विनोद त्रिवेदी आ श्रीधर शेट्टी के ‘नाच दुलारी नाच’

बालाजी सोलिटर फिल्म्स प्रा. लि. के बैनर तले बनल भोजपुरी फिल्म ‘नाच दुलारी नाच’ क बारे में साफ कहल जाता कि एह फिल्म के पूरा परिवार एक संगे बइठ के देख सकेला.

‘नाच दुलारी नाच’ के निर्माता विनोद त्रिवेदी आ निर्देशक श्रीधर शेट्टी हउवें. एक से बढ़के एक गीतन के संगीत दिहले बाड़न संगीतकार राकेश त्रिवेदी, पटकथा लेखक केशव राठौड़, संवाद लेखक मोहम्मद रफी खान, कैमरामैन प्रिंस, गीतकार राकेश निराला, नृत्य निर्देशक केदार सुब्बा, आ एक्शन डायरेक्टर हउवें हेमल सी.

फिल्म के मुख्य कलाकारन में श्री कनकनी, यश त्रिवेदी, जफ़र खान, उदय श्रीवास्तव, रोहित सिंह मटरू, चंदन पुरुषोत्तम, आ डांसिंग क्वीन सीमा सिंह के नाम बा. फिल्म के शूटिंग पूरा हो गइल बा आ अब पोस्ट प्रोडक्शन के काम लागल बा.


(स्रोत – शशिकांत सिंह, रंजन सिन्हा के रपट)

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निर्माता रितेश ठाकुर ले अइहें "दरदिया ए बालम"

“तू ही मोर बलमा “,”कलुआ भइल सयान ” के बाद रितेश ठाकुर अब ले के आवत बाड़ें भोजपुरी फिलिम “दरदिया ए बालम” जवना के निर्माण आकाश फिल्म्स इंटरटेनमेंट के बैनर तले कइल जात बा.

एह फिलिम में अरविन्द अकेला कल्लू, सुप्रेरणा सिंह, आ अवधेश मिश्रा मुख्य कलाकार बाड़ें. संगीत छोटे बाबा दिहले बाड़न.

एक्शन,रोमांस आ कॉमेडी भरल एह फिलिम के शूटिंग जल्दिए शुरू होखी.


(भोजवुड न्यूज के रपट)

१४ सितम्बर के सगरी हिन्दुस्तान में देखावल जाई ‘गंगादेवी‘

निर्माता दीपक सावंत आ निर्देशक अभिषेक चड्ढ़ा के फिलिम ‘गंगा देवी‘ १४ सितम्बर से सगरी हिन्दुस्तान में एके साथ रिलीज कइल जाई. दक्षणा फिल्म्स के बैनर तले बनल एह फिलिम ला दर्शक ढेरे दिन से तिकवत बाड़ें. एहमें बिग बी आ जया बच्चन के अलावा दिनेशलाल यादव ‘निरहुआ’, पाखी हेगड़े, गिरीश शर्मा, अवधेश मिश्रा अउर विनय बिहारी मौजूद बाड़ें. साथही एही फिलिम से गुलशन ग्रोवरो पहिला बेर भोजपुरी दर्शकन के सोझा होखीहें.

फिल्म निर्माण बेशक एगो कला ह, लेकिन निर्माता दीपक सावंत हमेशा से सामाजिक सरोकारन से प्रेरणा ले के फिलिम बनावत आइल बाड़ें. इहे वजह बा कि मराठी भाषी होखला का बावजूद ऊ समाज के ओह तबका के अपना फिलिम के केंद्र में रखलन जहँवा सामाजिक बदलाव के सबले अधिका ज़रूरत बुझाला.

‘गंगा’ आ ‘गंगोत्री’ बना चुकल दीपक सावंत के अगिला भोजपुरी फिल्म हवे ‘गंगादेवी’. एह फिलिम का कहानी में महिला आरक्षण के मुद्दा केन्द्र में बा. आरक्षण का बावजूद औरतन के हैसियत जस के तस बा आ आजुवो उनुका आपन वाजिब हक हासिल नइखे. निर्माता दीपक सावंत आ निर्देशक अभिषेक चड्ढ़ा ‘गंगादेवी’ के जरिए महिला आरक्षण राजनीति पर कड़ा चोट मरले बाड़ेंॆ सिनेमा भोजपुरी के मौजूदा चलन से अलगा हटके बनल एह उद्देश्य प्रधान फिल्म में कहानी आ किरदारन के बेहतरीन तरीका से पेश कइल गइल बा.


(संजयभूषण पटियाला के रपट)

आलोक कुमार-निरहुआ के बहुते सफल जोड़ी फेरू साथ-साथ

सिनेमा भोजपुरी के सबले सफल निर्माता आलोक कुमार आ सबले सफल स्टार दिनेशलाल यादव ‘निरहुआ’ क सुपरहिट जोड़ी एक बेर फेरू धमाल मचावे ला तइयारी करत बा. आलोक कुमार निरहुआ लेके आपन नइकी फिलिम ‘दूध का कर्ज’ बनावल शुरू कइले बाड़न.

एह जोड़ी के सफल फिलिमन के सूची में ‘हो गईल बा प्यार ओढ़निया वाली से’, ‘निरहुआ चलल ससुराल’, ‘हो गइनी दिवाना तोहरे प्यार में’ शामिल बाड़ी सँ आ ‘गंगा जमुना सरस्वती’ एही महीना रिलीज होखे वाली बा. एह जोड़ी के तुलना ट्रेड पंडित आ दर्शक मनमोहन देसाई-अमिताभ बच्चन, पहलाज निहलानी-गोविन्दा, सुभाष घई-जैकी श्रॉफ, आदित्य चोपड़ा-शाहरूख खान जइसन सफल जोड़ियन से करेलें. आलोक कुमार आ निरहुआ दुनु के बारे में मानल जाला कि ई लोग भोजपुरी सिनेमा देखेवालन के नब्ज पकड़े में माहिर ह. एहीसे जब जब एह जोड़ी के कवनो फिलिम आवेला त ओह फिलिम के सफलता तय मान लिहल जाला.


(प्रशांत निशांत के रपट)

भोजपुरी माटी क पहचान ओकरा लोकगीतन से बा, गोविन्द विद्यार्थी अइसने माटी के लाल हउवें

गोविन्द विद्यार्थी भोजपुरी लोकगीत के विधा अपना गीतन के माध्यम से लोग तक पहुँचवलें. इनका के भोजपुरी लोकगीतन के जादूगर मानल जाला. गोविन्द विद्यार्थी के लिखल गीत बहुते प्रचलित बाड़ी सँ, जइसे कि “हलफा मचा के गइल”,”कहेली की अलगा होके चल जाइब बहरा”, “लगा देहीं चोलिया के हूक राजा जी”, सुपर हिट सॉंग २०११ “कइसन पियवा के चरितर बा”, आ अबकी का सावन में लिखल गीत “भोला गिरी डि” खूबे पसन्द कइल गइल बा. गोविन्द विद्यार्थी अपना गीतन में चैती, सोहर, पूरबी गीतन के बढ़ावा दिहले बाड़न.

गोविन्द विद्यार्थी एलबम ला गीत लिखला का साथे साथ फिलिमो में गीत लिखत बाड़ें. पवन सिंह के पहिलकी फिलिम “रंगली चुनरिया तोहरे नाम”में “जब बहेला पवन पुरवाई” आ “बड़ा जान मारे जालीदार कुर्ती” गीत लिखलन जवन सुपर हिट भइली सँ. बताशा चाचा में “बताशा चाचा बियर पीके” आ “कजरारे तोहर नैना” गीत इनकरे लिखल ह. पवन सिंह के आवे वाली फिल्म “आंधी तूफ़ान” में “आरा जिला घर बा ता कवन बात के डर बा” गीत लिखले बाड़न.


(भोजवुडन्यूज के रपट)

‘बिगुल’ हर तरह से मौलिक आ साफ सुथरा मनोरंजन देबे वाली फिलिम बा – रवि कांत

बहुते कम निर्देशक ई कहे के जज़्बा राखेलें कि उनका फिलिम के एकहु फ्रेम कवनो दोसरा फिलिम के नकल ना मिली. बाकिर अइसन दावा करत बाड़ें निर्देशक रविकांत. ‘भारतेन्दु नाट्य अकेडमी’ से जुड़के अनेके नाटक मंचन आ साहित्य सेवा करे वाला रविकांत छोटका परदा पर ‘किटी पार्टी’, ‘अंखियों के झरोखे से’, ‘कहीं किसी रोज’ वगैरह धारावाहिक निर्देशित कइले बाड़न. उनुका निर्देशन में बने वाली पहिला भोजपुरी फिल्म ह ‘बिगुल’. नमन प्रोडक्शंस के बैनर तले बनत एह फिल्म में ‘रंगबाज’ हैदर काजमी आ अक्षरा सिंह के जोड़ी बा. पेश बा रविकांत से भइल बातचीत के कुछ खास अंश :

आखिर का खासियत बा ‘बिगुल’ के ?

दरअसल, ‘बिगुल’ उत्तर भारत के सामाजिक परिवेश पर बनल फिलिम ह जवना में एगो किसान-मजदूर के कहानी बा. अपना देश-प्रदेश के समस्या, ओकरा दुःख-दर्द के एह फिल्म में पिरोवल गइल बा. हमार दावा बा कि एह फिल्म में दुनिया के कवनो फिलिम के एकहु फ्रेम के नकल नइखे. ‘बिगुल’ पूरा तरह से मौलिक बावे. एकर भाषा जरूर भोजपुरी बा लेकिन एकर सब्जेक्ट, प्रस्तुतिकरण, फिल्मांकन, फोटोग्राफी, निर्देशन, पोस्ट-प्रोडक्शन वगैरह सगरी एकदम हटके बा. ई एगो बढ़िया दर्जा के पारिवारिक-मनोरंजक फिल्म ह, जवना में फूहड़पन के तड़का नइखे मारल. एकर कथा-पटकथा हमरे लिखल ह जबकि संवाद मनोज पाण्डे आ हमार लिखल. मुख्य कलाकार हउवें हैदर काजमी, अक्षरा सिंह, जितेंद्र यादव, श्रेया शर्मा, मनीष खन्ना, संजय कुलकर्णी, कृष्ण गोपाल अउर संगीता रमन वगैरह. गीतकार-संगीतकार नजाकत-सुजात हउवें. एहमें कुल 8 गो गीत बा, जवना में एगो आइटम गीत ह आ सगरी गीत सिच्युएशनल बाड़ी सँ.

एह फिल्म के अउरी का खासियत बा?

देखीं, पहिलही बतवनी कि सबले बड़ी खासियत बा एकर मौलिक सब्जेक्ट अउर प्रस्तुतिकरण. एकर हर पक्ष खास बा. कहीं कवनो कटौती नइखे कइल गइल फिल्मांकन में. इलाहाबाद में एकरा शूटिंग खातिर 10 लाख रुपिया के सेट लगावल गइल जवन कि पटकथा के डिमांड रहल. अभिनय क बात करीं त हैदर काजमी, अक्षरा सिंह, नवोदित जितेंद्र यादव समेत सगरी कलाकार बढ़िया काम कइले बाड़ें. एह फिल्म के बेहतरीन बनावे में कवनो कसर नइखीं छोड़ले हम. काहे कि हम समझौता में ना बलुक बढ़िया काम करे में विश्वास राखीलें. हम त इहो कहब कि ‘बिगुल’ भोजपुरी इंडस्ट्री में माइल स्टोन फिल्म साबित होखी आ दोसरो फिल्मकार अइसने बढ़िया फिलिम बनावे ला उत्साहित होखीहें.

मौजूदा फिलिमन क बारे में आपके नजरिया?

साँच कहीं त हम संतुष्ट नइखीं काहे कि आजु बनत ज़्यादातर फिलिम समाज के हिस्सा नइखे बनत, बमुश्किल दस फीसदी लोग खातिर बनत बा. हमनी का समाज के बाँट के राख दिहले बानी जा. जबकि फिल्मकारन के दायित्व पूरा समाज ला होखेला. आज समाज टूटत बा आ समाज के छोड़के हमनी का कला-सेवा ना कर सकीं. आजु बढ़िया मौलिक कहानी आ लेखकन के कमी बा. सस्ता लोकप्रियता बटोरल हमनी के मकसद ना होखे के चाहीं. कुछ फिल्मकार कहेलं कि ऊ उहे परोसेलें जवन दर्शक देखल चाहेलें, जबकि हमार कहना बा कि रउरा जवने परोसत बानी दर्शक ओकरे के देखे ला मजबूर बाड़ें. उनुका लगे विकल्प नइखे.

फिल्म के मथैला भा टाइटल ‘बिगुल’ एकरा कथानक में कवना तरह जस्टीफाई भइल बा?

जइसन कि पहिलही कहनी ई एगो किसान-मजदूर के कहानी ह. जब एगो भू-माफिया ओकरा पर अत्याचार करत बा त आखिरकार ऊ किसान ओह माफिया आ ओकरा अत्याचार का खिलाफ उठ खड़ा होके न्याय खातिर बिगुल बजा देता. ई टाइटल कथानक साथे पूरा तरह से जस्टीफाईड बा, फिलिम देखि के रउरो मान जाएब.

कुछ अपना बैकग्राउण्ड का बारे में?

मूल रूप से हम औरंगाबाद, बिहार के हईं. रंगमंच में शुरुए से दिलचस्पी रहल, लिहाजा लखनऊ में ‘भारतेन्दु नाट्य अकेडमी’ से जुड़ल रहनी आ अनेके नाटक मंचित कइनी. साहित्यो में दिलचस्पी बा, कविता लिखिलें. मुंबई साल 2000 में अइनी आ टीवी खातिर ‘अंखियों के झरोखे से’, ‘किटी पार्टी’, ‘कहीं किसी रोज’ वगैरह सीरियल निर्देशित कइनी. ‘बिगुल’ हमार पहिलका फिलिम ह. आ बढ़िया फिलिम बनावले हमार मकसद बा.


(शशिकांत सिंह रंजन सिन्हा के रपट)

केहु साथ चले मत चले हमरा त चलत जाए के बा – विश्वनाथ रामदास पाटिल

कॅन्सट्रक्शन बिजनेस मे जुडल जलगाँव के रहेवाला शांत आ सज्जन विश्वनाथ रामदास पाटिल अब भोजपुरी फिल्म निर्माता बन गइल बाड़ें. पिछला दिने अपना साक्षात्कार में जवन कहलें तवने क सारसंक्षेप एहिजा पेश बा. का अंश प्रस्तुत है।

महाराष्ट्र के जलगांव के रहे वाला विश्वनाथ पाटिल एन.एस.डी. के एगो कलाकार आ एगो फिल्म वितरक के राय पर प्रापर्टी डीलिंग आ भवननिर्माण का धंधा से भोजपुरी फिल्म निर्माण में उतरलें. ऊ दुनु दोस्त भोजपुरी सिनेमा से जुड़ल रहलें से विश्वनाथो पाटिल मराठी फिलिम ना बना के भोजपुरी फिलिम बनावल तय कइलें. बाकिर जब समय आइल त केहु साथ ना दिहल उहो दुनु जने ना जे एकर सलाह दिहले रहलें.

सिनेमा भोजपुरी के लोगन में बहुते धोखेबाज भरल बतावे वाला पाटिल के पहिला फिलिम “शेरनी” दशहरा ले रिलीज होखी जबकि दोसरकी फिलिम “साँवरिया तोसे लागी कैसी लगन” के शूटिंग अगिला महीना शुरु होखी. एकाध गो हिन्दीओ फिलिम के योजना पर काम चलावत बाड़ें.


(संजय भूषण पटियाला के रपट)