अँजोरिया के नया ईमेल anjoria@outlook.com इस्तेमाल कइल करीं.

आए दिन बार बार अँजोरिया के वेबसाइट में बाधा आवत रहेला जवना चलते एडिटर एट अँजोरिया डॉट कॉम के भेजल मेल मिल ना पावे. एहसे अब सिर्फ आउटलुक वाला इमेल इस्तेमाल होखल करी.

रउरा भइल असुविधा खातिर माफी माँगत बानी.

ओम

भोजपुरी का सेवा में दसवाँ साल

अँजोरिया आजु १९ जुलाई २०१२ से दसवाँ साल में प्रवेश कर गइल बा. एह मौका पर अपना सगरी पाठक परिवार के हार्दिक अभिनन्दन करत बिया अँजोरिया. पिछला नौ साल में नव करम झेलला का बादो अँजोरिया चलत रह गइल त एगो अचरजे बा. ना त पता ना कतने वेबसाइट खुललीं सँ आ गँवे गँवे बिला गइली सँ. कारण खोजी त कई गो मिल जाई.

पहिला त ई कि भोजपुरियन के आदत नइखे कि भोजपुरी साइट्स खोल के देखसु कि भोजपुरी में कहवाँ का होत बा. भोजपुरियन के सुभाव जइसन हो जाला कि दोसरा के बारे में कम अपना बारे में अधिका बतियावेलें. भोजपुरी खातिर माँगे वाला बहुते बाड़न देबे वाला कम. आ एकर हद त तब हो जाला जब लोग आपन रायो देबे से नकार देला. देखत आइल बानी कि पाठक लोग टीका टिप्पणी करे से गुरेज करेला. एके सबले बड़ नुकसान होला कि पता ना चले कि का अच्छा लागत बा का खराब. रोज पाँच सात सौ विजिट होला अँजोरिया पर बाकिर पाँच सातो गो लोग के टिप्पणी पढ़े के ना मिले. एकाध गो चंदन आ अमृतांशु के छोड़ दीं त शायदे कवनो पाठक होइहें जे महीनो दू महीना पर कबो कवनो टिप्पणी करत होखसु.

दोसर कारण आ हो सकेला कि सबले बड़का कारण एह वेबसाइटन के आर्थिक आत्मनिर्भरता के कमी. लोग आवेला, शान से साइट शुरु होले, तकनीकि विशेषज्ञता से बढ़िया बढ़िया साइट शुरू होली सँ बाकिर फेर असकत आ जाला कुछ करे में, काहें कि फूटल झुनझुना केहू कब ले बजाई.

तिसरका कारण बा गुटबाजी. भोजपुरियिन के हालत तीन कनौजिया तेरह चुल्हा वाला हो गइल बा. सभे आपन ढपली बजावे में लागल बा. सभ आपन छाती फुलवले घुमेला कि भोजपुरी बा त बस हमरे से, आ रही त बस हमरे से. भुला जाला लोग कि दुनिया में कबो कवनो चीज टिकाऊ ना होला. भोजपुरी जिन्दा बिया त आम आदमी का चलते, अपना तथाकथित नेतवन का चलते ना. गुटबाजी से नुकसान देर सबेर ओकरे होला जे एह गुटबाजी का दलदल में फँस जाला. अँजोरिया चलावत बहुते लोग मिलल, कुछ दिन ले साथ चलल बाकिर फेर लोग अपना अपना राहे चल दिहल. एह में हमरे में कुछ कमी होखी जे हम लोग के कवनो काम के ना लगनी आ लोग देर सबेर मुँह फेर लिहल.

चउथका कारण भोजपुरी में लिखला पढ़ला के कमी, बतियवला में कवनो कमी हमरा ना बुझाव. भोजपुरी बोले बतियावे वाला लोगो के देखेनीं कि भोजपुरी लिखे पढ़े में दिक्कत होला. एक त एकर उच्चारण आ लिपि में फरक का चलते. लिखल बा बाति बाकिर पढ़े के बा बात, लिखल बा चलसु बाकिर पढ़े के बा चलस. भोजपुरी में अर्ध ह्रस्व स्वर दीर्घ दीर्घ स्वर का चलते ई कठिनाई आवेला. स्कूल कॉलेजन में हिंदी पढ़ावल जाले, भोजपुरी ना. एह चलते लोग के हिंदी वाला उच्चारण जुबाने चढ़ि जाला आ सुभावे हो जाला हिंदी वालन का तरह लिखे पढ़े के. भोजपुरी में “भी” के कवनो जगहा ना होखे के चाहीं बाकिर भोजपुरी के बहुते प्रतिष्ठित साहित्यकारनो का साथे ई “भी” जोंक लेखा सटल बा, छोड़वले ना छूटे. अउरियो बहुत कुछ बा जवना खातिर सामूहिक फैसला करे के जरूरत बा. जरूरत बा कि भोजपुरी के विद्वत मंडली बइठो आ एह सब पर विचार करो. बाकिर विद्वत मंडली बइठो त कइसे जब एक विद्वान दोसरा के विद्वान माने के तइयारे ना होखीहें.

अपना वर्षगाँठ जइसन खुशी का मौका पर हम ई विरही राग उठा दिहनी त मजबूरी में. पिछला नौ साल के अनुभव सुखद नइखे रहल आ आगहुं सुखद होखे के उमेद नइखे. बाकिर हम त एह लाइलाज बीमारी के शिकार बानी जे घर परिवार का विरोधो का बाद एह भोजपुरी में लागल बा आ जबले जाँगर आ बेंवत रही लागल रही. जब ना रह जाई त फेर केहु अइबे करी जे एह काम में लाग जाई. आ ना लागी त गूगल बड़ले बावे. काल्हुवे पढ़नी कि गूगल एगो नया सेवा शुरू कइले बा जवना में दुनिया के मरे वाली भाषा के जिआवे, सम्हार के राखे के इंतजाम कइल जात बा. डर बा कि कहियो भोजपुरीओ के ओह सेवा के जरूरत मत पड़ि जाव.

अँजोरिया अपना दिसाईं भोजपुरी के बढ़ावा देबे खातिर सोचत बिया पुस्तक प्रकाशन में उतरे के. अबहीं जवन कुछ छपत बा तवना के दायरा बहुते सीमित बा. आपन किताब छपवावे खातिर पूरा खरचा दिहला का बादो जवन छपत बा तवना में बहुते कुछ गलत रह जाता. दाम अतना बेसी राखल जात बा कि लोग खरीदिए ना पाई चहलो पर. बाकिर सरकारी खरीद में कमीशन लुटावे खातिर प्रकाशक वइसने दाम रखीहें जवना से बाँटिओबूँट के ओकरा तर माल भेंटा जाव. आम पाठकन के कवनो चिंता नइखे ओह प्रकाशक के काहें कि ओकरा मालूम बा कि भोजपुरी के कवनो पाठक वर्ग नइखे जे भोजपुरी के किताब खरीद के पढ़त होखे. फोकट में भेंटा जाव त जरूर देख ली. एह से भोजपुरी के किताब स्टाल पर अइबे ना करे आ जब अइबे ना करे त बिकाए कइसे?

एह से अँजोरिया के योजना बा कि भोजपुरी के एगो पाठक वर्ग खोजल जाव, तइयार कइल जाव जे भोजपुरी किताबन के खरीदे आ पढ़े. एह खातिर दाम बान्हे के कोशिश करे के पड़ी. लेखक के खरचा त अबहियों होखी बाकिर जब किताब बिकाए लागी त ओह खरचा से कमाईओ के उमेद जिंदा रही काहें कि ओकरा हर बिकाइल किताब पर हिस्सा मिलल करी. पाठक वर्ग तइयार करे में जरूर दिक्कत होखे वाला बा. काहे कि जब हिंद पाकिट बुक्स जइसन संस्था ना चल सकल त भोजपुरी के कवनो प्रकाशन कतना चलि पाई. बाकिर एकरो खातिर सोचल जात बा कवनो उपाय निकाले के. अबहीं सब कुछ विचार प्रक्रिया में बा. आ एह दिसाईं अगर रउरा दिमाग में कवनो विचार उपजत होखो त जरूर बताईं. अँजोरिया के बधाई देबे के सबले बढ़िया तरीका उहे रही.

एक बेर फेर रउरा सभे के अभिनन्दन करत बानी.

राउर,
ओम
संपादक प्रकाशक, अँजोरिया वेब समूह

भोजपुरी के अल्पसंख्यक भाषा काहे कहल जाव?

हालही में भोजपुरीओ में प्रकाशित होखे वाली पत्रिका द संडे इंडियन के तरफ से मुद्दा उठावल गइल बा कि भोजपुरी के अल्पसंख्यक भाषा के दरजा दिहल जाव. एह बारे में पत्रिका के प्रबंध संपादक ओंकारेश्वर पाण्डे के कहना बा कि ई माँग भोजपुरी समाज के नया दिशा देबे वाला एगो क्रांतिकारी विचार हवे आ एकर समर्थन करे वालन में सभेश्री सीताकांत महापात्र, मुरारी तिवारी, रघुवंश प्रसाद सिंह, उमाशंकर सिहं, जगदंबिका पाल, प्रो॰मंगलमूर्ति, प्रो॰आर॰के॰दुबे, वजाहत हबीबुल्लाह, शिवजी सिंह, अजीत दुबे वगैरह के नाम शामिल बा.

पत्रिका के २४ जून २०१२ वाला अंक में बतावल गइल बा कि रंगनाथ मिश्रा आयोग अल्पसंख्यक भाषा कहाए खातिर तीन गो मापदण्ड तय कइले बाड़न. संख्या में कम, गैर प्रमुखता, आ आपन अलग पहचान. एहमें ई नइखे बतावल कि संख्या के आधार का होखे, कवनो राज्य में ओह भाषा के बोले वालन के संख्या कि पूरा देश में ओह भाषा के बोले वालन के संख्या.

द संडे इंडियन के प्रबंध संपादक ओंकारेश्वर पाण्डे का लेख में बतावल गइल बा कि भोजपुरी ई तीनो शर्त पूरा करत बिया. हर राज्य में ऊ अल्पसंख्यक बिया आ कतहीं प्रमुखता का स्थिति में नइखे. ओकर अलग पहचान त बड़ले बा. लगले हाथ भोजपुरी के मूल कैथी लिपि के सवाल उठावत पांडेजी के कहना बा कि कैथी लिपि, जवन आजु के गुजराती भाषा के लिपि बिया, के फेर से भोजपुरी के लिपि बनावल जाव. उदाहरण देत बतावल गइल बा कि मणिपुर के मैतेयी समुदाय के लोग सैकड़न साल से भुलाइल आपन लिपि खोज निकालल आ ओकरा के फेर से जिया दिहल.

पहिला बेर जब हम भोजपुरी के अल्पसंख्यक भाषा बनावे का माँग का बारे में सुननी त बुझाइल ना कि का कहल जात बा. अल्पसंख्यक शब्द अतना बदनाम हो चुकल बा कि सुनते विवाद के ध्वनि कान में गूंजे लागेला. मजा के बात बा कि बीस करोड़ लोगन के भाषा भोजपुरी होखे के दावा करे वाला लोगो एह बात से सहमत बा जबकि बीस करोड़ के संख्या ख्याली पुलाव से अधिका नइखे. तबहियो हम ई माने के तइयार नइखीं कि भोजपुरी के अल्पसंख्यक भाषा कहल जाव. माइनारिटी का जगहा माइनर भाषा, छोटहन भाषा, अविकसित भाषा वगैरह शब्द के इस्तेमाल हो सकेला बाकिर भोजपुरिया अहम के एह बात से ठेस लागी कि ओकरा भाषा के छोटहन भाषा, माइनर भाषा, अविकसित भाषा वगैरह कहल जाव.

भोजपुरी के लड़ाई लगे वाला लोग खुद भोजपुरी के इस्तेमाल में संकोच करेला. आजु ले नइखीं देखले कि कवनो भोजपुरी संगठन, संस्था भा आयोजन के प्रेस विज्ञप्ति भोजपुरी में निकलल होखे. निकली त हिन्दी में काहे कि एगो बड़हन श्रोता समुदाय ले चहुँपे के बात कहल जाई. भोजपुरी के ना त कवनो अखबार बा ना कवनो अइसन पत्रिका जवन कमो बेस हर जगहा मिलत होखे एहसे लोग भोजपुरी में विज्ञप्ति भा सूचना जारी ना करे. हे महानुभाव लोग, हम अपने से सहमत बानी बाकिर का ई नीमन ना लागित कि राउर सगरी सूचना भोजपुरी में जारी होखीत आ ओकरा संगही हिन्दी आ अंगरेजी में अनूदितो! बाकिर ना ओहमें त मेहनत लागी, भोजपुरी लिखी के, टाइप के करी, छोड़ऽ ई सब झंझट हिंदीए में लिख द. सभका बुझा जाई.

भोजपुरी के लड़ाई लड़े वाला सांसद लोग संसद में भोजपुरी ना बोल के हिंदी में बोलेला जबकि संसद में भोजपुरी बोले पर कवनो रोक नइखे. रोक होइयो ना सके काहे कि मौजूदा स्थिति ई बा कि सरकार भोजपुरी के हिंदी के बोली माने ले आ ओकरा हिसाब से भोजपुरी आ हिंदी अलग नइखे. एह तर्क का आधार पर सांसद बखूबी संसद में भोजपुरी में आपन बात कह सकेलें आ अगर केहू विरोध करे त संवैधानिक प्रावधानन के सवाल उठावल जा सकेला.

अगर राउर सब काम हिंदीए में होखत बा त भोजपुरी के इस्तेमाल कवना खातिर? भोजपुरी के आंदोलन चलावे के बा त पहिले भोजपुरी के इस्तेमाल बढ़ावे के, भोजपुरी में पत्र पत्रिका अखबारन के प्रकाशन का दिसाईं काम कइला क जरूरत बा. एकरा खातिर मंगला के जरूरत नइखे दिहला के जरूरत बा. बा केहू देबे वाला कि भोजपुरी में सबही माँगही वाला बा?

– ओमप्रकाश सिंह,
संपादक, अँजोरिया

समय आ गइल बा जब भाजपा के आपन प्राथमिकता तय करे लेबे के चाहीं.

आजुकाल्हु राष्ट्रपति के उम्मीदवार चुने में भाजपा के जवन फजीहत होखत बा ओहसे लागत बा कि ओकरा आपन प्राथमिकता तय करे के समय आ गइल बा. का चाहीं ओकरा, एन केन प्रकारेण सत्ता में चहुँपे के जोगाड़ आ कि अपना तय लक्ष्य के प्राप्ति?

राम मन्दिर आन्दोलन का बाद बनल एनडीए सरकार में भाजपा आपन सब कुछ गँवा दिहलसि. सरकार में बनल रहे खातिर हर तरह के समझौता कइलसि आ परिणाम सभका सामने बा. एनडीए के हालात आजुओ उहे बा. एह गठबन्हन में शामिल हर दल, भाजपा छोड़ के, अपना नीति पर कायम बा आ ओकनी के सटवले राखे खातिर भाजपा सगरी अंगुरियावल महटिया के बरदाश्त कइले जात बिया. कवना फायदा खातिर कवना सोच में?

राष्ट्रपति का चुनाव में लड़े के बा त आपन मजगर उम्मीदवार देव ना त मैदान छोड़ देव. एह मजगर उम्मीदवारन में या त शरद यादव के उम्मीदवार बने खातिर तइयार करावे भा खुद लालकृष्ण आडवाणी के आपन उम्मीदवार घोषित करे. शरद यादव बनीहें ना काहे कि ऊ हारल बाजी पर दाँव चढ़े ला तइयार ना होखीहें. बाकिर लालकृष्ण आडवाणी के उम्मीदवार बनवला से बहुते कुछ संदेश जनता आ अपना सहयोगियन के दे सकेले भाजपा. आडवाणी के राष्ट्रपति चुनाव लड़वा के भाजपा देखा दी कि ऊ एह लड़ाई के मजाक नइखे बने दिहल चाहत आ अपना पूरा ताकत से लड़े के इरादा राखत बिया. हो सकेला कि ओह सूरत मे एनडीए के बाकी दलो पूरा मन से उनुका पक्ष में खड़ा हो जासु. अगर ना खड़ा भइलें त मान लेबे के चाहीं भाजपा के ई संहतिया ना हउवें बलुक संगे रहि के घात करे वाला हउवें. तब अइसनका लोग से दूरी बनाइए लिहला में भलाई होखी भाजपा के.

अगर आडवाणी के एह पर आपत्ति होखे त उनुका के समुझावल जा सकेला कि देश के कवनो कानून राष्ट्रपति के चुनाव लड़े वाला के बाद में सांसद भा प्रधानमंत्री बने से ना रोके. अबहीं राष्ट्रपति के चुनाव फरियावे के बा संसद के चुनाव दू साल बाद देखल जाई.

आजु का राजनीति में देश के सबले बडका समुदाय के पक्षधर केहू नइखे. इहाँले कि ओह समुदाए में विभीषण आ जयचन्दन के भरमार हो गइल बा. आपन राज बचावे खातिर हमलावर के आपन बेटी सँउपे वाला राजा ना रहतें त का देश अतना दिन ले गुलाम रहल रहीत? जे लड़ाई से भागत रहेला ऊ बाद में लड़े लायक ना रहि जाव. भाजपा के हालत इहे हो गइल बा. हमेशा मिमिंयात आ दोसरा के बात मान लेबे वाला के सम्मान केहू कइसे करी?

टटका बात बा नीतीश कुमार के बयान जेहमें ऊ कहले बाड़न कि भाजपा के चाहीं कि आपन प्रधानमंत्री के उम्मीदवार तय कर लेव जेहसे सहयोगी फैसला कर सकसु कि उनुका का करे के बा. नीतीश अपना हिसाब से बिल्कुल सही कहले बाड़न बाकिर का भाजपा में अतना बेंवत रहि गइल बा कि ऊ अपना हिसाब से सही बात कहि सको ? हम ना त भाजपा के सदस्य हईं ना कवनो अधिकारी बाकिर भाजपा के शुभचिन्तक अपना के जरूर मानीलें काहें कि देश में अकेला भाजपे बिया जे कांग्रेस के गलत नीतियन के मुकाबला कर सकेले आ देश के बड़हन जमात के हित के रक्षा कर सकेले अगर करे के चाहे. बार बार नरेन्द्र मोदी के खिलाफ होखे वाला बयान बाजी के विरोध कइल ओतने जरूरी बा. साबित हो चुकल बा कि गुजरात दंगा में नरेन्द्र मोदी के कवनो हाथ ना रहे. हँ ओह दंगा के समय पर काबू कर लेबे के सम्मान उनुका के जरूर दिहल जा सकेला. बाकिर ओही नरेन्द्र मोदी के देश के सेकुलर जमात बार बार गरियावत रहेले आ भाजपा चुपचाप सुनत रहि जाले. भाजपा के ई मान लेबे के चाहीं कि देश के कल्याण सेकुलरिज्म से नइखे होखे वाला सर्व धर्म समभाव से होखे वाला बा. जहवाँ कवनो धर्म भा मजहब के ना त बेजा बढ़ावा दिहल जाव ना बे जरूरत निंदा कइल जाव.

दोसरे का दिक्कत बा भाजपा के आपन नेता चुन लेबे में? पूरा राष्ट्रीय कार्यकारिणी बइठे आ तब ले बइठावल जाव जब ले कवनो एक आदमी भा महिला के नेता चुन नइखे लिहल जात. एक बेर भाजपा तय कर लेव त जनतो के सहूलियत हो जाई आपन राय तय करे में. अगर भाजपा कांग्रेस के बी टीम बनल चाहत बिया त बनो ई ओकरा फैसला होखी बाकिर जनतो तब बी टीम के काहे समर्थन करी काहे ना सीधे ए टीम के करी? अगर भाजपा ओही राहे चली जवना पर देश के सेकूलर जमात चलत बा त का जरूरत बा ओकर?

दोसरे भाजपा के इहो तय कर लेबे के चाहीं कि के ओकर स्वाभाविक सहयोगी हो सकेला आ के कवनो फायदा का लालच में ओकरा से सटे वाला बा. अपना स्वाभाविक सहयोगियन के भलही चिंता कर लेव भाजपा बाकिर लालची सहयोगियन खातिर आपन विचारधारा तजल ठीक ना कहाई. याद करे भाजपा जब ओकरा लगे संसद में बस दू गो सीट बाँचल रहि गइल रहे? ओकरा बाद ओकर वापसी ओकरा विचारधारा का चलते भइल रहुवे जवना के अटल बिहारी बाजपेयी के भलमनसाहत में गँवा दिहलसि भाजपा आ बढ़िया सरकार चलवला का बावजूद अगिला चुनाव हार गइल रहे. अगर भाजपा आपन कोर्स करेक्शन ना करी त २०१४ का चुनाव का बाद भाजपा के हालत अउरी पातर हो जाई. समय आ गइल बा जब भाजपा छाती ठोक के आपन नेता तय कर लेव आ कह देव सहयोगियन के कि जेकरा रहे के बा से रहे जेकरा जाए क बा से जाय.

– संपादक, अँजोरिया वेबसाइट समूह

अइसनका राष्ट्रपति पा के शर्मिन्दा बानी

भारत के मौजूदा राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल का नामे जवने बात रहल होखे राष्ट्रपति बने से पहिले के बाकिर अपना राष्ट्रपति रहत में ऊ जवन कर दिहली ओहसे हम त शर्मिंदा बानी बाकी लोग का बारे में नइखीं जानत.

राष्ट्रपति महोदया साबित कर देखवले बानी कि या त उहाँ का रबर के मोहर हईं भा उहां के लगे कवनो अंतरात्मा नइखे. देश के सगरी कानूनन से उपर हईं उहाँ के. कतनो जघन्य अपराध कइले होखे, कतनो कुकर्म कइले होखे सबका के माफ कर देबे वाली हईं उहाँ के. अगर दोसरा कवनो रिलीजन के रहतीं त हो सकत रहे कि एह दयालु सुभाव खातिर उहाँ के सेंट बना दिहल जाइत.

आईं राष्ट्रपति महोदया के कुछ फैसलन पर नजर डालल जाव.

सतीश नाम के एगो अपराधी छह साल के लड़िकी से बलात्कार कइलसि आ फेर ओकर हत्या कर दिहलसि. हमनी के दयालु राष्ट्रपति महोदया ओकर सजा कम कर दिहनी.

मोलाई राम अउर संतोष यादव अपना जेलर के दस साल के बेटी से जेले परिसर में गैंगरेप कइलन आ फेर ओकर हत्या कर दिहलन. राष्ट्रपति महोदया के दुनु पर दया आ गइल आ ओकनी के सजा कम कर दिहनी.

धर्मेद्र सिंह आ नरेंद्र यादव पहिले त एगो लड़िकी से बलात्कार कइलें आ फेर ओकरा पुरा परिवार के मार दिहलें. एहमें तीन गो छोटहन बच्चो शामिल रहलें. राष्ट्रपति महोदया के ओकनियो पर दया आ गइल आ ओकनी के सजा कम कर दिहनी.

अइसनके अइसन तीस गो मुजरिमन पर उहाँ के दया देखवले बानी आ सभके माफ कर दिहनी. पता ना एह माफी का पाछा का बा. संसद पर हमला करे वाला दोषी अफजाल गुरु के माफ करे के भूमिका त ना रहे ई सब? के जानऽता? हो सकेला कि जात जात ओकरो के माफ कर जासु हमनी के दयालु राष्ट्रपति.
– संपादक, अँजोरिया


का होई हमरा बाद ?

बहुत दिन पहिले एगो कहानी सुनले रहीं. एगो नेताजी मंच से भाषण देत रहलें. कहत रहलें कि ऊ देश के हालात से बहुते चिन्तित रहेलें काहें कि गाँधी जी मर गइले, नेहरू जी मर गइलें आ हमरो तबियत खराबे चलत बा……………..

पता ना ऊ कहिया मर बिला गइल होखीहे आ देश जे बा कि आजुओ चलते जात बा. चलते जात रही.

बाकिर बाति एहिजा देश के नइखे. बात बा एहिजा एगो सपना के, एगो नशा के, एगो भरम के …. बात करत बानी अँजोरिया के.

आठ साल से अधिका हो गइल अँजोरिया के चलावत. एह बीच बहुते लोग आइल, भेंटाइल, कुछ दिन ले नियमित संपर्क में रहल फेर अपना अपना राहे चल गइल. बाकिर अबहीं ले केहु अइसन ना मिलल जेकरा से हमरा तोस मिले कि चलऽ केहु त बा जे एह अलख के जगवले रही. हमरा खुशी एह बाति के बा कि आजु भोजपुरी में वेबसाइटन के कमी नइखे. बहुते बाड़ी स. बाकिर केहु अइसन नइखे लउकत जे ….

कहल जाला कि अपना दही के कवनो अहिरिन खट्टा ना कहे. आपन जामल सबका प्यारा लागेला. हो सकेला कि कुछ अइसने होखे बाकिर तबहियो हमार चिता वाजिब बा. बाहर के बात त छोड़ीं अपने बेटा बेटी से उमेद ना राख सकीं कि एह अँजोर के ऊ आगा ले जा पइहें. एक त ओह लोगन के भोजपुरी से कवनो लगाव नइखे, दोसर ओह लोग का लगे ऊ नशा नइखे जवना में हम बानी.

शायद हमहु अतना दिन ले एकरा के चला ना पइतीं अगर हम अकेला ना होखतीं. हित मित दोस्त साथी केहु कतहीं नइखे. जे बड़का बा ऊ हमरा के ना चिन्हे, छोटका के हम ना चिन्हीं आ बरोबरी में केहु लउकत नइखे ! बस आपन अकेलापन अँजोरिया परिवार में काट लीहिलें. अकेले केहु करियो का सकेला ? खास कर के ऊ आदमी जे मानसिक तौर पर अकेला पड़ गइल होखे, कुछ अपना गलती से, कुछ हालात के मजबूरी से.

दोसर कारण ई कि भगवान का दया से घर परिवार चलावे लायक, जिये खाये लायक उपार्जन हो जाला आ अँजोरिया पर होखे वाला खरचा अखरे ना.

तिसर ई कि एकरा खातिर हम केहु पर आश्रित नइखीं. बीरबल लाओ ऐसा नर पीर बावर्ची भिश्ती खर. से अँजोरिया के सबकुछ हमहीं हईं आ अपना के तनखाह देबे के जरूरत ना पड़े.

बाकिर अब एक त धीरे धीरे उमिर बढ़ल जात बा. देर सबेर हाथ गोड़ जबाब देबे करी आ तहिया का होई ? का ई सपना एही तरे मर जाई ? का केहु अइसन बा जे एह अँजोर के अलख जगवले राख सकी. शायद ना !

काहे कि कवनो प्रकाशन के आपन एगो नीति होखेला, आपन रूल बुक होला. आ भोजपुरी में नौ कनौजिया तेरह चूल्हा वाला बाति जमाना से चलत आवत बा. अबर बानी दूबर बानी बाकिर भाई में बरोबर बानी. केहु दोसरा से कम नइखे आ जेही बा से हमरा से डेढ़ा अढ़ईया. ऊ हमार बैटन काहे ढोई, आपने चरखा काहे ना चलाई. हमार दुर्भाग्य कहीं कि अबहीं ले केहु वइसन ना मिल सकल जेकरा के अँजोरिया के भार दिहल जा सके.

आजु एह चिंता के जाहिर करे के कारण ई बा कि समय रहते अगर ना चेतल जाव त बाद में कुछ ना हो पावे. का बरखा जब कृषि सुखानी ? अबहीं समय बा. कुछेक साल हम ओह संभावित आदमी का साथ काम कर सकीले आ धीरे धीरे ओह आदमी पर जिम्मेदारी बढ़ावत जा सकीलें. हो सकेला कि एक आदमी ना बलुक कुछ लोग के समूह के प्रेसिडियम, मण्डल बना दिहल जाव जे एकर फैसला लेत रहे. बाकिर असल सवाल ई आवत बा कि एकर आर्थिक पक्ष कइसे देखल जाव. जहाँ ले निकट भविष्य के बाति बा हमरा कवनो अइसन राह नइखे लउकत जे एह पक्ष के समाधान देखा सके. आ कहल जाला कि जवना समस्या के समाधान ना होखे से समस्या ना रहि जाव जिनिगी के सच्चाई बनि जाला. ओकरा साथ जिये के पड़ेला.

शायद अइसहीं अँजोरियो चलत रही. बाद में ना त आखिरी साँस तकले. भा शायद ओकरो बाद कुछ दिन ले. के जानत बा ?

का होई हमरा बाद ?

चिहुँकला के जरुरत नइखे

अँजोरिया के ई रूप जानबूझ के कइल गइल बा कि पहिला पन्ना जल्दी खुल जाव आ ओकरा बाद जब रउरा कवनो सामग्री के विस्तार पढ़े के चाहीं तबहिये विज्ञापन वगैरह सामग्री सामने आवे. ई सुधार कइसन लागल कमेंट लिखल मत भूलाईं. जानल चाहत बानी कि रउरा सभ के का राय बा ?

एगो पाठक नीरज का बहाने

काल्हु अँजोरिया के एगो सम्मानित पाठक नीरज जी जानल चहले कि सुर के महासंग्राम के आडिशन पटना में कहिया होखी? उनुका सवाल के जवाब लिखे बइठनी त बहुत कुछ अइसन लिखा गइल कि सोचनी कि एकरा के अलगे पोस्ट कर दीं.

पता ना का चाहत बावे महुआ टीवी चैनल आ का मन में बावे ओकरा प्रचारक के. महुआ टीवी के अपनो वेबसाइट पर एह बारे में कवनो जानकारी नइखे. जवने जानकारी बा तवन महुआ टीवी चैनल पर. बइठ जाईं ओकरा आगा कलम कागज लेके आ जब एह महासंग्राम के जानकारी आवे तब लिख लीं.

सुर संग्राम एक आ दू के मिलल सफलता का बाद होखे के त ई चाहत रहे कि सुरसंग्राम तीन करावल जाव बाकिर शायद एहले नइखे करावल जात कि अबही ले सुर संग्राम दू के फाइनल नइखे हो पावल. जज लोग आ अंकर लोग के भुगतान के विवाद अलगा बा.

एही सब का चलते हम कई बेर कह चुकल बानी कि महुआ भा कवनो टीवी चैनल, कवनो संगीत कंपनी, कवनो फिल्म, कवनो फिल्मकार से अँजोरिया वेबसमूह के कवनो संबंध नइखे. प्रचारकन से मिले वाला जानकारी रउरा सभे तक चहुँपा दिहिले काहे कि अँजोरिया समूह हमेशा भोजपुरी आ एह भाषा में काम करे वालन के बढ़ावा देत आइल बा, देत आवत रही. अँजोरिया समूह के प्रकाशन बलिया से कइल जाला जहवाँ टीवी भा सिनेमा भा संगीत का बारे में कवनो जानकारी ले पावल मुश्किल होला. दोसरे भोजपुरी के वेबसाइटन के प्रकाशन आर्थिक सक्षम नइखन स कि आपन संवाददाता आ आपन ब्यूरो चलावल जा सके.

एह दिसाईं पाठक लोग के सक्रिय सहयोग के अपेक्षा रहेला कि ऊ लोग अपना स्रोत से मिलल जानकारी के बाकी पाठकन से मिल बाँटे लोग. अगर अइसन होखे लाग जाव त सिनेमा आ टीवी चैनल का बारे में सही सही जानकारियो मिल पाई. बाकिर रउरा सभे बानी कि कुछ बाँटे के तइयारे नइखीं. आइलें, जवन मिलल तवना के देखनी, पढ़नी आ चल दिहनी बिना कुछ कहले, बिना कवनो टिप्पणी मरले.

घरो में आदमी खाना खाला त ओकरा बारे में अगर टिप्पणी ना करे त रसोईया के मन टूटेला. ना विश्वास होखे त अपने घर में पूछ लीं. सामने वाला चटखारा ले के खाय, बड़ाई करे त बनावे परोसे वाला के आनन्द मिलेला आ काम के थकान खतम हो जाला. अगर खराब लागल भा पसन्द ना आइल तबहियो बतावल जरूरी होला जेहसे कि रसोईया अगिला बेर सचेत रहो.

हमार काम रसोईये जइसन बा. टिप्पणी दिहल राउर काम होखे के चाहीं. रोजाना नाहियों त चार सौ लोग जरूरे आवत होई अँजोरिया पर ओहमें से चालीसो पचास लोग टिप्पणि देबे लागे तब भोजपुरी आ एह से जुड़ल लोगन के काम में गुणात्मक परिवर्तन अइला बिना ना रही.

बाकी राउर मरजी.

राउर,
संपादक, अँजोरिया

बार बार होखत परेशानी का चलते

पिछला दू महीना से अपना वेबहास्ट का चलते अँजोरिया के प्रकाशन बार बार बाधित होखला से अनसा के अब अँजोरिया के दोसरा वेबहास्ट पर ले आइल गइल बा.

पिछला वेबहॉस्ट का चलते टिप्पणी आ बहुत कुछ दोसरो तरह के परदा के पीछे के काम पर बाधा लगावे के पड़ल रहे. अब सगरी बाधा हटा दिहल गइल बा. रउरा आराम से टिप्पणी कर सकीले.

साथ ही साथ इहो बतावत चलत बानी कि ई व्यवस्था अस्थायी तौर पर कइल गइल बा. हो सकेला कि एहिजो दिक्कत आवे त फेर एकरा के नया वेबहास्ट पर ले जाये के तइयारी लागल बा. देखल जाव कि राह में आवे वाली बाधा के अँजोरिया कवना तरह से पार करत बिया.

परेशान जतना हो लीं, हार नइखे माने के.

सादर सप्रेम,
राउर,
ओम,
प्रकाशक संपादक अँजोरिया

असुविधा खातिर माफी चाहब

बाकिर काल्हु रात से फेर अँजोरिया वेबसाइट बंद हो गइल रहुवे. एह हॉस्ट से तंग आ गइल बानी बाकिर “उपर चढ़ि के देखा त घर घर एके लेखा”. हर वेबहास्ट का लगे कुछ ना कुछ समस्या बा.
अबही हमरा हॉस्ट के कहना बा कि केहू अँजोरिया के खराब कइल भा हैक कइल चाहत बा. एह चलते अँजोरिया परिवार के सगरी वेबसाइटन पर से कमेंट करे आ रजिस्टर करे के सुविधा हटावल जात बा. रउरा अगर कुछ कहहीं के होखे त हमरा के ईमेल कर दीं. राउर टिप्पणी ओह पोस्ट का साथ जोड़ दिहल जाई.

आशा बा कि रउरा एह असुविधा के सह लेब काहे कि ना रहला से नीमन बा आन्हर बहिर हो के रहल..
राउर,
ओम