पुलिस के नाक कटला से बचाईं

– जयंती पांडेय

एक दिन एगो प्रोफेसर साहेब, उनकर नांव ह रवींद्र पाठक जी, बिहार के सिवान जिला से आ के लस्टमानंद से भेंट कइले. बाते बात में पुलिस पर चर्चा चलि गइल त पाठक जी बड़ा दुखी हो के बतवले ‘आजुओ काल पुलिस के बारे में लोग के अच्छा विचार नइखे. एक दिन हमार मोबाइल फोन चोरी हो गइल. थाना में रिपोर्ट लिखवा दिहनी. पुलिस चोर के ध लिहलस. लेकिन जब हम गइनी त चोर थाना में ना रहे. पुलिस ओकरा के छोड़ चुकल रहे. लेकिन हमार मोबाइल जब्त क लिहले रहे. जब हम मंगनी त कहले कि मोबाइल के कोर्ट से छोड़ावे के परी. हम दंग कि चोर के त पुलिस छोड़ि दिहलस लेकिन मोबाइल कोर्ट से छूटि.’ बाबा तहार का विचार बा पुलिस कं बारे में.

बाबा सुर्ती थूकि के कहले , हो पाठक बाबा रउआ त अइसन पूछऽतानी कि बुझाता कि कवनो चैनलीय पत्रकार हईं. बाकी ई जान लीं कि प्रात: स्मरणीय आ दुपहरिया के विस्मरणीय आ सांझ के असहनीय पुलिस के सबसे बड़हन खूबी ह कि ऊ सबके एके आंखि से देखे ले चाहे ऊ गुंडा होखो चाहे घोटालाबाज. चाहे ऊ शरीफ होखो चाहे मजदूर. जवन भ्रष्टाचार के ले के आतना हाला बा ऊ ई पुलिस के पवित्र संस्कृति ह. ई लोग गाली दिहला में आ गोली चलवला में ही माहिर ना होला लोग बल्कि आउर कई गो कला बा जेकर महारत ई लोग में रहेला. ई लोग टेबुल के नीचे आ परदा के पीछे के इसारा के खूब बूझेला. एकदम साफ डीलिंग होला ई लोग के. या त लाठी के भासा बूझेला लोग ना त पईसा के भासा. जेकरा हमनी का अपराध कहेनी सन ओकरा के ई लोग उद्योग बूझेला आ ऊ लोग के बसे खातिर अवसर आ जगहि दिवावे ला. एगो पुलिस अधिकारी बतवले कि समाज जेकरा से मुंह मोड़ लेला ओकरा हमनी का जीए के मौका देनी सन. ई केतना आदर्श समाज सेवा ह कि जेकरा के अपराधी कहि के समाज अलग क देला ओकरा के पुलिस सहारा देले. अब ओकर गलत मतलब लगा ल त केहु का करो.

अब सड़क पर ट्राफिक पुलिस के ओर से लिखल लउके ला कि ‘वी केयर फार यू’ , माने हम रउरा सब के खेयाल राखी ले. अब अगर केहु गाड़ी चलावे वाला एने ओने ताको आ केहु के लाग जाउ, चाहे रउरा कवनो कारण से सिगनल ना मानीं त धराहीं के बा, लेकिन ऊ मामला के रफा दफा करे खातिर जवन फीस ले ला ऊ ओकर सेवा भावना आ समाज से पक्का निष्ठा के उदाहरण ह. अब रउरा कवनो ट्राफिक के नियम भंग कईनी त फाइन होई. अब ऊ डांड़ देवे जब ट्रेजरी में जायेब चाहे थाना में जायेब त टाइम बरबाद होई. राउर काम हरजा होई आ मन में तनाव बढ़ि. एके हाली ई सबसे छुटकारा मिल जाई. केतना मौलिक चिंतन बा. अब ई चिंतन के बड़ाई करे के बजाय लोग एकर बुराई करे ला. पुलिस वाला भाई लोग गांधी जी के परम भगत होला. हमेसा पाकिट में गांधी छाप कड़क नोट राखेला आ जादे से जादे उनकर फोटो वाला नोट लेवे के चक्कर में रहेला लोग. भारतीय पुलिस दुनिया के सबसे तेज पुलिस ह. एक हाली एगो अमरीकी पुलिस के अफसर आ एगो ब्रिटिश पुलिस के अफसर के संगे एगो भारतीय पुलिस के अफसर बइठल रहे. बात चलल कि के केतना देर में कवनो अपराध के सुराग खोज ले ला. अमरीकी पुलिस वाला अफसर कहलस कि हमनी का त चौबीस घंटा में पता लगा लेनी सन. ब्रिटिश कहलस कि हमनी का 12 घंटा में पता लगा लेनी सन. ई सुन के भारतीय पुलिस वाला ठठा के हंसलस आ कहलस कि हमनी का त अपराध होला के 12 घंटा पहिले से जानेनी सन कि कहां ऊ होई आ मामला में केकरा के सजा दिहल जाई. एगो सर्वे में आइल रहे कि हमार भारत के पुलिस भ्रष्टाचार के मामला में दुनिया में चौथा नम्बर पर बा. अब ई हम देशवासी लोग के कर्त्तव्य ह कि एकरा एक नम्बर पर ले आईं सन ना त बेचारी पुलिस के नाक कटा जाई.


जयंती पांडेय दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में एम.ए. हईं आ कोलकाता, पटना, रांची, भुवनेश्वर से प्रकाशित सन्मार्ग अखबार में भोजपुरी व्यंग्य स्तंभ “लस्टम पस्टम” के नियमित लेखिका हईं. एकरा अलावे कई गो दोसरो पत्र-पत्रिकायन में हिंदी भा अंग्रेजी में आलेख प्रकाशित होत रहेला. बिहार के सिवान जिला के खुदरा गांव के बहू जयंती आजुकाल्हु कोलकाता में रहीलें.

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