भोजपुरी माटी क पहचान ओकरा लोकगीतन से बा, गोविन्द विद्यार्थी अइसने माटी के लाल हउवें

गोविन्द विद्यार्थी भोजपुरी लोकगीत के विधा अपना गीतन के माध्यम से लोग तक पहुँचवलें. इनका के भोजपुरी लोकगीतन के जादूगर मानल जाला. गोविन्द विद्यार्थी के लिखल गीत बहुते प्रचलित बाड़ी सँ, जइसे कि “हलफा मचा के गइल”,”कहेली की अलगा होके चल जाइब बहरा”, “लगा देहीं चोलिया के हूक राजा जी”, सुपर हिट सॉंग २०११ “कइसन पियवा के चरितर बा”, आ अबकी का सावन में लिखल गीत “भोला गिरी डि” खूबे पसन्द कइल गइल बा. गोविन्द विद्यार्थी अपना गीतन में चैती, सोहर, पूरबी गीतन के बढ़ावा दिहले बाड़न.

गोविन्द विद्यार्थी एलबम ला गीत लिखला का साथे साथ फिलिमो में गीत लिखत बाड़ें. पवन सिंह के पहिलकी फिलिम “रंगली चुनरिया तोहरे नाम”में “जब बहेला पवन पुरवाई” आ “बड़ा जान मारे जालीदार कुर्ती” गीत लिखलन जवन सुपर हिट भइली सँ. बताशा चाचा में “बताशा चाचा बियर पीके” आ “कजरारे तोहर नैना” गीत इनकरे लिखल ह. पवन सिंह के आवे वाली फिल्म “आंधी तूफ़ान” में “आरा जिला घर बा ता कवन बात के डर बा” गीत लिखले बाड़न.


(भोजवुडन्यूज के रपट)

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