ई न भइल बात

– जयंती पांडेय

अबहीं दिन चढ़ल शुरूए भईल रहे आ घामो अब तपल शुरु हो गइल रहे कि रामचेला बाबा लस्टमानंद के मड़ई में अइलें. उनका कांखि में एगो अखबार दबाइल रहे. ऊ अखबार निकाल के बाबा के दिहले. बाबा पढ़ल शुरू कइलें.

ओह में लिखल रहे कि सूतला में जेकर नाक बाजेला ओकरा हार्ट अटैक के डर बेसी रहेला. बाबा के नाक पूरा बाजेला, ऊ डेरा गइले. धीरे धीरे जइसे आगे बढले अखबर के एगो कोना में लिखल रहे कि आस्ट्रेलिया में मोट लोगन पर ज्यादा टैक्स लागी. बाबा अउरी डेरा गइले. कहीं ई खबर आपन वित्त मंत्री जी पढ़ि लिहले त ऊ खट दे काल्हुये आडिनेंस जारी क दीहें आ अपना देश पर एगो अउरी टैक्स बढ़ि जाई. आस्ट्रेलिया में सरकार फैट टैक्स लगावे के तैयारी में बिया. अपना देश में त ई टैक्स अगर लाग गइल त ओकर दोसरे असर होई. जइसे कि मेडिकल इंश्योरेंस करे वाली कंपनी मोटकन लोग से लगीहें सँ बेसी प्रीमियम वसूले. कवनों कवनों त हो सकेला कि 50 प्रतिशत बेसी लगा दीहें सन. अब त बाबा खराटा से आ मोटापा से पहिलहीं हरान रहले अब जे टैक्स बढ़ल त खटिया खड़ा हो जाई. एतने ना होई. अगर मोटापा के अलावा जे केहु सिगरेट वगैरह पीअत होई त ओकरा 300 प्रतिशत अधिका प्रीमियम चुकावे के होई. एकरा कहल जाई कि गइल भईंस पानी में. अब जे भईंस पानी में चल जाई त ओकरा के दूहल कइसे जाई? एही से कहऽतानी कि ई खबरिया वित्त मंत्री के मत पढ़वईह.


जयंती पांडेय दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में एम.ए. हईं आ कोलकाता, पटना, रांची, भुवनेश्वर से प्रकाशित सन्मार्ग अखबार में भोजपुरी व्यंग्य स्तंभ “लस्टम पस्टम” के नियमित लेखिका हईं. एकरा अलावे कई गो दोसरो पत्र-पत्रिकायन में हिंदी भा अंग्रेजी में आलेख प्रकाशित होत रहेला. बिहार के सिवान जिला के खुदरा गांव के बहू जयंती आजुकाल्हु कोलकाता में रहीलें.

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