मॉरीशस में भोजपुरी अस्मिता आजुओ मौजूद बा

१७८ बरीस पहिले जब गिरमिटिया मजदूर बिहार का भोजपुरी पट्टी से मॉरीशस गइलें त ओह लोग के देहे ना बलुक पूरा भोजपुरी रीति रिवाज भाषा आ संस्कृतिओ ओह लोग का साथ ही गइल, आजुओ मॉरीशस में भोजपुरी अस्मिता मौजूद बा.

मॉरीशस के इतिहास आ वर्तमान असल में बिहारी मूल के लोगन के इतिहास आ वर्तमान हवे, भोजपुरी के शब्दावली, मुहावरा, कहाउत, पहेली, लोक साहित्य, पारंपरिक आ संस्कार गीत सब कुछ आजुओ सुरक्षित बा.

ई कहना बा मॉरीशस यात्रा से लवटल बिहार भोजपुरी अकादमी के अध्यक्ष डा॰ रविकांत दुबे के. अपना मॉरीशस यात्रा में डा॰ दुबे अनके सरकारी आ गैर सरकारी आयोजनन में शामिल भइलें. ओहिजा उनुकर मुलाकात मॉरीशस के उप प्रधानमंत्री अनिल बेचू, कला संस्कृति मंत्री मुक्तेश्वर चुन्नी, शिक्षा मंत्री बसनंत बनवारी, स्पीकर कैलाश प्रयाग, मॉरीशस में भारत के उच्चायुक्त टी॰पी॰ सीतारमण, सांसद कल्याणी जुग्गु वगैरह से भइल. झारखंड विधानसभा स्पीकर सी॰पी॰ सिंह का संगे डा॰ दुबे मॉरीशस संसद के कार्यवाही विशेष दीर्घा से देखलन जहाँ ओह लोग के स्वागत स्पीकर कइलन आ सांसद मंत्री मेज थपथपा के समर्थन जतावल.

एह यात्रा का दौरान महात्मा गाँधी संस्थान से प्रकाशित पुस्तक “भोजपुरी कविताएँ” के लोकार्पण कइलन. पटना के निशिकांत मिश्र संपादित पत्रिका “बतिया निकलल बा” के लोकार्पणो भइल. एह बीच मॉरीशस में आयोजित पहिला अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में डा॰ दुबे के विशेष रुप से सम्मानित कइल गइल. महोत्सव में पाखी हेगडे, कल्पना पटवारीम अभय सिन्हा, राजकुमार आर पान्डेय समेत भोजपुरी फिल्म जगत के अनेके गणमान्य लोग आ स्वामी उमाकांतानंद मौजूद रहलें. कल्पना के नयका म्यूजिक अलबम “दि लीगेसी आफ भिखारी ठाकुर” के लाँचिगं उपप्रधानमंत्री अनिल बेचू आ मुक्तेश्चवर चुन्नी का हाथे कइल गइल. पाखी हेगडे आपन जन्म दिनो एह साल ओहिजे मनवली.

मॉरीशस गइल एह प्रतिनिधि मंडल में झारखंड स्पीकर सीपी सिंह, भाई जी भोजपुरिया, बिहार जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन, पाखी हेगडे, कल्पना पटवारी, राजकुमार पाण्डेय, अभय सिन्हा, बिहारी खबर के अश्विनी कुमार, शैलेश सिन्हा, कुलदीप श्रीवास्तव समेत अनेके लोग शामिल रहल.


(स्रोत : बिहार भोजपुरी अकादमी)

दुनिया भर में गूँजी अब भिखारी ठाकुर के वरासत

आ एह वरासत के गूंज सुनल जाई कल्पना पटवारी का आवाज में.

आसाम के लड़की भोजपुरी के लोकप्रिय गायिका कल्पना पटवारी ऊ काम कर देखवली जवना के कोशिश कबो कवनो दोसर गायक ना कइलन. कल्पना पटवारी के गावल गीत भिखारी ठाकुर के मूल गवनई के जस के तस परोसत बाड़ी सँ. जे भिखारीओ ठाकुर के सुनले बा आ कल्पना के एह नयका अलबम “दि लीगेसी आफ भिखारी ठाकुर” के सुनत बा ओकरा ई बात माने में इचिको हिचक नइखे होखत कि कल्पना भिखारी ठाकुर के गवनई से पूरा न्याय कइले बाड़ी. वइसे विशुद्धता वादी कह सकेलें कि एकाध जगहा कल्पना के उच्चारण जरूर गड़बड़ा गइल बा बाकिर एकर दोष हम कल्पना के ना देके ओकरा के देब जे एकर ट्रांसक्रिप्ट लिखले होखी.

भिखारी ठाकुर के जीवन के कहानीओ एह गीतन में मौजूद बा. उनुका जनम के कहानी, उनुका लड़िकाई के दिन, कइसे पाठशाला में मन ना लागल त भाग के बंगाल के मिदनापुर चहुँपले. फेर कइसे ओहिजा पेट पाले खातिर आपन पुश्तैनी धंधा, लोग के हजामत बनावल, शादी बियाह में नाई के जिम्मेदारी उठावल कइलें, आ एही बीच जब रामलीला आ बगाल के लोक नाटक जात्रा देखलें तब उनुका मन में एगो सपना जागल वइसने कुछ कर देखावे के. इहे सपना लिहले गाँवे लवटलें आ अपना दोस्त भगवान दास बनिया से अक्षर ज्ञान सीखलें जेहसे कि गोस्वामी तुलसीदास के रामचरित मानस पढ़ सकसु. जस जस पढ़त गइले राम में मन लागे लागल आ एक दिन जब अपना संगी साथियन के बिटोर कर के गांव मे पहिला बेर भोजपुरी में रामलीला के मंचन कइले त सगरी गाँव वाह वाह कर उठल. मंडली बनत गइल बाकिर देखते देखत नाच मंडली में बदल गइल. बाप महतारी के वर्जना रोक ना पवलसि भिखारी ठाकुर के आ ऊ चल दिहलें ओह राह पर जवना पर उनुकर सही मूल्याकन उनुका जिनिगी में त ना भइल बाकिर बाद में जरूर उनुका के भोजपुरी के शेक्सपियर के सम्मान दोसर केहू ना खुद दर्जन भर भाषा के ज्ञानी आ महान साहित्यकार पंडित राहुल सांस्कृतयायन दिहलें.

अब ओह महान भोजपुरिया लाल भिखारी ठाकुर के जीवनी आ रचना पेश करे के जीवट देखवले बाड़ी कल्पना पटवारी आ एह अलबम के गीत सुनला क बाद हम त इहे कहब कि कल्पना भिखारी ठाकुर के रचना से, उनका शैली से पूरा न्याय कइले बाड़ी. एह अलबम के संगीत आधुनिक होखला का बावजूद भिखारी ठाकुर के संगीत शैली के दोहरावत लागत बा. अलग बाति बा कि भिखारी ठाकुर के मर्दानी आवाज कल्पना पटवारी के आवाज में खोजल गलत होई. बाकिर हर भोजपुरी प्रेमी का घर मे एह अलबम के एगो कैसेट होखल जरूरी होखे के चाहीं आ ओहू लोग के जे भोजपुरी के बेंवत से सहमत नइखे. उहो लोग सुने कि भोजपुरी के मिठास कइसन होले.

एह अलबम के परिकल्पना खुद कल्पना पटवारी के बा. जे अपना आइकन भूपेन हजारिका के राह चलत भोजपुरी में वइसन आइकन खोजे निकलली त खोज आ के ठहरि गइल भिखारी ठाकुर पर. भोजपुरी में भिखारी ठाकुर ले बढ़ के कवनो लोक गायक नइखे भइल. जनता से जमीनी स्तर पर जुड़ल भिखारी ठाकुर जन भावना के, समाज के समस्या के जतना जियतार तरीका से पेश कइलन वइसन दोसर केहू ना कर पावल. एह जगहा महेन्दर मिसिर के नाम ना लिहल अन्याय हो जाई बाकिर महेन्दर मिसिर के रचना आ भिखारी ठाकुर के रचना अलगा अलगा स्तर पर बा. महेन्दर मिसिर जवन रचले तवन अपना प्रेम में ओकरा विरह में. भिखारी ठाकुर जवन रचलें तवन समाज के पीड़ा देख के, ओह पीड़ा के सहज समाधान खोजे का फेर में. एह मामिला में भिखारी ठाकुर के महत्व अतुलनीय हो जात बा.

कल्पना पटवारी के एह अलबम, “दि लीगेसी आफ भिखारी ठाकुर” के पिछला दिने लंदन में विश्व स्तरीय म्यूजिक कंपनी वर्जिन रिकार्ड्स, ईएमआई म्यूजिक का तरफ से रिलीज कइल गइल. दुनिया भर के म्यूजिक रिटेल आउटलेट, मॉल. आ प्लानेट एम के स्टोरन में बिकात एह अलबम के दाम एकसौ पंचानबे रुपिया राखल गइल बा. भोजपुरी के ई सबले महँग आडियो कैसेट अपना दाम से बेसी के वजन रखले बिया आ पूरा उमेद बा कि एह अलबम से भोजपुरी संगीत भोजपुरी के मौजूदा लोअर क्लास सर्किल से उपर उठि के मिडिल आ अपर क्लास ले आपन पहुँच बना ली.

भिखारी ठाकुर के रचना आ कल्पना पटवारी के आवाज के एह जुगलबंदी के सफलता खातिर अँजोरिया के हार्दिक शुभकामना बा.
– संपादक, अँजोरिया


एह अलबम का बारे में बेसी जानकारी खातिर

‘सुरो का महासंग्राम’ में अपना राज्य के नेतृत्व पावे के लड़ाई

एह हफ्ता महुआ टी॰ वी॰ पर प्रसारित ‘सुरो के महासंग्राम’ का एपिसोड में राज्य के टीम में चुनाये के लड़ाई देखावल गइल. देख के लागल कि कइसन कइसन अनगढ़ हीरा ले के एह शो के शुरुआत होखत बा आ धीरे धीरे उहे अनगढ़ हीरा पालिश्ड हो के कतना चमकदार बन जइहें इहो देखे लायक रही. शो में जवन बात सबले चटक लउकल ऊ कि बहुते प्रतिभागी वइसन गाना चुनत रहले जवना के आम आदमी के अपना परिवार का बीच बइठ सुने में अहस लागी. सोचे लगनी कि एह हालात के जिम्मेदार केकरा के मानल जाव. गायक गायिका त बस दोसरा के लिखला के आपन आवाज भर दे देलें. फूहड़ गीत लिखे के असल दोष त ओह गीतकारन के दिहला के जरूरत बा. ना त ऊ लिखते ना केहु गाइत. बाकिर कहल जा सकेला कि फूहड़ गीतन के लोकप्रियता दिआवे में गायक गायिको लोग के हाथ होला जे अपना आवाज के गलत इस्तेमाल करत वइसनका गीत के लोकप्रियता दिआवे के कोशिश करेले. घर में बाजे चाहे ना, ट्रक, ट्रैक्टर, टैक्सी रेला ठेला में वइसन गीत खूब सुने के मिल जाला काहे कि हमनी के सुभाव हो गइल बा कि भीड़ का बीच हमनी का आदमी ना रहि जाईं.

खैर देखनी कि जब कबो वइसन गीत आवत रहे त मंच पर बइठल निर्णायक लोग इशारा से रोक देत रहे आ कहत रहे कि कूछ अउर गावऽ. एह हफ्ता के मेगा आडिशन में सब कुछ बहुते अनौपचारिक जइसन लागल. एह मेगा आडिशन से चुनाइल लोग अगिला हफ्ता से होखे वाला प्रतियोगिता में प्रतिभागी बनीहे. शो के एंकर भा सूत्रधार मनोज तिवारी बाड़े. प्रतिभागियन के चुने वाला निर्णायक मण्डल में संगीतकार सतीश, अजय आ धनंजय मिश्रा रहले.

भोजपुरी के सबले बड़ ताकत एकर गीत गवनई हवे काहेकि एही सहारे भोजपुरी आम आदमी का बीच रचे बसेले. उमीद कइल जाव कि महुआ टीवी भोजपुरी गीत गवनई के चमकदार पहलू सामने ले आई आ फूहड़ गीतन के प्रतियोगिता से बाहर राखी. हँ भोजपुरी गीत गवनई से रसिक अंदाज के हटावल ना जा सके आ ओकरा बिना भोजपुरी गीत गवनई भजन बनि के रहि जाई इहो साँच बा.

सुरों का महासंग्राम महुआ टी॰ वी॰ पर हर शुक आ शनिचर के रात 8.00 बजे से होखत बा.


(प्रशांत निशांत के भेजल रपट का आधार पर)

महुआ पर 3 फरवरी से शुरू होखी ‘सुरो का महासंग्राम’

एक बेर फेर सजी गीत गवनई के मंच, आपन कला देखइहें बिहार, यू॰पी॰ आ झारखण्ड के सुरवीर. ई शो देखल जाई 3 फरवरी से ‘महुआ टी॰वी॰’ पर. ‘सुर संग्राम’ के दू गो शानदार सीजन का बाद महुआ टी॰वी॰ ले के आइल बा ‘सुरो का महासंग्राम’ आ फेर देश के उभरत गवनिहारन का बीच एगो जंग मची. देश के 5 राज्यन में कुल एक दर्जन शहरन में करावल आडिशन में करीब 50 हजार प्रतिभागी शामिल भइल रहले. ओही में से चुनल 36 गायकन के फौज उतरी ‘सुरो का महासंग्राम’ में.

भोजपुरी सभ्यता आ संस्कृति से जुड़ल गीत-गवनई का साथही पोपुलर फिल्मी गीतन आ पारंपरिक लोक गीतन के सुने के मौका मिले जात बा दर्शकन के. पहिला दू दिन, 3 आ 4 फरवरी के दर्जन भर शहरन में करावल आडिशन के झलकी देखावल जाई. एह शो के एंकर बनावल गइल बाड़े मनोज तिवारी मृदुल जे मंच पर भगवान कृष्ण का भूमिका में होखीहें आ तीनो राज्यन के प्रतिभागियन के जंग सम्हारे के काम करीहें.

बतौर जज रहीहे मशहुर लोक गायिका कल्पना आ भोजपुरी सिनेमा के सदाबहार अभिनेत्री ‘नंदिया के पार’ के गुंजा साधना सिंह. शो के निर्माण मशहूर फिल्म निर्माता अभय सिन्हा के कंपनी यशी फिल्म्स कइले बिया.

‘सुरों के महासंग्राम’ शो के समय रही हर शुक आ शनिचर के रात आठ बजे से.


(महुआ टीवी के पीआरओ प्रशांत निशांत के रपट)

रघुवीर शरण श्रीवास्तव के सुर संग्राम २ के विजेता बनवलसि महुआ

पिछला दिने बिना कवनो पूर्व सूचना के भा तामझाम के महुआ टीवी का नोएडा आफिस में गवनई के रियलिटी शो “सुर संग्राम सीजन – 2” के विजेता के फैसला कर लिहल गइल. एह बात के जानकारी महुआ टीवी के पीआरओ प्रशान्त निशान्त से मिलल बा. कवना आधार पर एकर फैसला लिहल गइल ओकरा बारे में कवनो जानकारी नइखे दिहल गइल.

“सुर संग्राम सीजन २” के विजेता के फैसला २० दिसम्बर २०१० के होखे वाला रहुवे. पटना के गाँधी मैदान में भव्य समारोह आयोजित भइल बाकिर कुछ असामाजिक तत्वन का उपद्रव का चलते आयोजन रोक के रद्द कर देबे के पड़ल. फाइनल में बनारस के गायक रघुवीर शरण श्रीवास्तव आ राँची के गायिका ममता राउत का बीच मुकाबिला रहुवे. अब करीब तेरह महीना बाद ओह फाइनल के फैसला महुआ टीवी के नोएडा कार्यालय में कर दिहल गइल.

बतावल गइल बा कि रघुवीर के पचीस लाख रुपिया आ ममता राउत के एगारह लाख रुपिया के इनाम दे दिहल गइल.

अब जब सुर संग्राम सीजन २ के फाइनल हो गइल त महुआ टीवी के नयका रियलिटी शो “सुरों का महासंग्राम” के राह खुल गइल. एह शो के आडीशन के प्रक्रिया पूरा हो गइल बा.

मूरख मिले बलेस्सर पढ़ा लिखा गद्दार ना मिले

(9 जनवरी के पहिला पुण्य तिथि पर)
बालेश्वर के बिना एक साल

– दयानंद पांडेय

बालेश्वर के बिना ई एक बरीस बहुते चुभन का साथे बीतल. दोस्ती त इयाद आइबे करेले. हर भिनुसहरा, हर सँझिया याद आवेले. बाकिर एह साल एतना सगरी नया घटना भइली स आ हर बेर बालेश्वर याद अइले. ऊ चाहे राजा, कलमाडी, कनिमोझी भा येदियुरप्पा वगैरह के जेल गइल होखो, मंहगाई, भ्रठियरपन, लोकपाल भा अन्ना के मुद्दा रहल होखो, भा उत्तर प्रदेश में धकाधक बीस गो मंत्रियन के बर्खास्तगी भा इस्तीफ़ा होखो. भा तमाम अउरी मसला. हर बेर बालेश्वर याद अइलन. एहले याद अइलन कि अगर ऊ रहीतन त एह मसलन पर उनुकर एकाध गो गीत आ गइल रहीत.व्यवस्था विरोध आ बदलाव के जवन गीत बालेश्वर ललकार के गावत रहले, ऊ गाना गावे वाला अब केहु नइखे रहि गइल. ठकुरसुहाती गाना आ गोंइयां, सइयां से आगे भोजपुरी गायकी के अगर भिखारी ठाकुर का बाद केहु ले गइल त ऊ बालेश्वरे रहले. ऊ त गावसु कि “दुश्मन मिले सबेरे लेकिन मतलबी यार ना मिले” आ जइसे कि विसंगति के रेघरियावत रहले, “मूरख मिले बलेस्सर, पढ़ा लिखा गद्दार न मिले”. अब देखीं ना, अधिकतर पढ़ल लिखल लोगे देश आ समाज का साथे गद्दारी करत मिलत बाड़े. पता चली कि आक्सफोर्ड के पढ़ल हउवन आ करोड़ो अरबो के भठियरपन में डूबत उतरात बाड़न.

बालेश्वर के एगो गाना हवे, “नाचे न नचावे केहू पइसा नचावे ला”. जब ई गाना लिखले रहले बालेश्वर तब नरसिंहा राव प्रधान मंत्री रहले. सुखराम के घोटाला सामने आइल रहे आ चंद्रास्वामी के राजनीति में गरमाहट रहल आ घोटालो में. त बालेश्वर गावसु, “नाचे न नचावे केहू पइसा नचावे ला” आ फेरू जोड़सु कि, “हमरी न मानो सुखराम जी से पूछ लो”. फेरू ऊ चंद्रास्वामी अउर नरसिंहा राव ले आ जासु. बालेश्वर के गायकी दरअसल व्यवस्था के फुलौना में पिन चुभावत रहे. ऊ चाहे राजनीतिक व्यवस्था होखो भा सामाजिक कुरीति. ऊ हर जगहा चोट मारसु. व्यवस्था पर अइसन चोट अब भोजपुरी गायकी से नदारद बा. एही से बालेश्वर के इयाद आवत बा. बालेश्वर के एगो गाना ह, “मोर पिया एम पी, एम एल्ले से बड़का, दिल्ली लखनऊआ में वोही क डंका” आ जब ऊ एहमें ललकार के जोड़सु कि, “अरे वोट में बदलि देला वोटर क बक्सा ! मोर पिया एम पी, एम एल्ले से बड़का !” त चुनावी दलालन के चेहरा बरबस सामने आ जात रहुवे. “बाबू क मुंह जैसे फ़ैज़ाबादी बंडा, दहेज में मांगेलैं हीरो होंडा” भा फेरु “बिकाई ए बाबू बीए पास घोड़ा” जइसन गीतो बालेश्वर किहाँ बहुतायत में रहे. बालेश्वर असल में भोजपुरी गायकी में कबीर जइसन साफगोई अउर बांकपने खातिर जानलो जासु. से ऊ गाइबो करसु, “बिगड़ल काम बनि जाई, जोगाड़ चाही !” एक समय मंडल कमंडलो पर ऊ खूब गावसु. “फ़िरकापरस्ती वाली बस्ती बसाई न जाएगी” गावसु आ बतावसु कि “हिटलरशाही मिले पर मिली जुली सरकार ना मिले.” दलबदलुओं पर तंज करत एक समय ऊ गावसु “चार गो भतार ले के लड़े सतभतरी !” मंहगाई ले के उनुकर एगो तंज देखीं. “चंद्रलोक का टिकट कटा है, आगे और लडाई है, सोनरा दुकनिया भीड़ लगी है कोई कहता मंहगाई है.” ऊ त इहो गावसु “जब से लइकी लोग साइकिल चलावे लगलीं तब से लइकन क रफ़्तार कम हो गइल.” भा फेर “समधिनिया क पेट जइसे इंडिया क गेट” जइसन गानन में उनुकर गायकी के गमक देखले बनत रहे. “नीक लागे टिकुलिया गोरखपुर के” जइसन गाना त उनुका के गायकी के माथ पर बइठा दिहलसि.

बालेश्वर असल में गरीब गुरबन के गायक रहले. खुदहु गरीब रहलन. दबाइल कचराइल समाज से आवसु से उनुकर दुखोसुख करीब से जानसु. आ उनुकर दुख सुख गाइबो करसु. “लोहवा के मुनरी पर एतना गुमान, सोनवा क पइबू त का करबू!” गीत में गरीबी के जवन दंश आ डाह के जवन डंक ऊ परोससु ऊ अविरल बा. भा फेर “हम कोइलरी चलि जाइब ए ललमुनिया क माई” गीत में बेरोजगारी अउर प्रेम के जवना कंट्रास्ट ऊ परोससु ऊ अदभुत रहे, अदभुत रहे उनुकर ई गीतो कि “तोहर बलम कप्तान सखी त हमरो किसान बा.” गंवई औरत के जवन गुरुर आ स्वाभिमान एह गीत में छलकत सामने आवत बा ऊ विरल बा. “बलिया बीचे बलमा हेराइल” जइसन विरह गीतो उनुका खाता में दर्ज बा, “आव सखी, चलीं ददरी क मेला” भा “अपने त भइल पुजारी ए राजा हमार कजरा के निहारी ए राजा” भा फेर “कजरवा हे धनिया” जइसन गीतन के बहारो बा. “केकरे गले में डालूं हार सिया बउरहिया बनि के” जइसन मार्मिक गीतो बालेश्वर किहाँ मौजूद बा.

बालेश्वर किहाँ प्रेम बा त प्रेम का बहाने अश्लीलतो भरपूर बा. “खिलल कली से तू खेललऽ त हई लटकल अनरवा का होई?” भा फेर “काहें जलेबी के तरसेली गोरकी, बडा मज़ा रसगुल्ला में” भा फेर “लागऽता जे फाटि जाई जवानी में झुल्ला”, “आलू केला खइलीं त एतना मोटइलीं दिनवा में खा लेहलीं दू दू रसगुल्ला”, भा फेर “अंखिया बता रही है, लूटी कहीं गई है” जइसन गीतनो के उनुका लगे कमी नइखे. ऊ मात रहले कि दुअर्थी भा अश्लील गाना गावल गलत ह बाकिर बाज़ार में बनल रहे खातिर एकरा के एगो तरकीब आ ज़रुरी तत्व मानत रहले. कहसु कि “जो यह सब नहीं गाऊंगा तो मार्केट से आऊट हो जाऊंगा. तो मुझ को पूछेगा कौन ? भूखों मर जाऊंगा.”

चाहे जवन होखे, बालेश्वर के गायकी अब भोजपुरी गायकी के धरोहर हवे. अलगा बाति बा कि उनुका निधन का बाद एक से एक लुभावन वायदा भइल. बड़का से बड़का नेता अइले आ चल गइलन तमाम वायदा करि के. अब साल भर बीत गइला का बादो भोजपुरी के एह अमर गायक का नाम से कवनो एगो पार्क, सड़क, मूर्ति भा स्मारक ना बन सकल. अउर भोजपुरी के ठेकेदारी करे वालन के, भोजपुरी के रोज ब रोज बेचे वालन के, भोजपुरी के दुकान चलावे आ भोजपुरी के राजनीति करे वालन के कबहु एकर चिंतो ना भइल. आ ओह बालेश्वर खातिर ना भइल जे अवध का धरती लखनऊ में भोजपुरी के झंडा गाड दिहलसि. आ लखनऊए में ना. सगरी दुनिया में भोजपुरी गायकी के परचम लहरवलसि. भोजपुरी गायकी के स्टारडम से नवज़लसि. भोजपुरी गायकी के ऊ पहिलका स्टार रहले. साले भर में लोग उनुका के बिसरा देव त ई का ह ? भोजपुरी भाषियन के ई कृतघ्नते ह, दोसर कुछ ना ! त का करब. ऊ त लिखिये गइल बाड़न कि “जे केहू से नाईं हारल से हारि गइल अपने से !”

जवन होखे, लोग उनुका के लाख बिसरा देव बाकिर जब ले भोजपुरी गायकी रही तबले बालेश्वर अमर रहीहें. बहुते सगरी कलाकार उनकुर गावल गीत पहिलही से गावत बाड़े. संतोष त एह बाति के बा कि उनुकर मझीला बेटा अवधेश अब उनुकर गायकी के विरासत के ना सिरिफ सम्हार लिहले बाड़े, बलुक उनुका संगी साथियन, साजिंदन, कलाकारन के पूरा टीम, प्रशंसकन, आ उनुका “परोगरामो” के सहेज लिहले बाड़न. उनुकर गायकी, उनुकर मंच, उनुकर कार्यक्रम सब कुछ. अवधेश के मंच पर गावत देखि के युवा बालेश्वर के याद मन में ताजा हो जाऽता. आ फेर बालेश्वर के इयाद आ जाऽता. उनुकर गायकी याद आ जातिया. “फगुनवा में रंग रसे रसे बरसे” उनुका गायकी के एगो अइसन बिरवा ह, अइसन होली गीत ह जवना में रंगो बा, रसो बा, आ रासो बा. फगुआ के ठु्नको बा आ ओकर मुरकी आ खुनकीओ. उनुका आवाज के मिठास के मिसरी मन में आजुओ फूटतिया. “अउरी महिनवा में बरसे न बरसे, फगुनवा में रंग रसे रसे बरसे, सास घरे बरसे, ससुर घरे बरसे अरे उहो भींजि गइलीं, जे निकले न घर से ! फगुनवा में रंग रसे रसे बरसे.” उनुकर ई गायकी अबहियो मन के पुकारेले. रई रई रई रई करि के मन बान्हि लेले, ऊ मरदानी अउर मीठ आवाज़ जवना में समाईल भोजपुरी माटी के खुशबू पागल बना देतिया. त उनुकरे बिरहा के ठेका में कहे के मन करत बा “जियऽ बलेस्सर, जियऽ !”


दयानंद पांडेय जी के संपर्क सूत्र
5/7, डाली बाग, आफिसर्स कॉलोनी, लखनऊ.
मोबाइल नं॰ 09335233424, 09415130127
e-mail : dayanand.pandey@yahoo.com

संस्कृति के जड़ एतना गहिर आ व्यापक बा कि अश्लील गीत से फर्क ना पड़ सकेला

लखनऊ से प्रकाशित होखे वाली साप्ताहिक भोजपुरी पत्रिका “भोजपुरिया अमन” के ३० दिसम्बर वाला अंक में अरूण कुमार मिश्र के एगो साक्षात्कार छपल बा. ओही साक्षात्कार के एगो टुकड़ा एहिजा दिहल जा रहल बा.

आरा के कोईलवर खास में साल बासठ में जनमल अरूण कुमार मिश्र साल एकासी में पटना कॉलेज से ग्रेजुएशन कइले आ थियेटर में रूचि होखला का चलते कैमरामैन बन गइले. उनुका से जब भोजपुरिया अमन के संपादक डा॰ जनार्दन सिंह पूछले कि…

भोजपुरी गीत संगीत आ सिनेमा में अश्लीलता के बड़ी जोर शोर से परोसल जाता. एकरा चलते हमार संस्कृति भी खतरा में पड़ गइल बा. मनोज तिवारी भी अश्लीलता के बढ़ावे में दाल में घी के काम कर रहल बाड़न. एह संबंध में रउआ का कहे के बा ?

अरूण मिश्रा के जबाब रहे कि,

देखल जा, जे धन्धा करेला, उ इ ना जानेला कि एकर प्रभाव समाज पर कइसन पड़ी. उ मार्केट के देख के आपन व्यवसाय करेला. सबसे लमहर बात इ बा कि भोजपुरी सिनेमा के निर्माता लोगन के जवन लगन फैनिंसिअली मार्केटिंग के रहेला. भोजपुरी के क्षेत्र में मनोज तिवारी के कवनो विशेष योगदान नइखे. काहें कि सिनेमा भा कवनो कार्यक्रम के संपन्न भइला बा में एगो पानी पियावे वाला से ले के सांस्कृतिक कार्यक्रम वाला हर पात्र के विशेष जोगदान रहेला आ ओकर महत्व अतने बा जेतना मनोज तिवारी के बा.
कवनो तरह के अश्लील गीत भा सिनेमा के अइला से संस्कृतिर पर कवनो प्रभाव ना पड़ सकेला. कवनो सिनेमा भा व्यापार के अइला से कवनो फर्क ना पड़ सकेला. काहें कि संस्कृति के जड़ एतना गहिर आ व्यापक बा कि कवनों सिनेमा भा अश्लील गीत से फर्क ना पड़ सकेला.

डा॰ जनार्दन सिंह के दोसर सवाल रहल…
भोजपुरी भाषा के प्रति सिनेमा कलाकार राजनेता इ केतना संवेदनशील बाड़न. एकरा बारे में बताई.

अरूण मिश्रा के जबाब रहे कि,

हमार मातृभाषा भोजपुरी ह.बाकिर क्षेत्रीय रूप में भोजपुरी भाषा एक नइखे. हम लिख सकतानी बोल नइखीं सकत. हमनि किहाँ रिदम नइखे. काहें कि इहाँ एगो लड़िका लड़की के जब स्टेज पर भेजल जाला त लोग मजाक उड़ावेला. उ कहेला कि लउण्डा हो गइल बा त नचनिया हो गइल बा. ओहिजा बंगाल में, असम में दक्षिणी भारत में लोग खुश होके सहानुभूति देला आ प्रशंसा करेला. सबसे पहिले हमनि के आपन विचार कला के प्रति बदलिजा जबे ठीक हो सकेला.
मनोज तिवारी के कायदे से परीक्षा होई त कहीं से फिट ना बइठिहें. हमनि के सांसद विधायक जीत के विधानसभा आ लोकसभा गइला क बाद उ कबो भोजपुरी में उहवाँ ना बोलले लेकिन बंगाली, तमिल चाहे पंजाबी नेता अपना विधानसबा आ लोकसभा में उ आपना भाषा में बोलेल.
जुआ आ कला दुनु में समान अन्तर बा. कला के कवनो पाँव ना होला. सभे मेहनत करेला आँख मूंद के केहू आगे बढ़ जाला.

पूरा साक्षात्कार भोजपुरिया अमन के नयका अंक में बा.

सुरों का महासंग्राम के आडिशन

– प्रशांत निशांत


७ जनवरी २०१२ का दिने बलिया का आर॰डी॰पब्लिक स्कूल, सुखलपुरा, धरहरा में सबेरे साढ़े एगारह से साँझ चार बजे ले, साते जनवरी के पटना में यशी फिल्म्स एंड टेलीविजन इंस्टीच्यूट, श्रीकृष्णनगर, किदवईपुरी में, आ ओही दिने राँची में सत्यभारती, पुरुलिया रोड पर, आ ९ जनवरी २०१२ का दिने बनारस के पढेरकर स्मृति भवन, गोलघर, मैदागिन चौराहा का लगे करावल जाई.

जमशेदपुर, धनबाद, मुजफ्फरपुर, सिवान, लखनऊ आ गोरखपुर के आडिशन पिछला दिने हो चुकल बा.

एह ऑडिशन में शामिल होखे खातिर उमिर के सीमा बान्हल गइल बा चौदह साल से तीस साल का बीच.

आडिशन में शामिल होखे खातिर प्रतिभागियन के आपन आवासीय प्रमाणपत्र, उमिर के प्रमाण पत्र आ दू गो पासपोर्ट साइज फोटो का साथे आपन रजिस्ट्रेशन करवावे के पड़ी. रजिस्ट्रेशन आडिशन स्थले पर कइल जाई. आवासीय प्रमाणपत्र बिहार, झारखण्ड भा उत्तर प्रदेश के होखे के चाहीं.

पहिला राउण्ड में चुनइला का बाद प्रतिभागियन के फेरू फाइनल राउण्ड पार करे के पड़ी.

“सुरों का महासंग्राम” खातिर लखनऊ में ऑडिशन 3 जनवरी के

– प्रशांत निशांत

भोजपुरिया गीत गवनई के शौकीन लोग का मन में आपन खास पहिचान आ जगहा बना चुकल ‘‘महुआ टी. वी.’’ अब भोजपुरिया सुरवीरन खातिर ‘‘सुर संग्राम’’ के भारी सफलता का बाद ‘‘सुरों का महासंग्राम’’ ले के आवत बा.

“सुरों का महासंग्राम” में अबकी बिहार, झारखण्ड आ उत्तर प्रदेश के उभरत गायक गायिका लोग का बीचे गवनई के जंग मची. तीन जनवरी से एह शो खातिर प्रतिभागी चुने के काम लखनऊ से शुरू होखे जा रहल बा. लखनऊ में ऑडिशन राउण्ड के जगहा तय भइल बा स्वयंवर मैरिज हॉल, भवानी बाजार, गोल चौराहा, जानकीपुरम, लखनऊ.

एह ऑडिशन में मशहूर संगीतकार जोड़ी सतीश-अजय के अजय, महुआ टी. वी. के विनीता उपाध्याय आ अभिषेक प्रतिभागियन के चयन करीहें. एह आ एकरा बाद के बाकी जगहा के ऑडिशन में शामिल होखे खातिर उमिर के सीमा बान्हल गइल बा चौदह साल से तीस साल का बीच.

आडिशन में शामिल होखे खातिर प्रतिभागियन के आपन आवासीय प्रमाणपत्र, उमिर के प्रमाण पत्र आ दू गो पासपोर्ट साइज फोटो का साथे आपन रजिस्ट्रेशन करवावे के पड़ी. रजिस्ट्रेशन आडिशन स्थले पर कइल जाई. आवासीय प्रमाणपत्र बिहार, झारखण्ड भा उत्तर प्रदेश के होखे के चाहीं.

पहिला राउण्ड में चुनइला का बाद प्रतिभागियन के फेरू फाइनल राउण्ड पार करे के पड़ी.

"सुरों का महासंग्राम" खातिर लखनऊ में ऑडिशन 3 जनवरी के

– प्रशांत निशांत

भोजपुरिया गीत गवनई के शौकीन लोग का मन में आपन खास पहिचान आ जगहा बना चुकल ‘‘महुआ टी. वी.’’ अब भोजपुरिया सुरवीरन खातिर ‘‘सुर संग्राम’’ के भारी सफलता का बाद ‘‘सुरों का महासंग्राम’’ ले के आवत बा.

“सुरों का महासंग्राम” में अबकी बिहार, झारखण्ड आ उत्तर प्रदेश के उभरत गायक गायिका लोग का बीचे गवनई के जंग मची. तीन जनवरी से एह शो खातिर प्रतिभागी चुने के काम लखनऊ से शुरू होखे जा रहल बा. लखनऊ में ऑडिशन राउण्ड के जगहा तय भइल बा स्वयंवर मैरिज हॉल, भवानी बाजार, गोल चौराहा, जानकीपुरम, लखनऊ.

एह ऑडिशन में मशहूर संगीतकार जोड़ी सतीश-अजय के अजय, महुआ टी. वी. के विनीता उपाध्याय आ अभिषेक प्रतिभागियन के चयन करीहें. एह आ एकरा बाद के बाकी जगहा के ऑडिशन में शामिल होखे खातिर उमिर के सीमा बान्हल गइल बा चौदह साल से तीस साल का बीच.

आडिशन में शामिल होखे खातिर प्रतिभागियन के आपन आवासीय प्रमाणपत्र, उमिर के प्रमाण पत्र आ दू गो पासपोर्ट साइज फोटो का साथे आपन रजिस्ट्रेशन करवावे के पड़ी. रजिस्ट्रेशन आडिशन स्थले पर कइल जाई. आवासीय प्रमाणपत्र बिहार, झारखण्ड भा उत्तर प्रदेश के होखे के चाहीं.

पहिला राउण्ड में चुनइला का बाद प्रतिभागियन के फेरू फाइनल राउण्ड पार करे के पड़ी.