पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से – 3


सामयिकी

आधी आबादी के बदलत चेहरा

– ‍आस्था

जिनिगी में, हार, असफलता आ पीछे छूटि गइल आम बात हऽ. सपना पूरा ना भइल त एकर मतलब ई ना हऽ कि सपना देखले छोड़ दिहल जाव. उमेद मुए के ना चाहीं. उमीद आ सपना जिया के राखल आ ओके पूरा करे खातिर, लगातार कोशिश कइल ‘खास’ बात हऽ. एही खास बात आ प्रवृत्ति का कारन, लाख भेदभाव, उपेक्षा आ अन्याय का बावजूद ‘नारी’ आगा बढ़ि पवले बिया. उमेद के दामन थमले चेतना आपन लक्ष पावे खातिर, ओके सक्रिय करत रहल. सत्तर का दशक से शुरू भइल ‘नारी आंदोलन’ का बाद नारी का भीतर ‘अन्याय’, ‘शोषण’ आ भेदभाव के खिलाफ लड़े आ आवाज उठावे का बल में बढ़ोत्तरी आइल. ‘नारी लेखन’ आ ‘स्त्री-विमर्श’ नारी पक्ष के असुरक्षा चिन्ता, दुख, पीड़ा आ कुण्ठा के मुखर अभिव्यक्ति कइलस. एसे नारी के सोच-विचार में बदलाव आइल. समाज, सरकार आ प्रशासन ‘नारी’ के हक आ सम्मान खातिर सचेत भइल आ हरकत में आइल.

श्रम में जबर्दस्त भगीदारी स्वालंबन आदि से समाज में मेहरारूअन के बढ़त साख आ रसूख से, नया उमेद जागल. जीवन का हरेक क्षेत्र में नारी अपना प्रतिभा-लगन से आपन नया मुकाम बनावत लउकत बिया. पढ़ाई, व्यवसाय, नौकरी, खेल, उद्यम प्रशासन राजनीति कवनो अइसन क्षेत्र नइखे, जहाँ ओकर दमदार उपस्थिति ना होखे.बाकिर देश के जनसंख्या आ ओकर आध आबादी का लिहाज से नारी के हिस्सेदारी बहुते कम बा. देश का कई हिस्सा में, आजो औरत परिवार से लेके बाहर तक- भेदभाव, उपेक्षाआ शोषण के शिकार बिया. आजो ओके बराबरी वाला सम्मान से मरहूम राखे वाला सामन्ती, रूढ़िवादी सोच बरकार बा. आजुओ, असुरक्षा, डर आ आशंका औरत के आगे बढ़त डेग रोकत बा. आजो पुरूष सत्ता अपना शक्ति-सामर्थ आ अहंकार से ओके नीचा देखावे में कसर नइखे छोड़त. आजुओ समाज में औरत खातिर सामाजिक व्यवहार हाथी दांत लेखा देखावे वाला ढेर बा.

प्रेम, दया, करुना, ममता आ सहनशीलता के मूरत मानल जाये वाली नारी के जमात में प्रगतिशील सोच आ नया विचारन क विवेक त जाग रहल बा, बाकिर एम्मे बहुत कुछ खराबो चीज साथ-साथ घुसि आइल बा. औरत का प्रति खुद औरत के जवन पक्षधरता आ प्रेरणास्पद संवेदनाशीलता होखे के चाहीं ऊ नइखे आइल. कतने अइसन घर बा, जहाँ बेटी आ बहू में फर्क कइल जाता, जहाँ बहू के लक्ष्मी बना के घर में ले आइल जाता आ बाद में घर सँवरला-सहेजला आ खाना पकवला, सेवा-टहल कइला का बादो उपेक्षा भरल व्यवहार कइल जाता. दहेज-प्रताड़ना, मार-पिटाई जइसन घटना आजुओ मन के दुखी करत बाड़ी सन. सबसे बड़ त्रासदी त ई बा कि एह कुल्हि में खुद औरत, औरत का खिलाफ साजिश आ उत्पीड़न के प्रमुख हिस्सेदार बनत बाड़ी सन. दकियानूसी सोच, दिखावा आ झुठिया अहं के तुष्टि खातिर परिवार के औरते दुसरा औरत के नीचा दिखावे आ अपमानित करे के मोका नइखी स चूकत. ई सब भावनात्मक लगाव आ संवेदनशीलता ना रहला के कारन बा. अपना वर्ग का प्रति सहानुभूति का कमी का कारन बा.

समय का साथ-साथ दुनिया आ देश में बहुत कुछ बदल रहल बा. नारी का प्रति दकियानूसी सामन्ती सोच, पारंपरिक नजरिया बदले न बदले बाकि प्रगतिशील सोच आ आधुनिक विचारन क संघर्ष जारी बा. पुरान मान्यता टूट रहल बाड़ी स. कट्टरता आ जकड़न कम भइल बा. पुरूष समाज में खास तौर से, बाप, भाई, पति आ अन्य निकट संबंधियन के औरत के प्रति नजरिया बदलल बा. ऊ खुल के नया बदलाव खातिर लड़कियन आ औरतन के तइयार होखे आ अपना पैर पर खड़ा होखे में मदद करत बा. ऊ खुशी से अपना परिवार के लइकी आ औरत के आगा बढ़े या लक्ष हासिल करे खातिर उकसावत आ उत्साहित करत बा. एही सब क नतीजा बा कि नारी शिक्षा-दीक्षा आ काम कुशलता में बढ़ोत्तरी भइल बा. ओकरा भीतर छिपल प्रतिभा आ शक्ति-सामर्थ के फरे फुलाए में सहूलियत आ सहयोग मिल रहल बा. परिवार के सहयोग आ प्रोत्साहन क नतीजा में आज सेवा-व्यवसाय आ उद्यम में औरतन क भगीदारी बढ़ल बा.

‘नारी सशक्तीकरण’ का लेहाज से, जवन उपलब्धि हासिल भइल बा ओम्मे ‘बहुत कुछ’ त नइखे, बाकि एतना जरूर बा कि आगा अउर अच्छा होखे के संभावना आ उमेद झलकत बा. शिक्षा आ स्वास्थ्य में नारी के भागीदारी पहिलही से रहल हा, बाकि एने कुछ सालन में आई.टी., साफ्टवेयर, संचार-माध्यम आ मैनेजमेन्ट में लइकियन आ औरतन के बढ़त रूचि, सक्रियता आ उपलब्धि देख के, उमेद के अउर बल मिलत बा. ग्राम पंचायत, नगरपंचायत जइसन स्थानीय निकायन में आइल पिछड़ी, परिगणित आ अनुसूचित जातियन के औरतन क प्रतिशत ज्यादा बा. एम्मे ज्यादातर अशिक्षित भा मामूली पढ़ल-लिखल औरतन क जमात बा आ एह औरतन क कमान (पति, भाई, भतीजा का रूप में) मरदन का हाथ में बा. अगर महिला प्रधान, प्रमुख भा अन्य महत्व का जगहा पर बाटे त पढ़ल-लिखल रहलो प घर के मरदन क हस्तक्षेप ओइसहीं बा. ओके स्वतंत्र निर्णय करे आ विवेकानुसार चले के इजाजत नइखे.

भारत का राजनीतिक इतिहास में ईहो गजब संजोग बा कि देश के राष्ट्रपति, लोकसभा अध्यक्ष, सत्ताधारी पार्टी के अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष आ सत्ता में समर्थन देबे वाली कुछ पार्टियन क अध्यक्ष ‘नारी’ बाड़ी सन. ममता बनर्जी, मायावती, जयललिता जइसन मजबूत राजनीतिक कद वाली नारी अपना इच्छाशक्ति, मजबूत संकल्प आ लगन से कठिन लक्ष साध के समाज के नया राह देख रहल बा लोग. संगठित क्षेत्र में नारी के हिस्सेदारी भले कम होखे बाकि असंगठित क्षेत्र में 92-94 प्रतिशत बा. श्रमिक क्षेत्र में 31 प्रतिशत आ प्रशासन में 8 से 10 प्रतिशत. राजनीति में महिला भागीदारी खातिर 33 प्रतिशत आरक्षण क बिल उच्चसदन में पास भइला का बाद भलहीं लटक गइल, बाकि समय जवना तेजी से करवट ले रहल बा कि महिला आरक्षण बिल पास करही के पड़ी. लिंग भेद का आधार पर भेदभाव, असमानता आ उपेक्षा के दौर ज्यादा दिन चले वाला नइखे. देश के एगो मजबूत राष्ट्र बनावे खातिर, आधी आबादी के स्वतंत्रता, अधिकार आ सम्मान के बहुत ढेर दिन ले, दबाइ के नइखे राखल जा सकत. आधुनिक भारत के सोगहग रूप तबे लउकी जब मर्द-औरत एक साथ मिल के नव समाज निर्माण क पक्का बुनियाद रखी. फेरु त कारवां बनत जाई आ लोग आवत जाई.


पिछला कई बेर से भोजपुरी दिशा बोध के पत्रिका “पाती” के पूरा के पूरा अंक अँजोरिया पर् दिहल जात रहल बा. अबकी एह पत्रिका के जनवरी 2012 वाला अंक के सामग्री सीधे अँजोरिया पर दिहल जा रहल बा जेहसे कि अधिका से अधिका पाठक तक ई पहुँच पावे. पीडीएफ फाइल एक त बहुते बड़ हो जाला आ कई पाठक ओकरा के डाउनलोड ना करसु. आशा बा जे ई बदलाव रउरा सभे के नीक लागी.

पाती के संपर्क सूत्र
द्वारा डा॰ अशोक द्विवेदी
टैगोर नगर, सिविल लाइन्स बलिया – 277001
फोन – 08004375093
ashok.dvivedi@rediffmail.com

भउजी हो : तीज के व्रत

भउजी हो !

का बबुआ ?

आजु त उपासल होखबू ?

हँ बबुआ आजु तीज के व्रत त सभे औरत करेली.

एही पर एगो सवाल बा भउजी ? तोहरा लोग खातिर त तीज, जिउतिया तरह तरह के व्रत बा बेटा भतार खातिर बढ़िया मनावे के. बाकिर मरदन के एहसे आजाद काहे राखल बा ?

ई दरद रउरा ना बूझ पाएब. मरद हईं मरदे रहब. बाकिर सवाल कइले बानी त हम आपन जबाब त देबे करब. असल बाति ई बा कि हमनी का आपन घर छोड़ के दोसरा का घर में आइले जा आ ओही घर के आपन घर बना के राखीला जाँ. आपन बाप महतारी भाई बहिन सगरी छूटि जाला. अब अगर इहो सहारा छूटि जाव त हमनी का कहाँ जाएब कहाँ के रहि जाएब ! एही चलते औरत हमेशा अपना बेटा भतार के बढ़िया मनावेली. ई विस्थापितन के दरद ह बबुआ. एक जगहा से उखरला का बाद दोसरा जगहा ठौर बनावे के दरद. पार्वती जी के माईओ उनुका के विदाई का बेरा इहे कहले रही कि, “करेहू सदा शंकर पद पूजा, नारि धरम पति देव न दूजा.”

ठीक कहत बाड़ू भउजी. आजु त कुछ खाएब पिएब ना. चलत बानी.

मनोमस्तिष्क स्वस्थ राखे के तरीका

आजु हमनी सभे जानत आ मानत बानी कि देह के निरोग रखला के कवनो विकल्प नइखे. ऊ त रखही के बा. बाकिर अतने से काम नइखे चले वाला हमनी का देखले बानी जा कि उपर से पूरा तरह से निरोग लउके वाला लोग, जे नियमित व्यायाम करत रहे, सही भोजन सही समय पर करत रहे, कइसे हार्ट अटैक से भा कैन्सर वगैरह से मर गइल. पहिले का जमाना से कहीं बहुते बेसी आजु जरूरत बा अपना दिमाग के. मनो मस्तिष्क के निरोग राखल, देह से बेसी ना त देह से कमो ना. दिन, हफ्ता, साल, भा दसियो साल से दबावल आवेग, तनाव, आ जिनिगी में मिले वाला निराशा, अपना अन्तरमन के आवाज दबवले राखे के मजबूरी, आ भावनाशून्य बनल हमनी के हमनिये से अलगा कर देत बा.

आजु बहुते जानकारी एह बाति पर मिल जाई जवना में मस्तिष्क के सरल अध्ययन भइल होखे, मनोमस्तिष्क के दर्शन विचारित कइल गइल होखे, मनोविज्ञान, मानसिक स्वास्थ्य, नवयुग के वैकल्पिक संदर्भन के चरचा भइल होखे. मनोविचार आ स्वस्थ जीवनो पर ढेर कुछ मिल जाई पढ़े खातिर. बाकिर अइसन कवनो किताब बहुत कमे मिली जवना में समुझावल गइल होखे कि कवनो खास तरीका आ टिप से रउरा मानसिक, भावनात्मक, आ शारीरिक स्तर पर का फायदा हो सकेला.

हालही में ममता सिंह के लिखल आ स्टर्लिंग प्रकाशन से प्रकाशित किताब “Mentor Your Mind, Tested Mantras For The Busy Woman” में बतावल गइल बा कि कवना तरीका के मनोमस्तिष्क के स्वास्थ्य पर का असर पड़े वाला बा. आ जवना तरीकन के बाति कइल गइल बा उहो आम पाठक खातिर बहुत सहज आ संभव बाड़ी सँ. अइसन अइसन टिप, अभ्यास, सरल योग, सहज ध्यान का बारे में बतावल गइल बा जवना से पाठिका आजु का जमाना में अपना मनोमस्तिष्क के स्वस्थ राख सकेली.एह तरीकन खातिर कवनो स्पेशलिष्ट का लगे गइला के जरुरतो नइखे पड़े वाला. “मेन्टर योर माइन्ड” में छह गो मानसिक बीमारियन का बारे में, छह गो भावनात्मक उद्वेगन का बारे में आठ गो आध्यात्मिक तरीका सिखावल गइल बा. किताब में एगारह गो प्रश्नावली बाड़ी सँ जवना से रउरा आपन मूल्यांकन कर सकीले. रेखाचित्र का सहारे तेरह गो सहज अभ्यास बतावल गइला बा. किताब में २८ गो कार्यक्रम बतावल गइल बा अपना मन के बदले खातिर आ सात गो टेबुल बनाके सबकुछ समुझावे के कोशिश कइल गइल बा.

किताब हर बड़ा शहर के प्रतिष्ठित पुस्तक विक्रेता का लगे मिल सकेला. अगर ना मिले त ममता सिंह से जानकारी लिहल जा सकेला.


Book Name: Mentor Your Mind, Tested Mantras For The Busy Woman
Publisher: Sterling Publishers
ISBN: 978-81-207-5973-2
Author: Mamta Singh

घर फूटे गँवार लूटे

भोजपुरी सिनेमा के मेगास्टार मनोज तिवारी, जिनका के हालही में भइल एगो सिने अवार्ड समारोह में एह दशक के सितारा कहि के सम्मानित कइल गइल रहे, आजुकाल्हु गलत कारण से चरचा में बाड़न. मनोज तिवारी के शिकायत बा कि कुछ अखबार आ मीडिया में उनुका तलाक से जुड़ल खबर गलत तरीका से दिहल गइल.

मनोज के कहना बा कि ऊ सभका के बतावल चाहत बाड़न कि मनोज अपना बीबी आ बेटी से बेइंतहा प्यार करे ला आ कबहू ना चहले कि अपना बीबी के तलाक देबे के पड़ो. अपना बेटी आ बीबी से अलग रहे के सोचिये के मनोज तिवारी सिहर जात बाड़न. मनोज के कहना बा कि आजु ले ऊ कवनो अइसन काम नइखे कइलन जवना से ऊ खुद का नजर में नीचे गिर जासु. बाकिर कुछ गलतफहमियन का चलते उनुकर पत्नी जिद्द ठान लिहले बाड़ी कि उनुका तलाक चाहीं आ बेमरजी मजबूरी में आ के मनोज के ओह कागज पर दस्तखत करे के पड़ल जवना में आपसी राय से तलाक लेबे के बाति लिखल बा. ई सब मनोज तिवारी अपना बीबी के तनाव खतम करे खातिर कर दिहलन बाकिर ऊ सभका से निहोरा करत बाड़न कि एह दुनिया के कवनो भलामानुष उनुका पत्नी के समुझा बुझा के मना सको त उनुका बहुते खुशी होई.

आपसी राय से तलाक वाला मामिला में कोर्ट छह महीना के समय देला जवना बीच मरद मेहरारू अपना फैसला पर फेर से विचार कर सकसु. एह से एह समय का भीतर अगर केहू ई शुभ काम करा सके त बहुते खुशी के बात होखी.


(स्रोत – शशिकान्त सिंह)

निर्दोष मेहरारुवन के घंटो थाना में बइठवलसि पुलिस

पिछला हफ्ता गाजीपुर जिला के नंदगंज थाना के पुलिस तीन गो परिवार के मेहरारुवन के थाना उठा ले गइल आ ओहिजा बंधक बना के राखि लिहलसि. फिरौती का रुप में ओकर माँग रहुवे दू गो आरोपियन के थाना में हाजिरी. ओह औरतन में एगो औरत यशवंत के महतारीओ रहली जिनकर पूरा मामिला से कवनो लेना देना ना रहुवे. संजोग से ऊ ओह घरी अपना पटीदारी में दयादिन का घरे गइल रहली आ ओह घर के सवांग पर एगो हत्या के आरोप रहे. पुलिस आइल आ सगरी मेहरारुवन के उठा ले गइल आ ओह लोग के तब ले बन्हक बना के रखलसि जब ले ऊ आदमी थाना में आत्म समर्पण ना कर दिहलसि.

यशवंत जानल मानल पत्रकार हउवन आ पूरा देश के पत्रकार उनका के जानेले. बाकिर एह सब का बावजूद उनकर केहू सुने के तइयार ना भइल आ महतारी तबे थाना से लवटि पवली जब पुलिस के मकसद पूरा हो गइल. एह गैर कानूनी काम के जतना विरोध कइल जाव ओतना कम होखी. काल्हु मऊ से संपुर्णानन्द दूबे के पाती आइल त पूरा घटना के जानकारी लिहनी. एह सिलसिला में यशवंत के लिखल अपना महतारी के नामे एगो सार्वजनिक चिट्ठी रउरा सभे के सोझा ले आवे लायक लागल. यशवंत पत्रकारन के आवाज का रुप में जानल जाये वाला लोकप्रिय वेबसाइट http://bhadas4media.com के संचालक हउवन. पेश बा उनकर अपना महतारी का नामे लिखल चिट्ठी के भोजपुरी अनुवाद

आदरणीय माँ
गोड़ लागीं.

माँ, हमरा समुझ में आ गइल बा कि तू सभ हमरा के पुलिस अधिकारी काहे बनावल चाहत रहलू. आईएएस अधिकारी बनावल चाहत रहलू. हम पढ़ाई लिखाई में अपना जवार में सबले तेज रहीं, से रउरा लोग सोचत रहीं कि इलाहाबाद पढ़े गइल बा, पढ़ लिख के अधिकारी बन के लवटी आ तब घर के सगरी दुख खतम हो जाई. बाकिर माँ, हम भगत सिंह के आदर्श मानत एगो नक्सलवादी संगठन आइसा से जुड़ गइनी. अपना परिवार के दुख दर्द का सोझा समाज के दुख दर्द ज्यादा बड़ लागल आ नौकरशाह बन के अपने जनता पर राज करे का जगहा जनता का बीचे रहि के ओह लोग के गोलबंद करिके सत्ता शासन से लड़ाई कइल उचित लागल. बाकिर ई ढेर दिन ले चलल ना. हमरा लागल कि जनता का बीच रहि के ओकरा के गोलबंद कइल बेहद मुश्किल काम बा से हम बीच के रास्ता चुन लिहनी. कलम का जरिये जनता के आवाज उठावल शुरु कइनी. इलाहाबाद आ बीएचयू में छात्र आन्दोलन, नुक्कड़ नाटक, गाना बजाना करत कब पत्रकार बन गइनी पता ना चलल.

बाकिर, उहे कीड़ा जवन हमरा के भगत सिंह के रोल मॉडल माने के कहलसि आ परिवार के हित का बजाय समाज आ जनता के हित के बड़हन माने के नसीहत दिहलसि, हमरा के कतहीं चैन से ना रहे दिहलसि. सिस्टम के, आफिस आफिस का खेल में रमे ना दिहलसि. काहे कि हर जगहा नामो भर के नैतिकता आ ईमानदारी के निर्वाह भारी पड़े लागत रहे. ई नैतिकता आ ईमानदारी कवनो आरोपित भाव ना ह, बलुक बचपन में गाँव का स्कूल में उच्च विचार वाली कविता कहानी स्लोक पढ़ला का चलते बा जवना के झूठ मनला के बावजूद अपना व्यवहार के हिस्सा आजु ले ना बना पवनी. काहे कि तू ही सभ कहत रहलऽ कि झूठ बोलल गलत हऽ, चोरी कइल गलत हऽ. से उहे मानत अइनी. हालांकि अब हमरा लागेला कि ई सब बाति फर्जी हऽ. नैतिकता दू तरह के होले, एगो गाँव वाली जवना के हम तू जियेनी, दोसरका शहर वाली जवना के सफल कहाये वाला चालाक लोग जियेला बाकिर बतावे ना.

हँ, त माँ हम कहत रहनी कि पढ़ाई लिखाई में ठीकठाक होखला का चलते हम पढ़ाई लिखाई में लागल रहनी आ हमरा सामनही बेईमान पत्रकार आ रीढ़विहीन संपादक आफिस का बहरी के धन्ना सेठन से साँठगाँठ कर के मिशन मनी के अभियान चलावत रहले. अपना संस्थानो के बेइमानी के रकम खिआवत रहले त प्रबन्धन खुश हो के ओह लोग के तरक्कीओ देत गइल. ओह लोग का परिवारन में समृद्धि आवत गइल, फ्लैट आ कार खरीदात गइल. दोसरा तरफ हम लिखले पढ़ला के आदर्श मानत रहनी. निमन काम का चलते हमार तनखाह बढ़त गइल, तरक्कीओ मिलत गइल बाकिर सब कुछ बढ़ला का बावजूद, ३५ हजार रुपया के तनखाह का बावजूद महीना का अन्त में पइसा खतम हो जात रहल. ओही कीड़ा का चलते हम आजु ले कहीं जम ना पवनी. सफल ना हो पवनी, काहे कि दुनिया जवना के सेटल होखल कहेले, सफल होखल मानेले, ऊ हमरा खातिर गिरला सरीखा होला, आँख मूंद लेबे जइसन होला. जवन सुख अपना फकीरी में पावेनी ऊ अंबानी बन गइला का बादो हमरा कतई नसीब ना हो सके. बाकिर एह फकीरी के का करीं जे तोरा के थाना जाये से ना बचा सकल.

बाकिर माँ, चिन्ता मत करीहे. हमरा खातिर तू हीं अकेला माँ ना हऊ, तोहरा जइसन लाखो महतारी बाड़ी जवना के बेटा हमरे जइसन हउवें. जे चहीहन कि उनका महतारियन के उत्पीड़न करे वाला के सजा मिले बाकिर उनका तरीका मालूम नइखे. हम कोशिश करब जे माँ तोहरे ना, आगा से तमाम महतारियन के अइसनका जिल्लत जलालत से दू चार ना होखे के पड़े. एकरा खातिर हमरा सोनिया गाँधी से ले के मायावती जइसन तमाम महिला महतारियन से भेंट करे के पड़ी त करेम. कानून अपना हाथ में ले के आपन बाति राखे के पड़ी त ओकरो पर सोचब काहे कि अइसने भगत सिंह सिखवले बाड़न. बाकिर तोरा अपमान के भुलायब ना. हमरा पता बा तू जल्दिये सब कुछ भुला देबू. सभका सोझा अइसन पेश करबू जइसे कुछ भइले ना होखे. कहबू कि पुलिस तोहरा साथे बढ़िया बेवहार कइले रहुवे, बढ़िया से रखले रहुवे. बाकिर हमरा मालूम बा कि तोहार मन भीतर कहीं से चटक गइल होखी. जवन गहिर कचोट लागल होखी ओकराके हम समुझत बानी. तू आपन दुख व्यथा केहू से कह ना सकऽ काहे कि कहला के अधिकार त पुरुष आ पुलिस का लगे बा. तोहरा लोगन के त बस रिसीविंग एंड पर राखल गइल बा, महसूस करत रहे खातिर.

माँ, हम नइखी जानत कि तोहरा के अपमानित करे वाला हम केकरा के मानीं ? नंदगंज के थानेदार के, की इलाका के सर्किल आफिसर के, कि पुलिस कप्तान के ? आ की आईजी के मानीं, की मुख्यमंत्री मायावती के मानीं. एह लोकतंत्र के मानीं कि खुद अपना के दोषी मानीं. हमरा त सभ एके जइसन लागत बाड़े. हिंसक जानवर के पूरा शृंखला बा. हम बहुते भकुआ गइल बानी. हमरा लागत बा माँ कि हमहीं दोषी बानीं जे अतना पइसा ना कमा सकल कि पुलिस वालन के तोहरा लगे चहुँपे से पहिले खरीद लेतीं. अतना बड़ नौकरी ना खोज पवनी कि पुलिस वाले तोहरा लगे पहुँचे के सोचिये के थर्राये लागस. अइसन दोस्त ना बना पवनी जे अतना प्रभावशाली होखतन कि एगो फोने पर गाजीपुर के कप्तान यस सर, यस सर कहत आदेश के पालन में जुट जाइत. एहसे माँ हम अपने के दोषी मानत वादा करत बानी कि हम प्रायश्चित करब आ तोहरा जइसन हजारो लाखो महतारियन के सामने आवत रहे वाला अइसनका मजबूर दिन में ओह लोग का साथे खड़ा रहनी. ओह लोग खातिर लड़ पवनी त अपना के धन्य समुझब.

हो सके त माफ कर दीहे, बावजूद एकरा कि तू हमरा के दोषी नइखू मानत.

बाकिर हम अपना के कबो माफ ना कर पायब.

तोहार,
यशवंत
एह लेख के मूल


संपूर्णानन्द दूबे के ई-पाती

बर्बाद गुलिस्ताँ करे खातिर बस एगो ऊल्लुए काफी बा हर डाल पर उल्लू बैठल बा अब आगे अंजाम का होई. अब राउवीं ई सोच के बता सकीले की आज भड़ास मीडिया के यशवंत जी की माता के साथे जवन कृत्य भइल बा ऊ पूरे भारतीय पत्रकारिता का साथे लागल एक कलंक बा. प्रशाशन जेकर काम आम जनता के सुरक्षा कइल बा ऊहे एगो कलम के सिपाही. के अपना कर्तब्य कइले से रोकत बा. का होखी यह देश के जहाँ भारत माता के विश्व गुरु होखे के परिकल्पना के साथे भारत माता के सपूत दिल्ली में अपना कलम के साथे लागल बा. आ घरे ओही के माता सुरक्षित नइखे. ई ता भारतीय लोकतंत्र का साथे हो रहल अन्याय बा. ई अन्याय का साथे हम सभी के हाथ में हाथ. डाल के अपना कलम के साथे न्याय कर के काम करे के चाही. तबे जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि वरीयसी के सपना साकार होखी.

धन्यवाद.

ई लेख यशवंत जी के माता के नइखे हम सबहीं के माता के बा. एकरा के हम आपके माध्यम से पूरे जनता में प्रदर्शित करल चाहत बनी यह में आपके सहयोग के जरूरत बा.

– सम्पूर्णा नन्द दुबे

एक एक करके दर्जनो दुलहिन बना डलनी

– डा. उत्तमा दीक्षित,

एसिस्टेंट प्रोफेसर (फैकेल्टी आफ विजुअल आर्ट्स, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय)

चुनार सीमेंट फैक्टरी का परिसर में बहुते आम घर रहे हमार. चिकित्सक पिता आ शिक्षिका मां के अकेली कन्या संतान हईं हम. दू गो भाई बाड़े, दुनु छोट. जब हमार जनम भइल त घर में कवनो खास खुशी ना मनावल गइल. बलुक पापा त दुखिये भइलन. शायद बेटी का जिम्मेवारी से डेरा गइल रहले. मम्मी अनुशासन पसन्द आ कड़क सुभाव के रहली आ हमरा ई खराब लागत रहुवे. मम्मी-पापा दुनु जने महत्वाकांक्षी रहले. ऊ लोग आगा बढ़त रहल चाहत रहुवे. मम्मी अपनहू पढ़ाई करत रही आ पापा आपन प्रैक्टिस जमावे में जुटल रहले. दुनु जीवन का संघर्षे में व्यस्त रहले आ ओह लोग का लगे हमरा खातिर समये ना रहे. फैक्टरीए का स्कूल में हमार दाखिला करा दिहल गइल काहे कि मम्मी ओहिजे टीचर रहली.

पढ़े-लिखे में हम शुरूवे से मेधावी रहनी. क्लास में हम पातर-दुबर आ छोट लागीं जबकि हमार सहेली सब बड़ आ मोट. जवने पढ़ावल जाव हम तुरते याद कर लेत रहीं. घरे लवटि के मम्मी पूछत रही त एक-एक करके सगरी पीरिएड्स के पढ़ाई सुना देत रहीं. पापा खुश होखतन. रोजाना कहतन – अनामिका तुम बस, इसी तरह पढ़ना और डॉक्टर बनना.

कला त हमरा मन में कहींओ ना रहुवे बाकिर पांचवाँ क्लास के एगो घटना हमरा के कला के ओर ले आइल. मास्टर जी पूरा क्लास के पेपर पर दुलहिन पेंट करके ले आवे के होमवर्क दिहले. मास्टर जी रहले त गणित के बाकिर जिम्मेदारी कलो पढ़ावे के जिम्मेदारी दे दिहल रहे. ऊ अपनहू कला ना जानत रहले. कोशिश करसु कि जल्दी से पीरिएड खत्म हो आ बला टले. हमरा सहपाठी शीला के बनावल दुलहिन के मास्टर जी जमके तारीफ कइलन. हमरा से कहलन कि तुहू निमने बनवले बाड़ू बाकिर देखऽ शीला के बनावल दुलहिन कतना सुंदर बिया. रंगन के कतना निमेन इस्तेमाल कइल बिया ऊ. रंग खिलल-खिलल बा. टीचर के बेटी हऊ, तहरा त हर काम में आगा रहल चाहीं. हमरा इयाद बा कि एहिजे हमार मन में पहिल पहिल बेर केहू से ईर्ष्या जागल रहुवे. घरे अइनी, खूब रोवनी आ लगनी बइठ के कागज पर दुलहिन बनावे. एक-एक करके दर्जनों दुलहिन बना डलनी. आ मास्टर जी के शाबासी लेइये के मननी हम.

एकरा बाद आर्टो हमरा पसंदीदा विषयन में शामिल हो गइल. घर में बाकिर जोर विज्ञाने का विषयन पर रहे. पापा चाहत रहले कि कइसहू करीं, हमरा डॉक्टरे बने के बा. भाइयन से बड़ा होखला का चलते हमार जिम्मेदारियो बेसी रहे. मम्मी स्कूल जासु तो समय निकाल के भाइयनो के संभारे के पड़े. सुभाव जिम्मेदार प्रवृत्ति के रहे एहसे इहो काम खुशी-खुशी कर लेत रहीं. एही बीच कला का प्रति हमरा मन में दीवानगी पनपे लागल रहे. रफ कापियन में पाछा के पेजन पर आर्टे आर्ट बनाईं. जबे मौका मिले, कवनो आकृति उकेर देतीं. कई हाली त एकरा खातिर पिटइबो कइनी. मम्मी-पापा के शिकायत रहे कि हमार ध्यान बंटत बा आ हम डाक्टर ना बन पायब. माता-पिता के उम्मीदन के बोझ का होला, ई निमना से मालूम बा हमरा. ई बोझा लिहले हमार पढ़ाई चलत रहल. विज्ञान विषयन से हम हाईस्कूल में फर्स्ट डिवीजन पवनी. ओने उत्तर प्रदेश सीमेंट कारपोरेशन के चुर्क, चुनार, आ डाला, तीनों फैक्टरियन में समस्या होखे लागल रहे. कर्मचारियन आ ओहनी के परिवार मुश्किल में आ गइल रहले. हम बायो ग्रुप के विषय से इंटर पढ़त रही.लड़कियन खातिर त सुरक्षो के सवाल रहुवे. लड़कियन-मेहरारुवन से घर में घुसके अभद्रता के खतरा महसूस होत रहुवे, एहसे एक्जाम खत्म होखते हमरा के चुनार से करीब 25 किमी दूर नानी का गांवे भेज दिहल गइल. इंटरमीडिएटो में हम अव्वल अइनी.

एकरा बाद त पापा के दबाव अउरी बढ़ गइल. बीएचयू में मेडिकल एंट्रेंस एक्जाम खातिर कम से कम जतना उमिर जरूर रहुवे, हम ओकरा से कुछ महीना कम के रहनी. हमरा के एक साल तैयारी करके अगिल साल ई एक्जाम देबे के हुक्म भइल. मम्मी कहली कि एक साल बा, चाहऽ त कवनो दोसरो एंट्रेंस एक्जाम दे ल. हमार मौसा जी ओह घरी बीएचयू में रिसर्च करत रहले. ऊ समुझवले कि कवनो प्रोफेशनल सब्जेक्ट से ग्रेजुएशन कर लऽ. कला में रुझान बा त काहे ना बीएफए के एंट्रेंस एक्जाम नइखू दे देत ? तबहियो बड़ा कठिन होत रहुवे बीएफए के एंट्रेंस एक्जाम. हम दिहनी आ पास कर गइनी. हमरा खुदऊ आश्चर्य भइल कि एक्जाम में त उहो स्टूडेंट बइठल रहले जे एकरा खातिर पहिलहीं से तइयारी कइले रहले. अतना आसान ना रहुवे बीएचयू में पढ़ल. घर दूर रहे. रोजाना आइल-गइल मुश्किल.

हम बहुते संकोची आ सोझ-सिधवा रहनी. हीन भावना के जल्दिये शिकार हो जात रहीं. माइये हमार अकेला दोस्त रहली. संसाधन सीमित रहुवे आ बेटी का वजह से हमरा खातिर त अउरियो कम. हमरा हास्टल मिल गइल. ओने चुनार में अबहियो आतंक के माहौल रहुवे. लोग जगहा छोड़ जात रहे. पापा के प्रैक्टिसो कम हो गइल रहे. मम्मी के नौकरी खतरा में रहे. हमरा अल्टीमेटम मिल गइल कि खर्च घटावऽ. हम उहे कपड़ा अदल बदल के पहिरतीं. शनिचर के खाना ना खइतीं कि घरे जाये के बा आ सोमार का पूरा दिने खाये के छुट्टी ई कहके कि घर से खाके आइल बानी. हफ्ता में एक दिन दुनु टाइम मेस का खाना ना खइतीं आ भूकले रहतीं. बाजार से आर्ट के काम लेके अइतीं आ बनइतीं. हालांकि एहमे धोखो खूब मिलल. बहाना बना के पेमेंट या त दिहल ना जात रहुवे भा मिलबो करे त बहुते कम. हमरा अपना अकेला दोस्त मम्मी के बीएचयू में खूब याद आवे. शनिचर के क्लास अटेंड करते चुनार खातिर चल देतीं. एही तरह चलत रहल बीएफए के पढ़ाई.

पढ़ाई चलते रहे तबहिये पापा को बुझा गइल कि अपना जिम्मेदारी से मुक्ति पा लेसु. एने-ओने दउड़-धूप शुरू हो गइल. बाकिर लागत ना रहे कि ई कवायद हमरा बहुत अच्छा करे खातिर हो रहल बा. इहे बुझाव कि ई अपना जिम्मेदारी से कवनो तरह मुक्त हो जाये के मशक्कत हो रहल बा. मुक्ति मिलिये गइल. आ एहिजो हमार निमन किस्मत कामे आइल. पराया घर के अपना बनावे में आम भारतीय लड़की से बेसी मुश्किल आइल, बाकिर ओहमें हमार अपनो सुभाव के दोष रहे. हम बहुते भावुक आ महत्वाकांक्षी रहनी. एही बीच हम दुनु परानी बढ़िया मुकाम पावे खातिर घर छोड़के पढ़े के फैसला कइनी जा. मुश्किल फैसला रहुवे, ई कुछुये दिन में पता चल गइल. हमनी दुनु पढ़त रहीं. रहे थे. साथ में हम कामो करतीं कि केहू जिनिगी पटरी पर आ जाव. ईश्वर बहुते देर कइले सुने में.

हर तरह का कष्ट से हमार सामना भइल बाकिर हर बार हमहीं जीततीं, हमार हौसला कामे आ जाव. पति मदद करतन. एमएफए का बाद पीएचडी करे के ठान लिहनी. राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) एकही प्रयास में पास कर लिहनी. बाकिर एही बीच किस्मत पलटी मारल शुरु कर दिहलसि. उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा आयोग से लेक्चरर पद के साक्षात्कार के बुलावा भेज दिहलिस. हम खुश रहनी. करीब महीना भर के बेसब्र इंतजार का बाद दौड़के इलाहाबाद पहुंचनी आ चुनाइयो गइनी. बाकिर खुशी अबकियो तत्काल ना आइल. उत्तर प्रदेश उच्च शिक्षा निदेशालय से कानपुर के जुहारी देवी कन्या पीजी कॉलेज में प्लेसमेंट मिलल. ओहिजा चहुंपनी त पोस्ट विवादित रहे. प्रबंध तंत्र ज्वॉइने ना करवलसि. लमहर लड़ाई का बाद बमुश्किल आगरा कॉलेज में नियुक्ति खातिर पत्र मिल गइल. थोड़ बहुत मुश्किलन का बाद उत्तर भारत के एह बेहद प्रतिष्ठित पीजी कॉलेज में ज्वॉइनिंगो हो गइल. ई एगो लमहर आ हताशा भरल लड़ाई के सुखद अंत रहुवे.

कानपुर का बजाए आगरा में नौकरी मिलल हमरा खातिर भाग्य खुलला जइसन रहे. चूंकि आगरा दिल्ली के करीब बा आ दिल्ली में कलाकारन खातिर करे के बहुते-कुछ बा. नौकरी मिलला के सुकून के आनंद लिहला के कुछुवे महीना बाद हम सक्रिय भइनी आ लगावे लगनी दिल्ली के दौड़. तमाम गैलरीज़ से संपर्क स्थापित कइनी. एकर लाभो मिले लागल. बाकिर स्वभाव का मुताबिक कुछ महीना बाद फेर असंतुष्ट रहे लगनी. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के छात्रा रहल रही एहिसे ओहिजा नौकरी करे के इच्छा बलवती होखे लागल. नजर अखबारे पर रहित आ साथही बनारस में अपना पुरान मित्रन आ शिक्षकन से संपर्को कायम रहित.

एक दिन पता चलल कि बीएचयू के चित्रकला विभाग में लेक्चरर की पोस्ट विज्ञापित भइल बा. पोस्ट एगो, उम्मीदवार हजारन में. हम आवेदन करे में इचिको देरी ना कइनी. बीएचयू में चुनाइल बेहद मुश्किल रहे , बाकरि हम पूरा निश्चिंत रहीं. नेट का साथे पीएचडी संपन्न हो चुकल रहनी. इंटरव्यू खातिर स्क्रीनिंग भइल. कइगो बड़हन नाम स्क्रीनिंगे में निबट गइले. हम इंटरव्यू तक चहुँपनी आ चुन लिहल गइनी. पांच साल तक आगरा कालेज में लगातार सेवा कइला का बाद नवम्बर 2007 में हम एहिजा ज्वॉइन कर लिहनी. ई सपना साँच होखे जइसन रहे. बीएचयू हमारा खातिर सौभाग्य के बाति बा बाकिर देश के सांस्कृतिक राजधानी होखला का बावजूद बनारस में कला खातिर ऊ बात नइखे जवन मेट्रो शहरन में होला. कलाकार खातिर डेगे डेग पर संघर्ष बा एहिजा. अइसनका में लगातार कोशिश बा कि शिक्षा का क्षेत्र में नाम कमइला का साथे कला के दुनियो में हमार झंडा बुलंद होखे. हम अबहियो नइखीं मानत कि लड़ाई खत्म हो गइल बा. निरंतर प्रयास में बानी. कवनो काम छोट मानके ना छोड़ी लें. केहू साथ दे भा ना हम चलते रहीलें.

अपना फील्ड आ काम का साथे अखबारन से लेके इंटरनेट तकले लगातार सक्रिय बानी. लक्ष्य अउरी आगा बढ़े के बा, बढ़ते रहे के बा. ईश्वर पर भरोसा बा, उम्मीदो बा आ उम्मीदे पर त दुनिया कायम बा. हारे के अहसास होखलो पर रुकीलें ना.

दू दिन पहिले की बात ह. स्वभाव के अनुरूप अतीत में भुला गइनी. हालांकि अपना एगो शिक्षक के बातो याद रहे, जे कहत रहले कि भूतकाल भूत का तरह होला, जतना पाछा भगबू ओतने परेशान करी. बाकिर यदि भूतकाल भुला गइनी त कइसे पता लागी कि कामयाबी कतना मिलल ? कइसे चखी आदमी ओकर मजा ? कइसे करी मूल्यांकन कि कमी कहां रह गइल ? आ कमी पता ना चलल त ओकरा के दूर करके आगे के रास्ता कइसे तय होखी ? हमरा कामयाबी के इहे मंत्र ह. हम सफलता के पीछे भागीले. कबही लागेला कि हार जायब तबो रुकीले ना. सोचीले कि चलऽ अनुभव त मिली जवना से आगा गलती ना होखी.


सफलता के कवनो शाट-कार्ट ना होला, दृढ़निश्चय आ लगातार कोशिशे एकर कुंजी होले. पुरुष प्रधान समाज में मेहरारुवन खातिर आपन मुकाम पहिचानल आ ओकरा के हासिल करे खातिर मजबूती से डेग बढ़ावल त अउरियो मुश्किल होला. एकरा बावजूद बहुते महिला एह मिथक के तूड़त कई इलाकन में सफलता के बुलंदी छू रहल बाड़ी भा छुवे का कगार पर बाड़ी. अपना हिम्मत आ हौसला से जे एगो नया इतिहास रचत बाड़ी. डा. उत्तमा दीक्षित के नाम अइसने मेहरारुवन में शामिल बा. अदभुत जिजीविषा से संपन्न डा. उत्तमा दीक्षित ना सिर्फ जीवन के हर थपेड़न के पूरा बहादुरी से सामना कइली, बलुक प्रतिकूल प्रवाहो के अपना मजबूत इरादन से अपना वश में करके कामयाबी के नया नया कहानी गढ़त चल गइली. मुश्किल हालात मे घेरइला का बावजूद ऊ बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से पेंटिंग में पीएचडी की उपाधि लिहली आ फेरु बाद में कई गो राष्ट्रीय आ अंतरराष्ट्रीय स्तर के पेंटिंग प्रदर्शनियन में आपन धमक बिखेरला का बाद एही विश्वविद्यालय के फैकेल्टी आफ विजुअल्स आर्ट्स में सहायक प्रोफेसर नियुक्त हो गइली. एह लेख में डा. उत्तमा दीक्षित खुद अपने अपना लमहर पथरीला राह के सफर के वर्णन कइले बाड़ी, जवना में जीत के ओज भरल बा.

डा॰ उत्तमा दीक्षित के पेंटिंग्सब्लॉग
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