आजादी के पैंसठवा सालगिरह पर राष्ट्रपति के सबोधन भोजपुरी में

हमार साथी नागरिक,

हमरा ला ई बड़हन सौभाग्य के बाति बा कि देश के आजादी के पैंसठवाँ सालगिरह पर देश में आ दुनिया के सैकड़ों कोना में रहत अपना साथी भारतीयन के संबोधित करे के सौभाग्य मिलल बा. एह महान पद पर बइठावे ला आपन लोग आ जनप्रतिनिधियन के पूरा आभार शब्दन में ना जतावल सके, ई बढ़िया से जनला का बावजूद कि अपना लोकतंत्र में सबले बड़हन सम्मान एह पद से नइखे बलुक एह देश के, अपना मातृभूमि के, नागरिक होखला में बा. अपना महतारी, देश भारत, का सोझा हमनी सभे बरोबर बानी जा आ हमनी के अपना से ई सवाल कइला के जरुरत बा कि राष्ट्रनिर्माण के जटिल काम में हमनी का आपन काम बढ़िया से, इमानदारी से, पूरा लगन आ संविधान के बनावल मूल्यन मे पूरा निष्ठा संगे निबाहत बानी जा.

आजादी का एह तारीख पर ई बाति याद राखल जरूरी बा कि साम्राज्यन का दिन में आजादी दिहल ना जात रहे, लिहल जात रहे. ई आजादी महान मनईयन के पीढ़ियन से हासिल भइल. जवना के नेतृत्व भाग्य के ताकतवर महात्मा गाँधी कइलें पूरा निस्वार्थ भाव से आ इतिहास में तबके सबले बड़हन ताकत का खिलाफ राजनीतिक सोच बदल देबे वाला अपना नैतिक बल का सहारे कइलें आ जवना के झंकार आजुवो दुनिया के बड़हन घटना में सुनात रहेला. अगर यूरोपियन उपनिवेशिकरण के शुरूआत अठारहवीं सदी के भारत मे भइल त एकर अन्त के संकेत साल १९४७ के जै हिन्द के सामूहिक नारा से भइल. विजय के निर्णायक गोहार सुभाष चन्द्र बोस के, जिनका के आजुओ हर हिन्दुस्तानी “नेताजी” के रूप में जानेला, नारा जय हिन्द से मिलल. पंडित जवाहरलाल नेहरू, बाबा साहब अम्बेदकर, सरदार वल्लभभाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद, सरोजिनी नायडू आ अनेके लोग आजाद भारत के राह बनावल. ई महान लोग हमनी के काल्हु खातिर आपन आजु बलिदान कर दिहल. आ ऊ काल्हु आ गइल बा, आ हमनी के अपना से ई सवाल पूछल जरूरी हो गइल बा कि का हमनी का ओह महापुरुषन के दृष्टि के एगो राष्ट्र का तरह, एगो समाज का तरह सम्मान कइनी जा का?

जब नेताजी, ताप्ती का किनार भइल इण्डियन नेशनल कांग्रेस के ५१ वाँ अधिवेशन के राष्ट्रपति का तौर पर, हमनी के याद करवलन कि “हमनी के असली राष्ट्रीय समस्या गरीबी, अशिक्षा आ बीमारी हटावल बा”, तब हम एगो नन्हका रहलीं. नेताजी के कहल बात हमरा घर में गूंजल जइसे कि ई देश के लाखों करोड़ों घरन में गूंजल. हमार बाबूजी आजादी के लड़ाका रहलन आ ओह घरी जब आजादी एगो भ्रम जइसन लागत रहे हमनी का अपना में, अपना नेतवन में, अहिंसा के ताकत में, आ डर से बेडर भइल हिन्दुस्तानियन के साहस में भरोसा बनवले रखनी जा. बाकिर हमनी का तबहियों इ जानत रहीं, जइसन कि आजुवो जानत बानी जा, कि आजादी के मतलब रोटी आ सपना दुनु होखे के चाहीं.

नेताजी आ नेहरू जी मानत रहीं कि भारत समन्वयवाद, साम्यवाद के इस्तेमाल से, जवन कि उपर झापर देखत एक दोसरा के विरोधी लागेला, के सहारे भविष्य जीत ली. ओह लोग के भरोसा रहे कि आजाद भारत अपना आर्थिक समानता आ अलग अलग समुदायन का बीच गलतफहमी से उपजत झगड़ा मिटावत समन्वयवाद के सामाजिक आन्दोलन का सहारे उपनिवेश काल के बाद वाला दुनिया में वैकल्पिक उदाहरण बन के उभरी. मजहब के आजादी, लैंगिक आजादी आ सभका ला आर्थिक न्याय के बल पर भारत एगो आधुनिक राष्ट्र बन जाई. छोट मोट घटना एह सच्चाई के ना झूठला सके कि भारत एगो आधुनिक राष्ट्र बनत बा, हमनी के देश में कवनो संप्रदाय खतरा में नइखे, आ मरद मेहरारू के बरोबरी हमनी के समय के सबले बड़ हासिल बा.

हमार साथी नागरिक लोग,

हम निराशावादी ना हईं, हमरा ला गिलास हमेशा आधा भरल होला ना कि आधा खाली. हम त इहाँ ले कहल चाहब कि आधुनिका भारत के गिलास आधा से अधिका भरल बा. हमनी के उत्पाद श्रमिक वर्ग, हमहन के ताकत देत किसान वर्ग, जे अकाल ग्रस्त भूमि के अन्न के अधिकता वाला देश बना दिहल, हमनी के कल्पनाशील आद्यौगिक उद्यमी चाहे ऊ सार्वजनिक क्षेत्र में होखसु भा निजी क्षेत्र में, हमनी के बुद्धिजीवी, हमनी के शिक्षाविद्, आ हमनी के राजनीतिक वर्ग मिलजुल के अइसन आधुनिक राष्ट्र बनवलें जे कुछे दसेक साल में कई सौ साल वाला आर्थिक विकास आ अग्रगामी सामाजिक नियमन हासिल कर लिहल.

हमनी के जबले ई ना समुझब कि साल १९४७ में हमनी के कहाँ से शुरूआत कइनी जा तबले हमनी के एह बात के सही से ना समुझ पाएब जा कि हमनी का कतना आगा आइल बानी. जइसन कि जवाहरलाल नेहरू अपना भाषण आ लेखन में कई बेर बतवलन कि हमनी के देश तब गरीब ना रहल जब हमनी के आजादी छीन लिहल गइल रहे. का हम ई जोड़ सकीलें कि, केहू कवनो गरीब देश के जीते ला हजारन मील के सफर ना करे. तब के अंतर्राष्ट्रीय विद्वानन के दिहल आंकड़ा एह बात के झूठलावे वालन के चुप करे ला सुबूत बा. साल १७५० में, पलासी के लड़ाई से सात साल पहिले, दुनिया के २४.५ फीसदी उत्पादन भारत में होत रहे जबकि इंगलैंड में मात्र १.९ फीसदी रहल. दोसरा शब्द में कहीं त दुनिया के बाजार में तब मिले वाला हर
चार सामान में से एक सामान भारत में बनत रहे. साल १९०० लें भारत के उत्पादन दुनिया के उत्पादन के मात्र १.७ फीसदी रह गइल रहे आ ब्रिटेन के बढ़ के १८.५ फीसदी हो गइल रहे. पश्चिम के औद्यिगिक क्रांति अठारहवीं सदी में अपना शुरूआती दौर में रहल बाकिर ओहु समय में प्रति व्यक्ति औद्योगीकरण मामिला में भारत सातवाँ जगहा से चढ़ के पहिला जगहा चहुँप गइल रहे जबकि इंगलैंड दसवाँ जगह से सरक के सौंवा जगहा पर आ गइल रहे. साल १९०० से १९४७ का बीच भारत के आर्थिक विकास दर के सालाना औसत १ फीसदी रहल. ओह निचला जगहा से हमनी के चढ़ाई शुरू कर के पहिले ३ फीसदी पर आइल, आ फेर एगो लमहर छलांग ले के आजु, दुनिया के हिला देबे वाला आ कुछ देश के डूबो देबे वाला दू गो बड़हन अंतर्राष्ट्रीय संकट का बावजूद, सालाना औसत विकास दर पिछला सात साल से ८ फीसदी के उपर बा.

अगर हमनी के आर्थिक हालात क्रिटिकल मास हासिल कर लिहले बा, त ई हमनी के अगिला छलांग के लांचिंग पैड जरूर बने के चाही. एह बात के पक्का कर लेबे खातिर कि भारत हमेशा ला भूख, बीमारी आ गरीबी से आजाद हो जाव, हमनी के आजादी के एगो दोसर लड़ाई के जरूरत बा. जइसन कि हमनी के राष्ट्रपति रहल महान व्यक्तित्व डा॰ सर्वपल्ली राधाकृष्णन कि एही मंच से आजादी के १८वीं सालगिरह पर कहले रहीं, “आर्थिक विकास लोकतंत्र के परख में से एक होला”.

अगर बढ़त अभिलाषा का सोझा हमनी के विकास कम लागत बा, खास कर के नवहियन के, त खीस उभरबे करी हमनी अइसन देश हईं जे रोज नवही होखल जात बा, उमिर आ उमंग दुनु में. ई एगो चुनौती आ मौका दुनु बा. जानकारी बढ़ावे खातिर नवहियन के भूख ओह लोग के कौशल बढ़ाई आ एगो मौका दी जवना से भारत पहिला दुनिया के तेज राह पर आ सकी. नवहियन का लगे चरित्र बा बस मौका चाहीं. शिक्षा बीज ह आ आर्थिकहालात ओकर फल. बढ़िया शिक्षा दीं, बीमारी गरीबी आ भूख घटे लागी. जइसन कि हम अपना पहिला संबोधन में कहले रहीं हमनी के ध्येय वाक्य होखल चाहीं “ज्ञान ला सभे आ सभका ला ज्ञान.” दृष्टि खुला आसमान ना हो के नवहियन पर जरूर से केन्द्रित होखे के चाही.

प्रिय नागरिक,

बाहरी हालातन का चलते उपजल बेहद दबाव का बावजूद हमनी के आर्थिक हालात आजु अधिका मजगर आ लचीला बा. लगातार आर्थिक सुधारन के दू दशक हमनी के औसत आमदनी के आ घरेलू खपत के, शहरी आ देहाती इलाका दुनु में, बढ़वले बा. अनेके पिछड़ा इलाकन में एगो नया सक्रियता उपजल बा राष्ट्र के आर्थिक मुख्यधारा में आवे के. तबहियों अइसन बहुते खाई बा जवना के पाटल, ओहपर पुल बनावल, जरूरी बा. हरित विकास के पूर्वोत्तर राज्यन में चहुँपावे के बा. नीमन आ निकहा संसाधन बनावल तेज करे के बा. शिक्षा आ स्वास्थ्य सेवा के समाज के आखिरी आदमी ले चहुँपावे के बा,. बहुत कुछ कइल गइल बा, बहुत कुछ करे के बाकी बा.

एह साल मानसून धोखा दे दिहले बा. हमनी के देश के बड़हन इलाका सूखा के चपेट में बा, त कुछ दोसर इलाका बाढ़ के त्रासदी झेलत बा. महँगाई, खास कर के भोजन सामग्री के महँगाई, चिन्ता के कारण बनल बा. हमनी के अनाज उपलब्धता बढ़िया बा आ एह खातिर हमनी का ओह किसानन के ना भुला सकीं जे खराबो हालात में एकरा के संभव बनवलें. ऊ लोग समय पर देश ला खाड़ रहल, त ओह लोग के संकट का घड़ी में देशो के खाड़ होखे के पड़ी.

हम ना मानीं कि वातावरण संरक्षण आ आर्थिक विकास में कवनो विरोधाभास मौजूद रहेला. जबले हमनी का गाँधी जी के पाठ याद राखब जा कि दुनिया में आदमी के जरूरत ला पर्याप्त सामान मौजूद बा बाकिर ओकरा लालच ला ना, तबले हमनी का सुरक्षित रहब. हमनी के प्रकृति से मिल के रहल सीखहीं के पड़ी. प्रकृति हमेशा एक जइसन ना रहे, हमनी का ठीक समय में मिलल उपहार के बचा के राखे के पड़ी जेसे कि कमी का समय में छुंछे ना रहीं.

भठियरपन के कड़ुहट का खिलाफ खीस जायज बा, जइसे कि देश के संसाधन आ संभावना लूटे का खिलाफ होखत विरोध. अइसनो समय आवेला जब आदमी आपन धीरज खो देला बाकिर ई सब लोककतांत्रिक संस्थन पर हमला करे के कारण ना बने के चाहीं.

संस्था संविधान के सम्हारे वाला खंभा हईं सँ. अगर ऊ टूटल त संविधान के आदर्शवाद ना बचावल जा सकी. ई संस्था सिद्धांत आ नागरिकन का बीच के संपर्क सूत्र हईं स. हमनी के संस्था गुजरल समय से कुछ कमजोर पड़ल हो सकेली सँ बाकिर जवन बनल बा तवना के बिगाड़ल सही ना होई. ओकनी के फेर से मजगर बनावे के चाहीं जेहसे कि ऊ हमनी के आजादी के रक्षा कर सकऽ सँ.

हमनी के सीमा पर चौकसी ओतने जरूरी बा जतना देश के भीतर के चौकसी हमनी के अपना शासनव्यवस्था के ओह इलाकन के, न्यायपालिका कार्यपालिका आ विधायिका के, विश्वसनीयता बढ़ावे के जरूरत बा जहाँ थकान आ खराबी का वजह से कुछ कमी आ गइल बा. लोग के आपन विरोध जतावे के अधिकार बा बाकिर हमनी के इहो समुझे के चाहीं कि विधायिका से कानून बनावे के अधिकार आ न्यायपालिका से न्याय करे के अधिकार ना छीनल जा सके.

जब शासन मनमानी करे लागे त लोकतंत्र के नुकसान होला बाकिर जब विरोध चारो ओर पसर जाव त हमनी का अव्यवस्था के नेवतत होखीलें. लोकतंत्र एगो हिस्सेदारी ह. हमनी का साथही जीतीलें चा हारीलें. लोकतात्रिक सुभाव अपना बेवहार के सम्हारे के आ असहमति के बर्दाश्त करे वाला होला. संसद अपने कैलेंडर आ चाल से चली. कबो कबो ऊ चाल बेचाल लाग सकेला बाकिर लोकतंत्र में हमेशा एगो कयामत के दिन आवत रहेला जब चुनाव होला. संसद देश के आत्मा होले, लोग के आत्मा होले. एकरा अधिकार भा काम के चुनौती अपने के नुकसान चहुँपावे के खतरा हो सकेला. .

ई बात हम लोग के डाँटे का भाव में नइखीं कहत, एगो निहोरा का भाव में कहत बानी कि मौजूदा मुद्दन के पीछे लुकाइल खतरा के मुखौटा चिन्हल जाव. लोकतंत्र में अपना शिकायतन के तोड़ खोजे के मौका जवबादेही सकारे के सबले महान संस्था मुक्त चुनावन में मिलत रहेला.

हमहन के राष्ट्र के स्थिरता के चुनौती देबे वाली आग बुताइल नइखे. राख का नीचे अबहियों सुनगत बा. आसाम के हिंसा देखल हमरा ला बहुते दर्दनाक बा. हमनी के अकलियन के सुरक्षा चाहीं, हमला से बचाव, आ ओहलोग के समुझल चाहीं. हिंसा कवनो विकल्प ना होखे, हिंसा बड़हन हिंसा के निमन्त्रण होखल करेले. आसाम के घाव सुखावे खातिर निकहा काम भइल बा जवना में हमनी के प्रधानमंत्री रहल प्रिय राजीव गाँधी आ आसाम के नवहियन का बीचे भइल आसाम समझौता शामिल बा. ओकरा के फेर से देखल आ न्याय ला अउर राष्ट्रहित में जरूरत मुताबिक फेरबदल करे के जरुरत बा. नयका आर्थिक विकास के नयका लहर खातिर शान्ति के माहौल जरूरी बा जवन हिंसा के जड़ मिटा सके.

ई हमहन के भौगोलिक राजनीतिक वास्तविकता ह जवना से कुछ समस्या सीमा पार से आवत रहेला. एह समस्यन के समाधान बातचीत आ मिलजुल के निकाले खातिर सताइस साल पहिले सार्क बनावल गइल रहे, जवना से कि तेज आर्थिक विकास का तरफ बढ़ल जा सके. एक जगहा से दोसरा जगहा होखे वाला अंतरन आ असमान विकास के समस्या के दीर्घकालिक समाधान तेज आर्थिक विकासे से होखी सार्क के एह लक्ष्य के हासिल करे खातिर उर्जावान होखे के पड़ी.

आतंकवाद का खिलाफ सामूहिक लड़ाई में सार्क एगो मजगर औजार होखे के चाहीं. अंतर्राष्ट्रीय सहयोग से बड़हन सफलता संभव बा. निर्दोष लोगन पर आफत बने वाला आतंकियन के न्याय का दायरा में ले आवे खातिर सगरी सार्क देशन के आपस में सहयोग करे के चाहीं. एह उपमहादेश में शांति ले आवे के दोसर कवनो राह नइखे.

हमरा गर्व बा अपना बहादुर सशस्त्र सेना से आ अपना बहादुर पुलिस बल से जे अपना पर आवे वाला खतरन से बेपरवाह हो के आतंकवाद के खात्मा खातिर अतना कुछ करत बाड़ें. ओह लोग के चौकसिए का चलते अउरी बड़हन आफत आवे से बचल बानी जा. अगर हमनी का शांति से सूतत बानी जा त एहसे कि ऊ लोग जागत बा आ मरुभूमि में, पहाड़न में, जंगलात में, समुद्र के निर्जन इलाकन में अपना काम में लागल बा. ओह लोग के देशभक्ति आ लगन के हम सलाम करत बानी. ई बहुते खुशी के बात कि हमनी के सेना हमनी के शांतिए के गारंटी ना देव, ओलम्पिक में देश ला मेडल जीते वालनो के बनावेला. हाल का खेलन में देश के माथ ऊँचा करेवाला खिलाड़ियन के हम बधाई देत बानी जे देश खातिर मेडल जीतल आ ओहू लोग के जे देख ला खेलल. पदक के गिनिती बहुत नइखे बाकिर पिछला बेर ले बहुते अधिका जरूर बा. चार साल बाद, जब हम फेर रउरा सभ के संबोधित करे के आशा राखत बानी, हमरा पूरा विश्वास बा कि हमनी के पदक के बसंत ले आएब.

हमार साथी नागरिक,

अगर इतिहास में एक आदमी बा जेकर नाम शांति के पर्यायवाची बा त ऊ बावे गाँधीजी के नाम, जे हमनी के आजादी के निर्माता रहनी. भारत बहुतायत वाला देश ह जहाँ गरीबी बसेले. भारत का लगे एगो उत्साही आ विकासमान सभ्यता बा जवन हमनी के महान कला में चमकेला आ हमनी के गाँव शहर में दैनन्दिन जीवन में मानवता आ सृजनात्मकता में झलकेला. जब इन्दिरा गाँधी सितारन ले चहुँपली तब ऊ मानत रहली कि उ सब कुछ बारत के अगिला पीढ़ी हासिल कर सकेले. बाकिर राष्ट्रीय एकता आ भाईचारा का बिना हमनी के ना त वर्तमान हो सके ना भविष्य.

हमार साथी नागरिका,

आईं हमनी का नफरत, हिसा आ खीस के पीछे छोड़त चलीं जा. आपस के छोटमोट झगड़ा के किनार करीं जा. अपना देश खातिर मिल जुल के काम करीं जा अपना महतारी के पूजा करे वाला बचवन जइसन. उपनिषदन से मिलल एह ज्ञान में आपन भरोसा जताईं जा :

भगवान हमनी के रक्षा करसु. भगवान हमनी के पोषण करसु. हमनी का मिल जुल के उर्जा आ उत्साह से काम करी सँ. हमनी के अध्ययन बढ़िया रहो. आपस में कवनो विरोध मत होखे. बस शांति शांति शांति रहो. शांतिए हमनी के आदर्श, विकास आ क्षितिज बनो.

जय हिन्द!


आजादी के पै्सठवा सालगिरह से पहिले के सांझ देशवासियन का नामे राष्ट्रपति के सबोधन के भोजपुरी अनुवाद. लाख सावधानी का बादो कुछ गलती हो सकेला एकरा खातिर माफी मँगला का साथे पेश बा ई दस्तावेज.

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3 thoughts on “आजादी के पैंसठवा सालगिरह पर राष्ट्रपति के सबोधन भोजपुरी में

  1. अनुवाद के बहुत बढ़िया प्रयत्न आ खूबसूरत प्रस्तुति. राष्ट्रपति महोदय के
    भाषण के समापन ॐ शांतिः शांतिः शांतिः से भइल; ई हमनी के उज्ज्वल भविष्य
    के संकेत बा. भगवान जवन करिहें,निमने करिहें. धन्यवाद.
    ____________________________________________विमल
    साइट पर कमेंट पोस्ट नइखे हो पावत, ब्लॉक हो जाता. सुबह से कई बेर कोशिश
    कर चुकल बानी.google+ भी जवाब दे चुकल बानी.
    विमल

  2. राष्ट्रपति के संबोधन भोजपुरी में पढ़ के अच्छा लागल .बहुत नीमन आ सार्थक प्रयास बा, राउर हर साल के .
    धन्यवाद !
    ओ. पी. अमृतांशु

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