बतकुच्चन ‍ – ७४


भोजपुरी में मन के भाव बतावे वाला शब्द अतना आ अइसन अइसन बाड़ी सँ जवना के दोसरा भाषा में अनुवाद करे में पसीना सूख जाई. पिछला दिने कुछ अइसने शब्द दिमाग में चमके लागल जब देश के सबले बड़की बईठका में एगो नेताइन, कहे के मतलब कि महिला नेता, एगो दोसरा नेता के बात पर अइसन पनपना गइली कि लागल कि कुछ परपरा गइल होखे आ ओह पनपनाहट में ऊ अपना दल के नेता सब के उकसावत लउकली कि बवाल करऽ लोग. अब ऊ का कइली, काहे कइली एह सब से त एह बतकुच्चन के मतलब नइखे. मतलब बा त पनपनइला से, परपरइला से आ छनछनइला से.
उकसावे का बारे में फेर कबो बतिआवल जाई आजु मत उकसाईं.

पनपनाइल परपराइल आ छनछनाइल में से पनपनाइल आ छनछनाइल सामने आ जाला बाकिर परपराइल उहे महसूस करेला जेकरा परपराला. सामने वाला ना जान सके कि का परपराइल, कहवाँ परपराइल. अब चलीं जानल जाव कि परपराइल का होला. अगर घाव पर मरीचा के बुकनी पड़ जाव त जवन महसूस होखेला तवने के परपराइल कहल जाला. अगर घाव ना होखे त परपरा ना सके कतनो बुकनी बुक दीं. एही बीच बुकनी शब्द आ गइल त एकरो के समुझत चलल जाव. बुकनी संज्ञा आ क्रिया दुनु ह. एकर दुनु मतलब होला पावडर आ पावडर बनावल. बुकनी संज्ञा ह त बुकल क्रिया. बतकुचनो में हम कवनो ना कवनो बात ध के ओकरा के बुकत रहीलें बुकनी बनावे का फेर में. एहीसे मिलत जुलत एगो शब्द ह बुनिया. मैदा के घोल के गरम तेल में बुँद बुँद डाल के तइयार होखे वाला चीझु बुनिया कहल जाला. अब एह बुनिया के चीनी का पाग में डाल दीं त मिठाई बन जाई, मुट्ठी में बान्ह के लड्डू बना लीं भा अइसहीं खा लीं. दही में डाल के नून मरीचा छीट के रायता बना लीं. राउर मरजी. बुनिया के आपन कवनो जिद्द ना होला सामने वाला का मरजी से आपन सवाद बदलत रहेला.

हँ त बात होत रहुवे परपरइला के त. जब कुछ परपराए लागेला त आदमी खीसि पनपन करे लागेला. ओकरा चेहरा पर रौद्र रूप साफे लउके लागेला. मन करेला कि सामने वाला के कच्चे चबा जाईं जे हमरा घाव पर मरीचा के बुकनी डललसि. पनपनाइल आ छनछनाइल एक जइसन होइओ के अलग अलग होला. गरम तेल में पानी पड़ जाव त छन छन के आवाज आवेला आ ओहि से बनल छनछनाइल. जब केहू के अइसने गरम तेल जइसन बात कह दिहल जाई त ऊ छनछनइबे करी. छनछनाए वाला आदमी के देहि पर कवनो घाव बा कि ना एहसे कवनो अंतर ना पड़े. ओकरा हर हाल में छनछनाए के बा. बाकिर परपरइला में घाव के मौजूदगी जरूरी होले. अब इ रउरा पर बा कि रउरा का कहब ओह नेताइन के. ऊ पनपनाइल रहली कि छनछनाइल.

अब आईं सोचल जाव कि एह पनपनइला, छनछनइला आ परपरइला के अनुवाद हिंदी भा अंगरेजी में करे के पड़ो त कइसे होखी. एह एक एक शब्द खातिर एगो लमहर वाक्य लिखे के पड़ जाई. आ अनुवाद करे वाला के चेहरा जवन पितरिआई कि देखल बनी. चलीं छोड़ीं, एह पितरिअइले के अनुवाद कर देखाईं.

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2 thoughts on “बतकुच्चन ‍ – ७४

  1. बतकुच्चन कइल आसान ह पर साकारात्मक बतकुच्चन कइल सबकी बस के बात नइखे।। ओपीजी के एकरा खातिर हृदय से धन्यवाद बा।। रउआँ भोजपुरी के एगो नया राह देखा देले बानी..जवन आगे चल के भोजपुरी साहित्य अउर व्याकरण में मील के पत्थर साबित होई…जे दिन अधिकाधिक लोग भोजपुरी भासा, व्याकरण में आपन रूचि देखाई…सब्दन के लीला पसंद करे लागी..ओई दिन एकर महत्ता समझ में आई।।

    अउर हम इहाँ इ कहल चाहतानी की नेताइन के दु गो अर्थ होला…एगो त ..महिला नेता…ए अर्थ में त सब भाषा-भाषी समझि लेला पर एकर एगो अउर अरथ बा…नेता के मलिकाइन..अरे भाई-काका मतलब नेता के पत्नी, औरत, बीबी…एहींगा…डाक्टराइन आदि शब्दन के उपयोग बा… हमरा डाक्टराइन काकी मोन परतारि…हमार काकी पढ़ले-लिखले त ना रहली ह पर हमनी जान उनके डाक्टराइन काकी कहत रहनी हँ जाँ..काहें कि काका डाक्टर हँउअन…धनि बा भोजपुरिया समाज…जय भोजपुरी।।

  2. चलीं हमरा अब भाइयो-काका मोन पड़ि गइने।।

    हम रउआँ के बताईं की हमार एक जाने काका रहने हँ…गाँव भर जेकर उ रिस्ता में काका लगिहें…सब केहू उनके भाइए-काका कहत रहल ह..पता ना इ उपाधि उनकी संघे कवनेगाँ जुड़ि गइल…केहू बाहरियो परिचित आई त इहे पूछी..ए बाबू..तोहार भाई-काका बानें….नया आदमी से पूछाव त उ कही की भाइयो बाने..कको बाने..पर हमरी इँहा..भाईयो बाने, कको बाने अउर भाइयो-काका बाने।। जय हो।।

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