हऽ. ऊ हमनी के क्रेडिट रेटिंग घटवले बा. रामचेला कहले , बाबा हो, ओकरा नांवे में पुअर बा. माने गरीब. ऊ जे बा हमनी अइसन स्टैंडर्ड देश के साख के कम करऽ ता. ई अमरीकी असहीं होले सन. एकर माने बूझलऽ. लस्टमानंद ना में मूड़ी डोलवले. एकर माने होला कि बाबा लस्टमानंद के लगे माल मत्ता कम बा, कर्जा देवे वाला लोग हुंसियार रहो. अब कर्जा देबे वाला लोग तऽ पूरा चालू होला ऊ कर्जा ना रोकी लोग बस सूद बढ़ा दी लोग. अब जान लऽ ओकनी का हमरा से भेंट ना कइले सन ना तऽ बतवतीं कि जवन देश के आपन कवनो क्रेडिट ना होखे तऽ ऊ दोसरा देश के रेटिंग ना कर सकेला. इहो कहल जा सकेला कि जवन देश के आपन कवनो स्टैंडर्ड नइखे ऊ दोसरा के पुअर काहे कही. बाबा समझवले, भाई रामचेला ऊ अमरीका हऽ ओहिजा दूइयेगो कैटिगरी होला – जे स्टैंडर्ड नइखे ऊ पुअर बा. ई चूंकि इंडिया हऽ, एहले मामला बहुत कनफ्यूजिंग बा. अब जइसे मनरखन भाई वइसे तऽ पुअर हउवें बाकिर बेटा बड़का अफसर हो गइल आ प्रांत के मंत्री बेटी खातिर रिश्ता लेके अइले तऽ स्टैंडर्ड हो गइलें. अब अपना गांव के ननकिसोर पांड़े बाड़े. वइसे बड़का गिरहथ हउवें आ पइसो बा लेकिन एक एक पइसा दांते धरेले तऽ पुअर लउकेले. इहां स्टैंडर्ड अउर पुअर के फैसला एतना आसान नइखे.

पर रामचेला कहां माने वाला रहले. बड़ा गंभीरता से कहले, क्रेडिट रेटिंग, जीडीपी, इनकम वगैरह के सबे आंकड़ा गलत हऽ. बाबा समझवले , चिंता मत करऽ. इंडिया में इनकम वगैरह के आंकड़ा असली ना होला. एक ऊ इनकम होला जे असली होला. एक ऊ इनकम होला , जे इनकम टैक्स अफसर के बतावल जाला. एक ऊ इनकम होला , जे लड़िकी क शादी के टाइम पर समधीजी के बतावल जाला. एक इनकम ऊ हऽ, जे बेटा के बियाह के टाइम पर समधीजी के बतावल जाला. एक ही जमीन के भाव पता कऽ लऽ, रजिस्ट्री के भाव सरकारी रही आ खरीद के भाव दोसर रही. बेटिहा आई तऽ बेटा खातिर दहेज मांगल जाई जे रेट कबहुओं ना मिली. आमदनी का बारे में सरकार आ मेहरारू से बेवकूफे आदमी सांच बतावेला. विश्वास करऽ अपना देस के ज्यादातर लोग बेवकूफ नइखे. भले मार्कण्डेय चाचा कहस कि 90 प्रतिशत इंडियंस बेवकूफ होला? ई जान लऽ कि हमनी का ओतने स्टैंडर्ड बानी सन, जेतना दू हफ्ता पहिले रहनी सन आउर ओतने पुअर बानी सन जेतना दू हफ्ता पहिले रहनी सन. भाई रामचेला ई सुन के चुपा गइले आ लगले सुर्ती बनावे.


जयंती पांडेय दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में एम.ए. हईं आ कोलकाता, पटना, रांची, भुवनेश्वर से प्रकाशित सन्मार्ग अखबार में भोजपुरी व्यंग्य स्तंभ “लस्टम पस्टम” के नियमित लेखिका हईं. एकरा अलावे कई गो दोसरो पत्र-पत्रिकायन में हिंदी भा अंग्रेजी में आलेख प्रकाशित होत रहेला. बिहार के सिवान जिला के खुदरा गांव के बहू जयंती आजुकाल्हु कोलकाता में रहीलें.

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