भारत के सबले लमहर रोड शो चलावत बावे अंजन टी वी

भोजपुरी मनोरंजन के क्षेत्र में भावी युग के अंजन टी.वी. चैनल भारत के मनोरंजन इंडस्ट्री के इतिहास में सबले लमहर रोड शो चलावत बा. एह रोड शो में उत्तर प्रदेश, बिहार आ झारखंड के शहर अंजन टी.वी. के लय पर झूमीहें सँ. 22 अगस्त से शुरू भइल ई रोड शो उत्तर प्रदेश के अनेके शहरन से गुजरत चालीस दिन ले सफर करी.

अंजन टी वी के चैनल के हेड मंजीत हंस के कहना बा कि जबहीं हमनी का कवनो बड़का आयोजन करीलें त एक एक आदमी के आशीर्वाद के कामना करीलें. एह रोड शो से हमनी का उत्तर प्रदेश, बिहार आ झारखण्ड के लोगन से आशीर्वाद लिहल चाहत बानी. चालीस दिन के एह रोड शो में ५००० किलोमीटर के सफर का दौरान चालीस गो शहर अइहें सँ. कहलन कि ई रोड शो ३० सितम्बर के खतम होखी. एह शो से चैनल अपना सगरी दर्शकन से स्थाई जुड़ाव स्थापित करे चाहत बा. सजल सजावल बड़का बड़का ट्रक, ट्राली आ स्टाइलदार जीप तय शहर के गलियन, सड़कन आ मुख्य जगहन पर नजर अइहें सँ. एह रोड शो में लाइव कार्यक्रम, प्रतियोगिता आ उपहार बाँटल मुख्य आकर्षण होखी.

अँजन टी.वी. के प्रबंध निदेशक दीपक राज भंडारी कहलें कि ऊ चैनल खातिर वइसने भावपूर्ण प्रतिक्रिया के लालसा राखत बाड़न जवन एह विशाल रोड शो से मिले के आशा बा.

पिछला २४ अगस्त के मुंबई में अंजन टीवी के लौन्चिंग भइल रहे.


(उदय भगत के रपट)

भोजपुरी सिनेमा में एगो नया आगाज़ हवे "देख के"

आजु जीवन के महाभारत ओह मोड़ पर बा, जहाँ सभे कृष्ण बने के तइयार बा, आ तलाश बाकी बा त बस एगो अर्जुन के जे समाज के रक्षा ला अपना रिश्तेदारो पर प्रहार करे से ना हिचके. सिनेमा भोजपुरीओ में ई बात ओतने सही बा. हर शख्स आँख में ढ़ेरे चिंगारी भरले एगो रौशनी जोहत बा. बाकिर एह चिंगारी के रौशनी में बदले त के ? जिंदगी के एही स्याह-सफ़ेद सच्चाई के पेश करे जात बिया निर्देशक निखिल राज के फिल्म “देख के”. फिलहारमोनिक एंटरटेनमेंट के बैनर तले बनत एह फिल्म से छोटका परदा के स्टार श्रीवर्धन त्रिवेदी आ खुद निखिल राज बड़का परदा पर दस्तक देबे जात बाड़न.

कथ्य अउर शिल्प के लिहाज़ से “देख के” भोजपुरी सिनेमा में एगो नया युग के आगाज करी. खटिया-पटिया अउर लहंगा-चुनरी के दलदल में धंसल भोजपुरी सिनेमा के वास्तविक सरोकारन से जोड़े के जवन कोशिश “देख के” में भइल बा ओहसे भोजपुरी सिनेमा के एगो नया माने आ पहचान मिले के उमेद बा. श्रीवर्धन त्रिवेदी आ निखिल राज के अलावे एह फिल्म में जाकिर हुसैन, वंदना वशिष्ठ, जीतू शास्त्री, निशाश्री आ महेंद्र मेवाती जइसन मंझल कलाकारन के साथ अवधेश मिश्रा, श्री कंकानी आ प्रकाश जैश जइसन खांटी भोजपुरिया खिलाड़ीओ बाड़ें.

म्यूजिको लेके एह फिल्म में एगो नया प्रयोग भइल बा क्लासिकल आ लोक संगीत के आधुनिक म्यूजिक शैली के मिठास में सुनावे के. बानी चक्रवर्ती आ पॉल जैकब जइसम संगीतकारन के धुन पर एह फिल्म के गाना कैलाश खेर, साउथ अफ्रीकन सिंगर सइयों बम्बा कमारा, श्रीलंकन सिंगर योगेश्वरण मनिक्कम, अउर साउथ इंडियन सिंगर बौंबे जयश्री गवले बाड़न.

निर्देशक निखिल राज के भोजपुरिया जोश आ जूनून के कुछ एह रूप में देखे के चाहीं …

दीया खामोश है मगर किसी का दिल तो जलता है

चले आओ जहां तक रौशनी मालूम होती है …


(स्पेस क्रिएटिव मीडिया के रपट)

सिनेमा भोजपुरी में पहिलका सिक्वल ‘‘प्रतिज्ञा 2’’ के शानदार लांचिग

सिनेमा भोजपुरी में पहिला बेर कवनो फिलिम के सिक्वेल बने जात बा आ एह सिक्वेल ‘‘प्रतिज्ञा 2’’ के शानदार लांचिग पिछला दिने मुंबई के टाईम एण्ड अगेन में कइल गइल. साल 2009 के ब्लॉकबास्टर फिलिम ‘‘प्रतिज्ञा’’ के सिक्वल ‘‘प्रतिज्ञा 2’’ के निर्माण जय माँ आसकामिनी फिल्मस् के बैनर तले निर्माता अनिल सम्राट के चचेरा भाई कांग्रेस नेता संजय यादव करत बाड़ें. निर्देशन के कमान फेरू सुशील कुमार उपाध्याए सम्हरीहें.

फिल्म में सुपरस्टार पवन सिंह, खेसारीलाल यादव आ अनिल सम्राट के प्रमुख भूमिका होखी. अभिनेता उपेन्द्र चौधरी आ विष्णु शंकर बेलू फिल्म में निगेटिव किरदार में रहीहें. मुहूर्त बिहार सरकार के पूर्व मंत्री ददन पहलवान नारियल फोड़ के कइलन. फिल्म के गीतकार-संगीतकार विनय बिहारी, लेखक संजय रॉय, छायांकन आर. आर. प्रिंस, आ प्रोजेक्ट डिजाइनर अनंजय रघुराज हउवें.

‘‘प्रतिज्ञा 2’’ के लांचिग पर महानायक कुणाल सिंह, निर्देशक असलम शेख, राजकुमार आर. पाण्डेय, हैरी फर्नाडिस, जगदीश शर्मा, के. डी., देव पाण्डेय, अनिल उपाध्याय, संतोष मिश्रा, मंजूल ठाकुर, अशोक त्रिपाठी ‘अत्रि’, विष्णु शंकर बेलू, सुजीत पुरी, निर्माता सुजीत तिवारी, अनिल कुशवाहा, शंभू पाण्डेय, नीरज डी. गुप्ता, रवि शर्मा, जे. नीलम, अभिनेत्री संभावना सेठ, मोनालिसा, रिंकू घोष, शुभी शर्मा, काजल राघानी, संगीता तिवारी, श्यामली श्रीवास्तव, काव्या, सुप्रेरणा सिंह, परी सिंघानिया, पुष्पा वर्मा, प्रिया शर्मा, अनुपमा, आफरीन, अपूर्वा, श्रीकंकानी, अभिनेता सुशील सिंह, विक्रांत सिंह, प्रकाश जैश, अवधेश मिश्रा, मनोज टाईगर, संजय पाण्डेय, ब्रजेश त्रिपाठी, गोपाल राय, रत्नेश वरनवाल, के. के. गोस्वामी, मटरू, मनोज द्विवेदी, विनोद मिश्रा, नरसू, प्रचारक प्रशांत निशांत, गीतकार प्यारेलाल यादव, संगीतकार मधुकर आनंद, विशाल जयसवाल, (उपाध्यक्ष, बीजेपी सिने युनियन) समेत अनेके गणमान्य लोग मौजूद रहल.


(प्रशांत निशांत के रपट)

व्यस्त बाड़न जय सिंह

भोजपुरी सिनेमा में आपन पहचान बना चुकल जय सिंह आज कल कईएक भोजपुरी फिलिमन में व्यस्त बाड़न. बतावेलें कि भोजपुरी फिलिम उनुका जीवन के हिस्सा बन गइल बा ऊ पूरा तन्मयता से आपन अभिनय करेलें.

जय सिंह “तोहर नइखे कवनो जोड़ तू बेजोड़ बाडू हो”,”चोरवा बनल दामाद”,”पयाल”,पवन पुरवैया”,”प्रेम लगन” वगैरह अनेके फिलिम कर चुकल बाड़ें. एह साल रिलीज भइल फिल्म “बजरंग” में जय सिंह के विलेन किरदार के लोग बहुते पसंद कइल.

“कोठा” फिल्म भी में जय सिंह एगो कुटिल दरोगा बनल बाड़न आ उनका उमेद बा कि एहु किरदार के दर्शकन से वइसने प्यार मिली जइसन उनुका “बजरंग” फिल्म में मिलल.


(भोजवुड न्यूज के रपट)

मनोज तिवारी के नयका एलबम ‘जय बिहार जय जय बिहार’

भोजपुरी मेगा स्टार आ बिहार के लल्ला मनोज तिवारी एगो नया अलबम में आपन बिहारी तेवर देखावे जात बाड़न. एह एलबम के नाम बा ‘जय बिहार जय जय बिहार’ जवना के जानल मानल संगीत कम्पनी विकॉन म्यूजिक जारी करत बिया. इहे कंपनी सदी के महानायक अमिताभ बच्चन आ मनोज तिवारी के आवाज. में ‘हनुमान चालीसा’ जारी कइले रहल. ‘जय बिहार जय जय बिहार’ के शूटिंग आजुकाल्हु बिहार के वैशाली आ दानापुर छावनी में चलत बा आ निर्देशक बाड़ें समर मुखर्जी. वैशाली ऐतिहासिक रूप से समृद्ध आ कला संस्कृति के दृष्टिकोण से बहुते धनी जगहा ह जहवाँ दुनिया के पहिला लोकतंत्र स्थापित भइल रहे. भगवान बुद्ध के एह धरती पर तीन बेर आगमन भइल रहे. ईसा पूर्व छठी सदी के उत्तर आ मध्य भारत में विकसित 16 महाजनपदन में वैशाली के खास महत्व रहे. नेपाल के तराई से लिहले गंगा के मैदान का बीच पसरल एह भूमि पर वज्जियन आ लिच्छवियन के संघ (अष्टकुल) गणतांत्रिक शासन व्यवस्था के शुरुआत कइले रहे. तब एहिजा के शासक जनता के प्रतिनिधि चुनत रहलें. लिच्छवियन के नगरवधु आम्रपाली के भला के भुला सकेला. एहिजा के अशोक स्तंभो देखे लायक बा.

मनोज तिवारी कहलें कि एह राज्य के ऐतिहासिक धरोहरन के अतना नजदीक से देखे के ई पहिला मौका रहल. एही क्रम में दानापुर छावनी जाए के मौका मिलल. एह छावनी के बीच से करीब तीन किलोमीटर ले रास्ता पटना के आरा से जोड़ेला आ एह रास्ता पर चले वाला हर आदमी सेना के अनुशासन में नजर आवेला. एहिजा शूटिंग के अनुमति लेबे खातिर जब मनोज तिवारी छावनी प्रमुख से मिललन त शूटिंग के अनुमति दे दिहलन आ जवाननो के पूरा वर्दी में उपलब्ध करवलें. फेर हमनी का मिल के राग छेड़ली जा कि ‘जय बिहार, जय जय बिहार’.


(शशिकांत सिंह, रंजन सिन्हा के रपट)

‘गोला बारूद’ में राजकुमार पांडे के नाम के ग़लत इस्तेमाल

सिनेमा भोजपुरी के नम्बर वन निर्देशक राजकुमार पांडे अपना प्रशंसकन के गोहार लगवले बाड़न कि फिलिम ‘गोला बारूद’ के उनकर निर्देशित फिलिम मत समुझे लोग. ऊ त बस एकर एगो गाना निर्देशित कइले बाड़न. राजकुमार पांडे के कहना बा कि ‘गोला बारूद’ दरअसल साल 2008 में ‘विधाता’ के नाम से देखावल जा चुकल बा आ अब ओही फिलिम के नाम बदल के देखावल जात बा. ‘विधाता’ के निर्देशन हैरी फर्नांडीज कइले रहले.

राजकुमार पांडे बतवलें कि एह फिल्म ‘गोला बारूद’ (पुरनका नाम ‘विधाता’) के निर्माता ग़लत तरीका से ‘गोला बारूद’ के पोस्टर आ कई दोसरा जगहा पर उनकर नाम देत बाड़ें जबकि ऊ सिरिफ एगो गाना निर्देशित कइले बाड़ें आ उहो दोसरा फिलिम खातिर जवना के उठा के निर्माता एह फिलिम में डाल दिहले बाड़न. राजकुमार पाण्डेय नइखन चाहत कि उनुका फिलिमन के चाहेवाला दर्शक गलतफहमी में एह फिलिम के देखे जाव.

जाने लायक बात बा कि भोजपुरी सुपर स्टार रवि किशन आ दिनेशलाल यादव ‘निरहुओ’ अपना प्रशंसकन से अपील कइले बाड़ें कि ‘गोला बारूद’ के ओह लोग के नया फिलिम मत समुझल जाव. ई त साल 2008 में देखावल जा चुकल फिलिम ‘विधाता’ ह जवना के नाम बदल दिहल गइल बा.


(शशिकांत सिंह, रंजन सिन्हा के रपट)

पारो पटनावाली के शूटिंग ला सुदीप पाण्डेय मलेशिया में

भोजपुरी सिनेमा के एक्शन हीरो सुदीप पाण्डेय पिछला दिने फिलिम “पारो पटना वाली” के शूटिंग खातिर तिसरका बेर मलेशिया चहुँपलें. रंजू सिन्हा के निर्माण एह फिलिम के निर्देशन राज वर्मा करत बाड़ें. सुदीप पाण्डेय के जोड़ी एह फिलिम में सेक्सी बाला दिव्या द्विवेदी संगे बनावल गइल बा. सुदीप पाण्डे एहसे पहिलहू रंजू सिन्हा के बनावल फिलिम “जय हो जगदम्बे माई” आ कसम तिरंगा के” फिलिम में काम कर चुकल बाड़ें. ओहू दुनु फिलिमन के शूटिंग मलेशिया में भइल रहुवे.

सुदीप पाण्डेय बतवलें कि मलेशिया में बिहार आ यूपी के बहुते लोग बा. साथही शूटिंग में मलेशिया के सरकारो भरपूर सहयोग देले. भोजपुरी सिनेमा के बेर बेर एके जगहा फिलिमावल दर्शकन के उकता सकेला एह से शूटिंग के जगहा बदलत रहे के चाहीं. भोजपुरी फिलिम अइसन बने के चाहीं जे हिंदी सिनेमा के टक्कर दे सको ना त एकर लोकप्रियता में कमी आवे लागी. कहलन कि उनकर हमेशा कोशिश रहेला कि दर्शकन के बढ़िया फिलिम देसु.


(संजय शर्मा राज के रपट)

‘दिल ले गईल ओढनिया वाली’ के रिकॉर्ड व्यवसाय

सिनेमा भोजपुरी के नयका स्टार खेसारी लाल यादव के ‘दिल ले गईल ओढ़निया वाली’ सगरी बिहार में शानदार बिजनेस कइला का बाद अब मुंबई, पंजाब आ दिल्ली-यू. पी. में रिकॉर्ड व्यवसाय करे में लागल बिया. बालाजी सिनेविजन प्रा. लि. प्रस्तुत आ पप्पू भाई, राजेश सिंह अउर संजय कानूगा के बनावल ई फिलिम मुंबई में पहिला हफ्ता में 25,00,000/- रूपये के नेट बिजनेस कर देखवलसि. भिवंडी, कुर्ला समेत दर्जनभर सिनेमाघरन में फिलिम के दुसरका हफ्ता चलत बा. पंजाब के जालंधर अउर यू. पी. के बलिया, मऊ, आ बड़हल गंज में फिलिम रिकॉर्ड बिजनेस दर्ज करवलसि.

अरविंद चौबे निर्देशित एह फिल्म में खेसारी लाल यादव, अंजना सिंह, शशि मोहन, प्रिया कपूर, आशा शर्मा, प्रिया पाण्डेय, बालेश्वर सिंह, रजनीश झांजी, मनोज टाईगर, जसवंत जैसवाल आ सीमा सिंह के खास भूमिका बा.


(प्रशांत निशांत के रपट)

सुकुलजी..रउआँ बहुते बेजोड़ बानी जी

Prabhakar Pandey

– प्रभाकर पाण्डेय “गोपालपुरिया”

आजु हमरा सुकुलजी के बहुते इयादि आवता. जब हमरा खूब हँसे के मन करेला त हम सुकुलजी के इयादि क लेनी. सुकुलजी के एइसन-ओइसन मति समझीं सभे. सुकुलजी त बहुते काम के चीज हईं. सुकुलजी त ओमे के हईं की उहाँ का बालू में से तेल निकालि देइबि.
सुकुलजी जब घरे रहबि त फटही बंडी अउर लुंगी पहिनी के, कांधे पर गमझा लटका के, नंगे गोरे पूरा गाँव का जवार घूमि देइबि पर उहे सुकुलजी जब कवनो रिस्तेदारी में जाए के तइयार होखबि त गवनही मेहरारू कुल की तरे सजबि, सँवरबि. 
पता ना सुकुलजी के बाबूजी उहाँकी बिआहे में कोट सिउआ के सही कइनी की गलती, इ हम ना कहि सकेनी पर बिआहे की 20-22 साल बादो आजुओ सुकुलजी के कोट ओहींगा चमकता. हँ इ अलग बाति बा की ओमे-किसिम-किसिम के बटाम लागि गइल बा. अब रउआँ सोंचति होखबि की इहाँ कोट के बखान काहें कइल जाता, त हम इ कहल चाहतानी की जब सुकुल जी कहीं पहुनाई में निकलबि त इ आपन बिहउती कोट अउर बिहउती मोजा-जूता जरूर पहिनबि.
सुकुलजी के अगर रऊआँ उनकी गाँव में देखि लेइबि त इहे कहबि के कवनो भकभेल्लर ह (भकभेल्लर हम एसे कहनी हँ की हम सुनले बानी की सुकुलजी की बिआहे में जब सुकुलजी अपनी ससुरारी में खीर खाए बइठने त ओ गाँव के जनाना बुढ़-पुरनिया एगो गीत सुरु कइल सब…ई भकभेलरा दामाद कहाँ से हमरी इहाँ आइल रे, बरओ पाकल, मोछियो पाकल, लागता इ भागलपुर के भागल… ई भकभेलरा दामाद कहाँ से हमरी इहाँ आइल रे…) चाहें हँसमतिया के भाई ह पर उहे सुकुलजी जब गवनहीं मेहरारू कुल की तरे बनि-छनि के रिस्तेदारी में जाए के निकलिहें त लागि की कवनो दुबिआहा अब पहिले-पहल अपनी ससुरारि जाता.
सुकुलजी के इयादि आवते हमरा हँसी काहें आ जाला इहो बता देतानी अउर गारंटी दे तानी की रउओं आपन हँसी रोकि ना पाइबि. खैर हम त सुकुलजी के तीन-चार गो खेला देखले बानी ओमे से रउआँ सब के अबे एक्के गो सुनाइबि, काँहे कि सगरी सुना देहलहुँ पर मजा किरकिरा हो जाई.
हम सुकुल जी के जबन घटना बखाने जा तानी उ टटका बा, कहले के मतलब इ बा की पिछलहीं गरमिए में उनकर इ खेला हम देखनी.
बिआह-सादी के दिन रहे अउर हमहुँ नोकरी पर से छुट्टी ले के गाँवे गइल रहनी. रउआँ सब के त पते बा की बिआह-सादी की दिन में केतना नेवता गिरेला. अगर घर में 3-4गो सवांग होखे लोग तबो सबके एक-आध दिन आंतर दे के कवनो तिलक, बिआह आदि में जाहीं के परेला. हमार बाबा कुछ नेवता लिआ के हमरी आगे ध देहने अउर कहने की बाबू छाँटि ल की तूँ ए में से कगो में जइबS, वइसे तोहरी ऊपर बा ना त झुनझुन-मुनमुन के भेजि देइबि चाहें हमहीं चलि जाइबि. हम नेवतन के निहारे लगनी त का देखतानी की ओ ही में सुकुलोजी के नेवता बा. सुकुलजी के नेवता देखते तS हम ओ के खोलि के लगनी पढ़ें. सुकुलजी की छोट बहिन के बिआह रहे अउर एकदिन की बादे तिलक रहे. अब हम काहे के अउर नेवतन के देखीं, हम दउरि के बाबा की लगे गइनी अउर कहि देहनी की सुकुलजी वाला तिलक अउर बिअहवो में हमहीं जाइब. बाबा कहने नया रिस्तेदार हउअन अउरी तिलके में घरभरी के चले के कहले बाने. तोहार बाबूओजी आ रहल बाने बिहने सबेरे, ओ तिलके में जाए खातिर. फेर बाबा कुछ सोंचि के कहने ठीक बा तूँ अउर तोहार बाबूजी चलि जइहS जा. हमरा त अंदर से लड्डू फूटत रहे, हम कहनीं ठीक बा.
दूसरा दिन हम बाबूजी की साथे दुपरिअवे में सुकुलजी की इहाँ पहुँच गइनी. साँझिखान तिलक पहुँचि गइल लइका की दुआरे पर. अरे इ का तिलक त चढ़ि गइल पर तिलक चढ़ले की बादे अचानक हल्ला सुनाए लागल. सुकुलजी के बाबूजी अउर लइका की काका में लेन-देन के ले के कुछ बतकही होत रहे. हमहँ उहाँ पहुँचनी. सुकुलजी त पहिलहीं से उहाँ बँसखटिया पर मुँह लटका के बइठल रहने. सुकुलजी के बाबूजी खूब तेज आवाज में कहने की हमार सामान वापस क दS…तहरी घरे हमरी लइकिनी के बिआह ना होई. लइको के काका जोर से कहने की घर में से इनकर सामान ले आके वापस क द सन. इ बहुत चालू बाभन बाने सन. कहतानेसन कुछ अउर तथा करतानेसन कुछ अउर. सुकुलजी के बाबूजी सुकुलजी पर घोंघिअइने, “इ सब, एही सारे मउगे के कइल-धइल हS…का तय कइले बा..का नाहीं केहू के बतवले नइखे..अउर पूछले पर कहत रहल हS की हम बानी न सब संभारी लेइबि..तूँ टेंसन मति लS.”
अरे इ का ए दादा. सुकुलजी की बाबूजी की एतना कहते सुकुलजी त लगने भोंकार पारि के खूब जोर-जोर से रोवे. एइसन लागे की कवनो मेहरारू गवने जा तिया. सब लोग एकदम सांत हो गइल पर सुकुलजी आपन रोवल चालू रखने अउर बीच-बीच में रुँआँसे बोली में बोलत जाँ, ” इ हमार बाप नइखन, कसाई बाने. हर जगहिए कुछ न कुछ नाटक क के सब काम बिगाड़ि देने. खरमतियो कि बिआहे में इ एहींगा नाटक कइले रहनें..ऊँ…ऊँ…ऊँ……..” अरे अब त सुकुलजी के बाबूजी के ठकुआ मारि देहलसि, उ एकदम से चुप हो गइने, उनकर मुँह झँउआ गइल. एकरी बाद सुकुलजी उठने अउर रोवते लइका की काका से हाथि जोड़ि के कहने, “निकलवा दीं महराज, हमार समान. हमार बापे एइसन बा. राउर कवनो दोस नइखे.ऊँ…ऊँ…ऊँ……..”
सुकुलजी के रोवाई से सब गमा गइल रहे, सोंचे पर मजबूर हो गइल रहे पर हमार हँसी रुके ना…काँहे कि हमरा पता रहे की अब सुकुलजी की दाँव से केहू बँची ना. लइका के काका केतनो हुँसीयार होखों पर उनकरा अब फँसहिंके बा.
सुकुलजी के रोवाई अब अउर तेज होत जाव….बीच-बीच में कहल करें…अब हमार बहिन कुँआरे रही…जब बापे एइसन बा…त का कइल जा सकेला. अब त सुकुलजी की अगल-बगल में कईगो रिस्तेदार जुटी के समझावे लागल रहे लोग…बाबू..चुपा जा…ओने लइका की कको के समझावे खातिर कइगो मेहरारू (लइका के बुआ, ईया) घर में बाहर आ गइल लोग. लइका के ईया लइका की काका से कहली, “जा ए मास्टर, तोहरा इजति के कवनो लाज नइके. दुआरे पर हित-नात के बोला के एतना नाटक कS देहलS. देखबS सुकुल बाबू केतना रोवताने.”
अब हमरा पूरा यकीन हो गइल रहे की सुकुलजी अपनी खेला में कामयाब हो जइहें, काहें कि लइका के फुआ, माई, ईया सबलोग एकट्ठा हो के सुकुलजी के चुप करावे लागल अउर लइका की काका के डांटे लागल. लइका के कको ठकुआ गइल रहनें. हमार हँसी अब रूकले मान के ना रहे. काहे के सामान अब घर में से बाहर आओ, जे जहें रहे उहवें गमा गइल रहे. तिलकहरू लोग आराम से खाइल-पियल. अब लइका की काका के तनको हिम्मत ना रहे की एको सब्द बोलें. घर में जा के एकदम से गमा गइने. एकरी बाद बिआहो एकदम निमने-निमने बीत गइल. बिआह बितले की बाद हम सुकुलजी से कहनी की महराज राऊर कवनो जबाब नइखे, जहाँ सुई ना घुसी उहाँ रउआँ हाथी घुसा देइबि, काम परले पर गदहवो के बाप बना लेइबि. सुकुलजी की चेहरा पर कुटिल मुस्कान तैरि गइल.
बाद में पता चलल की सुकुलजी लइका की ओर से जेतना फरमाइस भइल रहे सब मानि ले ले रहने…पर देखा देहने लइका की काका के अँगूठा.. जय हो..


-प्रभाकर पाण्डेय, हिंदी अधिकारी, सी-डैक, पुणे

खुश बाड़ी स्मृति सिन्हा

भोजपुरी के चमकत अदाकारा स्मृति सिन्हा आजुकाल्हु बहुते खुश बाड़ी आ होखसु काहे ना ? पिछला दिने रिलीज उनुकर तीनो फिलिम ‘‘साजन चले ससुराल’’, ‘‘देवरा पे मनवा डोले’’ आ ‘‘सौंगन्ध गंगा मईया के’’ बॉक्स ऑफिस पर हिट साबित भइली सँ. स्मृति अबही भोजपुरी के सगरी बड़का निर्माता-निर्देशक आ अभिनेतन संगे काम करत बाड़ी.

स्मृति बतावत बाड़ी कि उनुका खुशी के सबले बड़का कारण बा सबले सफल भोजपुरी फिल्म निर्माता आलोक कुमार संगे लगातार तीसरका फिलिम कइल. कहली कि आलोक जी उनुका के ‘‘साजन चले ससुराल’’ आ ‘‘देवरा पे मनवा डोले’’ जइसन बेहतरीन फिलिम दिहलें आ अब ऊ आलोक जी के ‘‘दूध का कर्ज’’ के शूटिंग करत बाड़ी.

स्मृति सिन्हा के खेसारी लाल संगे ‘‘लाल दुपट्टा मलमल का’’ आ विराज भट्ट संगे ‘‘अंतिम तांडव’’ प्रदर्शन खातिर तइयार बा.


(प्रशांत निशांत के रपट)