हाथ के संगे लेकिन हाथ भर फरका

– जयंती पांडेय

सब केह हाथ के संगे बा बाकिर हाथ भर फरका. शरद पवार भईया खिसियाइल बाड़े. उनका के देखि के बुझाला ना कि खिसियइबो करेले. हमशा खुशे लऊकेलें. लेकिन खिसिया गईल बाड़े. ऊ त अईसन जीव हउअन कि यूपीए के आठ बरिस में कबहुओं ना खिसिअइले. ओहु समय ना जब ई कहल गईल कि महंगी से पार पावे नइखे आवत. ओहु समय ना जब उनका पर आरोप लागल कि ऊ दाम बढ़े घटे के भेद व्यापारी लोगन के दे देत रहले, उहो समय ना खिसियइले जब कांग्रेसी भाई लोग कहल कि ऊ खाद्य मंत्रलय नईखन चला पावत त छोड़ि देस हमनी का चला लेब सन. ओहु समय ना जब सबलोग खिसियात रहे, रंज होत रहे. यूपीए के पहिलका समय में लेफ्ट खिसिया के साथ छोड़ दिहलस, द्रमुको कबो- कबो रंज हो जात रहे बाकिर पवार जी ना खिसिअइले.लेकिन अब ऊ खिसिया गईल बाड़े तबो कहतारे कि साथ ना छोड़ेब.

अब देखऽ सभे कि ऊ आठि बरिस ना खिसिअइले लेकिन चुनाव जब दू बरिस बा त खिसिआ तारे. जब खिसिअइले त एकदमे जामा से बाहर हो गइले जइसन बंगाल के दीदी करेली. लेकिन चिंता के कवनो बात ना. काहे कि पवार चाचा कहतारे कि ऊ कांग्रेस के हाथ ना छोड़िहें. भले गारी दिहें, आलोचना करिहें, कमी गिनइहें लेकिन हाथ धईले रहिहें. ऐने सुनल जाता कि दीदीओ चाहे जेतना खिसिआस लेकिन यूपीए में बनल रहिहें. हँ त प्रणव बाबा के वोट दे के ऊ खुस ना भइली आ कहली कि मजबूरी में ई करे के परल. अइसन ना होखो कि एक दिन कहि देस कि यूपीए में मजबूरी में रहतानी. ओकरा से खुस नईखी, ओकर कवनो बात ना मनिहें लेकिन साथहे रहिहें. हालांकि ऊ बंगाल में कांग्रस के संगे नईखी. इहे हाल द्रमुक के बा. हं ईबार वाला यूपीए में ऊ ओइसन नईखी नाराज जईसन पछिलका बेर होत रही. ऊ समय दोसर रहे. ऊ कांग्रेस के धमकाइओ देत रहली आ अलगा होखे के बातो कहि देत रहली. लेकिन अबनी बार ऊ जलवा नईखे. मुलायमो जी यूपीए के संगही रहिहें. हां ई कहऽ कि ओकरा घर में ढुकिहें लेकिन खान पान दिल्लगी ठठ्ठा चलत रही. एहि से जवन पैकेज उनका मिलल ऊ दीदी के ना मिलल. असहीं मायावती जी के देखीं. ऊ मोलायम के साथ ना रहिहें लेकिन यूपीए के हाथ ना छोड़िहें. ई बात दोसर बा कि राहुल बबुआ के गरिआवत रहिहें. लेकिन साथे रहिहें. माने कि घर में झगरा कतनो भारी होखो पर साथे रही लोग, चाहे हाथ भर फरके काहे ना रहे लोग.


जयंती पांडेय दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में एम.ए. हईं आ कोलकाता, पटना, रांची, भुवनेश्वर से प्रकाशित सन्मार्ग अखबार में भोजपुरी व्यंग्य स्तंभ “लस्टम पस्टम” के नियमित लेखिका हईं. एकरा अलावे कई गो दोसरो पत्र-पत्रिकायन में हिंदी भा अंग्रेजी में आलेख प्रकाशित होत रहेला. बिहार के सिवान जिला के खुदरा गांव के बहू जयंती आजुकाल्हु कोलकाता में रहीलें.

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