भोजपुरी भाषियन से केन्द्र सरकार के धोखाधड़ी

संसद के पिछला सत्र में तब के गृहमंत्री पी चिदम्बरम भोजपुरी में एगो वाक्य का पढ़ दिहलन कि लागल सरकार अब भोजपुरी के ओकर जायज हक देइए दिहलसि. चारो ओर से नगाड़ा बाजे लागल. बाकिर अबकी के सत्र में विचार करे वाला विषयन में भोजपुरी के विषय शामिले ना रहल.

बिहार भोजपुरी अकादमी के अध्यक्ष प्रो॰ रविकांत दुबे केन्द्र सरकार के एह आचरण के धोखाधड़ी बतावत खुलासा कइले बाड़न कि केन्द्रीय गृहमंत्रालय भोजपुरी के मान्यता के सवाल लटकावे खातिर बिहार सरकार आ ओकरा माध्यम से भोजपुरी अकादमी से नौ बिन्दूवन पर जानकारी मँगवले बिया. जवन सवाल पूछल गइल बा तवनन के उलूल जलूल बतावत प्रो॰ दुबे कहले बाड़न कि एह तरह के बेमतलब सवाल पूछला से इहे लागत बा कि केन्द्र सरकार भोजपुरी के मसला लमहर दिन ले लटकावल चाहत बिया.

भोजपुरी अकादमी के अध्यक्ष प्रो॰ दुबे ओह सवालन के जानकारी देत कहले बाड़न कि केन्द्र सरकार जानल चाहत बिया कि बिहार सरकार के कवन कवन विभाग भोजपुरी के इस्तेमाल करेले, भोजपुरी लिपि में कतना विद्यार्थी कवन कवन विषय के परीक्षा देबेलें, कतना लोग भोजपुरी बोलेला, कतना प्राथमिक आ मध्य विद्यालयन में भोजपुरी पढ़ावल जाले आ कतना विद्यार्थी एकरा कक्षा में बाड़ें, सरकार कतना भोजपुरी शिक्षक बहाल कइले बिया, आ कवना स्तर ले सरकारी काम में भोजपुरी के इस्तेमाल होला. एह सवालन से केन्द्र सरकार के मनसा साफ पता लागत बा.

एह दिसाईं प्रो॰ दुबे कहले बाड़न कि भोजपुरी अकादमी भोजपुरी इलाका के ओह सांसदन के विरोध करी जे लोग संसद में भोजपुरी के सवाल पुरजोर तरीका से नइखे उठवले.


(भोजपुरी अकादमी के विज्ञप्ति से)

संविधान के अठवीं अनुसूची में भोजपुरी शामिल करावे ला जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन

पिछला २९ अगस्त का दिने दिल्ली के जंतर मंतर पर एगो बड़हन धरना प्रदर्शन कर के जोरदार ढंग से भोजपुरी भाषा के संविधान के अठवीं अनुसूची में शामिल करावे ला सरकार पर दबाव बनावे के कोशिश भइल. ई धरना प्रदर्शन पूर्वांचल एकता मंच, भोजपुरी समाज दिल्ली, अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन आ भोजपुरी के अनेके संगठनन के अगुवाई में भइल. एहमें शामिल होखे ला देश भर से लोग आइल.

याद बा कि संसद के पिछला सत्र में तब गृह मंत्री रहल पी़ चिदम्बरम ई आस धरवले रहलें कि मानसून सत्र में भोजपुरी के संवैधानिक मान्यता खातिर बिल संसद में पेश कर दिहल जाई. बाकिर मानसून सत्र में सरकार एकरा ला कवनो पहल ना कइलसि जवना पर नाराजगी जतावे खातिर जंतर-मंतर पर भोजपुरिया बुद्धिजीवी लोग आ भोजपुरी प्रेमी सामाजिक कार्यकर्ता ई धरना प्रदर्शन कइलें.

एह मौका पर बोलत सांसद उमा शंकर सिंह बतवलें कि एह बाबत ऊ आ सांसद रघुवंश प्रसाद सिंह यूपीए अध्यक्षा सोनिया गांधी से मिलल रहुवे आ उनुका के सरकार के दिहल आस के याद करावल लोग. कहलन कि ई त हंगामा के भेंट चढ गइल लागऽता बाकिर विश्वास जतवले कि अगिला सत्र में ई मांग पूरा हो जाई. सांसद महाबलो मिश्र ने कहलें कि उहो एह मुद्दा पर नजर गड़वले बाड़न आ जी जान से लागल बाड़न अगिला सत्र में बिल जरूर पास हो जाई. भोजपुरी समाज दिल्ली के अध्यक्ष अजीत दुबे कहलें कि पिछलका सत्र में दिहल भरोसा का बावजूद एह सत्र के विचारणीय सूची में शामिल 32 गो बिल में भोजपुरी वाला बिल शामिल नइखे. अजीत दुबे सरकार से निहोरा कइलें कि भोजपुरी के ई माँग अगिला सत्र में जरूर पूरा कर दिहल जाव. पूर्वांचल एकता मंच के अध्यक्ष शिवजी सिंह के कहना रहल कि समय अब आर पार के लडाई के बा. सरकार आपन बात पूरा करे ना त गांव से लगायत दिल्ली ले जनांदोलन कइल जाई. अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन के महामंत्री डॉ. गुरुचरण सिंह कहलन कि पिछला चालीस साल से चलत एह कोशिश के सरकार हलुका मत ले ना त भारी पड़ी. कुँअर वाहिनी के अध्यक्ष प्रो.जीतेन्द्र स्वामीओ धिरवलें कि सरकार भोजपुरी भाषा, साहित्य अउर संस्कृति के कमतर आंके के कोशिश मत करे आ जल्दी से जल्दी भोजपुरी के 8वीं सूची में शामिल कर देव.

एह प्रदर्शन में शामिल हजारों लोग के संबोधित करे वालान में पी़ एऩ पाण्डेय, वी पी सिंह, संतोष पटेल, मनोज भावुक, निगम पार्षद सत्येन्द्र सिंह राणा, मुकेश सिन्हा, संजय सिंह, निर्मल सिंह, मुकेश कुमार सिंह, एल एस प्रसाद, रामेश्वर सिंह, श्रीकांत यादव, श्रीकांत विद्यार्थी, विनोद श्रीवास्तव अउर अमरेन्द्र सिंह वगैरह शामिल रहलें.

प्रदर्शन के आखिर में प्रधान मंत्री, गृह मंत्री आ लोकसभा अध्यक्ष के भोजपुरी भाषा के संविधान के अउवीं अनुसूची में शामिल करावे बाबत ज्ञापन देके धरना खतम भइल.


(स्रोत समाचारन से)

भारत के सबले लमहर रोड शो चलावत बावे अंजन टी वी

भोजपुरी मनोरंजन के क्षेत्र में भावी युग के अंजन टी.वी. चैनल भारत के मनोरंजन इंडस्ट्री के इतिहास में सबले लमहर रोड शो चलावत बा. एह रोड शो में उत्तर प्रदेश, बिहार आ झारखंड के शहर अंजन टी.वी. के लय पर झूमीहें सँ. 22 अगस्त से शुरू भइल ई रोड शो उत्तर प्रदेश के अनेके शहरन से गुजरत चालीस दिन ले सफर करी.

अंजन टी वी के चैनल के हेड मंजीत हंस के कहना बा कि जबहीं हमनी का कवनो बड़का आयोजन करीलें त एक एक आदमी के आशीर्वाद के कामना करीलें. एह रोड शो से हमनी का उत्तर प्रदेश, बिहार आ झारखण्ड के लोगन से आशीर्वाद लिहल चाहत बानी. चालीस दिन के एह रोड शो में ५००० किलोमीटर के सफर का दौरान चालीस गो शहर अइहें सँ. कहलन कि ई रोड शो ३० सितम्बर के खतम होखी. एह शो से चैनल अपना सगरी दर्शकन से स्थाई जुड़ाव स्थापित करे चाहत बा. सजल सजावल बड़का बड़का ट्रक, ट्राली आ स्टाइलदार जीप तय शहर के गलियन, सड़कन आ मुख्य जगहन पर नजर अइहें सँ. एह रोड शो में लाइव कार्यक्रम, प्रतियोगिता आ उपहार बाँटल मुख्य आकर्षण होखी.

अँजन टी.वी. के प्रबंध निदेशक दीपक राज भंडारी कहलें कि ऊ चैनल खातिर वइसने भावपूर्ण प्रतिक्रिया के लालसा राखत बाड़न जवन एह विशाल रोड शो से मिले के आशा बा.

पिछला २४ अगस्त के मुंबई में अंजन टीवी के लौन्चिंग भइल रहे.


(उदय भगत के रपट)

भोजपुरी के एगो नया मनोरंजन चैनल अंजन टीवी

भोजपुरी मनोरंजन के मैदान में क्रांति करे का दिसाईं एगो नया मनोरंजन चैनल डेग बढ़वले बा. भोजपुरी के ई दुसरका मनोरंजन चैनल होखी बाकिर एकर कार्यक्रम के अंदाज अलगे तरह के होखे वाला बा. अंजन टीवी नाम के एह चैनल पर के हर कार्यक्रम संदेशपरक होखी.

अंजन टीवी के चैनल हेड मंजीत हंस के कहना बा कि उनुका चैनल के उद्देश्य दर्शकन के मनोरंजने करल ना, बलुक बल्कि स्वस्थ मनोरंजन कइल बा. एहसे कार्यक्रम बनावत घरी एह बात पर खास ध्यान दिहल गइल बा कि समाज के हर वर्ग के लोग एकर आनंद ले सकसु. अंजन टीवी पर योग, संगीत, फिल्म, धारावाहिक, ट्रेवल, भक्ति, रियलिटी शो, कोमेडी शो, लाइफ स्टाइल आ खाना खजाना से जुड़ल कार्यक्रम पेश होखी आ एह कार्यक्रमन के भोजपुरी फिल्म जगत के कलाकार होस्ट करीहें.

अंजन चैनल के टेग लाइन “जियो हर पल” का बारे में चैनल हेड मंजीत हंस बतवलें कि ई आध्यात्म से जुडल बा आ संदेश देत बा कि जीवन अनमोल ह, एकरा के खुशी, आपसी भाईचारा आ चेहरा पर मुस्कान लिहले बितावे चाहीं. कहलन कि चैनल के लोगो में त्रिनेत्रो के झलक मिलत बा. कहलन कि उत्तर भारत के लोगन के ओह लोग का अपना भाषा में बढ़िया कार्यक्रम दिहले चैनल के अकेला मकसद बा.


(स्रोत – अंजन टीवी)

आजादी के पैंसठवा सालगिरह पर राष्ट्रपति के सबोधन भोजपुरी में

हमार साथी नागरिक,

हमरा ला ई बड़हन सौभाग्य के बाति बा कि देश के आजादी के पैंसठवाँ सालगिरह पर देश में आ दुनिया के सैकड़ों कोना में रहत अपना साथी भारतीयन के संबोधित करे के सौभाग्य मिलल बा. एह महान पद पर बइठावे ला आपन लोग आ जनप्रतिनिधियन के पूरा आभार शब्दन में ना जतावल सके, ई बढ़िया से जनला का बावजूद कि अपना लोकतंत्र में सबले बड़हन सम्मान एह पद से नइखे बलुक एह देश के, अपना मातृभूमि के, नागरिक होखला में बा. अपना महतारी, देश भारत, का सोझा हमनी सभे बरोबर बानी जा आ हमनी के अपना से ई सवाल कइला के जरुरत बा कि राष्ट्रनिर्माण के जटिल काम में हमनी का आपन काम बढ़िया से, इमानदारी से, पूरा लगन आ संविधान के बनावल मूल्यन मे पूरा निष्ठा संगे निबाहत बानी जा.

आजादी का एह तारीख पर ई बाति याद राखल जरूरी बा कि साम्राज्यन का दिन में आजादी दिहल ना जात रहे, लिहल जात रहे. ई आजादी महान मनईयन के पीढ़ियन से हासिल भइल. जवना के नेतृत्व भाग्य के ताकतवर महात्मा गाँधी कइलें पूरा निस्वार्थ भाव से आ इतिहास में तबके सबले बड़हन ताकत का खिलाफ राजनीतिक सोच बदल देबे वाला अपना नैतिक बल का सहारे कइलें आ जवना के झंकार आजुवो दुनिया के बड़हन घटना में सुनात रहेला. अगर यूरोपियन उपनिवेशिकरण के शुरूआत अठारहवीं सदी के भारत मे भइल त एकर अन्त के संकेत साल १९४७ के जै हिन्द के सामूहिक नारा से भइल. विजय के निर्णायक गोहार सुभाष चन्द्र बोस के, जिनका के आजुओ हर हिन्दुस्तानी “नेताजी” के रूप में जानेला, नारा जय हिन्द से मिलल. पंडित जवाहरलाल नेहरू, बाबा साहब अम्बेदकर, सरदार वल्लभभाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद, सरोजिनी नायडू आ अनेके लोग आजाद भारत के राह बनावल. ई महान लोग हमनी के काल्हु खातिर आपन आजु बलिदान कर दिहल. आ ऊ काल्हु आ गइल बा, आ हमनी के अपना से ई सवाल पूछल जरूरी हो गइल बा कि का हमनी का ओह महापुरुषन के दृष्टि के एगो राष्ट्र का तरह, एगो समाज का तरह सम्मान कइनी जा का?

जब नेताजी, ताप्ती का किनार भइल इण्डियन नेशनल कांग्रेस के ५१ वाँ अधिवेशन के राष्ट्रपति का तौर पर, हमनी के याद करवलन कि “हमनी के असली राष्ट्रीय समस्या गरीबी, अशिक्षा आ बीमारी हटावल बा”, तब हम एगो नन्हका रहलीं. नेताजी के कहल बात हमरा घर में गूंजल जइसे कि ई देश के लाखों करोड़ों घरन में गूंजल. हमार बाबूजी आजादी के लड़ाका रहलन आ ओह घरी जब आजादी एगो भ्रम जइसन लागत रहे हमनी का अपना में, अपना नेतवन में, अहिंसा के ताकत में, आ डर से बेडर भइल हिन्दुस्तानियन के साहस में भरोसा बनवले रखनी जा. बाकिर हमनी का तबहियों इ जानत रहीं, जइसन कि आजुवो जानत बानी जा, कि आजादी के मतलब रोटी आ सपना दुनु होखे के चाहीं.

नेताजी आ नेहरू जी मानत रहीं कि भारत समन्वयवाद, साम्यवाद के इस्तेमाल से, जवन कि उपर झापर देखत एक दोसरा के विरोधी लागेला, के सहारे भविष्य जीत ली. ओह लोग के भरोसा रहे कि आजाद भारत अपना आर्थिक समानता आ अलग अलग समुदायन का बीच गलतफहमी से उपजत झगड़ा मिटावत समन्वयवाद के सामाजिक आन्दोलन का सहारे उपनिवेश काल के बाद वाला दुनिया में वैकल्पिक उदाहरण बन के उभरी. मजहब के आजादी, लैंगिक आजादी आ सभका ला आर्थिक न्याय के बल पर भारत एगो आधुनिक राष्ट्र बन जाई. छोट मोट घटना एह सच्चाई के ना झूठला सके कि भारत एगो आधुनिक राष्ट्र बनत बा, हमनी के देश में कवनो संप्रदाय खतरा में नइखे, आ मरद मेहरारू के बरोबरी हमनी के समय के सबले बड़ हासिल बा.

हमार साथी नागरिक लोग,

हम निराशावादी ना हईं, हमरा ला गिलास हमेशा आधा भरल होला ना कि आधा खाली. हम त इहाँ ले कहल चाहब कि आधुनिका भारत के गिलास आधा से अधिका भरल बा. हमनी के उत्पाद श्रमिक वर्ग, हमहन के ताकत देत किसान वर्ग, जे अकाल ग्रस्त भूमि के अन्न के अधिकता वाला देश बना दिहल, हमनी के कल्पनाशील आद्यौगिक उद्यमी चाहे ऊ सार्वजनिक क्षेत्र में होखसु भा निजी क्षेत्र में, हमनी के बुद्धिजीवी, हमनी के शिक्षाविद्, आ हमनी के राजनीतिक वर्ग मिलजुल के अइसन आधुनिक राष्ट्र बनवलें जे कुछे दसेक साल में कई सौ साल वाला आर्थिक विकास आ अग्रगामी सामाजिक नियमन हासिल कर लिहल.

हमनी के जबले ई ना समुझब कि साल १९४७ में हमनी के कहाँ से शुरूआत कइनी जा तबले हमनी के एह बात के सही से ना समुझ पाएब जा कि हमनी का कतना आगा आइल बानी. जइसन कि जवाहरलाल नेहरू अपना भाषण आ लेखन में कई बेर बतवलन कि हमनी के देश तब गरीब ना रहल जब हमनी के आजादी छीन लिहल गइल रहे. का हम ई जोड़ सकीलें कि, केहू कवनो गरीब देश के जीते ला हजारन मील के सफर ना करे. तब के अंतर्राष्ट्रीय विद्वानन के दिहल आंकड़ा एह बात के झूठलावे वालन के चुप करे ला सुबूत बा. साल १७५० में, पलासी के लड़ाई से सात साल पहिले, दुनिया के २४.५ फीसदी उत्पादन भारत में होत रहे जबकि इंगलैंड में मात्र १.९ फीसदी रहल. दोसरा शब्द में कहीं त दुनिया के बाजार में तब मिले वाला हर
चार सामान में से एक सामान भारत में बनत रहे. साल १९०० लें भारत के उत्पादन दुनिया के उत्पादन के मात्र १.७ फीसदी रह गइल रहे आ ब्रिटेन के बढ़ के १८.५ फीसदी हो गइल रहे. पश्चिम के औद्यिगिक क्रांति अठारहवीं सदी में अपना शुरूआती दौर में रहल बाकिर ओहु समय में प्रति व्यक्ति औद्योगीकरण मामिला में भारत सातवाँ जगहा से चढ़ के पहिला जगहा चहुँप गइल रहे जबकि इंगलैंड दसवाँ जगह से सरक के सौंवा जगहा पर आ गइल रहे. साल १९०० से १९४७ का बीच भारत के आर्थिक विकास दर के सालाना औसत १ फीसदी रहल. ओह निचला जगहा से हमनी के चढ़ाई शुरू कर के पहिले ३ फीसदी पर आइल, आ फेर एगो लमहर छलांग ले के आजु, दुनिया के हिला देबे वाला आ कुछ देश के डूबो देबे वाला दू गो बड़हन अंतर्राष्ट्रीय संकट का बावजूद, सालाना औसत विकास दर पिछला सात साल से ८ फीसदी के उपर बा.

अगर हमनी के आर्थिक हालात क्रिटिकल मास हासिल कर लिहले बा, त ई हमनी के अगिला छलांग के लांचिंग पैड जरूर बने के चाही. एह बात के पक्का कर लेबे खातिर कि भारत हमेशा ला भूख, बीमारी आ गरीबी से आजाद हो जाव, हमनी के आजादी के एगो दोसर लड़ाई के जरूरत बा. जइसन कि हमनी के राष्ट्रपति रहल महान व्यक्तित्व डा॰ सर्वपल्ली राधाकृष्णन कि एही मंच से आजादी के १८वीं सालगिरह पर कहले रहीं, “आर्थिक विकास लोकतंत्र के परख में से एक होला”.

अगर बढ़त अभिलाषा का सोझा हमनी के विकास कम लागत बा, खास कर के नवहियन के, त खीस उभरबे करी हमनी अइसन देश हईं जे रोज नवही होखल जात बा, उमिर आ उमंग दुनु में. ई एगो चुनौती आ मौका दुनु बा. जानकारी बढ़ावे खातिर नवहियन के भूख ओह लोग के कौशल बढ़ाई आ एगो मौका दी जवना से भारत पहिला दुनिया के तेज राह पर आ सकी. नवहियन का लगे चरित्र बा बस मौका चाहीं. शिक्षा बीज ह आ आर्थिकहालात ओकर फल. बढ़िया शिक्षा दीं, बीमारी गरीबी आ भूख घटे लागी. जइसन कि हम अपना पहिला संबोधन में कहले रहीं हमनी के ध्येय वाक्य होखल चाहीं “ज्ञान ला सभे आ सभका ला ज्ञान.” दृष्टि खुला आसमान ना हो के नवहियन पर जरूर से केन्द्रित होखे के चाही.

प्रिय नागरिक,

बाहरी हालातन का चलते उपजल बेहद दबाव का बावजूद हमनी के आर्थिक हालात आजु अधिका मजगर आ लचीला बा. लगातार आर्थिक सुधारन के दू दशक हमनी के औसत आमदनी के आ घरेलू खपत के, शहरी आ देहाती इलाका दुनु में, बढ़वले बा. अनेके पिछड़ा इलाकन में एगो नया सक्रियता उपजल बा राष्ट्र के आर्थिक मुख्यधारा में आवे के. तबहियों अइसन बहुते खाई बा जवना के पाटल, ओहपर पुल बनावल, जरूरी बा. हरित विकास के पूर्वोत्तर राज्यन में चहुँपावे के बा. नीमन आ निकहा संसाधन बनावल तेज करे के बा. शिक्षा आ स्वास्थ्य सेवा के समाज के आखिरी आदमी ले चहुँपावे के बा,. बहुत कुछ कइल गइल बा, बहुत कुछ करे के बाकी बा.

एह साल मानसून धोखा दे दिहले बा. हमनी के देश के बड़हन इलाका सूखा के चपेट में बा, त कुछ दोसर इलाका बाढ़ के त्रासदी झेलत बा. महँगाई, खास कर के भोजन सामग्री के महँगाई, चिन्ता के कारण बनल बा. हमनी के अनाज उपलब्धता बढ़िया बा आ एह खातिर हमनी का ओह किसानन के ना भुला सकीं जे खराबो हालात में एकरा के संभव बनवलें. ऊ लोग समय पर देश ला खाड़ रहल, त ओह लोग के संकट का घड़ी में देशो के खाड़ होखे के पड़ी.

हम ना मानीं कि वातावरण संरक्षण आ आर्थिक विकास में कवनो विरोधाभास मौजूद रहेला. जबले हमनी का गाँधी जी के पाठ याद राखब जा कि दुनिया में आदमी के जरूरत ला पर्याप्त सामान मौजूद बा बाकिर ओकरा लालच ला ना, तबले हमनी का सुरक्षित रहब. हमनी के प्रकृति से मिल के रहल सीखहीं के पड़ी. प्रकृति हमेशा एक जइसन ना रहे, हमनी का ठीक समय में मिलल उपहार के बचा के राखे के पड़ी जेसे कि कमी का समय में छुंछे ना रहीं.

भठियरपन के कड़ुहट का खिलाफ खीस जायज बा, जइसे कि देश के संसाधन आ संभावना लूटे का खिलाफ होखत विरोध. अइसनो समय आवेला जब आदमी आपन धीरज खो देला बाकिर ई सब लोककतांत्रिक संस्थन पर हमला करे के कारण ना बने के चाहीं.

संस्था संविधान के सम्हारे वाला खंभा हईं सँ. अगर ऊ टूटल त संविधान के आदर्शवाद ना बचावल जा सकी. ई संस्था सिद्धांत आ नागरिकन का बीच के संपर्क सूत्र हईं स. हमनी के संस्था गुजरल समय से कुछ कमजोर पड़ल हो सकेली सँ बाकिर जवन बनल बा तवना के बिगाड़ल सही ना होई. ओकनी के फेर से मजगर बनावे के चाहीं जेहसे कि ऊ हमनी के आजादी के रक्षा कर सकऽ सँ.

हमनी के सीमा पर चौकसी ओतने जरूरी बा जतना देश के भीतर के चौकसी हमनी के अपना शासनव्यवस्था के ओह इलाकन के, न्यायपालिका कार्यपालिका आ विधायिका के, विश्वसनीयता बढ़ावे के जरूरत बा जहाँ थकान आ खराबी का वजह से कुछ कमी आ गइल बा. लोग के आपन विरोध जतावे के अधिकार बा बाकिर हमनी के इहो समुझे के चाहीं कि विधायिका से कानून बनावे के अधिकार आ न्यायपालिका से न्याय करे के अधिकार ना छीनल जा सके.

जब शासन मनमानी करे लागे त लोकतंत्र के नुकसान होला बाकिर जब विरोध चारो ओर पसर जाव त हमनी का अव्यवस्था के नेवतत होखीलें. लोकतंत्र एगो हिस्सेदारी ह. हमनी का साथही जीतीलें चा हारीलें. लोकतात्रिक सुभाव अपना बेवहार के सम्हारे के आ असहमति के बर्दाश्त करे वाला होला. संसद अपने कैलेंडर आ चाल से चली. कबो कबो ऊ चाल बेचाल लाग सकेला बाकिर लोकतंत्र में हमेशा एगो कयामत के दिन आवत रहेला जब चुनाव होला. संसद देश के आत्मा होले, लोग के आत्मा होले. एकरा अधिकार भा काम के चुनौती अपने के नुकसान चहुँपावे के खतरा हो सकेला. .

ई बात हम लोग के डाँटे का भाव में नइखीं कहत, एगो निहोरा का भाव में कहत बानी कि मौजूदा मुद्दन के पीछे लुकाइल खतरा के मुखौटा चिन्हल जाव. लोकतंत्र में अपना शिकायतन के तोड़ खोजे के मौका जवबादेही सकारे के सबले महान संस्था मुक्त चुनावन में मिलत रहेला.

हमहन के राष्ट्र के स्थिरता के चुनौती देबे वाली आग बुताइल नइखे. राख का नीचे अबहियों सुनगत बा. आसाम के हिंसा देखल हमरा ला बहुते दर्दनाक बा. हमनी के अकलियन के सुरक्षा चाहीं, हमला से बचाव, आ ओहलोग के समुझल चाहीं. हिंसा कवनो विकल्प ना होखे, हिंसा बड़हन हिंसा के निमन्त्रण होखल करेले. आसाम के घाव सुखावे खातिर निकहा काम भइल बा जवना में हमनी के प्रधानमंत्री रहल प्रिय राजीव गाँधी आ आसाम के नवहियन का बीचे भइल आसाम समझौता शामिल बा. ओकरा के फेर से देखल आ न्याय ला अउर राष्ट्रहित में जरूरत मुताबिक फेरबदल करे के जरुरत बा. नयका आर्थिक विकास के नयका लहर खातिर शान्ति के माहौल जरूरी बा जवन हिंसा के जड़ मिटा सके.

ई हमहन के भौगोलिक राजनीतिक वास्तविकता ह जवना से कुछ समस्या सीमा पार से आवत रहेला. एह समस्यन के समाधान बातचीत आ मिलजुल के निकाले खातिर सताइस साल पहिले सार्क बनावल गइल रहे, जवना से कि तेज आर्थिक विकास का तरफ बढ़ल जा सके. एक जगहा से दोसरा जगहा होखे वाला अंतरन आ असमान विकास के समस्या के दीर्घकालिक समाधान तेज आर्थिक विकासे से होखी सार्क के एह लक्ष्य के हासिल करे खातिर उर्जावान होखे के पड़ी.

आतंकवाद का खिलाफ सामूहिक लड़ाई में सार्क एगो मजगर औजार होखे के चाहीं. अंतर्राष्ट्रीय सहयोग से बड़हन सफलता संभव बा. निर्दोष लोगन पर आफत बने वाला आतंकियन के न्याय का दायरा में ले आवे खातिर सगरी सार्क देशन के आपस में सहयोग करे के चाहीं. एह उपमहादेश में शांति ले आवे के दोसर कवनो राह नइखे.

हमरा गर्व बा अपना बहादुर सशस्त्र सेना से आ अपना बहादुर पुलिस बल से जे अपना पर आवे वाला खतरन से बेपरवाह हो के आतंकवाद के खात्मा खातिर अतना कुछ करत बाड़ें. ओह लोग के चौकसिए का चलते अउरी बड़हन आफत आवे से बचल बानी जा. अगर हमनी का शांति से सूतत बानी जा त एहसे कि ऊ लोग जागत बा आ मरुभूमि में, पहाड़न में, जंगलात में, समुद्र के निर्जन इलाकन में अपना काम में लागल बा. ओह लोग के देशभक्ति आ लगन के हम सलाम करत बानी. ई बहुते खुशी के बात कि हमनी के सेना हमनी के शांतिए के गारंटी ना देव, ओलम्पिक में देश ला मेडल जीते वालनो के बनावेला. हाल का खेलन में देश के माथ ऊँचा करेवाला खिलाड़ियन के हम बधाई देत बानी जे देश खातिर मेडल जीतल आ ओहू लोग के जे देख ला खेलल. पदक के गिनिती बहुत नइखे बाकिर पिछला बेर ले बहुते अधिका जरूर बा. चार साल बाद, जब हम फेर रउरा सभ के संबोधित करे के आशा राखत बानी, हमरा पूरा विश्वास बा कि हमनी के पदक के बसंत ले आएब.

हमार साथी नागरिक,

अगर इतिहास में एक आदमी बा जेकर नाम शांति के पर्यायवाची बा त ऊ बावे गाँधीजी के नाम, जे हमनी के आजादी के निर्माता रहनी. भारत बहुतायत वाला देश ह जहाँ गरीबी बसेले. भारत का लगे एगो उत्साही आ विकासमान सभ्यता बा जवन हमनी के महान कला में चमकेला आ हमनी के गाँव शहर में दैनन्दिन जीवन में मानवता आ सृजनात्मकता में झलकेला. जब इन्दिरा गाँधी सितारन ले चहुँपली तब ऊ मानत रहली कि उ सब कुछ बारत के अगिला पीढ़ी हासिल कर सकेले. बाकिर राष्ट्रीय एकता आ भाईचारा का बिना हमनी के ना त वर्तमान हो सके ना भविष्य.

हमार साथी नागरिका,

आईं हमनी का नफरत, हिसा आ खीस के पीछे छोड़त चलीं जा. आपस के छोटमोट झगड़ा के किनार करीं जा. अपना देश खातिर मिल जुल के काम करीं जा अपना महतारी के पूजा करे वाला बचवन जइसन. उपनिषदन से मिलल एह ज्ञान में आपन भरोसा जताईं जा :

भगवान हमनी के रक्षा करसु. भगवान हमनी के पोषण करसु. हमनी का मिल जुल के उर्जा आ उत्साह से काम करी सँ. हमनी के अध्ययन बढ़िया रहो. आपस में कवनो विरोध मत होखे. बस शांति शांति शांति रहो. शांतिए हमनी के आदर्श, विकास आ क्षितिज बनो.

जय हिन्द!


आजादी के पै्सठवा सालगिरह से पहिले के सांझ देशवासियन का नामे राष्ट्रपति के सबोधन के भोजपुरी अनुवाद. लाख सावधानी का बादो कुछ गलती हो सकेला एकरा खातिर माफी मँगला का साथे पेश बा ई दस्तावेज.

गोरखपुर के भोजपुरी “बइठकी”

गोरखपुर के भोजपुरी साहित्यकारन के संस्था “भोजपुरी संगम” के बइठकी हर महीना करावल जाले. २८वीं बइठकी पिछला १० जून के साहित्यकार सत्यनारायण सत्तन का घरे भइल रहे जवना के अध्यक्षता गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो॰ सुरेन्द्र दुबे कइले रहनीं.

एह बइठकी का पहिलका सत्र में (बिना बैनरवाला फोटो में बाँए से) चन्द्रेश्वर “परवाना”, प्रो॰ सुरेन्द्र दुबे, प्रो॰ जनार्दन, प्रो॰ रामदेव, गिरिजाशंकर राय “गिरिजेश”, प्रो॰ चित्तरंजन मिश्र, रवीन्द्र मोहन त्रिपाठी. माहेश्वर कुमार शुक्ल, (बैनरवाला फोटो में बाँए से) रामसमुझ साँवरा, सूर्यदेव पाठक “पराग”, कृष्ण कुमार श्रीवास्तव, धर्मेन्द्र त्रिपाठी, हरिवंश शुक्ला हरीश, श्रीधर मिश्र, सत्यनारायण “सत्तन”, ई॰ राजेश्वर सिंह, केशव पाठक “सृजन”, रामनरेश शर्मा, ज्योतिशंकर पाण्डेय के अलावा लल्लन पाण्डेय आ अवधेश शर्मा “सेन” के भागीदारी में भोजपुरी गीत पर बतकही कइल गइल.

दुसरका सत्र में एह लोग के काव्यपाठ भइल.



भोजपुरी संगम के २९ वीं बइठकी

भोजपुरी संगम के २९ वीं बइठकी में अध्यक्षता करत प्रसिद्ध हिन्दी कथाकार आ उपन्यासकार मदन मोहन जी कहनी कि “कवनो रचना के खासियत इहे होखे के चाहीं कि ऊ अपने समय आ समाज के हूबहु उजागर करे आ अपनी भासाई संपदा में कुछ अउर जोड़ सके.”

पहिलका सत्र मे रुद्रदेव नारायन श्रीवास्त के व्यंग लेख “मूल्य से वैल्यू ले” पर चरचा में प्रो॰ रामदेव शुक्ल के सुझाव रहल कि “भोजपुरी लिखे के समय लेखक के भुला जाए के चाहीं कि ओकरा हिन्दी आ खासकर अँगरेजिओ आवेला.”

समीक्षक गिरिजाशंकर राय “गिरिजेश” एह व्यंग के कथ्य तथ्य से भरल पूरल एगो सार्थक रचना बतावल सुझाव दिहलीं कि रुद्रदेव जी में सफल व्यंगकार के पुरहर सामरथ बा. उहाँ के, लेखक के, भोजपुरी गद्यलेखन के अउर अभ्यास करे के सुझाव दिहलीं.

छपरा विश्वविद्यालय से आइल डा॰ सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी बजार आ नैतिकता के “मूल्य” से, दामाद आ पतोहि के बापन के “वैल्यू” ले के लेखक के नाप तौल के खूबे सरहनी. बाप के कइल पुरनका पंखा के घनघनाहट में बेटा के फटकारत समझावत बाप के मौजूदगी आ नैहर से मिलल पंखा के रख रखाव में ससुरारीवालन के साथे मेहरारुन के उपेक्षाभाग त सिद्धार्थ जी के भावुक क देलस. सूर्यदेव पाठक “परागो” एकर समीक्षा कइलीं.

कृष्णानगर कालोनी में सुधा संस्कृति संस्थान का कार्यालय पर भइल एह बइठकी के दुसरका सत्र में रवीन्द्र मोहन त्रिपाठी, नरसिंह बहादुर चन्द, धर्मदेव सिंह “आतुर”, आचार्य ओमप्रकाश पाण्डेय, रामसमुझ “सांवरा”, चन्देश्वर “परवाना”, के॰ एन॰ “आजाद”, अवधेश शर्मा “सेन”, हरिवंश शुक्ल “हरीश”, केशव पाठक “सृजन”, आ अब्दुर्रहमान गेहुआँसागरी के काव्यपाठ भइल.


(बइठकी के संयोजक आ संचालक सत्यनारायण मिश्र सत्तन के रपट)

दिल्ली में मनावल गइल भिखारी ठाकुर के पुण्य तिथि

भोजपुरी के शेक्सपीयर के नाम से मशहूर लोक कलाकार भिखारी ठाकुर अपना जमाना में जवना सामाजिक बुराईयन का खिलाफ लड़ाई लड़लन ऊ समस्या आ सामाजिक बुराई कमोवेश आजुओ समाज में मौजूद बा. भिखारी ठाकुर के नाटकन में नशाखोरी, धर्मिक पाखण्ड, संयुक्त परिवार बिखरे के त्रासदी, बेटी बेचे के कुप्रथा, नारी पर अत्याचार वगैरह का खिलाफ आवाज बुलंद कइले रहन. जरूरत बा कि आजुओ भिखारी ठाकुर के विचार अपना के देश आ समाज के सही दिशा दिहल जाव. अइसने राय रखलन आधुनिक साहित्य पत्रिका के संपादक आ विश्व हिंदी साहित्य परिषद् के अध्यक्ष आशीष कंध्वे जे दिल्ली में बिहारी खबर का कार्यालय में आयोजित भिखारी ठाकुर पुण्य स्मृति का कार्यक्रम के अध्यक्षता करत कहलन.

भिखारी ठाकुर मेमोरियल ट्रस्ट, चैतन्य भारत न्यास, अउर बिहारी हेल्प लाइन के मिलल जुलल आयोजन में ‘भिखारी ठाकुर लोक भाषा पुस्तकालय’ के विधिवत शुरूआत कइल गइल. पुस्तक संस्कृति आंदोलन के प्रणेता आ रामधारी सिंह दिनकर न्यास के अध्यक्ष नीरज कुमार पुस्तकालय के उद्घाटन करत कहलन कि देश भर में पुस्तकालय आंदोलन चलावे के मकसद ई बतावल बा कि आदमी के शराब ना किताब चाहीं. नीरज कुमार पुस्तकालय ला हर संभव मदद करे के भरोसा दिहलन.

भोजपुरी जिनगी के संपादक संतोष पटेल अपना कविता के माध्यम से भिखारी ठाकुर के श्रद्धांजलि दिहलन आ पुस्तकालय आंदोलन के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना जगावे पर जोर दिहलन. आर.टी.आई. कार्यकर्ता सत्येन्द्र उपाध्याय कहलन कि भिखारी ठाकुर के विचार जन-जन तक पहुंचावे के जरूरत बा. ऊ दिल्ली के कवनो सड़क के नाम भिखारी ठाकुर के नाम पर राखे के मांग कइलन.

भिखारी ठाकुर मेमोरियल ट्रस्ट के सचिव लोकगायक गजाधर ठाकुर अगिला छह महीना ले भिखारी ठाकुर लोक उत्सव के आयोजन के जानकारी दिहलन. ज्ञान गंगोत्री संस्था के अध्यक्ष भाई बी.के. सिंह गोहार लगवलन कि भिखारी ठाकुर पुस्तकालय में अधिका से अधिका पुस्तक दान दिहल जाव. बिहारी हेल्प लाईन आ बिहारी खबर के संस्थापक अश्वनी कुमार पुस्तकालय ला 51 सौ रुपये के सहयोग दिहलन आ बिहार के छपरा में भिखारी ठाकुर लोककला संग्रहालय स्थापित करे खातिर फाउंडेशन के जमीन दान देबे के एलान कइलन.

एह कार्यक्रम में बिहारी खबर के संवाददाता संतोष सिंह, नीलांजन बनर्जी, श्रीकृष्णा गिरी, उज्जवल कुमार मंडल आ बब्लु कुमार वगैरह लोग शामिल भइल. कार्यक्रम के संयोजन आ संचालन मुन्ना पाठक कइलन.


(ईमेल से मिलल खबर)

छपरा के लोग भुला दिहल भिखारी ठाकुर के

पिछला मंगल १० जुलाई का दिने जब पटना आ कुतुबपुर में भोजपुरी के शेक्सपियर कहाएवाला भिखारी ठाकुर के पुण्यतिथि मनावल गइल तवना दिने छपरा के भिखारी ठाकुर मोड़ पर मौजूद भिखारी ठाकुर आ उनुका मण्डली के मूर्ति बाट जोहत रह गइल एगो फूल माला के. ई मूर्ति स्थापित कइला का बाद ई पहिला मौका रहल जब एह जगहा पर कवनो कार्यक्रम आयोजित ना भइल. ना त कवनो राजनेता अइलें ना भोजपुरी के नाम पर आपन चेहरा आ धंधा चमकावे वाला लोग, देश विदेश में भोजपुरी के अलख जगावे वाला लोग.

गनीमत अतने रहल कि बिहार भोजपुरी अकादमी आ भिखारी ठाकुर के गाँव के कुछ नवजवान भिखारी ठाकुर के श्रद्धांजलि देबे के औपचारिकता निबाह दिहलें. कुतुबपुर में आयोजित कार्यक्रम में भिखारी ठाकुर के पोता राजेन्द्र ठाकुर, भिखारी ठाकुर के सहकर्मी रहल गोपालजीम विष्णुदेव शर्मा, चरण जी वगैरह का साथ कुछ जनकवि भिखारी ठाकुर लोक साहित्य व संस्कृति मंच के पदाधिकारी ललन राय, चुनमुन गु्पता, रवि कुलभूषण, गोपाल राय, किशुनदेव शर्मा, चंद्रशेखर बैठा, कृष्ण कुमार वैष्णवी आ कुछ स्थानीय लोग भिखारी ठाकुर के मुर्ति पर फूल माला चढ़ावल आ उनुका के श्रद्धांजलि दिहल. भिखारी ठाकुर के नाटक के प्रस्तुति भइल.

भिखारी ठाकुर के पुण्यतिथि मनावल गइल

पटना में बिहार भोजपुरी अकादमी १० जुलाई के स्व॰ भिखारी ठाकुर के पुण्यतिथि का अवसर पर एगो कार्यक्रम आयोजित कर के उनुका के श्रद्धांजलि दिहलसि.

कार्यक्रम के उद्घाटन करत बी॰एन॰तिवारी उर्फ भाईजी भोजपुरिया कहनी कि भिखारी ठाकुर अपना नाटकन का जरिए समाज में पसरल कुरीतियन का खिलाफ आवाज उठवले रहीं.

समारोह के अध्यक्षता अकादमी के अध्यक्ष प्रो॰ आर॰ के॰ दूबे कइनी आ कहनी कि बिहार भोजपुरी अकादमी का तरफ से भिखारी ठाकुर पर शोध करे वाला विद्यार्थियन के आर्थिक सहायता दिहल जाई आ भिखारी ठाकुर के पाण्डुलिपियन के प्रकाशन करावल जाई.

एह मौका पर मशहूर गायक आ गीतकार ब्रजकिशोर भिखारी ठाकुर के बिदेसिया गीत के सस्वर पाठ कर के सभका के भाव विभोर कर दिहलन.

समारोह में प्रमोद किशोर, लक्ष्मीकांत पाण्डेय, लल्लन जी, मोहम्मद नवाब, शिवजी सिंह वगैरह दर्जन भर वक्ता आपन विचार व्यक्त कइलें.


(स्रोत : अकादमी के प्रेस विज्ञप्ति)

भारत के राष्ट्रपति के चुनाव २०१२ : सगरी जानकारी

भारत के अगिला राष्ट्रपति चुने खातिर जोड़ घटाव चालू बा. राजनीति के चउँगोठल जात बा. एह बीच आम आदमी के सही सही मालूम नइखे कि देश में राष्ट्रपति के चुनाव वास्तव में होला कइसे, के एहमें वोट देला, आ वोट के गिनिती कइसे होला. एह बारे में साफ साफ जानकारी आम समाचार माध्यम से नइखे मिल पावत त अँजोरिया चहलसि कि सीधे चुनाव आयोग से मिलल जानकारी रउरा सभ के दिहल जाव.

अबकी के चुनाव राष्ट्रपति खातिर होखे वाला चौदहवाँ चुनाव ह.

  • सबसे पहिला चुनाव साल १९५२ में भइल रहुवे जवना में डा॰ राजेन्द्र प्रसाद के कुल वोट ६०५३८६ में से ५०७४०० वोट मिलल रहे. चार गो बाकी उम्मीदवारन में केहु के कवनो खास मत ना मिलल रहे. हँ के टी शाह के जरूर ९२८२७ वोट मिलल रहुवे.
  • दुसरका चुनाव साल १९५७ में भइल रहे आ एहू में डा॰ राजेन्द्र प्रसाद के कुल पड़ल वोट ४६४३७० में से ४५९६९८ वोट मिलल रहे. बाकी दू गो उम्मीदवार के तीन तीनो हजार वोट ना मिलल.
  • तिसरका चुनाव साल १९६२ में भइल जवना में डा॰ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के कुल पड़ल वोट ५६२९४५ में से ५५३०६७ वोट मिलल रहे आ बाकी दू गो उम्मीदवारन के बहुते थोड़ वोट से संतोष करे के पड़ल रहे.
  • चउथा चुनाव साल १९६७ में भइल जवना में डा॰ जाकिर हुसेन के कोटा सुब्बाराव से जोरदार टक्कर मिलल रहे. कुल पड़ल ८३८०४८ वोट में से डा॰ जाकिर हुसेन के ४७१२४४ वोट मिलल रहे आ सुब्बाराव के ३६३९७१ वोट. वइसे एह चुनाव में पन्द्रह गो अउरी उम्मीदवार रहलें जवना में से नौ जने के एको बोट ना मिलल रहे.
  • पँचवा चुनाव साल १९६९ में भइल आ एहमें कांग्रेस के अधिकृत उम्मीदवार नीलम संजीव रेड्डी के खिलाफ इन्दिरा गाँधी वी॰वी॰ गिरी के लड़वा के अन्तरात्मा के नाम पर वोट मँगले रही आ वी॰ वी॰ गिरी के ४०१५१५ वोट मिलल रहे. जीते खातिर कुल पड़ल वोट ८३६३३७ के आधा से कम रहला का चलते एक एक कर के उम्मीदवारन के छंटनी भइल रहे आ ओह लोग के पड़ल वोट में से दुसरका वरीयता के वोट बाकी उम्मीदवारन में जोड़ल जात गइल जब ले कि वी॰वी गिरी के बहुमत वोट ना मिल गइल. आखिरी गिनिती में वी॰वी॰ गिरी के ४२००७७ वोट मिलल जबकि नीलम संजीव रेड्डी के ४०५४२७ वोट. एह चुनाव मे पन्द्रह गो उम्मीदवार रहलें जवना में से पाँच जने के एको वोट ना मिलल रहे आ बाकी पाँच जने क एक हजार से कम वोट. तिसरका जगहा रहल सी॰डी॰ देशमुख के पहिला वरीयता के ११२७६९ वोट मिलल रहे.
  • छठवाँ चुनाव साल १९७४ में भइल जवना में दुइए गो उम्मीदवार रहलें आ फखरुद्दीन अली अहमद के कुल पड़ल वोट ९५४७८३ में से ७६५५८७ वोट मिलल रहे आ त्रिदीव चौधरी के १८९१९६ वोट.
  • सतवाँ चुनाव के नौबत साल १९७७ में पड़ गइल रहे काहे कि फखरुद्दीन अली अहमद के अचानक मौत हो गइल रहे. एह चुनाव में सैंतीस गो उम्मीदवार के परचा दाखिल भइल रहे बाकिर छत्तीस जने के परचा जाँच का बाद रद्द कर दिहल गइल आ अकेला बचल उम्मीदवार नीलम संजीव रेड्डी के निर्विरोध चुनाव हो गइल रहे.
  • अठवाँ चुनाव साल १९८२ में भइल जवना में दू गो उम्मीदवार मैदान में रहलें. एह चुनाव में कुल पड़ल वोट १०३६७९८ में से ७५४११३ वोट ले के ज्ञानी जैल सिंह जीत गइलें आ एच॰आर॰ खन्ना के कुल २८२६८५ वोट मिल पावल.
  • नउवाँ चुनाव साल १९८७ में भइल जवना में आर॰ वेंकटरमण के कुल पड़ल वोट १०२३९२१ में से ७४०१४८ वोट मिलल. वी॰आर॰कृष्णा अय्यर के २८१५५० वोट मिलल रहे. तिसरका उम्मीदवार मिथिलेश कुमार के २२२३ वोट मिलल. एह तीनो उम्मीदवार में से वेंकटरमण विजयी रहलें.
  • दसवाँ चुनाव साल १९९२ में भइल जवना में १०२६१८८ वोट पड़ल आ डा॰शंकर दयाल शर्मा के ६७५८०४ वोट मिलल रहे. जी जी स्वेल के ३४६४८५ वोट मिलल रहे. एह चुनाव में राम जेठमलानी आ धरती पकट काका जोगेन्दरो सिंह उम्मीदवार रहलें.
  • एगरहवाँ चुनाव साल १९९७ में भइल जवना में के॰आर॰नारायण के ९५६२९० वोट आ टी॰एन॰ शेषन के ५०६३१ वोट मिलल रहे. कुल १००६९२१ वोट पड़ल रहे.
  • बरहवाँ चुनाव साल २००२ में भइल जवना में कुल पड़ल वोट १०३०२५० में से ९२२८८४ वोट ले के डा॰ए॰पी॰जे॰ अब्दुल कलाम विजयी रहलन. अकेला विरोधी उम्मीदवार श्रीमती लक्ष्मी सहगल के १०७३६६ वोट मिलल रहे.
  • तेरहवाँ चुनाव साल २००७ में भइल जवना में कुल पड़ल वोट ९६९४२२ आ एहमें से ६३८११६ वोट श्रीमती प्रतिभा देवीसिंह पाटिल के मिलल रहे. पराजित उम्मीदवार भैरों सिंह शेखावत के ३३१३०६ वोट मिलल रहे.

अब चउदहवाँ चुनाव के सरगर्मी जारी बा.

आईं जानल जाव कि राष्ट्रपति चुनाव में वोट के देला.

– एह चुनाव में संसद के दुनु सदन के चुनाइल सदस्य, आ राज्य विधानसभा के चुनाइल सदस्य, आ दिल्ली आ पुड्डूचेरी के विधानसभा के चुनाइल सदस्य वोट देलें. मनोनीत सदस्यन के वोट देबे के अधिकार ना होला.

– विधायकन के वोट के मूल्य तय करे खातिर साल १९७१ के जनसंख्या के आधार मानल जाला. एह जनसंख्या में एक हजार से भाग देके बाकी बचल संख्या के ओह राज्य के विधायकन के संख्या में बराबर बराबर बाँटल जाला.

– सगरी राज्यन के विधायकन के वोट के मिला के जवन संख्या आवेला तवना में राज्यसभा आ लोकसभा के मिला के कुल सांसदन के संख्या से भाग दिहल जाला. जवन अंक आवेला उहे होला एक सांसद के वोट के वैल्यू भा मूल्य.

अबकी का चुनाव में विधायकन के वोट के मूल्य राज्य वार एह तरह से बा :

आंध्र प्रदेश १४८
अरूणांचल प्रदेश
असम ११६
बिहार १७३
छतीसगढ़ १२९
गोआ २०
गुजरात १४७
हरियाणा ११२
हिमाचल प्रदेश ५१
जम्मू एण्ड काश्मीर ७२
झारखण्ड १७६
कर्नाटक १३१
केरल १५२
मध्यप्रदेश १३१
महाराष्ट्र १७५
मणिपुर १८
मेघालय १७
मिजोरम
नागालैण्ड
ओडिशा १४९
पंजाब ११६
राजस्थान १२९
सिक्किम
तमिलनाडु १७६
त्रिपुरा २६
उत्तराखंड ६४
उत्तरप्रदेश २०८
पश्चिम बंगाल १५१
दिल्ली ५८
पुड्डूचेरी १६

एहमें उत्तर प्रदेश के विधायकन के वोट के मूल्य सबले बेसी २०८ बा जबकि सिक्किम के विधायकन के वोट के मूल्य सबले कम ७ बा. उपर दिहल सगरी वोट मिला के ओकर मूल्य भइल ५४९४०८ जवना के ७७६ सांसदन में बँटला पर ७०८ के वैल्यू भा मूल्य आवत बा.

एह आधार पर अबकी का चुनाव में कुल वोट के गिनिती भइल विधायकन के ५४९४७४ वोट आ सांसदन के ५४९४०८ वोट आ कुल मिला के १०९८८८२.

राष्ट्रपति चुनाव कवनो चुनाव चिह्न का आधार पर ना होखे आ हर वोटर सगरी उम्मीदवारन के क्रमवार जगहा दे सकेला. हालांकि बहुते लोग आपन पहिला वरीयता के वोट दे के छोड़ देलें. जवन कि करे के ना चाहीं काहे कि ओह हालत में अगर दुसरका वरीयता के वोट गिने के जरूरत पड़ल त उनकर वोट बेकार हो सकेला अगर उनकर वोट ओह आदमी के पड़ल बा जे सबले नीचे बा.

आईं अब देखल जाव कि वोट गिनल कइसे जाला

रिटर्निंग अफसर ई देखेला कि कुल पड़ल पहिला वरीयता के वोट का आधार पर कवनो उम्मीदवार के आधा से अधिका वोट मिलल बा कि ना. अगर कवनो उम्मीदवार के पचास फीसदी से कम से कम एको वोट अधिका नइखे मिलल त सबले कम वोट पाए वाला उम्मीदवार के हटा दिहल जाई आ ओकरा मिलल वोट में से दुसरका वरीयता के वोट तब पहिला वरीयता के मान लिहल जाई. ई क्रम तबले चलत रही जबले एक उम्मीदवार के पचास फीसदी से अधिका वोट नइखे मिल जात.

राष्ट्रपति चुनाव लड़े के अर्हता

भारत के नागरिक होखे के चाहीं.
पैंतीस साल से बेसी उमिर होखे चाहीं, आ
ऊ सांसद भा विधायक बने के योग्यता राखत होखे.
कवनो लाभ का पद पर ना होखे के चाहीं ओकरा. हालांकि राष्ट्रपति भा उपराष्ट्रपति के पद एह चुनाव खातिर लाभ के पद ना मानल जाव.

परचा दाखिल करे के नियम
उम्मीदवार का लगे कम से कम पचास गो विधायक भा सांसद प्रस्तावक होखसु आ पचास गो अउरी विधायक भा सांसदन के समर्थन रहे. केहू प्रस्तावक आ समर्थक दुनु ना हो सके.
अधिक से अधिक चार गो परचा दाखिल कर सकेला कवनो उम्मीदवार.
जमानत का तौर पर पन्द्रह हजार रूपिया जमा करे के पड़ी जवन कुल पड़ल वोट के छठवां हिस्सा से कम मिलला पर जब्त कर लिहल जाई.

आशा बा कि एह जानकारी का बाद अँजोरिया के पाठक एह चुनाव का बारे में सगरी जरूरी जानकारी राखे वाला बन जइहें. अंजोरिया के हमेशा से परंपरा रहल बा कि खाली भोजपुरी के बात ना कर के सगरी बात भोजपुरिए में कइल जाव.

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