सीमा सिंह निरहुआ साथे फेरू अइहें

सिनेमा भोजपुरी के डांसिंग क्वीन सीमा सिंह अब माथस्टार दिनेश लाल यादव संगे ‘दूध का कर्ज’ फिलिम में नजर अइहें. एह फिल्म ला एगो धाँसू आयटम नंबर सीमा सिहं पर पिछला दिने फिल्मावल गइल. निर्माता आलोक कुमार आ निर्देशक हिमांशु के एह फिल्म खातिर ई आयटम नंबर मुंबई के मड आईलैंड में फिल्मावल गइल. दिनेशलाल यादव संगे काम करे के सीमा सिंह पूरा उछाह में बाड़ी.

सीमा एकरा अलावे निर्देशक बाली के ‘इज्ज़त’ फिलिमो में बाड़ी जवना के नायक बाड़न दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’.


(शशिकांत सिंह, रंजन सिन्हा के रपट)

दुलहिन बने ला बेचैन बाड़ी गुंजन पंत

सिनेमा भोजपुरी के चर्चित अभिनेत्री, मोहक मुस्कान के मल्लिका गुंजन पन्त अनेके फिलिमन में शादी शुदा महिला के किरदार निभा चुकल बाड़ी बाकिर असली जीवन में दुलहिन बने के इंतजार लागल बा गुंजन के. कहेली कि जबहियों कवनो फिलिम के शूटिंग में दुलहिन के ड्रेस पहिरेली त लागेला कहीं सचहुं के शादी त नइखे होकत आ गुंजन असमंजस में पड़ जाली.

एगो सवाल के जवाब में गुंजन बतवली कि कहीं असलीओ शादी में उनुका निर्देशक के ‘एक्शन – कट – ओके’ के इंतजार मत होखे लागो. हालांकि दुलहिन बने के चाहत का बावजूद गुंजन के कहना बा कि अबही पाँच साल ले त शादी नइखे करे के काहे के अतना जल्दी ऊ अपना चहेता दर्शकन के दिल तूड़ल ना चहीहें.

पिछला दिने गुंजन ‘लक्ष्मण रेखा’ के शूटिंग पूरा कइली. एह फिल्म के निर्माता अशोक गुप्ता अउर बृजेश सिंह हउवें आ निर्देशक हउवें मनोज गिरी. फिल्म में गुंजन के नायक बाड़ें विनय आनद.


(अपना न्यूज के रपट)

भोजपुरी सरोकारन से जुड़ल पत्रिका भोजपुरी पंचायत

आजु जब भोजपुरी के पत्रिका प्रकाशन के स्थिति खराब चलत बा आ शायदे कवनो पत्रिका बिया जवना के नियमित प्रकाशन आ उहो समय पर हो रहल बा. एह दिसाईं दिल्ली से प्रकाशित होखे वाली पत्रिका भोजपुरी पंचायत बधाई के हकदार बिया कि अपना शुरुआत से अबले ओकर चारो अंक एकदम समय पर प्रकाशित होखत आइल बा.

हर नया अंक में एह पत्रिका के जुड़ाव भोजपुरी सरोकारन से बढ़ल जात बा. अलग बात बा कि साथही साथ पत्रिका के अपना व्यावसायिको हित के संरक्षण करे के पड़त बा. सब कुछ का बावजूद पत्रिका के कलेवर आ सामग्री के चयन में सुधार होखत बा. ई बात हम एहसे नइखी कहत कि अब एह पत्रिका में अँजोरिया पर प्रकाशित बतकुच्चनो के चुनल कड़ी प्रकाशित होखत बावे. अब एह पत्रिका में भोजपुरी रचना आ भोजपुरी सरोकार साफ झलके लागल बा. एह सब का बावजूद हमार निहोरा रही कि एह पत्रिका में विचारणीय विषय चाहे जवन राखल जाव साहित्यिक रचना भोजपुरीए में दिहल जाव त नीक रही.

सितम्बर के अंक अगस्त का आखिरी सप्ताह में नेट पर उपलब्ध हो गइल रहे. अगर एकरा के एक हफ्ता अउर विलम्ब से प्रकाशित कइल गइल रहीत त एहमें दिल्ली में पिछला २९ अगस्त के भइल धरना प्रदर्शन के खबर आ रपट सामयिक हो जाइत.

सब कुछ का बावजूद एह पत्रिका के सफलता खातिर अँजोरिया परिवार का तरफ से मंगल कामना हमेशा कइल जाई.

पत्रिका के सितम्बर के अंक पढ़े खातिर रउरा नेट से डाउनलोड कर सकीलें.
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विक्रांत बनलन बंटी बवंडर

सिनेमा भोजपुरी के एक्शन स्टार विक्रांत के एगो नये रूप अब दर्शकन के देखे के मिले वाला बा. मुन्ना बजरंगी में उनकर जबरदस्त एक्शन लोग खूबे सरहले रहुवे. अब लोग विक्रांत के बंटी बवंडर का रूप में देखी.

अबहीं एह फिलिम के बारे में बेसी नइखे बतावल जात कि ई कइसन फिलिम होई बाकिर विक्रांत इशारा कइलन कि एहमें मुन्ना बजरंगीओ से अधिका खतरनाक एक्शन देखे के मिली. एह फिल्म के शारदा पिक्चर्स एंड इंटर टेनमेंट के बैनर तले निर्माता एस. बी सिंह आ सह निर्माता धीरेन्द्र ठाकुर बनावत बाड़ें आ निर्देशन करत बाड़न कन्यादान, प्रतिज्ञा जइसन सुपर हिट फिलिमन के निर्देशक रहल सुशील कुमार उपाध्याय. फिल्म के नायिका के नाम अबहीं तय नइखे.


(अपना न्यूज के रपट)

रमाकांत प्रसाद अउर विराज भट्ट के नया रिकार्ड

सिनेमा भोजपुरी में निर्माता निर्देशक रमाकांत प्रसाद आ अभिनेता विराज भट्ट के टीम एगो नया रिकार्ड बनवले बिया. ई टीम अबहीं ले नौ गो फिलिम कइले बा आ नौ के नवो सुपर डुपर हिट भइल बाड़ी सँ. ई पहिलका अइसन टीम बा जवन अतना फिलिम एक संगे कइले बा.

एह नवो फिलिमन के नाम ह ‘लागल रहा ए राजा जी’, ‘दिवाना’, ‘दाग़’, ‘दिलजले’, ‘बारूद’, ‘जान तेरे नाम’, ‘जानवर’ आ ‘हिम्मतवाला’.


(शशिकांत सिंह रंजन सिन्हा के रपट)

राज ठाकरे के जवाब में मराठी फिल्म के शूटिंग शुरू कइलन रवि किशन

भोजपुरी के सदाबहार अभिनेता रवि किशन पिछला अतवार का दिने अपना मराठी फिल्म “मध्यवर्ग” के शूटिंग मुंबई के एसजे स्टुडियो में शुरू कइलन. कहेवाला एकरा के राज ठाकरे के बिहार विरोधी बयान के मुँहतोड़ जवाब कहत बाड़ें बाकिर रवि किशन के कहना बा कि एह बात के राज ठाकरे के बयान पर पलटवार बतावल गलत होखी काहे कि कवनो कलाकार जाति धर्म भा प्रान्त के भेद ना माने.

मराठी फिल्म “मध्यवर्ग” में रविकिशन नायक बनल बाड़ें आ ई पहिला मौका बा जब कवनो भोजपुरी अभिनेता मराठी फिलिम के नायक बनल बा. फिल्म के निर्देशक हैरी फर्नांडीज कहलन कि रवि किशन फर्राटा से मराठी बोलेलें आ उनकर टोन एकदम मराठीए मानुष जस लागेला. दोसरे एह किरदार लायक सबले फिट रवि किशन रहलन एहसे ऊ रविकिशन से संपर्क कइलन त रवि किशन तुरते तइयार हो गइलन कि नेतवन के आपन काम करे दिहल जाव आ हमनी का आपन काम करत रहीं जा.

रविकिशन बतवलन कि फिलिम त ऊ बहुत पहिलही साइन कइले रहलन बाकिर अपना व्यस्तता का चलते सितम्बर के तारीख दिहले रहलन जब अब अपना पहिले से तय तारीखे पर शुरू भइल बा. कहलन कि यूपी बिहार के लोग के मराठीओ भाषा से लगाव बा. दोसरे ऊ खुद मुंबई में अपना गृहप्रांत उत्तर प्रदेश से अधिका रहल बाड़ें.


(स्रोत – उदय भगत के रपट)

बतकुच्चन ‍ – ७५


बेर, बेरा, बारी आ बारी. बारी दू बेर आइल एकरो कारण बा. जवन आगा चल के बताएब. बेर मतलब कि आवृति, माने कि हाली. कव हाली भा कव बेर. कतना हाली भा कतना बेर. बाकिर बेर बेरा के बिगड़ल रूपो हो सकेला. बेरा मतलब समय. सबेरा, गदबेरा, एहबेरा, ओह बेरा, अबेरा, कुबेरा वगैरह. एह सब उपयोग में बेरा के मतलब समय से बा. बाकिर ई बेरा बिगड़ के कई जगहा बेर हो जाला आ मतलब उहे रहेला. सबेर, अबेर, कुबेर, गदबेर, एह बेर, ओह बेर में मतलब आवृति से ना हो के समय से होला. कई बेर मतलब ना बदले बाकिर कबो कबो बदल जाला. जइसे कि कुबेरा के कुबेर कहला से हो सकेला कि कुछ भ्रम हो जाव. कुबेर देवता लोग के खजांची हउवें भा रहलें. एह बारे में हमार जानकारी, हर जानकारी का तरह थोड़ही बा. हम अपना के कुबेर माने कि कुबेरा में समेट के राखब. कुबेरा खातिर कई बेर अबेरा के इस्तेमाल कर दिहल जाला बाकिर ठीक से देखीं भा सोचीं त कुबेरा आ अबेरा साफ अलग अलग होला. जब कवनो बात बिना समय के, कुसमय में हो जाव त कुबेरा कहल ठीक रही. अबेरा देर खातिर इस्तेमाल होखे क चाहीं. काहे कि कवनो जरूरी नइखे कि जवन अबेरा बा तवन कुबेरो होखे. देर रात के बिना पहिले से बतवले कवनो हित पाहुन आ जाव त कहल जाला कि कुबेरा आ गइलें. बाकिर समय दिहला का बाद देरी से आवसु त कहे के चाहीं कि अबेरा अइलन, अबेर कर दिहलन. ई त भइल अबेर कुबेर के बात. चलीं थोड़ीका सबेर आ गदबेरो के बतिया लिहल जाव. काहे कि पता ना कवन कारण बा कि जब जब संसद के बइठका होखे वाला रहेला तब तब कवनो बात अइसन कुबेरा में हो जाला कि बइठकी में बवाल हो जाला आ संसद में जवन काम सेकराहे हो जाए के चाहत रहे ओकरा में अबेर होखे लागेला. सेकराहे मतलब जल्दी होला बाकिर कबो कबो कुछ लोग एकर इस्तेमाल सबेरे खातिर कर देलें. काल्हु सेकराहे चल अइह. मतलब त इहे भइल कि काल्हु जल्दी चल अइहऽ. ई ना कि सबेरे सबेरे आ के दुआर ठोके लगीहऽ. सबेरा के इस्तेमाल कई बेर अबेरा से उल्टा मान के कर दिहल जाला हालांकि होखे के ना चाहीं. अबेरा के सही विलोम सेकराहे होखे के चाहीं सबेरे ना. सबेरा के विलोम होला गदबेरा. गदबेरा खातिर कबो अबेरा भा कुबेरा के इस्तेमाल ना कइल जाव. गदबेरा त हमेशा अपना समय पर आवेला, जइसे कि सबेरा आवेला. ना त सेकराहे, ना अबेरा, ना कुबेरा. गदबेर के इस्तेमाल गोधुलि वाला समय खातिर होला. बाकिर हमरा समुझ से, अब चाहे ई समुझ कतनो कम काहे ना होखे, गोधुलि आ गदबेरा मे तनी फरक होला. गोधुलि ओह समय के कहल जात रहे जब साँझि बेरा लवटत गाय बैल के झुंड के खुर से उड़त गरदा गुबार साँझि के बढ़त अन्हार से मिल जुल के गदबेर बना देत रहुवे. गरदा जइसन समय गदबेर. वइसे अलग बाति बा कि देश के संसद में हमेशा गदबेरे जइसन माहौल बनल रहेला. काहे कि ओहिजा बेरा कुबेरा हमेशा लोग अपना खुर से गरदा उड़ावे में लागल रहेला. अब एह सब बाति में अतना बाति निकल आइल कि बारी आ बारी के फरक अगिला बारी.

करप्शन से विकास होला आ रोजगार बढ़ेला

– जयंती पांडेय

गुरू लस्टमानंद मार कुर्ता धोती अपना बेग में से निकाल के बिगत रहले साफ करे के. अतने में राम चेला अइले. दंडवत क के पूछले का ह हो बाबा कई दिन से ना लउकलऽ. कहां चल गइल रहल ? बाबा कहले, दिल्ली गईल रहीं. राम चेला के चेहरा पर सवाल रहे जेकर माने कि काहे के? कहले भ्रष्टाचार पर सेमिनार रहे. गवई भ्रष्टाचार मुख्य विषय रहे. अब ऊ त अण्णा पार्टी बोलवले रहे आ पिटाई के खतरा रहे एही से कवनो चैनली पत्रकार त आइल ना. हार पाछ के हमनी के बोलावल लोग.

ओहिजा का बताई कि चारू ओर से करप्शन के प्रतिनिधि लोग आइल रहे. झारखंड से उत्तराखंड ले आ बंगाल से बनारस ले. सब ओर से भ्रष्टाचार. उहां सेमिनार के आयोजक कहले कि विचार के विषय बा कि, मीडिया में करप्शन के बड़ा बदनामी हो रहल बा. ई बदनामी के हटावे खातिर कुछ करे के चाहीं. सब तरह आ वेराइटी के करप्शनन के, के राय धइल कि मीडिया में सबके बात आवे ला. कभी करप्शन के आपन पीड़ा केहु ना कहल. एगो करप्शन के आपन नजरिया से सम्बद्ध लेख तइयार कइल जाउ आ मीडिया के दिहल जाउ. सब लोग तइयार हो गइल. एह में सबसे बड़हन बात ई बा कि सब बहस इमानदारी के नजरिया से होला. बेइमानी के एंगल से केहु ना देखे. आखिर ओकरो बात त सुने के चाहीं. मीडिया चाहे अण्णा पाटीं के लोग कहेला कि करप्शन बड़ा खराब चीज ह. एकरा से दूर रहे के चाहीं. लेकिन हमरा रात में अचानक करप्शन महराज सपना में अइले. हमरा से कहले लस्टमानंद, भले हम अबहीं तनी कमजोर पड़ गइल बानी, सब लोग कहऽता कि एकरा मेटा के रहब लेकिन केहु ई नइखे पूछत कि ओकर आपन नजरिया का बा.

करप्शन के बड़ा फायदा बा. सबसे बड़हन बात बा कि एह से विकास के गति तेज हो जाला. दासरका फायदा बा कि करप्ट आदमी सुस्त ना हो सकेला. जब देख तब जोगाड़ में लागल रहेला. कबहु शांति से ना बइठ सके. कुछ करे के चक्कर आ ओकरा बाद जवन क देहलस ओकरा के बचावे के आ खुद बांचे के चक्कर. इहे ना करप्शन से डबल विकास होला. जइसे मान ल कि कहीं एगो पुल बनऽता. अब इमानदारी से त पुल बनी लेकिन करप्शन से एगो पुल बनी आ ओही में से थोड़ सीमिंट, छड़, पइसा वगैरह निकाल के कहीं एगो बंगलो बनि जाई. अरे बंगला मान लऽ अपने बनल लेकिन विकास भइल न. एगो बजट में पुलो बन गइल आ बंगलो बन गइल. एतने ना इमानदारी से रोजगार मिलेला आ करप्शन रोजगार के संभावना बढ़ावे ला. अब मान ल कि एगो रोड बनऽता. ओह से एक बेर कुछ लोगन के रोजगार मिल गइल. अब करप्शन का करी कि ओह रोड के अइसन बनाई कि तीने महीना में टूट जाई. अब ओकरा मरम्मत के खातिर कुछ लोग के रोजगार मिल जाई. ओकर बजट आयी त फेर कवनो घर बन जाई चाहे गाड़ी किना जाई आ फेर तीन महीना के बाद सड़क दूट जाई त फेर इहे चालू हो जाई. रोजगार आ आमदनी के प्रचुर इंतजाम एगो सड़क से. हां कुछ लोग कहेला कि करप्शन चुप चोरी होला. अरे भाई अतना चुप चोरी होइत त अतना खबर कइसे फइलित ? एह से मीडिया से निवेदन बा कि ऊ करप्शन के पाछ छोड़ देऊ.

आपन भाषण खतम क के जब लस्टमानंद सांस लेहले तले ठीकदार साहेब उनका के फरका बोला ले गइल. का जाने का बात रहे.


जयंती पांडेय दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में एम.ए. हईं आ कोलकाता, पटना, रांची, भुवनेश्वर से प्रकाशित सन्मार्ग अखबार में भोजपुरी व्यंग्य स्तंभ “लस्टम पस्टम” के नियमित लेखिका हईं. एकरा अलावे कई गो दोसरो पत्र-पत्रिकायन में हिंदी भा अंग्रेजी में आलेख प्रकाशित होत रहेला. बिहार के सिवान जिला के खुदरा गांव के बहू जयंती आजुकाल्हु कोलकाता में रहीलें.

भोजपुरी भाषियन से केन्द्र सरकार के धोखाधड़ी

संसद के पिछला सत्र में तब के गृहमंत्री पी चिदम्बरम भोजपुरी में एगो वाक्य का पढ़ दिहलन कि लागल सरकार अब भोजपुरी के ओकर जायज हक देइए दिहलसि. चारो ओर से नगाड़ा बाजे लागल. बाकिर अबकी के सत्र में विचार करे वाला विषयन में भोजपुरी के विषय शामिले ना रहल.

बिहार भोजपुरी अकादमी के अध्यक्ष प्रो॰ रविकांत दुबे केन्द्र सरकार के एह आचरण के धोखाधड़ी बतावत खुलासा कइले बाड़न कि केन्द्रीय गृहमंत्रालय भोजपुरी के मान्यता के सवाल लटकावे खातिर बिहार सरकार आ ओकरा माध्यम से भोजपुरी अकादमी से नौ बिन्दूवन पर जानकारी मँगवले बिया. जवन सवाल पूछल गइल बा तवनन के उलूल जलूल बतावत प्रो॰ दुबे कहले बाड़न कि एह तरह के बेमतलब सवाल पूछला से इहे लागत बा कि केन्द्र सरकार भोजपुरी के मसला लमहर दिन ले लटकावल चाहत बिया.

भोजपुरी अकादमी के अध्यक्ष प्रो॰ दुबे ओह सवालन के जानकारी देत कहले बाड़न कि केन्द्र सरकार जानल चाहत बिया कि बिहार सरकार के कवन कवन विभाग भोजपुरी के इस्तेमाल करेले, भोजपुरी लिपि में कतना विद्यार्थी कवन कवन विषय के परीक्षा देबेलें, कतना लोग भोजपुरी बोलेला, कतना प्राथमिक आ मध्य विद्यालयन में भोजपुरी पढ़ावल जाले आ कतना विद्यार्थी एकरा कक्षा में बाड़ें, सरकार कतना भोजपुरी शिक्षक बहाल कइले बिया, आ कवना स्तर ले सरकारी काम में भोजपुरी के इस्तेमाल होला. एह सवालन से केन्द्र सरकार के मनसा साफ पता लागत बा.

एह दिसाईं प्रो॰ दुबे कहले बाड़न कि भोजपुरी अकादमी भोजपुरी इलाका के ओह सांसदन के विरोध करी जे लोग संसद में भोजपुरी के सवाल पुरजोर तरीका से नइखे उठवले.


(भोजपुरी अकादमी के विज्ञप्ति से)

संविधान के अठवीं अनुसूची में भोजपुरी शामिल करावे ला जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन

पिछला २९ अगस्त का दिने दिल्ली के जंतर मंतर पर एगो बड़हन धरना प्रदर्शन कर के जोरदार ढंग से भोजपुरी भाषा के संविधान के अठवीं अनुसूची में शामिल करावे ला सरकार पर दबाव बनावे के कोशिश भइल. ई धरना प्रदर्शन पूर्वांचल एकता मंच, भोजपुरी समाज दिल्ली, अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन आ भोजपुरी के अनेके संगठनन के अगुवाई में भइल. एहमें शामिल होखे ला देश भर से लोग आइल.

याद बा कि संसद के पिछला सत्र में तब गृह मंत्री रहल पी़ चिदम्बरम ई आस धरवले रहलें कि मानसून सत्र में भोजपुरी के संवैधानिक मान्यता खातिर बिल संसद में पेश कर दिहल जाई. बाकिर मानसून सत्र में सरकार एकरा ला कवनो पहल ना कइलसि जवना पर नाराजगी जतावे खातिर जंतर-मंतर पर भोजपुरिया बुद्धिजीवी लोग आ भोजपुरी प्रेमी सामाजिक कार्यकर्ता ई धरना प्रदर्शन कइलें.

एह मौका पर बोलत सांसद उमा शंकर सिंह बतवलें कि एह बाबत ऊ आ सांसद रघुवंश प्रसाद सिंह यूपीए अध्यक्षा सोनिया गांधी से मिलल रहुवे आ उनुका के सरकार के दिहल आस के याद करावल लोग. कहलन कि ई त हंगामा के भेंट चढ गइल लागऽता बाकिर विश्वास जतवले कि अगिला सत्र में ई मांग पूरा हो जाई. सांसद महाबलो मिश्र ने कहलें कि उहो एह मुद्दा पर नजर गड़वले बाड़न आ जी जान से लागल बाड़न अगिला सत्र में बिल जरूर पास हो जाई. भोजपुरी समाज दिल्ली के अध्यक्ष अजीत दुबे कहलें कि पिछलका सत्र में दिहल भरोसा का बावजूद एह सत्र के विचारणीय सूची में शामिल 32 गो बिल में भोजपुरी वाला बिल शामिल नइखे. अजीत दुबे सरकार से निहोरा कइलें कि भोजपुरी के ई माँग अगिला सत्र में जरूर पूरा कर दिहल जाव. पूर्वांचल एकता मंच के अध्यक्ष शिवजी सिंह के कहना रहल कि समय अब आर पार के लडाई के बा. सरकार आपन बात पूरा करे ना त गांव से लगायत दिल्ली ले जनांदोलन कइल जाई. अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन के महामंत्री डॉ. गुरुचरण सिंह कहलन कि पिछला चालीस साल से चलत एह कोशिश के सरकार हलुका मत ले ना त भारी पड़ी. कुँअर वाहिनी के अध्यक्ष प्रो.जीतेन्द्र स्वामीओ धिरवलें कि सरकार भोजपुरी भाषा, साहित्य अउर संस्कृति के कमतर आंके के कोशिश मत करे आ जल्दी से जल्दी भोजपुरी के 8वीं सूची में शामिल कर देव.

एह प्रदर्शन में शामिल हजारों लोग के संबोधित करे वालान में पी़ एऩ पाण्डेय, वी पी सिंह, संतोष पटेल, मनोज भावुक, निगम पार्षद सत्येन्द्र सिंह राणा, मुकेश सिन्हा, संजय सिंह, निर्मल सिंह, मुकेश कुमार सिंह, एल एस प्रसाद, रामेश्वर सिंह, श्रीकांत यादव, श्रीकांत विद्यार्थी, विनोद श्रीवास्तव अउर अमरेन्द्र सिंह वगैरह शामिल रहलें.

प्रदर्शन के आखिर में प्रधान मंत्री, गृह मंत्री आ लोकसभा अध्यक्ष के भोजपुरी भाषा के संविधान के अउवीं अनुसूची में शामिल करावे बाबत ज्ञापन देके धरना खतम भइल.


(स्रोत समाचारन से)