भोजपुरी का सेवा में दसवाँ साल

अँजोरिया आजु १९ जुलाई २०१२ से दसवाँ साल में प्रवेश कर गइल बा. एह मौका पर अपना सगरी पाठक परिवार के हार्दिक अभिनन्दन करत बिया अँजोरिया. पिछला नौ साल में नव करम झेलला का बादो अँजोरिया चलत रह गइल त एगो अचरजे बा. ना त पता ना कतने वेबसाइट खुललीं सँ आ गँवे गँवे बिला गइली सँ. कारण खोजी त कई गो मिल जाई.

पहिला त ई कि भोजपुरियन के आदत नइखे कि भोजपुरी साइट्स खोल के देखसु कि भोजपुरी में कहवाँ का होत बा. भोजपुरियन के सुभाव जइसन हो जाला कि दोसरा के बारे में कम अपना बारे में अधिका बतियावेलें. भोजपुरी खातिर माँगे वाला बहुते बाड़न देबे वाला कम. आ एकर हद त तब हो जाला जब लोग आपन रायो देबे से नकार देला. देखत आइल बानी कि पाठक लोग टीका टिप्पणी करे से गुरेज करेला. एके सबले बड़ नुकसान होला कि पता ना चले कि का अच्छा लागत बा का खराब. रोज पाँच सात सौ विजिट होला अँजोरिया पर बाकिर पाँच सातो गो लोग के टिप्पणी पढ़े के ना मिले. एकाध गो चंदन आ अमृतांशु के छोड़ दीं त शायदे कवनो पाठक होइहें जे महीनो दू महीना पर कबो कवनो टिप्पणी करत होखसु.

दोसर कारण आ हो सकेला कि सबले बड़का कारण एह वेबसाइटन के आर्थिक आत्मनिर्भरता के कमी. लोग आवेला, शान से साइट शुरु होले, तकनीकि विशेषज्ञता से बढ़िया बढ़िया साइट शुरू होली सँ बाकिर फेर असकत आ जाला कुछ करे में, काहें कि फूटल झुनझुना केहू कब ले बजाई.

तिसरका कारण बा गुटबाजी. भोजपुरियिन के हालत तीन कनौजिया तेरह चुल्हा वाला हो गइल बा. सभे आपन ढपली बजावे में लागल बा. सभ आपन छाती फुलवले घुमेला कि भोजपुरी बा त बस हमरे से, आ रही त बस हमरे से. भुला जाला लोग कि दुनिया में कबो कवनो चीज टिकाऊ ना होला. भोजपुरी जिन्दा बिया त आम आदमी का चलते, अपना तथाकथित नेतवन का चलते ना. गुटबाजी से नुकसान देर सबेर ओकरे होला जे एह गुटबाजी का दलदल में फँस जाला. अँजोरिया चलावत बहुते लोग मिलल, कुछ दिन ले साथ चलल बाकिर फेर लोग अपना अपना राहे चल दिहल. एह में हमरे में कुछ कमी होखी जे हम लोग के कवनो काम के ना लगनी आ लोग देर सबेर मुँह फेर लिहल.

चउथका कारण भोजपुरी में लिखला पढ़ला के कमी, बतियवला में कवनो कमी हमरा ना बुझाव. भोजपुरी बोले बतियावे वाला लोगो के देखेनीं कि भोजपुरी लिखे पढ़े में दिक्कत होला. एक त एकर उच्चारण आ लिपि में फरक का चलते. लिखल बा बाति बाकिर पढ़े के बा बात, लिखल बा चलसु बाकिर पढ़े के बा चलस. भोजपुरी में अर्ध ह्रस्व स्वर दीर्घ दीर्घ स्वर का चलते ई कठिनाई आवेला. स्कूल कॉलेजन में हिंदी पढ़ावल जाले, भोजपुरी ना. एह चलते लोग के हिंदी वाला उच्चारण जुबाने चढ़ि जाला आ सुभावे हो जाला हिंदी वालन का तरह लिखे पढ़े के. भोजपुरी में “भी” के कवनो जगहा ना होखे के चाहीं बाकिर भोजपुरी के बहुते प्रतिष्ठित साहित्यकारनो का साथे ई “भी” जोंक लेखा सटल बा, छोड़वले ना छूटे. अउरियो बहुत कुछ बा जवना खातिर सामूहिक फैसला करे के जरूरत बा. जरूरत बा कि भोजपुरी के विद्वत मंडली बइठो आ एह सब पर विचार करो. बाकिर विद्वत मंडली बइठो त कइसे जब एक विद्वान दोसरा के विद्वान माने के तइयारे ना होखीहें.

अपना वर्षगाँठ जइसन खुशी का मौका पर हम ई विरही राग उठा दिहनी त मजबूरी में. पिछला नौ साल के अनुभव सुखद नइखे रहल आ आगहुं सुखद होखे के उमेद नइखे. बाकिर हम त एह लाइलाज बीमारी के शिकार बानी जे घर परिवार का विरोधो का बाद एह भोजपुरी में लागल बा आ जबले जाँगर आ बेंवत रही लागल रही. जब ना रह जाई त फेर केहु अइबे करी जे एह काम में लाग जाई. आ ना लागी त गूगल बड़ले बावे. काल्हुवे पढ़नी कि गूगल एगो नया सेवा शुरू कइले बा जवना में दुनिया के मरे वाली भाषा के जिआवे, सम्हार के राखे के इंतजाम कइल जात बा. डर बा कि कहियो भोजपुरीओ के ओह सेवा के जरूरत मत पड़ि जाव.

अँजोरिया अपना दिसाईं भोजपुरी के बढ़ावा देबे खातिर सोचत बिया पुस्तक प्रकाशन में उतरे के. अबहीं जवन कुछ छपत बा तवना के दायरा बहुते सीमित बा. आपन किताब छपवावे खातिर पूरा खरचा दिहला का बादो जवन छपत बा तवना में बहुते कुछ गलत रह जाता. दाम अतना बेसी राखल जात बा कि लोग खरीदिए ना पाई चहलो पर. बाकिर सरकारी खरीद में कमीशन लुटावे खातिर प्रकाशक वइसने दाम रखीहें जवना से बाँटिओबूँट के ओकरा तर माल भेंटा जाव. आम पाठकन के कवनो चिंता नइखे ओह प्रकाशक के काहें कि ओकरा मालूम बा कि भोजपुरी के कवनो पाठक वर्ग नइखे जे भोजपुरी के किताब खरीद के पढ़त होखे. फोकट में भेंटा जाव त जरूर देख ली. एह से भोजपुरी के किताब स्टाल पर अइबे ना करे आ जब अइबे ना करे त बिकाए कइसे?

एह से अँजोरिया के योजना बा कि भोजपुरी के एगो पाठक वर्ग खोजल जाव, तइयार कइल जाव जे भोजपुरी किताबन के खरीदे आ पढ़े. एह खातिर दाम बान्हे के कोशिश करे के पड़ी. लेखक के खरचा त अबहियों होखी बाकिर जब किताब बिकाए लागी त ओह खरचा से कमाईओ के उमेद जिंदा रही काहें कि ओकरा हर बिकाइल किताब पर हिस्सा मिलल करी. पाठक वर्ग तइयार करे में जरूर दिक्कत होखे वाला बा. काहे कि जब हिंद पाकिट बुक्स जइसन संस्था ना चल सकल त भोजपुरी के कवनो प्रकाशन कतना चलि पाई. बाकिर एकरो खातिर सोचल जात बा कवनो उपाय निकाले के. अबहीं सब कुछ विचार प्रक्रिया में बा. आ एह दिसाईं अगर रउरा दिमाग में कवनो विचार उपजत होखो त जरूर बताईं. अँजोरिया के बधाई देबे के सबले बढ़िया तरीका उहे रही.

एक बेर फेर रउरा सभे के अभिनन्दन करत बानी.

राउर,
ओम
संपादक प्रकाशक, अँजोरिया वेब समूह

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8 thoughts on “भोजपुरी का सेवा में दसवाँ साल

  1. Bahut-bahut badhai,

    sabse badhiya baat ee baa ki 10 sal ke baad bhi anjoria ke quality me kawano kami naikhe aail, aaur badhiya bhail jata, ekar sara shrey raura ke jata,

    bhojpuri patrika ke pathak ke sankhya badhawe khatir aur jan-jan tak pahuchawe khatir kuch baat par dhyan debe ke pari jaise, pahila…. patrika ke gunwata thik hokhe ke chahi, jaise hindi chahe english sanskaran ke anuvad bhar naa hokhe, balki kuchh aisan hookhe jawan ki hindi, english ke patrika me naa hokhe, dusra…. sahi kimat matlab hindi patrika se sasta, tisra….. sahi circulation, chautha…… munhdekhal aalekh matlab apna yaar dost ke mahima-mandit naa karke nishpaksh rup se sabhi lekhak-kavi ke ek saman mahatava ke sathe patrika me sthan, panchwa…. na besi ta kamse-kam jiye-khaye layak bhhi lekhak log kuchh dan-dakshina dehal chahi tabe man lagal rahi, kahe ki bhukhe pet bhajan bhi naa hola…. baki raura khude vidwan aadmi bai,

    bahut bahut badhai,
    Ajit Tiwari
    http://www.jaimaathawewali.com

  2. सबसे पहिले अंजोरिया समूह के संस्थापक ओम जी के सादर धन्यवाद बा जे उ भोजपुरी भाषा में एगो निमन वेबसाइट के चला रहल बाडन आज इ अंजोरिया परिवार अपने दसवें साल में पहुँच गईल बा ता जरुर एमन ओम जी के मेहनत ता बटले बा लेकिन साथै साथ बाबा विश्वनाथ जी के भी कृपा बा की आज अंजोरिया सच्चों में भोजपुरी समाज में अंजोर कर रहल बिया |हम बाबा विश्वनाथ से प्रार्थना करब की बाबा एह अंजोरिया के मार्ग में आवे वाले कुल अँधेरा के दूर करस आ एह्के और ऊँचाई पर पहुंचावस
    हमारा निवास स्थान बनारस बाते एह वजह से भोजपुरी लिखे में तनिका समस्या आवत बिया लेकिन हम एके दूर करे के पयान करब सौरभ चंद्र उपाध्याय

  3. बहुत बहुत बाधाई आ सुभकामना..
    अंजोरिया के अंजोरिया एही तरह फ़ैली.. आ भोजपुरी के अंजोर के सगरो दुनिया में फइलावत रहे ईहे हमनी के हार्दिक शुभकामना बा
    सादर

    संतोष कुमार पटेल
    संपादक : भोजपुरी जिंदगी, नई दिल्ली
    महासचिव : पूर्वांचल एकता मंच,नई दिल्ली

  4. रउरा श्रम,साधना आ सर्जना के हम नमन करतानी.एह घरी अँजोरिया के कवनो जोड़ नइखे.हमार शुभकामना बा कि ई आपन मोकाम जरूर हासिल करो.अपना क्षमता का सीमा में हमनियो का लागल बानी जा आ अँजोरिया का साथे बानी जा.अँजोरिया के दसवाँ साल में प्रवेश कइला पर बधाई कबूल करीं.

  5. Hi
    Pawan Ji ke lie ek gana hai agar gaa sakte hai to meharbani hogi

    Ek go lamba aurat ke shaadi bauna marad se ho jata. Lekin u marad bahut rasik mijaj ke ba khub pareshan karat ba apan mehraru ke. Ta u aurat aapna mai ke chitthi likha tia. Chitthi me ka likha tia.

    Sutala me2, kare pareshan e mai mor bharbitana.
    Mor bharbitana ho mor bharbitana
    Ratia me2 ho jala hewan e mai mor bharbitana
    Barah baje ratia me dawari karawela
    Dawari karawela ho dawari karawela
    Do baje ratia ke houran bajawela
    Houran bajawela ho houran bajawela
    Dehia ke2 bujhe kharihaan e mai mor bharbitana
    Ratia me ho jala hewan e mai mor bharbitiana
    Hote bhinsar e ta chumma humse mangela
    Chumma humse mangela ho chumma humse mangela
    Din dupaharia me kora me bolawela
    Kora me bolawela ho kora me bolawela
    Kahela ki2 bhiri awa jaan e mai mor bharbitana
    Ratia me ho jala hewan e mai mor bharbitana
    Man kare bhaag jai aapan naiharawa
    Aapan naiharawa ho aapan naiharawa
    Kabo nahi jai la e ghar se baharawa
    Ghar e baharawa ho ghar se baharawa
    Sejia pa2 le lihi paran e mai mor bharbitana
    Ratia me ho jala hewan e mai mor bharbitana
    Raman se bachawa more jaan e mai mor bharbitana

  6. पहिले त बहुत बहुत धन्यवाद ! तनि देर से पढ़े के मिलल हऽ। साधन के कमी के वजह से सक्रियता घट गइल बा।

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