मनोवैज्ञानिक जेहाद की साजिश‏

– पाण्डेय हरिराम

उत्तर-पूर्व के लोग लगातार दक्खिन भारत से भागत जात बा आ महाराष्ट्रो में बहुते तनाव बन गइल बा. ई सब देख सुन के देश भर के सही सोच वाला लोग परेशान बा अनेसा से बाकिर आम आदमी लाचार बा. देखत बानी जा कि पिछला 20 मई से इंटरनेट, सोशल मीडियन आ मोबाइल फोन अउर आई पैड के जरिये लुकाछिपी जिहाद चलत बा. एकर शुरुआत म्यांमार के राखिने प्रांत से भइल जहाँ बौद्धन आ राहिंगा मुसलमानन का बीच झगड़ा का बाद दुनु तरफ के नाहियो त अस्सी लोग मरा गइल.

रोहिंगा मुसलमानन के म्यांमार बंगलादेशी घुसपैठिया मानेला. एह झगड़ा का बाद बहुते लोग ओह इलाका के छोड़ के चल दिहल. बहुते बड़हन पैमाना पर भितरी विस्थापन भइल. आ तबहिए से भारत, बंगलादेश आ म्यांमार के कुछ अनचिन्हार कट्टरपंथी तत्व इंटरनेट आ सोशल मीडिया के जरिये म्यांमार सरकार के बदनाम कइल शुरू कर दिहलें आ मुसलमान समाज एकजुटता देखावे लागल. म्यांमार के प्रेजिडंट सीन थीन ओ आई सी के प्रतिनिधिमंडल से बतवलें कि कइसे सोशल मीडिया आ इंटरनेट के जरिये झूठ तस्वीरन आ मनगढ़ंत खबरन का आधार पर सरकार के बदनाम कइल जात बा.

दरअसल ई अफवाह खाली म्यांमारे के अस्थिर करे के साजिश ना ह, बंगलादेश के शेख हसीना सरकारो के हिलावे के षड्यंत्र ह. काहे कि हसीना सरकार रोहिंगा लोगन के बंगलादेश में घुसे पर रोक लगा दिहले बिया. साथ ही साथ ई षडयंत्र भारतो में मनमुटाव पसरावे के कोशिश बा. एहसे दुतरफा काम कइल जात बा. अगर हसीना सरकार कमजोर होखत बिया त जेहादी ताकतवर बनीहें आ भारत पर दबाव बना सकीहें. साथ ही भारतो अपना बवाल में अझुरा जाई. कुछ मुस्लिम कट्टरपंथी ताकत आ समूह बाड़ी सँ जे रोहिंगा मुसलमानन पर जुल्मोसितम के बनावटी आ झूठ तस्वीर अउर ब्यौरा फइलावत बाड़ी सँ. एह तस्वीर आ ब्यौरन से मुसलमानन के मन तीत होखत बा आ ओह लोग में खीस उपजे लागत बा. असम में भड़कल हिंसा के विरोध में पिछला 5 अगस्त का दिने मुम्बई आजाद मैदान में भइल सभा के बाद के बवाल एही खीस के उपज रहल. सोशल मीडिया पर डालल तस्वीर आ झूठ ब्योरा से खिसियाइल लोग अपना मुस्लिम नेता लोग के भड़काऊ भाषण से अउरी पनपना गइल. भीड़ पुलिस पर हमला कइलसि, महिलो पुलिस पर हमला भइल, एगो सैनिक स्मारक तूड़ दिहल गइल आ मीडिया के लोग पिटाइल. मीडिया के लोग एह ला पिटाइल कि ऊ लोग सही बात नइखे बतावत. असल में त ओह भीड़ के अचेतन सोशल मीडिया पर डालल तस्वीर आ कहानियने के साँच मानत रहुवे. एहीसे ऊ लोग मीडिया के ब्यौरा के गलत मानत बा आ मीडिया पर खिसियाइळ बा. अनेके मुस्लिम नेता मुम्बई उपद्रव के निंदा कइले बाड़ें.

मुम्बई के बाद कट्टरपंथी दक्खिन भारत में आपन साजिश शुरू कर दिहलें. दक्खिन भारत में पूर्वोत्तर के बहुते लोग या पढ़ाई करत बा या काम काज. एहिजा ई अफवाह फैलावल गइल कि भारत सरकार चूंकि असम में रहत बंगलादेशियन के नागरिकता नइखे देर त एह इलाका में पूर्वोत्तर के लोगो के ना रहे दिहल जाई.

एहिजा गौर करे वाली बात बा कि ई मनोवैज्ञानिक जेहाद मजहब आधारित ना हो के इलाकाई आधार पर बा. जे लोग दक्खिन भारत भा मुम्बई-पुणे से भागत बा ओहमें सभे हिन्दूए ना ह, ईसाईओ लोग बा. अब ई लोग जब भाग के अपना विपदगाथा के साथ पूर्वोत्तर चहुँपी त साम्प्रदायिक तनाव के एगो नया लहर शुरू हो जाई. आजादी के बाद से उत्तर-पूरब के लोग आ भारत के शेष आबादी के मन में एगो खास तरह के मनभेद रहल बा जवना चलते तरह तरह के बगावत होत आइल बा. पिछला दस साल में ई बगावत के आग धीरे धीरे मेहराएल लागल रहे. पूर्वोत्तर के नवहियन के एगो बड़हन संख्या अपना के बाकी भारत से जोड़े लागल रहे जवना से बागियन के मिले वाला नवहियन के गिनिती घट गइल आ दोसरा तरफ ऊ लोग देश के दोसरा हिस्सा में जाए लागल. अब एह नया मनोवैज्ञानिक जेहाद से अनेसा बा कि कहीं फेरू से ऊ मनभेद वापिस मत लवटि आवे आ पूर्वोत्तर आ शेष भारत का बीच एगो बड़ आ चाकर खाई बन जाव. दुर्भाग्यवश हमनी के सुरक्षा एजेंसी सब एह मनोवैज्ञानिक जेहाद के समय पर अंदाजा ना लगा पवली सँ आ अबहियों दोषियन के खोह के बेकाम करे के कोशिश होत लउकत नइखे. जे लोग एह जंग के पसरावत बा ओहनी के जल्दि से जल्दि नेस्तनाबूद कइल चाहीं आ साथही भागत लोग का बीच सुरक्षा के भरोसा बनावल जाहीं ना त आवे वाला दिन बहुते खतरनाक परिणाम ले आई.

राजनीतिक गोलन का बीच एकजुटता के जरूरत

असम के कोकराझाड़ में रहवासियन आ घुसपैठियन के झगड़ा के कुछ मतलबी फिराक ओकरा के मुसलमानन का खिलाफ हिंसा के नाम दे दिहलें आ अफवाहन के चिंगारी छोड़ दिहलें जवन दावानल बन गइल बा. ई अफवाह बम सुनियोजित अंतरराष्ट्रीय साजिश के हिस्सा ह. जवना तरह से एह साजिश के अंजाम दिहल गइल ओहसे सुरक्षा एंजेसी सकता में पड़ल बाड़ी सँ. आई बी के वरिष्ठ अधिकारी एह तरह के अभियान के बेहद खतरनाक बतावत बाड़ें. ओह लोग के कहना बा कि सोशल मीडिया के जरिए चलावल जात एह मुहिम के मकसद देश के मुसलमानन के खोंचियावल बा. एकरा पीछे लश्कर-ए-तायबा अउर आईएसआई के हाथ ना. सूत्र बतावत बाड़ें कि पिछला चार साल में लश्कर देश में अइसन जमात बना दिहले बावे जे हमेशा कुछऊ कर गुजरे के तइयार बाड़ें. एह आतंकवादी संगठनन ला खुलेआम काम करे वाला लाखों लोग हाजिर बा जवना में कुछ जनप्रतिनिधिओ शामिल बाड़ें.

एह बवाल में सोशल मीडिया के बहुते खराब भूमिका रहल बा. कुछ मतलबी लोग असम दंगा के एगो बड़हन सांप्रदायिक तनाव बनावे के कोशिश में लागल बाड़ें. बंगलोर से भागत लोग के कहना रहल कि उनुका एकर भरोसा नइखे कि वक्त पर केहु ओह लोग के मदद ला आगे आई.

बहुलतावादी संस्कृति में भरोसा राखे वाला लोकतांत्रिक समाज खातिर एहसे बेसी शर्मिंदगी के बात अउर का हो सकेला ? एहसे जरूरी बा कि जबले हालात पर काबू नइखे मिल जात तबले देश भर के पुलिस आ खुफिया एजेंसी बेहद सतर्क रहऽ सँ. राजनीतिको गोल ला जरूरी बा कि ऊ मुसलमान नेता लोग का संपर्क में रहस आ हालात सुधारे में उनकर मदद लेसु. ओज लोग के बतावल जाव कि असम आ दोसरा जगहन पर सरकार कवनो कदम उठावत बिया आ एकर राजनीतिक लाभ ना उठावल जाए. अगर कवनो मुस्लिम नेता एह सलाह के ना माने त पुलिस ओकरा पर कानूनी कार्रवाई जरूर करे आ बाकी राजनीतिक नेतृत्व एहमें दखल मत देव.

इहे ना सगरी राजनीतिक गोल एक जुट होके एह अफवाह के रोकसु आ देशवासियन में कानून में भरोसा पैदा करे के कोशिश करसु.

(20 अगस्त 2012)



पाण्डेय हरिराम जी कोलकाता से प्रकाशित होखे वाला लोकप्रिय हिन्दी अखबार “सन्मार्ग” के संपादक हईं आ उहाँ का अपना ब्लॉग पर हिन्दी में लिखल करेनी.

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