भारत के सबले लमहर रोड शो चलावत बावे अंजन टी वी

भोजपुरी मनोरंजन के क्षेत्र में भावी युग के अंजन टी.वी. चैनल भारत के मनोरंजन इंडस्ट्री के इतिहास में सबले लमहर रोड शो चलावत बा. एह रोड शो में उत्तर प्रदेश, बिहार आ झारखंड के शहर अंजन टी.वी. के लय पर झूमीहें सँ. 22 अगस्त से शुरू भइल ई रोड शो उत्तर प्रदेश के अनेके शहरन से गुजरत चालीस दिन ले सफर करी.

अंजन टी वी के चैनल के हेड मंजीत हंस के कहना बा कि जबहीं हमनी का कवनो बड़का आयोजन करीलें त एक एक आदमी के आशीर्वाद के कामना करीलें. एह रोड शो से हमनी का उत्तर प्रदेश, बिहार आ झारखण्ड के लोगन से आशीर्वाद लिहल चाहत बानी. चालीस दिन के एह रोड शो में ५००० किलोमीटर के सफर का दौरान चालीस गो शहर अइहें सँ. कहलन कि ई रोड शो ३० सितम्बर के खतम होखी. एह शो से चैनल अपना सगरी दर्शकन से स्थाई जुड़ाव स्थापित करे चाहत बा. सजल सजावल बड़का बड़का ट्रक, ट्राली आ स्टाइलदार जीप तय शहर के गलियन, सड़कन आ मुख्य जगहन पर नजर अइहें सँ. एह रोड शो में लाइव कार्यक्रम, प्रतियोगिता आ उपहार बाँटल मुख्य आकर्षण होखी.

अँजन टी.वी. के प्रबंध निदेशक दीपक राज भंडारी कहलें कि ऊ चैनल खातिर वइसने भावपूर्ण प्रतिक्रिया के लालसा राखत बाड़न जवन एह विशाल रोड शो से मिले के आशा बा.

पिछला २४ अगस्त के मुंबई में अंजन टीवी के लौन्चिंग भइल रहे.


(उदय भगत के रपट)

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भोजपुरी के एगो नया मनोरंजन चैनल अंजन टीवी

भोजपुरी मनोरंजन के मैदान में क्रांति करे का दिसाईं एगो नया मनोरंजन चैनल डेग बढ़वले बा. भोजपुरी के ई दुसरका मनोरंजन चैनल होखी बाकिर एकर कार्यक्रम के अंदाज अलगे तरह के होखे वाला बा. अंजन टीवी नाम के एह चैनल पर के हर कार्यक्रम संदेशपरक होखी.

अंजन टीवी के चैनल हेड मंजीत हंस के कहना बा कि उनुका चैनल के उद्देश्य दर्शकन के मनोरंजने करल ना, बलुक बल्कि स्वस्थ मनोरंजन कइल बा. एहसे कार्यक्रम बनावत घरी एह बात पर खास ध्यान दिहल गइल बा कि समाज के हर वर्ग के लोग एकर आनंद ले सकसु. अंजन टीवी पर योग, संगीत, फिल्म, धारावाहिक, ट्रेवल, भक्ति, रियलिटी शो, कोमेडी शो, लाइफ स्टाइल आ खाना खजाना से जुड़ल कार्यक्रम पेश होखी आ एह कार्यक्रमन के भोजपुरी फिल्म जगत के कलाकार होस्ट करीहें.

अंजन चैनल के टेग लाइन “जियो हर पल” का बारे में चैनल हेड मंजीत हंस बतवलें कि ई आध्यात्म से जुडल बा आ संदेश देत बा कि जीवन अनमोल ह, एकरा के खुशी, आपसी भाईचारा आ चेहरा पर मुस्कान लिहले बितावे चाहीं. कहलन कि चैनल के लोगो में त्रिनेत्रो के झलक मिलत बा. कहलन कि उत्तर भारत के लोगन के ओह लोग का अपना भाषा में बढ़िया कार्यक्रम दिहले चैनल के अकेला मकसद बा.


(स्रोत – अंजन टीवी)

जमीनी हक़ीकत से बेख़बर बा भोजपुरी सिनेमा

– सुधीर सिंह उजाला

भोजपुरी फिल्म के उद्गम बिहार आ उत्तर प्रदेश के सांस्कृतिक भूमि से भइल बा. त अचरज ना होखे के चाहीं कि एकर बुनियाद बरकार राखे के जिम्मेदारीओ एही लोग का कान्ह पर टिकल बा. बाकिर पिछला दस साल से अपना कामयाबी पर इतरात भोजपुरी सिनेमा का लगे बस तीने गो नायक बाड़ें रविकिशन, मनोज तिवारी आ दिनेश लाल ‘निरहुआ’. हाल के दिन में जब मनोज तिवारी आ रवि किशन कमजोर पड़ल बाड़ें त पवन सिंह आ खेसारीओ लाल के चरचा भलहीं जोर पकड़े लागल बा बाकिर भोजपुरी सिनेमा के संगे धुरंधर कुणाल सिंह क बाद मौजूदा समय में जवन तीन नाम याद आवेला तवन रवि, मनोज अउर निरहुए के होला. रविकिशन के छोड़ दीं त लगभग सगरी नायक लोकगायक के रूप में लोकप्रियता बटोरला का बाद भोजपुरी सिनेमा के सितारन में शुमार भइलें. दोसरा ओर भोजपुरी सिनेमा में नायिका लोगन के कतार बहुते लमहर बा, रानी चटर्जी, पाखी हेगड़े से लेकर मोनालिसा अउर आइटम डांसर संभावना अउर सीमा सिंह ले. लेकिन एहमें से शायद केहु के ऊ बेंवत नइखे जे कैटरीना, करीना अउर ऐश्वर्या क तरह देखे वालन के सिनेमा घर ले खींच सके. ई लोग फिलिमन में एही ला होले कि ग्लैमर होखल जरूरी होला. ना त एह लोग के मार्केट वैल्यू इचिकिओ भर नइखे. ई बात भोजपुरी के नायको समुझेलें आ ओह लोगन पर मार्केट वैल्यू के बुखार सवार होके लागल बा तबहिए त भोजपुरी सिनेमा के बजट के आधा माने कि 50 लाख तक मांगे में एह लोग के संकोच ना होखे. पिछला दिने जब एगो नामचीन भोजपुरी अभिनेता से 50 लाख मँगला के लेके सवाल उठावल गइल त ऊ छूटते कहलन, रजनीकांत त एक फिल्म के 50 करोड़ लेबेलें, हम त ओह हिसाब से कुछऊ ना माँगीले. आखिरकार उहो त रिजनले सिनेमा से आवेलें. हम त चाहीलें कि हमनिओ के फिलिम ओह ऊँचाई ले चहुँपे.

अब के ना मर मिटी एह सीधाई पर. भोजपुरी सिनेमा के बेहतर भविष्य के चाहत सराहे लायक बा, लेकिन चाहत के बुनियाद जमीनी ना होखे त बस हँसा सकेले अउर कुछ ना कर सके. रजनीकांत के लेके इहो सवाल जेहन में चमकेला कि शुरूआतीए दौर में उनुका के 80 करोड़ परोसल गइल कि इंडस्ट्री के बुलंदी पर चहुँपवला का बाद 80 करोड़ मिलल. सवाल जतने अझूराइल बा जवाब ओतने सीधा बा, काहे कि शोहरत के सरपट में भोजपुरी के चंद नामचीन अभिनेता भूला जालें कि उनुकर इंडस्ट्री कवना लायक बा आ ओकर बेहतरी आ माकूल तरक्की ला ऊ कवन कोशिश कइले बाड़न? वास्तव में यदि भोजपुरी सिनेमा जगत के बीतल दस साल पर गौर करीं त पाएब कि पारिश्रमिक के बढ़ोतरी के अलावा इंडस्ट्री के बेहतरी ला कवनो अभिनेता निजी स्वार्थ से ऊपर उठके कवनो सार्थक पहल शायदे कइले होखे. जबकि भोजपुरी के जमीनी हकीकत से बेखबर भोजपुरी सिनेमा के चेहरा अउरी बिगाड़े के कोशिश बदस्तूर जारी बा. दावा क साथ ई कहल बेमतलब ना होई कि तीनों सितारा में से शायदे केहु अपना निर्माता, निर्देशक भा पटकथा लेखक से मिल के सार्थक दखल देबे खातिर कवनो गंभीर बइठकी भा राय विचार कइले होई. अतने ना, शायदे केहु अपना फिलिमन के तकनीकी गलतियन के सकरले होखी, भा अपना फिलिमन के सफलता भा असफलता के कारण जाने के कोशिश कइले होखी. कहल जा सकेला कि अभिनेतने से अतना उम्मीद काहें? उ एहसे कि जब फिल्म के बजट के आधा रउरे चाहीं त पूरा फिलिम के जवाबदेहीओ सकारे के पड़ी. तब शायद एगो नया अध्याय के नींव पड़ सकी बाकिर अइसन भावना के भनको से अभिनेता अपना के फरके राखे में आपन भलाई समुझेलें.

साँच त ई बा कि भोजपुरी सिनेमा के शुरूआती दौर याद करीं त फिल्मकार नासिर हुसैन, विश्वनाथ शाहाबादी भा फेर कुंदन कुमार के नाम याद आवेला, कवनो नायक नायिका के नाम याद ना आवे. लेकिन भोजपुरी सिनेमा के मौजूदा माने कि तिसरका दौर में शायदे कवनो फिल्मकार के नाम उनुका फिलिमन के नाम का साथे याद आवे, याद पड़ी त बस नायकन के नाम. फिल्म ‘ससुरा बड़ा पइसा वाला’ संगे मनोज तिवारी, ‘निरहुआ रिक्शावाला’ संगे दिनेश लाल ‘निरहुआ’ त ‘मार देब गोली केबू ना बोली’ संगे रविकिशन. जाहिर बा कि जब भोजपुरी सिनेमा के पूरा बाज़ारे नायकन का अंगुरी पर नाचत होखो त एकरा अच्छाई-बुराईओ से एह लोगन के बरी ना कइल जा सके. हमार निजी मानना बा कि रविकिशन अउर मनोज तिवारी के भोजपुरी लोकप्रियता के माथ पर चहुँपा दिहलस जहवाँ उ ढेर दिन ले बिना कवनो प्रतिस्पर्धा के टिकलो रहलें. अतने ना भोजपुरी खातिर प्रतीको बन गइलें, जहां ई लोग भोजपुरी में एगो ‘पिपली लाइव’ भा ‘लगान’ के सपना देख सकत रहे लेकिन अइसन हो ना सकल काहे कि एह लोगन के अपना बादशाहत के पड़ल रहे, ना कि भोजपुरी इंडस्ट्री के बेहतरी के. एकरे अलावा सबले बड़ मुश्किल ई रहल कि एह विसंगतियन का चलते भोजपुरी सिनेमा के एगो क्षेत्रीय सिनेमा के तरह के जमीनो ना मिल सकल, जवना का पीछे भोजपुरी सिनेमा के दशा आ दिशा के प्रतीक बन चुकल रविकिशन आ मनोज तिवारी जइसन अभिनेता अपना अंतर्मुखी प्रयास से एकर बेड़ा गर्क करे पर आमादा रहलें. नतीजा भइल कि असमिया, मलयालम, बंगाली, पंजाबी, छत्तीसगढ़ी सिनेमा का तरह भोजपुरी सिनेमा के विकास अपना जमीन पर भइबे ना कइल. ना त एकर केन्द्र दोसरा क्षेत्रीय फिलिमन का तरह उनुका राज्य भा व्यावसायिक जगहा पर खुल पावल. अघर अइसन भइल रहीत त सिनेमा भोजपुरी ला पटना आ गोरखपुर सबले खास केन्द्र होखीत. भोजपुरी सिनेमा एगो आजाद आसमान में बढ़ला का बजाय हिन्दी के हिमालय के छाँहे में अपना के सुरक्षित पवलसि. हालांकि शुरूआत तकनीशियनन से भइल, आ बाद में एहिजा के फिल्मकारो मुम्बई में आशियाना तलाश लिहलें. कलाकार त हमेशा का तरह मुम्बई के रूख करत गइलें आ बसत गइलें आ भोजपुरी सिनेमा अपना जमीन से बेदखल हो के हिन्दी सिनेमा के दहलीज पर जा पहुंचल. नतीजा भइल तथाकथित लोकप्रियता के दस बरीस गुजरला का बादो भोजपुरी सिनेमा के कवनो आपन आजाद पहचान ना बन सकल. बेसक कद त बढ़ल लेकिन एक हद ले दोसरा का दायरा में समेटा के. सिनेमा भोजपुरी के पहिलका स्वर्ण जयंती फिल्म ‘गंगा मइया तोहे पियरी चढ़इबो’ के निर्माण के केन्द्र पटना चुनल दूरदर्शिता साबित करत बा लेकिन तबहियों भोजपुरी के अगुआई करे वाला अभिनेता हमेशा अपना जमीनी हकीकत से मुंह चोरावे में लागल बाड़ें. अचरज नइखे कि मुम्बईए में बढ़ल मराठी सिनेमा से सिखला का बजाय भोजपुरी सिनेमा हिन्दी के भोंड़ा नकल कर के तोस पावत रहल. एतने ना हिन्दी से संपर्क भोजपुरीओ सिनेमा के राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय होखे के गलत फहमी दे दिहलसि. आजु भोजपुरी सिनेमा के बात होले त लोग सीधे मॉरीशस, सूरीनाम से शुरूआत करेला. बाक्स ऑफिस के बात आवेला त हिन्दी सिनेमा का तरह इहो पंजाब, महाराष्ट्र, बंगाल, गुजरात के सर्किल के चरचा करेलें. कुल मिलाके जबो भोजपुरी सिनेमा के बाजार के चरचा होले त भरम फइलावल जाले कि एकर बाजार हिन्दी सिनेमा के बराबर भलहीं मत होखे, होखल जरूर चाहीं. भोजपुरी विश्लेषक भलहीं आपन मंशा थोपे ला बेसिरपैर वाला गलतफ़हमी के हवा देसु, निश्चित तौर पर एहसे भोजपुरी सिनेमा के हमेशा नुकसाने चहुँपवले बा. परिणाम ई भइल कि अइसन हालात में भोजपुरी सिनेमा के कनो अपना बाजार के सही आंकलन ना मिल सकल. मॉरीशस आ सूरीनाम से कमाई करके पता ना कतना फिलिम लवटली सँ, एकर समुन्दर पार बिजनेस के कवन रिकार्ड कम से कम अबहीं ले त सार्वजनिक नइखे भइल. लुधियाना, सूरत आ मुम्बईओ में भोजपुरी सिनेमा कतना कमाई कर पावेले, लोग के मालूम बा. भोजपुरी सिनेमा के कवनो तयशुदा बाजार बा त ऊ बा बिहार आ उत्तर प्रदेश के लगभग 200 से 300 बी ग्रेड सिनेमा घर. जहां टिकट के दर अबहियों 10 से 50 के बीच बा. ई सीधा गणित के मामला बा कि यदि सगरीओ शो हाउसफुल हो जाव एगो भोजपुरी सिनेमा कतना कमाई कर पाई? लेकिन भोजपुरी सिनेमा से जुड़ल लोग सीधे तौर पर हिसाब किताब भा कहीं त आंकड़ा सकारे ला कतई तइयार नइखन. जतना सिनेमाघर पूरा बिहार में ओतना त अकेले चेन्नई शहर में बा. हिन्दी फिल्म यदि मल्टीप्लेक्स में तीन दिन चल जाव त मुनाफा में आ जाले, लागत त ऊ रिलीज होखे से पहिलही ऑडियो, वीडियो, सेटेलाइट समेत अनेके तरह के राइट्स से निकाल लेले. बगैर शोध आ सर्वे के सगरी आंकड़ा भोजपुरी के पक्ष में बा तबहियों एकरा ला आपके कवन राइट्स मिलेला जे हवा में कटल पतंग के तरह उड़ावे में मशगुल होत रहीलें. ई सब कुछ भोजपुरीए सिनेमा के पाला में काहे आवेला? साउथ के फिलिम 100 करोड़ के बन सकेले त भोजपुरी के बीसो करोड़ में त बने. जबकि भोजपुरी सिनेमा के सालाना कारोबारे 100 करोड़ तक चहुँप पावेला भलही निर्माण पर सवा सौ करोड़ खर्च होखे लागल बा. यदि भोजपुरी सिनेमा के अधिकतम वापसी दूइयो करोड़ के मानल जाव त कवन फिल्मकार 8 करोड़ ले निर्माण पर खरच सकेला? यदि ऊ हिम्मत करिओ लिहलसि त दुबारा वापसी के नाम ना ली. 40 से 50 लाख भोजपुरी नायक के चाहीं त तो बाकी के तकनीकी खरचा ला भा ओह फिलिम के बेहतर बनावे ले सलाह जोखिम भरल हो जाला. अचरज ना होखे कि हिन्दी सिनेमा के धुरंधर निर्माता सुभाष घई, सरोज खान, दिलीप कुमार जइसन हस्तीओ भोजपुरी सिनेमा के बहत गंगा में हाथ धोवे अइलन त बाकिर कबो मुड़ के ना देखलें. शायद उहो भोजपुरी के आंकड़ा के मकड़ जाल में अझूरा गइलें. अभय सिन्हा, संजय सिन्हा, डा.सुनील कुमार, आलोक कुमार समेत कुछेक भोजपुरी के मंजल प्रोड्यूसर बाड़ें जे भोजपुरी के मायने मतलब आ हद से वाकिफ़ होखला से टिकल बाड़ें. भोजपुरी दर्शक एकल पसंद के आदी हो चुकल बाड़ें. बीतल बीस भा पचास बरीसन में चुने के कवनो सुविधा सिनेमा के भोजपुरी परदा पर ना मिलल. हमेशा से बस एके तरीका से, कमोबेस एके माहौल वाली, एके जइसन कथानक, विषयवस्तु के इर्द-गिर्द भोजपुरी फिलिम बनत रहेले जवना से दर्शकन का नजरिओ पर कवनो खास फरक ना पड़ल. भोजपुरी सिनेमा भोजपुरी ला बने का बजाय खाली बाजार ला बनावल जाले. नतीजा बा कि दर्शकन पर भा बड़हन पैमाना पर आपन पकड़ बनावे में नाकाम साबित होखत बिया. साउथो के फिलिम में अश्लीलता के बाढ़ बा त अदूर गोपालाकृष्णनो बाड़ें, बांग्ला में बाजार ला फिलिम बा त गौतमो घोष बाड़न. मराठी में फुहड़ हास्य के भरमार बा त श्वासो बा. भोजपुरी में अइसन काहे नइखे होखत? शायद एहले कि दोसरा क्षेत्रीय सिनेमन का तरह लगाव नइखे लउकत.

इहे सही समय बा. बड़हन बजट आ हवाई बाजार के भरम का भ्रम छोड़ के छोट बजट में नया प्रयोगधर्मी भोजपुरी सिनेमा के नया शुरूआत कर सकेलें. बाकिर तब बजट के बड़हन हिस्सा नायक के हवाले कइला का बदले शोध, परिकल्पना, कैमरा, संपादन आ कहानी पर करे के पड़ी. लाइट्स आ संगीत के इस्तमालो सीखे के पड़ी. तब जाके ‘पिपली लाइव’ आ ‘वेलडन अब्बा’ के परिकल्पना भोजपुरी सिनेमा के सोंच बन सकेला. भोजपुरी सिनेमा के मुम्बई में न्याय नइखे मिले वाला. ओकरा हिन्दी भा दोसरा क्षेत्रीय फिलिमन से चोरावल विषयवस्तु से नकलचीए के दर्जा हासिल हो पाई. एकरा ला मुम्बई के मोह छोड़ पटना भा गोरखपुर का ओर चले के पड़ी. तब जाके भोजपुरी के हक़ खातिर सही पहल हो पाई. संगहीसंगे नया आ सही प्रतिभा के तलाशो पूरा होखी आ कुछ गिनल चुनल भोजपुरी के सितारन का चमको पर हिन्दी सिनेमा जइसन प्रभाव लउके लागी आ तब भोजपुरी सिनेमा के सितारा सही मायने में चमक उठी.



सुधीर सिंह उजाला मैजिक टीवी के एजीएम रह चुकल बानी. ओहसे पहिले साल २००७ से २०११ का बीच फिल्म निर्माण से जुड़ल रहनी. ओहसे पहिले ईटीवी, अमर उजाला दैनिक अखबार, दैनिक जागरण वगैरह से जुड़ल रहनी. हिंदी अंगरेजी आ भोजपुरी के जानकार सुधीर सिंह वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर से वनस्पतिशास्त्र में एमएससी कइले बानी.
आजुकाल्हु बनारस से प्रकाशित दैनिक अखबार फास्ट न्यूज इंडिया के चीफ एडीटर बानी.

मॉरीशस में भोजपुरी अस्मिता आजुओ मौजूद बा

१७८ बरीस पहिले जब गिरमिटिया मजदूर बिहार का भोजपुरी पट्टी से मॉरीशस गइलें त ओह लोग के देहे ना बलुक पूरा भोजपुरी रीति रिवाज भाषा आ संस्कृतिओ ओह लोग का साथ ही गइल, आजुओ मॉरीशस में भोजपुरी अस्मिता मौजूद बा.

मॉरीशस के इतिहास आ वर्तमान असल में बिहारी मूल के लोगन के इतिहास आ वर्तमान हवे, भोजपुरी के शब्दावली, मुहावरा, कहाउत, पहेली, लोक साहित्य, पारंपरिक आ संस्कार गीत सब कुछ आजुओ सुरक्षित बा.

ई कहना बा मॉरीशस यात्रा से लवटल बिहार भोजपुरी अकादमी के अध्यक्ष डा॰ रविकांत दुबे के. अपना मॉरीशस यात्रा में डा॰ दुबे अनके सरकारी आ गैर सरकारी आयोजनन में शामिल भइलें. ओहिजा उनुकर मुलाकात मॉरीशस के उप प्रधानमंत्री अनिल बेचू, कला संस्कृति मंत्री मुक्तेश्वर चुन्नी, शिक्षा मंत्री बसनंत बनवारी, स्पीकर कैलाश प्रयाग, मॉरीशस में भारत के उच्चायुक्त टी॰पी॰ सीतारमण, सांसद कल्याणी जुग्गु वगैरह से भइल. झारखंड विधानसभा स्पीकर सी॰पी॰ सिंह का संगे डा॰ दुबे मॉरीशस संसद के कार्यवाही विशेष दीर्घा से देखलन जहाँ ओह लोग के स्वागत स्पीकर कइलन आ सांसद मंत्री मेज थपथपा के समर्थन जतावल.

एह यात्रा का दौरान महात्मा गाँधी संस्थान से प्रकाशित पुस्तक “भोजपुरी कविताएँ” के लोकार्पण कइलन. पटना के निशिकांत मिश्र संपादित पत्रिका “बतिया निकलल बा” के लोकार्पणो भइल. एह बीच मॉरीशस में आयोजित पहिला अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में डा॰ दुबे के विशेष रुप से सम्मानित कइल गइल. महोत्सव में पाखी हेगडे, कल्पना पटवारीम अभय सिन्हा, राजकुमार आर पान्डेय समेत भोजपुरी फिल्म जगत के अनेके गणमान्य लोग आ स्वामी उमाकांतानंद मौजूद रहलें. कल्पना के नयका म्यूजिक अलबम “दि लीगेसी आफ भिखारी ठाकुर” के लाँचिगं उपप्रधानमंत्री अनिल बेचू आ मुक्तेश्चवर चुन्नी का हाथे कइल गइल. पाखी हेगडे आपन जन्म दिनो एह साल ओहिजे मनवली.

मॉरीशस गइल एह प्रतिनिधि मंडल में झारखंड स्पीकर सीपी सिंह, भाई जी भोजपुरिया, बिहार जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन, पाखी हेगडे, कल्पना पटवारी, राजकुमार पाण्डेय, अभय सिन्हा, बिहारी खबर के अश्विनी कुमार, शैलेश सिन्हा, कुलदीप श्रीवास्तव समेत अनेके लोग शामिल रहल.


(स्रोत : बिहार भोजपुरी अकादमी)

दुनिया भर में गूँजी अब भिखारी ठाकुर के वरासत

आ एह वरासत के गूंज सुनल जाई कल्पना पटवारी का आवाज में.

आसाम के लड़की भोजपुरी के लोकप्रिय गायिका कल्पना पटवारी ऊ काम कर देखवली जवना के कोशिश कबो कवनो दोसर गायक ना कइलन. कल्पना पटवारी के गावल गीत भिखारी ठाकुर के मूल गवनई के जस के तस परोसत बाड़ी सँ. जे भिखारीओ ठाकुर के सुनले बा आ कल्पना के एह नयका अलबम “दि लीगेसी आफ भिखारी ठाकुर” के सुनत बा ओकरा ई बात माने में इचिको हिचक नइखे होखत कि कल्पना भिखारी ठाकुर के गवनई से पूरा न्याय कइले बाड़ी. वइसे विशुद्धता वादी कह सकेलें कि एकाध जगहा कल्पना के उच्चारण जरूर गड़बड़ा गइल बा बाकिर एकर दोष हम कल्पना के ना देके ओकरा के देब जे एकर ट्रांसक्रिप्ट लिखले होखी.

भिखारी ठाकुर के जीवन के कहानीओ एह गीतन में मौजूद बा. उनुका जनम के कहानी, उनुका लड़िकाई के दिन, कइसे पाठशाला में मन ना लागल त भाग के बंगाल के मिदनापुर चहुँपले. फेर कइसे ओहिजा पेट पाले खातिर आपन पुश्तैनी धंधा, लोग के हजामत बनावल, शादी बियाह में नाई के जिम्मेदारी उठावल कइलें, आ एही बीच जब रामलीला आ बगाल के लोक नाटक जात्रा देखलें तब उनुका मन में एगो सपना जागल वइसने कुछ कर देखावे के. इहे सपना लिहले गाँवे लवटलें आ अपना दोस्त भगवान दास बनिया से अक्षर ज्ञान सीखलें जेहसे कि गोस्वामी तुलसीदास के रामचरित मानस पढ़ सकसु. जस जस पढ़त गइले राम में मन लागे लागल आ एक दिन जब अपना संगी साथियन के बिटोर कर के गांव मे पहिला बेर भोजपुरी में रामलीला के मंचन कइले त सगरी गाँव वाह वाह कर उठल. मंडली बनत गइल बाकिर देखते देखत नाच मंडली में बदल गइल. बाप महतारी के वर्जना रोक ना पवलसि भिखारी ठाकुर के आ ऊ चल दिहलें ओह राह पर जवना पर उनुकर सही मूल्याकन उनुका जिनिगी में त ना भइल बाकिर बाद में जरूर उनुका के भोजपुरी के शेक्सपियर के सम्मान दोसर केहू ना खुद दर्जन भर भाषा के ज्ञानी आ महान साहित्यकार पंडित राहुल सांस्कृतयायन दिहलें.

अब ओह महान भोजपुरिया लाल भिखारी ठाकुर के जीवनी आ रचना पेश करे के जीवट देखवले बाड़ी कल्पना पटवारी आ एह अलबम के गीत सुनला क बाद हम त इहे कहब कि कल्पना भिखारी ठाकुर के रचना से, उनका शैली से पूरा न्याय कइले बाड़ी. एह अलबम के संगीत आधुनिक होखला का बावजूद भिखारी ठाकुर के संगीत शैली के दोहरावत लागत बा. अलग बाति बा कि भिखारी ठाकुर के मर्दानी आवाज कल्पना पटवारी के आवाज में खोजल गलत होई. बाकिर हर भोजपुरी प्रेमी का घर मे एह अलबम के एगो कैसेट होखल जरूरी होखे के चाहीं आ ओहू लोग के जे भोजपुरी के बेंवत से सहमत नइखे. उहो लोग सुने कि भोजपुरी के मिठास कइसन होले.

एह अलबम के परिकल्पना खुद कल्पना पटवारी के बा. जे अपना आइकन भूपेन हजारिका के राह चलत भोजपुरी में वइसन आइकन खोजे निकलली त खोज आ के ठहरि गइल भिखारी ठाकुर पर. भोजपुरी में भिखारी ठाकुर ले बढ़ के कवनो लोक गायक नइखे भइल. जनता से जमीनी स्तर पर जुड़ल भिखारी ठाकुर जन भावना के, समाज के समस्या के जतना जियतार तरीका से पेश कइलन वइसन दोसर केहू ना कर पावल. एह जगहा महेन्दर मिसिर के नाम ना लिहल अन्याय हो जाई बाकिर महेन्दर मिसिर के रचना आ भिखारी ठाकुर के रचना अलगा अलगा स्तर पर बा. महेन्दर मिसिर जवन रचले तवन अपना प्रेम में ओकरा विरह में. भिखारी ठाकुर जवन रचलें तवन समाज के पीड़ा देख के, ओह पीड़ा के सहज समाधान खोजे का फेर में. एह मामिला में भिखारी ठाकुर के महत्व अतुलनीय हो जात बा.

कल्पना पटवारी के एह अलबम, “दि लीगेसी आफ भिखारी ठाकुर” के पिछला दिने लंदन में विश्व स्तरीय म्यूजिक कंपनी वर्जिन रिकार्ड्स, ईएमआई म्यूजिक का तरफ से रिलीज कइल गइल. दुनिया भर के म्यूजिक रिटेल आउटलेट, मॉल. आ प्लानेट एम के स्टोरन में बिकात एह अलबम के दाम एकसौ पंचानबे रुपिया राखल गइल बा. भोजपुरी के ई सबले महँग आडियो कैसेट अपना दाम से बेसी के वजन रखले बिया आ पूरा उमेद बा कि एह अलबम से भोजपुरी संगीत भोजपुरी के मौजूदा लोअर क्लास सर्किल से उपर उठि के मिडिल आ अपर क्लास ले आपन पहुँच बना ली.

भिखारी ठाकुर के रचना आ कल्पना पटवारी के आवाज के एह जुगलबंदी के सफलता खातिर अँजोरिया के हार्दिक शुभकामना बा.
– संपादक, अँजोरिया


एह अलबम का बारे में बेसी जानकारी खातिर

गुदगुदी कि बेहयाई

– पाण्डेय हरिराम


फिल्म अभिनेत्री रेखा के नाम राज्य सभा खातिर सरकार मनोनीत कइले बिया आ जया बच्चन ओहिजा पहिले से चुना के आइल बाड़ी. एकरा के लेके मीडिया में बहुते चरचा बा. रसगर मजगर कहानी गढ़ाए लागल बा. ऊ कहाँ बइठी लोग, एक संगे बइठी लोग कि ना, बइठी लोग त बतियाई कि ना, वगैरह वगैरह.

एह सिलसिला में एगो प्रसंग बतावे पड़त बा. ओह जमाना में ना त ‘पिपली लाइव’ रहे ना ही बटुकनाथ एपीसोड. जमाना रहे जब सन्मार्ग के सम्पादक यशस्वी सम्पादक रामअवतार जी गुप्त रहनी. ओहि घरी सन्मार्ग में एक दिन एगो ‘बोल्ड’ तस्वीर छप गइल. अब पूरा स्टाफ के खिंचाई हो गइल. गु्प्त जी अपना डिप्टी के आदेश दिहनी कि दुबारा अइसन ना होखे. ओह दिन एकर कारण समुझ में ना आइल रहे. बस अतने समुझल गइल कि ‘नैतिकता के प्रति बेहद निष्ठावान आदमी हईं एहसे ई आदेश दिहनी.’ ओकरा कुछ दिन का बाद के घटना ह जब प्रोफेसर मटुकनाथ के प्रेमिका जूली के उनुकर पत्नी सरेआम पीटत रही आ टेलीविजऩ चैनल वाला सभ कवनो प्रायोजित कार्यक्रम जइसन ओकर लाइव प्रसारण करत रहलें. फेर बाद में लूप में डालके बेर-बेर देखवलें. अचरज ना पिटाई में रहल ना टीवी चैनलन का बेहयाई में. अचरज ओह गुदगुदी में रहल, जवन मन के भितरे होत रहुवे. अचरज रहे कि ई सब देखि के मन ना पसीजे, दुख ना उपजे. चरमसुख जइसन कुछ मिलत अस लागेला. अइसने सुख तबो मिलत रहे जब अखबारन में आ बाद में पत्रिकन में “तस्वीर” देखल करीं सँ. बार-बार देखल करीं सँ.

याद बा रउरा? घर के बड़की पतोहु सोनिया गांधी के दिवंगत देवर के पत्नी आ घर के छोटकी पतोहु मेनका गांधी के घर से निकाल दिहल गइल रहे. सामान सड़क पर फेंकाइल पड़ल रहे. एगो छोट लड़िका सामानन का साथे खड़ा रहुवे. याद बा आपके मन कइसन मुदित होत रहे ई तस्वीर देखि के? मन बावरा ह. तरह-तरह के कल्पना करत रहेला. अबही ले ऊ तस्वीर मन में बा. अबहियो ऊ आँख लगवले रहेला कि संसद का भीतर दुनु पतोहियन का नजर कबो मिलेला कि ना. खबरन पर नजर रहेला, छोटकी पतोहु का घरे पतोहु आवत बिया त बड़की पतोहु के कहना कइसन बा?

अचरज होला कि बेगानी शादी में अब्दुल्ला काहे दीवाना हो जाला. अरे शादी में होखे त होखे, शादी टूटे-बिखरे लागेले तबहियो चटखारा लेबे में मजा आवेला. केहु फुसफुसा के कहले रहल, देश के सबले बड़का औद्योगिक घराना के पतोहु एगो मिस इंडिया रहल से नाराज बाड़ी. बाड़ी त रहसु, हमरा बला से. लेकिन अचरज बा कि मन में गुदगुदी भइल. दिल में एगो लहर उठल. ऊ फुसफुसाहट एक कान से सुननी आ फेर तुरते दोसरको कान लगा दिहनी. परमानंद एकरे के कहल जात होखी. अब सभे केहू अखबार के कोना वाला कॉलम में पढ़त रहुवे कि मिसेस शाहरुख खान माने कि गौरी एह घरी प्रियंका चोपड़ा नाम के एगो फिल्म अभिनेत्री से नाराज बाड़ी. सुनत बानी कि ऊ कुछ अउरी अभिनेता पत्नियन के अपना नाराजगी में साझेदार बना लिहले बाड़ी. बावे त खराब. लेकिन का करीं कि मन मंद-मंद मुसुकाता. पुरान खाज के खजुलावे जइसन सुख मिलत बा. सवतिया डाह के खबर जइसन सुख परनिंदो में ना मिले. अब फेर बात आवत बा संसद में. जया बच्चन के घर के सामने वाला आंगन में बइठल बोफोर्स नाम के भूत 25 साल बाद ले- देके टरल. राहत के सांस लिहले दुइयो दिन ना बीतल कि आपन पत्रकार भाई-बहन लोग उनुका पिछवाड़ा वाला अँगना के फोटो लेबे लगलें. पुछनी त कहल कि पिछला दरवाजा से एगो अउर भूत घुस आइल बा. रेखा नाम के. रेखा जी, कुछ ही दिन में माननीय सांसद हो जइहें. बस शपथ लिहला के देर बा. लेकिन लोग का-का चुटकुला सुनावत बाड़े. एगो आदरणीय मित्र लिखलन, जवन अमिताभो ना कर पवलन से सरकार कर दिहलसि, जया आ रेखा अब एके “हाउस” में बाड़ी. बाद में देखनी कि मित्र के कल्पनाशीलता फेसबुक नाम के जंजाल में पसर गइल बा. सभे अइसने कुछ ना कुछ लिखत बा साथ ही एगो इस्माइली चिपका देत बा.

गुदगुदी असर देखावत बिया. केहू कहल, ‘जे अमिताभ के बोफोर्स में झूठे फंसवले रहुवे, ओही लोगन के करतूत बा कि अब बोफोर्स से छूटले त राज्यसभा में फंसा दिहलें.’

लोग इन्तजार करत बा कि कवना दिने दुनु देवी आमने-सामने होंखीहें. एगो कल्पनाशील पत्रकार मित्र के सलाह मिलल, ‘राज्यसभा के सिटिंग अरेंजमेंट के ग्राफिक बनवाकर ओहमें देखावऽ कि जया कहां बइठीहन आ रेखा कहवाँ बइठीहन. ओकरा के वेबसाइट पर लगवाव. देखऽ कइसन हिट होखत बा.’ कल्पना के घोड़ा धावत बाड़ें. लोग आंख मूंदले मंद-मंद मुसुकात बा. एह महंगाई के जमाना में लोगन के फोकटिया सुख मिलत बा. अचरज बा कि केहू दुखी नइखे. रउरा अगर दुख बा, त आपन इलाज करवाईं. ई मटुकनाथ उर्फ चौराहा पर प्रेम के गलीज जमाना ह. हमनी के मीडिया का लगे इहे सब सुनावे लायक बा आ इहे हमनी के मूल्यबोध हो गइल बा. हो सकेला हमार एह विरोध के हमार पाठक विरोध करसु बाकिर ई त तय बा कि आज पीढ़ी मूल्यहीनता के गहिरा गर्त में गिर चुकल बा आ खास किस्म के बेहयाई के हमनी का तरक्की के चोला पहिरावत बानी.
(४ मई २०१२)



पाण्डेय हरिराम जी कोलकाता से प्रकाशित होखे वाला लोकप्रिय हिन्दी अखबार “सन्मार्ग” के संपादक हईं आ उहाँ का अपना ब्लॉग पर हिन्दी में लिखल करेनी.

‘सुरो का महासंग्राम’ में अपना राज्य के नेतृत्व पावे के लड़ाई

एह हफ्ता महुआ टी॰ वी॰ पर प्रसारित ‘सुरो के महासंग्राम’ का एपिसोड में राज्य के टीम में चुनाये के लड़ाई देखावल गइल. देख के लागल कि कइसन कइसन अनगढ़ हीरा ले के एह शो के शुरुआत होखत बा आ धीरे धीरे उहे अनगढ़ हीरा पालिश्ड हो के कतना चमकदार बन जइहें इहो देखे लायक रही. शो में जवन बात सबले चटक लउकल ऊ कि बहुते प्रतिभागी वइसन गाना चुनत रहले जवना के आम आदमी के अपना परिवार का बीच बइठ सुने में अहस लागी. सोचे लगनी कि एह हालात के जिम्मेदार केकरा के मानल जाव. गायक गायिका त बस दोसरा के लिखला के आपन आवाज भर दे देलें. फूहड़ गीत लिखे के असल दोष त ओह गीतकारन के दिहला के जरूरत बा. ना त ऊ लिखते ना केहु गाइत. बाकिर कहल जा सकेला कि फूहड़ गीतन के लोकप्रियता दिआवे में गायक गायिको लोग के हाथ होला जे अपना आवाज के गलत इस्तेमाल करत वइसनका गीत के लोकप्रियता दिआवे के कोशिश करेले. घर में बाजे चाहे ना, ट्रक, ट्रैक्टर, टैक्सी रेला ठेला में वइसन गीत खूब सुने के मिल जाला काहे कि हमनी के सुभाव हो गइल बा कि भीड़ का बीच हमनी का आदमी ना रहि जाईं.

खैर देखनी कि जब कबो वइसन गीत आवत रहे त मंच पर बइठल निर्णायक लोग इशारा से रोक देत रहे आ कहत रहे कि कूछ अउर गावऽ. एह हफ्ता के मेगा आडिशन में सब कुछ बहुते अनौपचारिक जइसन लागल. एह मेगा आडिशन से चुनाइल लोग अगिला हफ्ता से होखे वाला प्रतियोगिता में प्रतिभागी बनीहे. शो के एंकर भा सूत्रधार मनोज तिवारी बाड़े. प्रतिभागियन के चुने वाला निर्णायक मण्डल में संगीतकार सतीश, अजय आ धनंजय मिश्रा रहले.

भोजपुरी के सबले बड़ ताकत एकर गीत गवनई हवे काहेकि एही सहारे भोजपुरी आम आदमी का बीच रचे बसेले. उमीद कइल जाव कि महुआ टीवी भोजपुरी गीत गवनई के चमकदार पहलू सामने ले आई आ फूहड़ गीतन के प्रतियोगिता से बाहर राखी. हँ भोजपुरी गीत गवनई से रसिक अंदाज के हटावल ना जा सके आ ओकरा बिना भोजपुरी गीत गवनई भजन बनि के रहि जाई इहो साँच बा.

सुरों का महासंग्राम महुआ टी॰ वी॰ पर हर शुक आ शनिचर के रात 8.00 बजे से होखत बा.


(प्रशांत निशांत के भेजल रपट का आधार पर)