बतकुच्चन – ६३


आजु जब बतकुच्चन लिखे बइठल बानी त घर दुअरा, खेते खरिहान, सड़क बधार सगरी ओर आसमान से आग बरसत बा. आ एह आग से राजनीतिओ बाच नइखे पावल. पेट्रोल क दाम में बढ़ोतरी का खिलाफ जनता अगियाइल बिआ आ राजनीतिक दल विरोध करे में लागल बाड़े. जे विरोध करत बा ओकरो मालूम बा कि दाम त बढ़हीं के रहे. बाकिर विरोध करे क बा त करहीं के पड़ी. समाचार देखला से साफ हो जात बा कि जहाँ जहाँ विरोधी दल वालन के सरकार बा ओहिजा ओहिजा विरोध जम के होखत बा. कुछ राजनीतिक दल कनियओ क भाई आ दुलहवो के भाई वाला रूख अपनवले बाड़ें. उनुके समर्थन से केंद्र के सरकार चलत बिया बाकिर ओकरा के समर्थन देत रहींहे आ सड़कि पर जनता के बरगलावे खातिर आपन विरोधी रुखो अपनवले रहीहें. अगर ममता, मुलायम, करूणानिधि चाह लेसु त केंद्र सरकार के का बेंवत कि ऊ एह लोग के खिलाफ फैसला ले लेव. बाकिर सभे जानत बा कि हाथी के खाए वाला दाँत दोसर होला आ देखावे वाला दाँत दोसर. आ एह दाँत से याद पड़ि गइल कि रिश्ता चार तरह के होला. खून के रिश्ता, दाँत निपोरन, देह देखावन, आ चूल्ह अगोरन. अब खून के रिश्ता बतावल त जरूरी नइखे बाकिर दाँत निपोरन, देह देखावन, आ चूल्ह अगोरन का बारे में तनी साफ कर दिहल जरूरी लागत बा. दाँत निपोरन में दोस्त मीत आ मतलबी चापलूस लोग आवेला जे हर बाति में दाँत निपोरले हिंहियात फिरेला. अइसनका दोस्त राजनीति में अधिका मिलेलें. फेर में त रहीहें आपन गोटी लाल करे के बाकिर सामने वाला का सोझा अइसन हिनहिनात रहीहें कि लागो उनुकर सबकुछ सामनहीं वाला खातिर बा. देह देखावन रिश्ता में दामाद, साढ़ू, फूफा वगैरह आवेलें जे नजर त हर जग परोजन में अइहें बाकिर भरसक कोशिश रही के देह लउकतो रहो आ बाचलो रहो. चूल्ह अगोरन में मामा आ सार जइसन लोग आवेला, ममो त सारे होखेलें बाप के. ई लोग जब कबो आई त मिनट दू मिनट भलहीं दुअरा ठहरि जाई बाकिर तुरते बहिना कहत चूहानी के रूख क ली लोग. एहिसे एह लोग के चूल्ह अगोरन कहल जाला. अब रउरा सोचीं कि राजनीति के चूल्ह अगोरन के होला. राजनीति के चूल्ह अगोरन खातिर एगो अउरी प्रचलित नाम ह किचन कैबिनेट भा कोटरी. ई लोग के रिश्ता सीधे आलाकमान से होला आ समुझदार लोग एह लोग से अझुराव ना. अब मामा शब्द कुछ दोसरो मतलब राखेला. पता लगावे क होखे त कोलकाता के कवनो सिपाही के मामा कहि के देख लीं तुरते सगरी मतलब साफ हो जाई. अगर राउर मामर हेठ ना करि दिहलें त ऊ साचहूं मामा होखीहें. मामर हेठ कइल एगो भोजपुरी कहाउत ह केहू के घमंड तूड़े के. मामर हेठ करे के मौका राजनीतिओ में केहू ना छोड़े. आ एह मौका पर अचके याद आवत बा कि आजु आपन सेनाध्यक्ष वीके सिहं रिटायर होत बाड़न. बहुते कोशिश भइल कि एह जनरल के मामर हेठ कर दिहल जाव बाकिर ऊ हर दाँव खाली करावत चलि गइलें. अन्ना के टीम के मामर हेठ करे में सगरी राजनेता लागल बाड़ें काहे कि एह टीम का चलते सभका खातिर मुश्किल होखल जात बा. दोष लगावे वाला के कुछ सोचे क ना होला. ओकरा त बस अछरंग लगावे के बा. आ ई रंग अइसन होले कि अगर कमजोर चमड़ी भेंटाइल त ओकरा पर अइसन चढ़ी कि छोड़वले ना छूटी. देख लीं एक लाख रुपिया घूस लेबे वाला आजु जेल में बा आ एक लाख करोड़ रुपिया बटोरे वाला मस्त घूमत बाड़ें. ऊ जानत बाड़ें कि बड़का चोरन के केहू कुछ ना करि सके. अगलगी में कुकुर ना जरसु ई बाति सभे जानेला. बाकिर आसमान से जवन आगि बरसत बा ओकरा से कइसे बाचल जाव. चलीं तनी छाँहे बइठल जाव.

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