‘सुरो का महासंग्राम’ में अपना राज्य के नेतृत्व पावे के लड़ाई

एह हफ्ता महुआ टी॰ वी॰ पर प्रसारित ‘सुरो के महासंग्राम’ का एपिसोड में राज्य के टीम में चुनाये के लड़ाई देखावल गइल. देख के लागल कि कइसन कइसन अनगढ़ हीरा ले के एह शो के शुरुआत होखत बा आ धीरे धीरे उहे अनगढ़ हीरा पालिश्ड हो के कतना चमकदार बन जइहें इहो देखे लायक रही. शो में जवन बात सबले चटक लउकल ऊ कि बहुते प्रतिभागी वइसन गाना चुनत रहले जवना के आम आदमी के अपना परिवार का बीच बइठ सुने में अहस लागी. सोचे लगनी कि एह हालात के जिम्मेदार केकरा के मानल जाव. गायक गायिका त बस दोसरा के लिखला के आपन आवाज भर दे देलें. फूहड़ गीत लिखे के असल दोष त ओह गीतकारन के दिहला के जरूरत बा. ना त ऊ लिखते ना केहु गाइत. बाकिर कहल जा सकेला कि फूहड़ गीतन के लोकप्रियता दिआवे में गायक गायिको लोग के हाथ होला जे अपना आवाज के गलत इस्तेमाल करत वइसनका गीत के लोकप्रियता दिआवे के कोशिश करेले. घर में बाजे चाहे ना, ट्रक, ट्रैक्टर, टैक्सी रेला ठेला में वइसन गीत खूब सुने के मिल जाला काहे कि हमनी के सुभाव हो गइल बा कि भीड़ का बीच हमनी का आदमी ना रहि जाईं.

खैर देखनी कि जब कबो वइसन गीत आवत रहे त मंच पर बइठल निर्णायक लोग इशारा से रोक देत रहे आ कहत रहे कि कूछ अउर गावऽ. एह हफ्ता के मेगा आडिशन में सब कुछ बहुते अनौपचारिक जइसन लागल. एह मेगा आडिशन से चुनाइल लोग अगिला हफ्ता से होखे वाला प्रतियोगिता में प्रतिभागी बनीहे. शो के एंकर भा सूत्रधार मनोज तिवारी बाड़े. प्रतिभागियन के चुने वाला निर्णायक मण्डल में संगीतकार सतीश, अजय आ धनंजय मिश्रा रहले.

भोजपुरी के सबले बड़ ताकत एकर गीत गवनई हवे काहेकि एही सहारे भोजपुरी आम आदमी का बीच रचे बसेले. उमीद कइल जाव कि महुआ टीवी भोजपुरी गीत गवनई के चमकदार पहलू सामने ले आई आ फूहड़ गीतन के प्रतियोगिता से बाहर राखी. हँ भोजपुरी गीत गवनई से रसिक अंदाज के हटावल ना जा सके आ ओकरा बिना भोजपुरी गीत गवनई भजन बनि के रहि जाई इहो साँच बा.

सुरों का महासंग्राम महुआ टी॰ वी॰ पर हर शुक आ शनिचर के रात 8.00 बजे से होखत बा.


(प्रशांत निशांत के भेजल रपट का आधार पर)

Advertisements

एह नयका सदी में भोजपुरी गीत गवनई

जे केहू से नाईं हारल ते हारि गइल अपने से
अपने से केहू आपन खुद नाश कै रहल बा.

– दयानंद पांडेय


‘तोहरे बर्फी ले मीठ मोर लबाही मितवा’ जयश्री यादव के एह गीत का तरहे कहीं त भोजपुरी गीतन में मिठास के इहे परंपरा ओकरा के बाकी लोकगीतन से ना सिर्फ़ अलग करेले बलुक इहे मिठास ओकरा के अनूठो बना देले. लेकिन आजु का तारीख में भोजपुरी के मसीहा बन के बइठल गायकी के ठेकेदार एकरा के बाजारि में बेच के भोजपुरी गायकी के बदनाम आ बरबाद कर दिहले बाड़े. भोजपुरी के लोकगीत अब बाज़ार के हवाले होके अश्लीलता, फूहड़पन अउर अभद्रता के छौंक में शेखी बघार रहल बा आ बाज़ार का रथ पर सवार एह व्यभिचार में कवनो एक दू जने ना बलुक समूचा गायक-गायिकायन के संसार जुटल पड़ल बा. इक्का-दुक्का अपवाद छोड़ के.

भोजपुरी गवनई के चलन वइसे त बहुते पहिले से बा तबहियो आधारबिंदु घूम फिर के भिखारीए ठाकुर बनेले. भिखारी ठाकुर आ उनुकर बिदेसिया शैली के गूंज अब एह सदी में मद्धिमे ना विलुप्त होखे का कगार पर खड़ा बिया. भोजपुरी गाना के बात बिना भिखारी ठाकुर के नाम लिहले आजुवो ना हो पावे. ‘एगो चुम्मा दिहले जइहऽ हो करेजऊ’, भा ‘अब त चली गडासा भाला, लोगवा नज़र लडावेला’, भा फेर ‘आरा हिले, बलिया हिले छपरा हिलेला, हमरी लचके जब कमरिया सारा ज़िला हिलेला’ जइसन भोजपुरी गाना खातिर लोग आजुवो भिखारी ठाकुर के दम भरेला लेकिन भिखारी ठाकुर ‘अपने लइकवा के भेजें स्कूलवा/हमरे लइकवा से भंइसिया चरवावें’ जइसनो गाना लिखले आ गवले से कमे लोग जानेला. ठीक वइसहीं जइसे “आरा हिले, बलिया हिले” गीत के मर्म बहुते कम लोग जानेला. अधिकतर लोग एह गीत के भोजपुरी गवनई में अश्लीलता के पहिलका सीढी मान बइठेला आ मन ही मन मज़ा लेला. अइसन लोग के अपना आँखि के मोतियाबिंद उतार के आ बुद्धि के पखार के जान लेबे के चाहीं कि भिखारी ठाकुर के ई गीत “आरा हिले, बलिया हिले” कवनो मामूली गीत ना होके व्यवस्था के चुनौती देबे वाला गीत ह जहवाँ मुंशी, दारोगा, कोतवाले ना सगरी जिले हिल जाला एगो कमर भर का हिलला से. सोचीं कि एगो कमर हिलला भर से जब सगरी व्यवस्था हिल जाव त आगा का होई ? अउर अब त हमनी का सोझा घोटालन के अंबार लाग गइल बा आ लोग खामोश पड़ल बा. अन्ना हज़ारे का हिलोर का बावजूद !

पता ना काहे लोग कुछ गाना के तासीर आ ओकर अर्थ विन्यास लोप कर कर के दोसर अर्थ पकड़ लेले. अइसने एगो गाना “पाकीज़ा” फ़िल्म के बा, ‘इन्हीं लोगों ने ले लीना दुपट्टा मेरा.’ एह में का सिपहिया, का रंगरेजवा, सबे दुपट्टा ले लेता. दरअसल ई दुपट्टा ओकर इज़्ज़त ह जवमा ले सभे बारी-बारी तार-तार करेले. एब एहू गाना के मर्म अधिकतर लोग भुला बईठेले आ एह गाना के असल तासीर डूब जाले. अइसनका कई गो गाना बाड़ी सँ. एगो अउरी गाना सुनीं आ याद करीं. अबही हालही में मशहूर भइल रहे ‘जब से सिपाही से भइलैं हवलदार हो, नथुनिए पे गोली मारें’. इहो पद का मद के ब्यौरा बाचे वाला गाना बाकिर अश्लीलता के इनार में उतर के अजबे सनसनी फइला गइल. ई असल गाना बालेश्वर के रहल बाद में मुन्ना सिंह एकरा के थाम लिहलें आ बाजार पर सवार करा दिहले, फ़ास्ट म्यूज़िक में गूंथ के. फेर रहल सहल कसर उतार दिहल गइल एगो हिन्दी फिल्म में गोविंदा रवीना पर फ़िल्मावल गाना ‘अंखियों से गोली मारे.’ में.

भोजपुरी के कई गो निर्गुनो गाना का साथे इहे बा. लोग औकर तासीर त समुझे ना, मर्म समुझे ना आ कौव्वा कान ले गइल का तर्ज पर गाना ले उड़ेले, भोजपुरी के बदनाम, बरबाद जवम कहीं कर बइठेले. त का करब ? ‘सुधि बिसरवले बा हमार पिया निर्मोहिया बनि के’ जइसन मादक आ मीठ गीत गावे वाला मुहम्मद खलीलो जइसन गायक भइले जिनका के आजु का दौर में कमे लोग जानेला काहे कि बाजार में ओह लोग के गाना के कैसेट कतही नइखे. बा त सिर्फ आकाशवाणी का कुछ केंद्रन का आर्काइब्स में. लेकिन जवन टिंच आ मिठास अपना भोजपुरी गीतन में मुहम्मद खलील परोस गइल बाड़न, जवन रस घोर गइल बाड़न ऊ मुश्किले ना दुर्लभो बा. ‘अंगुरी में डसले बिया नगिनिया हो, हे ननदो दियना जरा द. दियना जरा द, अपना भइया के जगा द. रसे-रसे चढतिया लहरिया हो, हे ननदो भइया के जगा द’. एह गीत में जवन मादकता, जवन मनुहार, जवन प्यार ऊ अपना गायकी के रस में डुबो के छलकावेले कि मन मुदित हो जाला, लहक जाला मन जब ऊ एह गीत में एगो कंट्रास्ट बोवत गावेले, ‘ एक त मरत बानी नागिन के डसला से, दूसरे सतावतिआ सेजरिया हे, हे ननदो भइया के जगा द’. भोजपुरी गीत के ई अदभुत संरचना बा.. ‘छलकल गगरिया मोर निर्मोहिया’ मुहम्मद खलील के गावल मशहूर गीतन में से एगो ह आ साँच इहे बा कि भोजपुरी के मिसरी जइसन मिठास मुहम्मद खलील का आवाज़ में घोरात उनुका गवनई में गूंजेले. भोलानाथ गहमरी के लिखल गीत, ‘कवने खोंतवा में लुकइलू आहि हो बालम चिरई’ में खलील ‘टीन-एज़’ के विरह को जवना ललक, सुरूर अउर सुकुमारता से बोवत लउकेले, जवन औचक सौंदर्य ऊ बना डारेले, ऊ एगो नया किसिम के नशा घोर देला. ‘मन में ढूंढलीं, तन में ढूंढलीं, ढूंढलीं बीच बज़ारे/हिया-हिया में पइठ के ढूंढलीं, ढूंढली विरह के मारे/ कवने सुगना पर लोभइलू, आहिहो बालम चिरई.’ गा के ऊ गहमरी जी के गीत के बहाने आकुलता का एगो नये रस परोस देले. एह रस के उनुका गावल, ‘खेतवा में नाचे अरहरिया संवरिया मोरे हो गइलैं गूलरी के फूल’ एगो दोसर गीतो में हेरल जा सकेला. ‘बलमा बहुते गवईया मैं का करूं/ झिर-झिर बहै पुरवइया मैं का करूं’ भा फेरु, ‘गंवई में लागल बा अगहन क मेला, खेतियै भइल भगवान, हो गोरी झुकि-झुकि काटेलीं धान’ जइसन दादरो में ऊ अलगे ध्वनि बो देले. पर लय उनुकर उहे मिठास वाली बा. मुहम्मद खलील के खूबी कहल जाव कि खामी, गायकी के त ऊ खूब सधले लेकिन बाज़ार साधल त दूर ओने झँकबो ना कइले आ दुनिया से कूच कर गइले. नतीजा सामने बा. मुहम्मद खलील के गावल गीत सुने खातिर तरसे के पड़ेला. भूले भटके, कबो-कभार कवनो आकाशवाणी केंद्र उनुका के बजा देला. पर अब आकाशवाणीओ भला के सुनत बा ?

सुनीले कि बहुत पहिले नौशाद मुहम्मद खलील के मुंबई ले गइल रहले, फ़िल्मन मे गवावे खातिर. लेकिन जल्दीये ऊ लवटि गइले काहे कि ऊ फिलिमन खातिर अपना गायकी में बदलाव खातिर तइयार ना भइले. कहले कि अइसे त भोजपुरी बरबाद हो जाई आ हमार गायकीओ. हम अपने बिला जायब बाकिर भोजपुरी के बरबाद ना करब. ठीक अपना गायकी का तरह, ‘प्रीत में न धोखा धडी, प्यार में न झांसा, प्रीत करीं अइसे जइसे कटहर क लासा !’ सचमुच अब ई कटहर क लासा जइसन प्रीत करे वाला गायक भोजपुरी का लगे नइखन रहि गइल. जइसे कुछ लोग अपना महतारिओ बहिन का कीमत पर तरक्की कबूल कर लेले, ठीक वइसही हमनी के भोजपुरी गायकों लोग अपना मातृभाषा के दाँव पर लगा दिहले बा बाजार का रथ पर सवार होखे खातिर. केहु कुछुवो कहो उनुका एह सब से कवनो सरोकार नइखे. उनकर सरोकार बस आ बस पइसा से बा. आपन महतारिओ बेच के उनुका सिर्फ पइसा आ शोहरत चाहीं. एकरा खातिर जवनो कुछ करे के पड़े ऊ त तइयार बाड़े. बाकिर मुहम्मद खलील अइसन ना कइले. हँ, अपवाद का तौर पर अबही एगो अउर गायक बाड़न – भरत शर्मा. एक से एक नायाब गीत उनुकरो खाता में दर्ज बा हालांकि मुहम्मद खलील वाला तासीर उनुका गायकी में नइखे बाकिर एगो चीज जे ऊ मुहम्मद खलील से सिखले बाड़न कि बाज़ार का रथ पर चढ़े खातिर अपना गायकी में समझौता करत अबहीं ले त नाहिए लउकत बाड़न. तारकेश्वर मिश्र के लिखल गीत,’हम के साडी चाही में” उनका गायकी के गमक में डूबल बहुते आसान बा, ‘चोरी करीहऽ, पपियो चाहे/ खींचऽ ठेला गाडी/ हम के साडी चाही’ भा फेर ‘गोरिया चांद के अंजोरिया नियर गोर बाडू हो/ तोहार जोर कौनो नइखै बेजोड बाडू हो’ मे उनका गायकी के अंजोर साफ पढल जा सकेला, निहारल जा सकेला आ अगर अबहियो कवनो सन्देह होखो त सुनीं, ‘धन गइल धनबाद कमाए/ कटलीं बडा कलेश/ अंगनवा लागेला परदेस.’ बाज़ार का घटाटोप धुंधो में भरत शर्मा अपना गायकी के बाज़ारूपन से बचवले बइठल बाड़न, एकरा ला उनुका के जतना सलाम कइल जाव, कम रही.

लेकिन बालेश्वर का साथे अइसन ना रहे. ऊ जब जियत रहले तबो आ अबहियो उनुका कैसेट आ सीडी से बाजार पटल पड़ल बा. बालेश्वर गायकीओ सधले आ बाज़ारो. आर्केस्ट्रा के बाज़ारो. नाहियो त डेढ सौ कैसेट बावे उनकर. ऊ हमेशा बुको रहत रहले. भोजपुरी के सरहद लाँघ के गावे वाला ऊ पहिलका भोजपुरी गायक रहले. भोजपुरी गायकी के अंतर्राष्ट्रीय पहिचान आ मंच बालेश्वरे दिअवले पहिले-पहिल. भोजपुरी में गावे वाला स्टारो हो सकेला ईहो बालेश्वरे बतवले. भोजपुरी गायकी के ऊ पहिला स्टार हउवन. गानो उनुका खाता में एक से एक नायाब बा. मुहम्मद खलील दोसरा के लिखल गावत रहले बाकिर बालेश्वर अपने लिखल गावसु जबकि ऊ कुछ खास पढल-लिखल ना रहले. बालेश्वर किहाँ प्रेमो बा, समाज आ राजनीतिओ. मतलब बाज़ार में रहे के सगरी टोटका. अउर हँ, ढेरहन समझौतो. नतीज़तन बालेश्वर त बहुते लोग के पाछा छोड़ट आपन सफलता के गाड़ी दउडा ले गइले पर भोजपुरी गायकी के समझौता एक्सप्रेस में बईठाइयो गइलन. अब ओकर जवन फसल सामने आ रहल बा ऊ भोजपुरी गायकी को लजवावत बा. बहरहाल एऋ बिना पर बालेश्वर को खारिज त नाहिये कइल जा सके. बालेश्वर के गायकी आ उनुकर आवाज के जादू आजुवो माथा चढ़ि के बोलेला. बालेश्वर असल में पहिले भिखारी ठाकुर आ कबीर के राह चलले. “बिकाई ए बाबू बी. ए. पास घोडा” जइसन गीत एकरे बुनियाद में बा. “दुशमन मिले सबेरे लेकिन मतलबी यार ना मिले/ मूरख मिले बलेस्सर पर पढा-लिखा गद्दार ना मिले” भा फेर “नाचे न नचावे केहू पैसा नचावेला” जइसन गीत उनका एही राह के आगे बढावत रहे. हँ, बालेश्वर किहाँ जवन प्रेम बा ओहमें मुहम्मद खलील वाला गहराई भा ‘ टिंच’ नदारद बा. ऊ ‘पन’ गायब बा. बल्कि कई बेर त ऊ प्रेम ‘शृंगार’ का आड में डबल मीनिगे डगर थाम लेत बा. जइसे उनुकर एगो गाना बा,’लागता जे फाटि जाई जवानी में झुल्ला/ आलू केला खइलीं त एतना मोटइलीं/ दिनवा में खा लेहलीं दू-दू रसगुल्ला!’ भा फेर ‘ खिलल कली से तू खेललऽ त लटकल अनरवा का होई/ कटहर क कोवा तू खइलू त हई मोटका मुअड़वा का होई.’ मुहम्मद खलील का गीतन में विरह वियोगो एगो सुख के अनुभूति देला लेकिन बालेश्वर किहाँ ऊ नइखे. उनुका लगे प्रेम में अनुभूति का जगह तंज आ तकरार बेसी बा. जइसे उनुकर कुछ युगल गीत बा, ‘हम कोइलरी चलि जाइब ए ललमुनिया क माई’ भा ‘अंखिया बता रही है लूटी कहीं गई है’ भा ‘ अपने त भइल पुजारी ए राजा, हमार कजरा के निहारी ए राजा’ भा फेर “आव चलीं ए धनिया ददरी क मेला.’ एक समय ददरी के मेला ले के ‘हमार बलिया बीचे बलमा हेराइल सजनी” गा के बालेश्वर ओह औरत के व्यथा बचले रहले जवन मेला में पति से बिछड जात बा. आ ओहू में जब ऊ टेक ले-ले के गावसु, ‘धई-धई रोईं चरनियां” त गाना के भाव दुगुना हो जात रहे. आ जब जोडसु, ‘लिख के कहें बलेस्सर देख नयन भरि आइल सजनी !’ त सचमुच सभकर नयन भर जात रहे. एगो गाना ऊ अउरी गावत रहले शादी में जयमाल का मौका पर, ‘केकरे गले में डारूं हार सिया बऊरहिया बनि के.’ कई बेर त हम देखनी कि कनिया सचमुच भरम में पड़ जा सँ, असमंजस में आ जा सँ. त ई बालेश्वर के गायकी के प्रताप रहल. लेकिन ऊ जल्दीये ‘नीक लागे टिकुलिया गोरखपुर क’ पर आ गइलन. आ फेर “जब से लइकी लोग साइकिल चलावे लगलीं तब से लइकन क रफ़्तार कम हो गइल’ भा ‘चुनरी में लागऽताटे हवा, बलम बेलबाटम सिया द’ जइसन गीतो उनुका खाता में दर्ज बा. ‘फगुनवा में रंग रसे-रसे बरसे’ ‘ सेज लगौला, सेजिया बिछौला हम के तकिया बिना तरसवला, बलमुआ तोंहरा से राजी ना/ बाग लगौला, बगैचा लगौला, हम के नेबुआ बिना तरसवला, बलमुआ तोंहरा से राजी ना !’ जइसन कोमल गीतो बालेश्वर गवले. लेकिन बाद में उनसे अइसन गीत बिसरे लागल आ कहरवा जइसन धुन के ऊ पंजाबी गानन का तर्ज़ पर फास्ट म्यूजिक में रंग दिहले. बाज़ार उनका पर हावी हो गइल. ‘बाबू क मुंह जैसे फ़ैज़ाबादी बंडा, दहेज में मा
गेलें हीरो होंडा’ जइसन गीत गावे वाला बालेश्वर मंडल-कमंडल के राजनीतिओ गावे लगले. ‘मोर पिया एम. पी. , एम.एल. ए. से बडका/ दिल्ली लखनऊआ में वोही क डंका/ अरे वोट में बदलि देला वोटर क बक्सा !’ जइसन गानो ऊ ललकार के गावसु. बात एहिजे ले ना रुकल, ऊ त गावे लगले, ‘ बिगडल काम बनि जाई, जोगाड चाही.’ बालेश्वर कई बेर समस्यन के उठा के ओह पर भिखारी ठाकुर का तर्ज़ पर प्रहारो कइले.

लेकिन मनोज तिवारी समस्यावन के जवन मार्मिक व्यौरा अपना गवनई में बुनेले ऊ कई बेर दिल दहलावे वाला होला. अकादमिक पढाई-लिखाई अउर शास्त्रीय रियाज़ आ मीठ आवाज़ से लैस मनोज तिवारी भोजपुरी गायकी में दरअसल खुशबू भरल झोंका ले के अइले. भोजपुरी माटी के सोन्ह महक वाला झोंका. जवन भोजपुरी समाज का बहाने पूरा का पूरा चित्रण करत आवेला. कहीं कि मनोज तिवारी गीत ना दृश्य रचे आ गावेले. तवना पर उनुका आवाज़ में मिठासो बा आ बोल में पैनोपन. ‘बी.ए. का कै लेहलीं/ समस्या भारी धै लेहलीं/ समस्या भारी धै लेहलीं/कि देहियां तुरे लगलीं हो/ अरे कलेक्टरे से शादी करिहैं उडे लगलीं हो.’ खुद के लिखल एह गीत में मनोज तिवारी कस्बा , गांवन के मध्यवर्गीय परिवारन में लड़िकी के पढ-लिख लिहला का बाद उपजे वाली शादी के समस्या अउर दोसरा तरफ लड़िकी के सपनन के एह विकलता से व्यौरा परोसले बाड़न कि मन हिल जाला. लड़िकी के शादी जाहिर ना कलक्टर से ना हो पावे. बात डाक्टर, इंजीनियर से होत मास्टर तक उतरि जाले आ तबो बाति ना बने त, ‘कइसे बीती ई उमरिया अंगुरिया पर जोडे लगलीं हो.’ पर आ जाले. एही तरह, ‘असीये से कइ के बी. ए. बचवा हमार कंपटीशन दे ता’ गीत में मनोज तिवारी बेरोजगारी के मुश्किल भरल सीवन के अइसन जोड़ले बाड़न कि ऊ मील के पत्थर वाला गाना बन जा ता. बेरोजगारी के अइसन सजीव खाका कहानियन में त मिल जाला बाकिर कवनो लोक भाषा का गाना में शायद पहिला बेर मिलल बा आ अपना पूरा कोमलता आ टटकापन का साथे. एही तरह मनोज तिवारी ‘मंगरूआ बेराम बा’ में चुटकी ले-ले के जवन दारूण गाथा परोसले बाड़न ऊ गांव से महानगर के बीच पनपत संत्रास के विलापे भर ना ह, ई एगो निरंतर दुरूह होत जा रहल समाज के महागाथो ह. ‘चलल कर ए बबुनी ओढनी संभाल/ केकर-केकर मुंह रोकबू सैंडिल उतारि के’ जइसन गीतन में मनोज छींटाकशीओ करेले आ विसंगतिओ. ई गीत उनुका पुरनका गीत, ‘हटत नइखै भसुरा, दुअरिये पर ठाड बा’ के यादो दिआवत बा. ‘का मिलबू रहरिया में/ आव ले चलीं तोंहके शहरिया में’ भा फेरु, ‘जवन बाति बा संवरको में ऊ गोर का करी/ जवन कै दिही अन्हार ऊ अंजोर का करी’ आ ‘नीमक पर मारि हो गइल’ भा “मैटर बदलि गइल’ जइसन गानो मनोज तिवारी का खाता में बा.

आरोप बालेश्वर का तरह मनोजो तिवारी पर ओही डबल मीनिंग वाला गाना गावे के बा. आ साँच इहे बा कि मनोज तिवारी के बाज़ार के रथ बालेश्वर से बड हो गइल. भोजपुरी गवनई के जतना नुकसान मनोज तिवारी अपना नयका गावल गानन से कइले बाड़न ओतना शायद केहू दोसर ना. समझौते बालेश्वरो कइले बाजार में जमे खातिर बाकिर मनोज तिवारी त जइसे गंगा में मोरी आ फ़ैक्टरी के कचरा दुनु ढकेल दिहले. बताईं कि देवी गीत गावे वाला मनोज तिवारी पैरोडीओ गावे लगलन. बाति एहिजे ले ना रुकल ऊ त, ‘बगल वाली जान मारेली’ गावत-गावत ‘केहू न केहू से लगवइबू, हमसे लगवा ल ना’ जइसन गानो गावे लगलन. के कही कि बी॰एच॰यू॰ के पढल-लिखल मनोज तिवारी राजन-साजन मिश्रो के शिष्य हउवन ? आ बाद का दिनन में त पतन के जइसे पराकाष्ठा हो गइल. खास कर के भोजपुरी सिनेमा में बतौर अभिनेता उनुकर का योगदान बा ई त उहे जानसु बाकिर हम त इहे जानीले कि उनुकर भोजपुरी फ़िलिम बड़का बोझ बाड़ी सँ भोजपुरी समाज पर आ ओहनी में उनकर गावल भोजपुरी गाना कोढ बा. लेकिन हँ, बाज़ार के त ऊ सिरमौरो बाड़न चाहे भोजपुरी के आन-शान बेचिये के सही. तवना पर उनुकर दंभ भरल आचरण उनुका के कहाँ ले जाई कहल ना जा सके. “बिग बास” में उनुकर घमंड त डाली बिंद्रा के झेललो से बेसी बरदाश्त का बाहर रहल. पता ना उनुका इर्द-गिर्द डटल सलाहकार उनुका के काहे ना बतावसु कि गायकी, खास करिके भोजपुरी गायकी, घर के ऊ लाज ह जवन सड़कन पर ना इतरात फिरे ! ना ही ऊ नेतवन, अधिकारियन के गोड़ छू के संभरे-संवरेले. ओकर दर्प, ओकर गुरूर आपन मर्यादा, आपन लाज, आपन संस्कारे त बा. आ भोजपुरिये काहे, कवनो भाषा के, इहे मिजाज होले.

एक वाकया देखीं जवन याद आ गइल. जवन कबो सपन जगमोहन सुनावसु कि ऊ लखनऊ में भातखंडे में पढत रहले. अचानक एक दिन एगो आदमी आइल, लागल गाना सीखे. करीब पंद्रहे दिन में सीख के ऊ जाये लागल आ आचार्य ओकर बहुते तारीफ कइलन. कहलन कि ऊ बहुते बढ़िया सीख लिहलसि. ऊ आदमी चल गइल त हमनी का कुछ विद्यार्थी ऐतराज़ जतइनी जा कि, ‘ वाह साहब हमनी का अतना समय से सीखत बानी सँ आ ना सीख पइनी सँ. आ ई जनाब पंद्रहे दिन में सीख गइले ?’ आचार्य संयम बनवले रखनी आ नाराज ना भइनी. सिर्फ अतने भर पूछनी कि, ‘पता बा कि ऊ के रहल ?’ सब लोग बोलल कि , ‘ना.’ आचार्य बतवनी कि, ‘कुंदन लाल सहगल रहले.’ आ जोड़नी, ‘बाबुल मोरा नइहर छूटो ही जाए” में अवधी के टच सीखे के रहल आ रियाज करे के रहल’. सभकर मुँह सिया गइल रहे कि अतना बडहन कलाकार हमनी का बीचे रहल आ पतो ना चलल ? बाकिर मनोज तिवारी? जब तक रहले बिग बास में आग मूतत रहले. जाने कइसे ऊ अपना घर में रहत होखीहन. अतना अहंकार? अहंकार तो बडहन-बडहन लोगन के लील जाला. का इहो ऊ ना जानसु ?

खैर बात भोजपुरी गायकी की होत रहुवे. माफ करीं तनी विषयान्तर हो गइल. जवनो हो भिखारी ठाकुर के गावल बहुते धुन आ उनुका गाना के इस्तेमाल फिलिमन में भइल बा. बालेश्वरो के कुछ गाना फिलिमन में चोरी-चोरी गइल. शारदो सिनहा फ़िलिमन में गवले बाड़ी, मनोजो तिवारी. लेकिन अइसन आरोप दोसरा पर ना लागल, मनोजे पर लागल. किसिम-किसिम के आरोप. एहीजे याद आ जात बा मुहम्मद खलील के. याद आवत बा उनुकर गायकी, ‘कवने अतरे में समलू आहिहो बालम चिरई !’ दरअसल किसिम-किसिम के दबाव झेलत भोजपुरी गायकी अब जाने कवना अतरा में समाइल जात बिया जहवाँ से ओकरा के गहमरी जी के नायिका का तरह खोजल मुश्किल होत जात बा. विंध्यवासिनी देवी के गावल ऊ गाना, ‘हे संवरो बहि गै पीपर तरे नदिया !’ भा ‘ चाहे भइया रहैं, चाहे जायं हो, सवनवा में ना जइबों ननदी’ जइसन टटकापन अब भोजपुरी गवनई से बिसरल जात बा.

एहिजा तक कि कबो मज़रूह सुलतानपुरी एगो भोजपुरी फ़िल्मी गाना लिखले रहले जवना के लता मंगेशकर चित्रगुप्त का संगीत निर्देशन में गवले रहली, ‘लाले-लाले ओठवा से बरसे ला ललइया हो कि रस चुवेला, जइसे अमवा के मोजरा से रस चुवेला !’ के मिठास आजुवो मन लहका देबेले. बाकिर अफ़सोस कि ई मिठासो अब भोजपुरी गाना में ना चूवे ! त एह नयकी सदी के डाटकाम युग में भोजपुरी गवनई के आगे का हाल होई ई त समय बताई. फ़िलहाल त मनोज तिवारी के गावल एगो भोजपुरी गज़ल एहिजा मौजू बाः “अपने से केहू आपन विनाश कै रहल बा, पंछी शिकारियन पर विश्वास कै रहल बा.’ सचमुच सोच के कई बेर डर लागत बा कि भोजपुरी गानो का साथ कहीं इहे त नइखे हो रहल ? बाज़ार का दबा्व का आड में. मज़रूह के शब्दन में भोजपुरी गाना के दर्द कहीं त, ‘लागे वाली बतिया न बोल मोरे राजा हो करेजा छुएला !’

‘फेंक देहलैं थरिया, बलम गइलैं झरिया, पहुंचलैं कि ना ! उठे मन में लहरिया, पहुंचलें कि ना !’ जइसन मार्मिक गानना भा फेर ‘आधी-आधी रतिया में बोले कोयलिया, चिहुंकि उठे गोरिया सेजरिया पर ठाढी.’ जइसन गानन से चरचा में आइल मदनो राय जल्दिये बाजार के हवाले हो गइलन. डबल मीनिंग का राह से त बचले बाकिर मुहम्मद खलील के मशहूर गाना “कवने खोंतवा में लुकइलू, आहिहो बालम चिरई” के गवले. एह गाना में त गायकी के ऊ रस त सुखइबे कइले जवन खलील बरसावेले, अंतिम अंतरा में गाना के बोले बदल के अर्थ के अनर्थ कर दिहले. भोलानाथ गहमरी जइसन लिखले आ खलील गवले कि, ‘सगरी उमिरिया धकनक जियरा, कबले तोंहके पाईं’ पर मदन राय गावेले,’सगरी उमिरिया धकनक जियरा कइसे तोंहके पाईं.’ त केहु का कर लीहि ? अइसही अउरियो गाना में जवना के सुर के मिठास कहल जाले ऊ ना भर पावें, जइसे कि शंकर यादव बाड़े. उनुका सुर में मिठास जइसन लहर मारेला. ‘ससुरे से आइल बा सगुनवा हो, ए भौजी गुनवा बता द’. जइसन गाना जब ऊ चहकि के गावेले त मन लहक उठेला बाकिर दिक्कत ई बा कि बालेश्वर का तरह शंकरो आरकेस्ट्रा के रंग-ढंग में सज-संवर के अपना के बिलवा देले, अपना गायकी के जइसे भ्रूण हत्या कर देले त तकलीफ होखेला. इहे हाल सुरेश कुशवाहा के बा. ऊ गावेले त कि, ‘आ जइह संवरिया/ बंसवरिया मोकाम बा.’ लेकिन उहो आर्केस्ट्रा के मारल हउवे.

हालांकि गोपाल राय एह सब से बाचेले आ अपना गवनई में सुकुमार भाव भरबो करेले, ‘चलेलू डहरिया त नदी जी क नैया हिलोर मारे, करिअहियां ए गोरिया हिलोर मारे’जइसन गीतन में ऊ बहकइबो करेले आ सहकइबो करले त आनन्द दुगुना हो जाले. जइसे कबो बालेश्वर से उनुकर स्टारडम आहिस्ता-आहिस्ता मनोज तिवारी छीन लिहले रहन, वइसही मनोजो तिवारी के स्टारडम एह घरी दिनेश लाल यादव निरहुआ लगभग छीन चलल बाड़े. लेकिन उनुकर डेग के शुरुआते भइल डबल मीनिंग गाना से, ‘दुलहिन रहै बीमार निरहुआ सटल रहै/ मंगल हो या इतवार, घर में घुसल रहै’ भा फेर “फिर मलाई खाए बुढवा” जइसन गाना से ‘शोहरत’ कमाके बाज़ार पर सवार भइल निरहुओ के बीमारी पइसे बा. भोजपुरी के हद लाँघ के तमिल- तेलुगू तक पहुंच गइल बाड़न, लेकिन स्टारडम में भलही आगा होखसु गायकी के गलाकाट लडाई में एह समय उनकरो कान काटे वाला लोग आ गइल बा. पवन सिंह गावत बाड़न, ‘तू लगावेलू जब लिपिस्टिक/ हिलेला आरा डिस्टिक/ लालीपाप लागेलू/ कमरिया करे लपालप/ज़िला टाप लागेलू’ भा फेर “नाहीं मांगे सोना चांदी/ नाहीं मांगे कंगना/ रह्त हमरे आंखि के सोझा परदेसी मोरे सजना.’ एगो खेसारी लाल यादव हउवे. उहो गावत बाड़न, ‘ सइयां अरब गइलैं ना/ देवरा चूसत ओठवा क ललिया हमार/ देवरा चूसत बा.’ गुड्डू रंगीला के त रउरा सुनते बानी, ‘गोरिया हो रसलीला करऽ/ तनी सा जींस ढीला करऽ !’ भा फेर, ‘हाय रे होठलाली, हाय रे कजरा/ जान मारे तोहरी टू पीस घघरा.’ मनोजे तिवारी का तरह दिवाकरो दुबे कबो देवी गीत गावत रहले. फेर उहो मनोज तिवारीए का तरह पैरोडी पर आ गइलन. ‘बहुत प्यार करते हैं पतोहिया से हम’ भा ‘मजा मारे बुढवा पतोहिया पटा के’ अउर कि, ‘उठा ले जाऊंगा रहरिया में/देखती रह जाएंगी अम्मा तुम्हारी.’ राधेश्याम रसिया गावत बाड़े,’ बंहियां में कसि के सईयां मारेलैं हचाहच.’ त सानिया के सुनी, ‘मुर्गा मोबाइल बोले चोली में कुकुहू कू/ दाना खइबे रे मुर्गवा कुकुहू कू’ भा फेर, ‘चुभुर-चुभुर गडेला ओड़चनवा ए भौजी.’ कलुआ के सुनीं,’ लगाई देईं/ चोलिया में हुक राजा जी/ कई दीं एक गो पीछवा से चूक राजा जी ! ‘ साथही सकेत होखता राजा जी, ‘दूसर ले आ दीं.’ विनोद राठौर त , ‘ तोहार लंहंगा उठा देब रीमोट से’ तक आ गइल बाड़न. संपत हरामी जइसन लोग के गायकी त हम एहिजा ‘कोटो’ ना कर सकीं.

गरज ई कि भोजपुरी गाना के मान-मर्यादा, मिठास अउर सांस एह तरह पतित हो गइल बा कि ऊ समय दूर नइखे जब भोजपुरी गानो में लांग-लांग एगो के शब्दावली आ जाई. लोग कही कि हँ, भोजपुरीओ एगो बाषा रहल जवना में लोग अश्लील गाना गावत रहे. सत्तर-अस्सी का दशक में जब बालेश्वर भोजपुरी के बिगुल फूंकत रहले भा मुहम्मद खलील भोजपुरी गीतन में रस भरत रहले, ओकर प्राण-प्रतिश्ठा करत रहले तबहियो अश्लील आ बेतुका गीतन के दौर रहल. लेकिन छुपछुपा के. ‘तनी धीरे-धीरे धंसाव कि दुखाला रजऊ’ भा फेर ‘मोट बाटें सइयां, पतर बाटी खटिया’ भा फेर ‘तोरे बहिनिया क दुत्तल्ला मकान मोरी भौजी’ जइसम गाना चलन में रहे. जवना चलते बालेश्वर त समझौता कइले बाकिर खलील जइसन गायक ना. आजुवो एगो गायक बाड़े रामचंद्र दुबे. आजु का तारीख में भोजपुरी गायकी के सर्वश्रेश्ठ गायक. ईश्वर उनुका के सुरो दिहले बाड़न आ गानो. आ जब ऊ ललकार के गावेल त मन मगन हो जाला. समझौता उहो ना कइलन अपना गायकी में. एक समय ई.टी.वी. पर फोक जलवा में बतौर जज जब ऊ आवसु त महफ़िल लूट ले जासु. अब महुआ पर रामायण बांचेले आ कानपुर में प्रवचन से गुजारा करेले. लेकिन देखीं बाजार के ताकत कि रामचंद्र दुबे के एको सी. डी. भा कैसेट बाज़ार में नइखे. बताईं मुहम्मसद खलील भा
रामचंद्र दुबे जइसन श्रेष्ठ गायकन के सी.डी भा कैसेट बाज़ार में नइखे बाकिर संपत हरामी आ कलुआ जइसन अइसन-वइसन गायकन के सी. डी. से बाज़ार पटाइल पड़ल बा. हर चीज़ के हद होले. भोजपुरी गायकीओ के बाज़ार अब आपन हद पार करत बा, नतीजा सामने बा. टी सीरिज़ भा वेब जइसन कंपनी जे भोजपुरी गाना के बिजनेस करेली सँ, आजु बाजार में भारी साँसत में बाड़ी सँ. अबकी का होली में अश्लील गानन के सीडीअन का पिटअइला से भारी नुकसान में आ गइल बाड़ी सँ. हालत ई बा कि कलाकारन के सी.डी. जारी करे खातिर ई कंपनियां सी.डी. आ एक लाख रूपिया माँगत बाड़ी सँ कलाकारन से ! आ बिलकुल नवही कलाकारन के तबहियो एंट्री नइखे.

अब कुछ गायिका लोगनो के ज़िक्र ज़रूरी बा. शारदा सिन्हा, कल्पना, मालिनी अवस्थी आ विजया भारती पहिला कतार में बा लोग, शारदा सिन्हा का लगे एक से एक बेजोड गाना बा. एक समय जब पाप गीतन के दौर आइल रहे त शारदा सिन्हा समझौता करे से इंकार करत कहले रही, ‘ई पाप भोजपुरी में कहां समाई? ई त पाप हो जाई !’ दुर्भाग्य से पुरूष गायक एह तथ्य के नज़रअंदाज़ कर दिहले. नतीजा सामने बा. शारदा सिन्हा अबहियो दोसर जोड़-तोड भले कइले होखसु, अपना गायकी में आपन गमक बरकार रखले बाड़ी. आपन गमक बचवले रखले बाड़ी, ‘हम त मंगलीं आजन-बाजन सिंघा काहें लवले रे/ फूंकब तोहार दाढी में बंदूक काहें लवले रे ‘ एकर सबले बड़का उदाहरण बा. खुशी के बाति बा कि मालिनी अवस्थी आ विजया भारती तमाम दबाव का बावजूदो अपना गायकी में लोच त बरकरार रखले बाड़ी बाकिर लोचा नइखी आवे दिहले. लेकिन बड़हन दिक्कत इहे बा कि सी.डी का बाज़ार में एहु दुनु लोग के धूम नइखे. विजया भारती एगो बढ़िया गायिका त हइये हई, कवियत्रीओ हई आ आपने गाना गावेली. लाख फ़र्माइश हो दोसरा के गावल गाना ना गावसु. बाकिर ले दे के उहो स्टेज शो अउर महुआ पर बिहाने-बिहाने आ भौजी नंबर एक में सिमट के रहि गइल बाड़ी.

इहे हाल मालिनी अवस्थी के बा. उहो महोत्सव अउर स्टेजे शो तक सिमटल बाड़ी. मालिनी दोसरा के गावल गाना गावे से गुरेज ना करसु बाकिर अपना गायकी में मर्यादा के एगो बडहन रेखा ज़रूरे खिंचले रहेली. हालांकि कई बेर ऊ इला अरूण का तर्ज़ पर स्टेज परफ़ार्मर बने का दीवानगी तक चल जाली आ ‘काहे को व्याही विदे्स’ के आकुलतो बोवेली लेकिन ‘सैयां मिले लरिकइयां मैं का करूं’ के मोह से आगा ना निकल पावसु. कबो राहत अली के शिष्या रहल मालिनी बाद में गिरिजा देवी के शिष्या हो गइली. राहत अली गज़ल के आदमी रहले आ गिरिजा देवी शास्त्रीय गायिका. कजरी, ठुमरी, दादरा, चैता गावे वाली. मालिनी खुद भातखंडे के पढल हई. बाकिर ई सब भूल-भुला के मालिनी अपना लोकगायकी में दुनु गुरूअन के शिक्षा के परे राखत शो वुमेन बन चलल बाड़ी का शोबाज़ीए के पहिला काम बना लिहले बाड़ी. ऊ भूल गइल बाड़ी कि एगो किशोरी अमोनकरो भइली जे सिनेमा में प्लेबैको एहसे छोड़ दिहली कि एहसे उनुका गुरु के एतरज रहल. हृदयनाथ मंगेशकर कहेले कि अगर
पिता जी जियत रहते त हमरा घर में केहु प्लेबैक ना गाईत. लतो मंगेशकर ना. ई बाति हमरा से एगो इन्टरव्यू में ऊ खुद कहले. बाकिर भातखंडे के पढल-लिखल मालिनी एह सब के भूल-भाल के बाज़ार का साथ समझौता कर बइठल बाड़ी आ लाग’ता कि स्टेज अउर पब्लीसिटी के गुलाम बन गइल बाड़ी. उनुकर गायकी अउरी निखरे ना निखरे उनुकर फ़ोटो अखबारन में छपल जरुरी बा. महोत्सवन में उनुकर चहुँपल जरुरी बा. मालिनी के ई समुझावे वाला केहु नइखे कि उनुकर पहिचान उनुका गायकी से याद कइल जाई, सिर्फ़ मंचीय सक्रियता, चैनलन पर बइठला भा शोबाज़ी से ना. खास कर तब आ जब जब रोटी-दाल के संघर्ष उनुका साथे नइखे. ऊ सब कुछ भूला के संगीत साधना कर सकेली आ कवनो बडहन गायकी के समय रच सकेली.

कल्पना बेजोड गायिका हई. ‘उतरल किरिनीया चांद से नीनिया के धीरे-धीरे हो’भा ‘नींदिया डसे रे सेजिया, कवनो करे चैना’ भा फेर ‘ जिनगी में सब कुछ करीहऽ/ प्यार केकरो से न करीहऽ.’ जइसन ना भुलाए वाला गीत कल्पना का खाता में दर्ज़ बा. सी.डी. के बाज़ारो में ऊ भारी बाड़ी. पर शारदा सिनहा, विजया भारती भा मालिनी अवस्थी का तरह ऊ गायकी की मान मर्यादा के गुमान बचा के ना राखसु, अकसर तूड़ देली, ‘ गवनवा ले जा राजा जी !’ तकेले बात रहीत त गनीमत रहे. लेकिन बात जब,’ सुन परदेसी बालम/ हम के नाहीं ढीली/ देवरा तूरी किल्ली/ आ जा घरे छोड के तू दिल्ली’ भा फेर, ‘मिसिर जी तू त बाडऽ बडा ठंडा’ आ फेर ‘जादव जी’ जइसन गीत उनुका के बाजार में भले टिका देत होखे बाकिर उनुका बेजोड़ गायकी में पैबंद बन के ओकरा के धूमिल कर देला. उनुका गायकी के जवन साधना बा, उनुकर जवन यात्रा बा, ऊ खंडिते ना कहीं कहीं त ध्वस्तो होखत लउकेले. अइसना में भलही थोड़िके देर ला सही, गायकी में आपन हाजिरी दर्ज करावे वाली ऊषा टंडन, पद्मा गिडवानी, अउर आरती पांडेय के इयादो आवल स्वाभाविक बा. खास कर उनकर गावल,’ का दे के शिव के मनाईं हो शिव मानत नाहीं’ भा फेर ‘भूसा बेंचि मोहिं लाइ देव लटकन’ भा फेर , ‘पिया मेंहदी ले आ द मोती झील से जा के साइकिल से ना !’ अउर कि, मोंहिं सैयां मिले छोटे से’ जइसन गानो के याद बरबस आ जाले. भलही एह गायिकन के सिक्का बाज़ार में ना उछलल लेकिन गायकी में समझौते ना कइळी ई गायिका लोग. एगो बातो एहिजा याद दिआवल मौजू बा कि लता मंगेशकर राज कपूर का कहला से संगम में ‘मैं का करूं राम मुझे बुड्ढा मिल गया ‘ गा ज़रूर दिहली लेकिन ओह गाना के मलाल उनुका आजु ले बा कि अइसन गाना ऊ काहे गा दिहली ? अइसही आशो भोसले के मलाला बा अॡना कुछ गाना के ले के, खास कर के ‘मेरी बेरी के बेर मत तोडो, नहीं कांटा चुभ जाएगा.’ बाकिर पता ना आजु के गायकन के ई अहसास कहिया होई ?

अबही हाल में महुआ पर सुर-संग्राम के दौरान देखाइल-सुनाइल कुछ कलाकारंनो के जिक्र जरुरी बा. भोजपुरी गायकी के ई पड़ावो दर्ज कइला बिना आगा के भोजपुरी गायकी के बात बेमतलब लागेला. एकर दुसरको सत्र समापन तक चहुँप चुकल बा बाकिर पहिलका सत्र में कुछ बहुते बढ़िया गायक गायिका सामने अइले जे भोजपुरी गायकी के बाचल रहि जाये के विश्वासो दिआवेला. पहिला सत्र में विजेता त मोहन राठौर आ आलोक कुमार बनले बाकिर सबले सधल स्वर आ रियाज लउकल आलोक पाण्डेय के. ओकरा के अद्भुत कह सकीले. गायकी के आकलन एस.एम.एस से होखल गायकी के पराजये बा तबहु जवन हमरा सामने बा ओहमें छाँटल-बीनल त जाइये सकेला. अनामिका सिंह आ प्रियंका सिंह जइसन गायिका का साथहु अगर समय इंसाफ कइलसि त श्रेया घोषाल का तरह आगा बढ़े से केहु रोक ना सके. अबकी का सत्र में रघुवीर शरन श्रीवासतव आ ममता राऊत त मैदान में बड़ले बावे लोग. आगा अउरी प्रतिभा सामने अइहें आ भोजपुरी गायकी के नया कीर्तिमान रचत भोजपुरी के अश्लीलता आ फूहड गाना का खोह से बाहर निकाली अइसन उम्मीद त बा. मुहम्मद खलील एगो पचरा गावत रहले, ‘विनयी ले शरदा भवानी/ सुनी ले तू हऊ बडी दानी !’ आगा ऊ जोड़सु, ‘माई मोरे गीतिया में अस रस भरि द जगवा के झूमे जवानी !’ हमरो इहे कामना बा कि भोजपुरी गीतन का लहक अउर चहक में जगवा के जवानी झूमे आ ई कि बाजार के जवन घटाटोप अन्हरिया बा ऊहो टूटे.

याद दिआवल जरुरी बा कि भले कुछुवे फिलिमन में सही, लता मंगेशकर, मुहम्मद रफ़ी, मन्ना डे, मुकेश, तलत महमूद, हेमलता, अलका याज्ञनिक, आ उदित नारायण जवन भोजपुरी गाना गवले बावे लोग ओहमें कवनो तरह के खोट आजु ले केहु नइखे खोज पवले. ऊ गाना आजुवो अॡना मेलोडी में बेजोड़ बाड़े. कवनो सानी नइखे ओह गानन के. लता आ तलत का गावल “लाले-लाले ओठवा से बरसे ला ललइया हो कि रस चुएला हो” भा “हे गंगा मैया तोंहें पियरी चढइबों” हो भा मन्ना डे का गावल “हंसि-हंसि पनवा खियवले बेइमनवा” होखे भा रफ़ी के “सोनवा के पिंजरा में बन्द भइल चीरई क जीयरा उदास” भा फेर मुकेश के “हिया जरत रहत दिन रैन हो रामा” होखे भा हेमलता के गावल “पहुना हो पहुना, जब तक पूरे ना हो फेरे सात” भा फेर अबही हाल के अलका याज्ञनिक आ उदित के गावल सोहर “जुग-जुग जीयसु ललनवा” होखे. अइसनका बहुते गीतन से आजुवो उनुका गायकी के टटकापन कवनो महूए का तरह टपकेला, चूवेला त चित्रगुप्त के ईयाद आ जाले, रवींन्द्र जैन के याद आ जाले. एहुसे कि आजु के भोजपुरी गानन के संगीतो एह कदर बेसुरा हो चलल बा कि मत पूछीं. शादी-बारात में पी-पा के कुछ लड़िका ओकरा हल्ला में डाँस त कर सकेले बाकिर आंख मूंद के सुने के सुख त हरगिज ना ले सकसु. आ एहिजे बालेश्वर के एगो पुराना गाना याद आ जाता, ‘ जे केहू से नाईं हारल ते हारि गइल अपने से’.

सचमुच भोजपुरी गायकी अपनने से हार गइल बिया.


लेखक परिचय
अपना कहानी आ उपन्यासन का मार्फत लगातार चरचा में रहे वाला दयानंद पांडेय के जन्म ३० जनवरी १९५८ के गोरखपुर जिला के बेदौली गाँव में भइल रहे. हिन्दी में एम॰ए॰ कइला से पहिलही ऊ पत्रकारिता में आ गइले. ३३ साल हो गइल बा उनका पत्रकारिता करत, उनकर उपन्यास आ कहानियन के करीब पंद्रह गो किताब प्रकाशित हो चुकल बा. उपन्यास “लोक कवि अब गाते नहीं” खातिर उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान उनका के प्रेमचंद सम्मान से सम्मानित कइले बा आ “एक जीनियस की विवादास्पद मौत” खातिर यशपाल सम्मान से.

वे जो हारे हुये, हारमोनियम के हजार टुकड़े, लोक कवि अब गाते नहीं, अपने-अपने युद्ध, दरकते दरवाजे, जाने-अनजाने पुल (उपन्यास), बर्फ में फंसी मछली, सुमि का स्पेस, एक जीनियस की विवादास्पद मौत, सुंदर लड़कियों वाला शहर, बड़की दी का यक्ष प्रश्न, संवाद (कहानी संग्रह), सूरज का शिकारी (बच्चों की कहानियां), प्रेमचंद व्यक्तित्व और रचना दृष्टि (संपादित), आ सुनील गावस्कर के मशहूर किताब “माई आइडल्स” के हिन्दी अनुवाद “मेरे प्रिय खिलाड़ी” नाम से प्रकाशित. बांसगांव की मुनमुन (उपन्यास) आ हमन इश्क मस्ताना बहुतेरे (संस्मरण) जल्दिये प्रकाशित होखे वाला बा. बाकिर अबही ले भोजपुरी में कवनो किताब प्रकाशित नइखे. बाकिर उनका लेखन में भोजपुरी जनमानस हमेशा मौजूद रहल बा जवना के बानगी बा उपन्यास “लोक कवि अब गाते नहीं”.

दयानंद पांडेय जी के संपर्क सूत्र
5/7, डाली बाग, आफिसर्स कॉलोनी, लखनऊ.
मोबाइल नं॰ 09335233424, 09415130127

e-mail : dayanand.pandey@yahoo.com

नन्हकन के जलवा देखते बनत बा


महुआ टीवी पर प्रसारित होखे जा रहल गीत गवनई के नया शो “नहले पे दहला” खातिर पिछला दिने पटना के बोरिंग कनाल रोड पर बाल्डविन अकादमी में जब आडिशन लिहल जात रहे तब प्रतिभागी नन्हकन के जलवा देखते बनत रहे. आडिशन देबे खातिर बिहार के दूर दराज से प्रतियोगी आइल रहलें आ सबेरे जब १० बजे से आडिशन शुरु होखे वाला रहे तबले ७०० नन्हका प्रतियोगी आपन नामांकन करा चुकल रहलें.

आडिशन लेत रहलें मशहूर संगीतकार सतीश उपाध्याय आ महुआ टीवी के सीनियर कार्यकारी निर्मात्री उर्मिका राय. आडिशन का बाद सतीश उपाध्याय बतवलें कि एह कार्यक्रम से एगो नया अध्याय शुरु होखे जा रहल बा जब सगरी देश नन्हकन आ नवहियन के भोजपुरी गीत गावत देखीहें सुनीहें. उर्मिका राय कहली कि महुआ टीवी हमेशा से गाँव देहात कस्बा से नया नया प्रतिभा खोज निकाल के ओकरा के राष्ट्रीय मंच देत आइल बा. सुर संग्राम, डांस संग्राम, भौजी नं. १, गृहलक्ष्मी का बाद ओहि कड़ी में ई नया शो जुड़े जा रहल बा जवना के नाम बा “नहले पे दहला”. बतवली कि शो २४ दिसम्बर से शुरु होखी आ दिनेश लाल यादव निरहुआ एह शो के एंकर रहीहें. जज का कुर्सी पर पवन सिंह आ धनंजय मिश्रा बइठीहें.


(स्रोत – प्रशान्त-निशान्त)

वइसनका गवला से का फायदा ?

बहुते फिल्म आ सैकड़ो अलबम खातिर गा चुकल इन्दु सोमाली ओह दिन फेर पटना के पीजी सुपर साउन्ड में एगो देवी गीत के अलबम रिकार्ड करावे आइल रहली. बातचीत होखे लागल त बतवली कि ऊ विनय बिहारी के शुक्रगुजार बाड़ी जे उनका के फिल्मन में गावे खातिर ब्रेक दिअवलें. अपना आवाज का दम पर इन्दु सोमाली ओह ब्रेक का बाद जमत गइली आ आजु बढ़िया मुकाम पर चहुँप चुकल बाड़ी.

बतवली कि पहिले ऊ स्टेज शो करत रहली. फेर अलबम खातिर गावे के मौका मिलल आ सबसे पहिले ऊ एही स्टूडियो, पीजी सुपर साउण्ड, में आइल रहली. फेर संजोग से विनय बिहारी से भेंट भइल. विनय बिहारी इन्दु सोमाली के सब जगह ले जा के परिचय करवलें आ कहलें कि बढ़िया गायिका हई, मौका दीहिं.

भोजपुरी में फूहड़ गीत के बहुतायत पर कहली कि ऊ उहे गावेली जवन सुने वाला पसन्द करेलें. कहली कि खाली भजन गाईं आ केहू सुने वाला ना होखे त गवला से का फायदा ? हँ अतना जरुर कोशिश करेली कि गाना के बोल से वइसन हिस्सा निकाल दिहल जाव जवन सही नइखे.

नयका गायक गायिका के दिशा निर्देश दिहला का बारे में इन्दु सोमाली कहली कि बस अतने कहीहें कि मेहनत करीं आ लागल रहीं. माँ के आशीर्वाद से आजु हम एहीजा बानी कि रउरा भा कुछ लोग हमरा के जाने लागल बा.


(स्रोत – संजयभूषण पटियाला)

जमशेदपुर में भोजपुरिया संग्राम

जमशेदपुर में काल्हु से आस्था नाम के संस्था भारत सरकार का केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय, झारखंड के कला संस्कृति युवा मामला विभाग, झारखंड पुलिस एसोसिएशन, आ टाटा स्टील का सहयोग से “संबंध २०१०” नाम के एगो उत्सव शुरु भइल बा. कार्यक्रम के उद्घाटन मारीशस के राष्ट्रपति अनिरुध जगनाथ कइलें

कार्यक्रम में शामिल होखे भोजपुरी सम्राट भरत शर्मा व्यास, मालिनी अवस्थी, आ राजकुमार पाण्डेय अपना गायकी के त पाखी हेगडे अपना नृत्य के जलवा देखावल लोग. बाद में कार्यक्रम में शामिल होखे आइल कलाकारन के सम्मानित कइल गइल.

भरत शर्मा व्यास कहलें कि जवना लोग के भोजपुरी अइबे ना करे, बुझइबे ना करे ओह लोग के सुर संग्राम के जज बनावल गइल बा. एहसे हो ई रहल बा कि योग्य प्रतिभागी आगा नइखन बढ़ पावत. एह बाति के विरोध मालिनी अवस्थी कइली आ कहली कि ऊ कवनो अइसन कार्यक्रम में जाइये नइखी सकत जवना में पक्षपात होखे के तनिको अनेसा होखे.

एह कार्यक्रम में भोजपुरी गायिका कल्पना के बोलावल गइल बा. उनकर कार्यक्रम २१ तारीख के होखी. भोजपुरी में अश्लीलता के विरोध करे वाला लोग एह फैसला का खिलाफ विरोध प्रदर्शन करे का तइयारी में बा. बाकिर आयोजक अपना फैसला पर अड़ल बाड़े.


(स्रोत – समाचार माध्यम)

भोजपुरी के तहस नहस

– आर्य संपूर्णानन्द

भोजपुरी के भोजवाली पूरी समुझल केतना नादानी के काम बा, ई खाली पढ़े आ सुने वाली बाति नइखे. बहुते विचार मंथन के बाति बा. आज के माहौल के बाति अगर करीं त ठीक उहे नादानी हमरा भोजपुरिया भाई लोग आज करत बाड़े जा. ए बाति के समझे खातिर रउवा हमरा साथे आज के गीत सुनीं. साचों रउआ ई जरूर महसूस होई कि हमरे समाज पर ए गीतन के बहुत सीधा असर पड़ता. शायदे एकाध गाना नीक नीक आ जाय नाहीं त लगभग सब उहे सुने के मिली. लगभग समझीं कि, गइल जमाना स्वस्थ भोजपुरी के.

ध्यान दीहीं कि एगो गाना आइल रहे, “एगो चुम्मा ले ल राजा जी, बनि जाई जतरा”. अब रउँए बतायीं कि ए शुभ अवसर पर पँवलगी गइल आशीष गइल. का एगो चुम्मे बाचि गइल रहे ? चलीं एकर त बहुते विरोध भइल. तनि ओहू ले पहिले जो ध्यान दीहीं त एगो गाना आइल रहे, “नथुनिये पर गोली मारे सईंया हमार”. एहू जो विरोध भइल. अरे का कहीं एहू ले हद तब हो गइल, जब “ले के भौजी के देवरे फरार हो गइल”. तनी देखिला. अब बताईं ए भईया, हमरे राम जइसन भउजी, हमरी सीता. का एह में कउनो कमी रहल? कि “साँचि कहे तोरे आवन से, हमरे अँगना में आइल बहार भउजी”, ई शब्द गलत रहे? अब बताईं, सीता के सम्बोधन, “लक्ष्मी सी सूरत, अउरी ममता की मूरत” वाली भउजी के आज के भोजपुरिया लोग कतना इज्जत के निगाह से देखेला, ई त गनवे में बता दीहल गइल बा. आज भौजी अउर देवर के पवित्र सम्बन्धो पर पश्नचिह्न खड़ा करे के प्रयास हमार भाई लोग कर रहल बाड़े जा. खैर रउँओ त एही देश के जामल बानी, फेर रउँओ के जानकारी होखी, बाकिर तबहियो हम ई बता देहल चाहब कि एही भारतवंश के बच्चा लोग कबो शेर के दाँत गिनत रहले, आज उहे हाथ चोलिया में हुक लगावत बाड़े !

ढेर दिन के बाति नइखे. तनिका पिछलका ओर ध्यान दीहीं त तमाम गाना अइसन मिली जवन कि हमरा देश अउरी गाँव के साथे जुड़ल रहे जइसे कि “गंगा किनारे मोरा गाँव हो”, “घरे पहुँचा द देवी मईया”, कतना सुन्दर ओह गाँव के चप्पा चप्पा के सुन्दर चित्रण गइल गइल रहे ओह गाना में. चाहे वंशी काका के बाति लीहीं भा गंगू चाचा के, इहाँ तक कि अँगना में नीमिया के छाँव तक के बाति कइल गइल. आजो रोंआ फूट पड़ेला वइसन गाना सुनि के.

रउआँ प्रेम प्यार के बाति कइल चाहेब? चलीं, ओहू में समय रउँआ साथे बा. “लाले लाले होंठवा से चूवेला ललईया हो कि रस चूवेला”. कतना रस चूवत बा एह गाना में, रउवें बता सकीले. “काहे बँसुरिया बजवले, पिरितिया लगवले, गइल सुख चैन हमार”. अब देख लीहीं ए गाना में कतना नीक तरीका से कान में बँसुरिया के पिरीत घोरे के प्रयास होता. लागता कि या त हमनिये के बुद्धि भ्रष्ट हो गइल बा या समय बदलि गइल बा. लेकिन समय के साथे साथे हमरा के ईहो सोचे के पड़ी कि आज देश कवना ओर जा ता. चूँकि एही देश के नमक हमनियो खात बानी जा, एह से हम सबहीं के ई फरज बनेला कि सबका साथे देशो के बारे में सोचे के कूबत रखे के चाहीं. मुख्य बाति बा कि आज चाईना संस्कृति के प्रचार हमरे गाँव गाँव अउर शहर शहर में हो ता. जहवें देखी उहें चाईना मोबाइल से भद्दा भद्दा गाना तेज अवाज में सुने के मिलऽता. इहाँ त ई लागता कि हमरा नवहियन के सीधे सीधे पथभ्रष्ट कइले के कुप्रयास हो ता. सीमा पर जहाँ चाईनीज सेना के गतिविधि बढल जाता, उहें हमरा देश के अन्दरवो कदम कदम पर आतंकवाद बढ़ल जा ता. का ई समय जींस ढीला करे के बा ? आ कि सेंट मारि के चिट्ठी देवे के बा ? शमियनवे में गोली चलावे के बा आ कि लहंगा में बम फोड़े के बा.

सोंची कि एगो उहो भोजपुरिया रहले जिनका बारे में हार मान के ई लिखल गइल कि “एक्जामिनी इज बेटर दैन एक्जामिनर” (ड़ा0 राजेन्द्र प्रसाद), जय जवान जय किसान (लाल बहादुर शास्त्री) के नारा देवे वालो भोजपुरिये रहल. अरे का कहीं, एतने ना एही बल पर त भोजपुरिया लोग अतना ताल ठोंकले जा कि बलिया के पूरे भारत में पहिलहीं स्वतन्त्र करा दिहले जा. एही भोजपुरियने के ऊ कमाल रहे. अरे हमनी के त ई चाहीं कि शक्तिशाली भोजपुरी के शब्द कमान पर चढ़ि के अइसन तीर मारीं कि दुश्मन के आँखी का आगे पियरी छा जाय. अउरी ऊ हमरा ओर भुलाइयो के ताके के हिम्मत ना जुटा पावँ स. बस इहे कहल चाहेब कि आज जरूरत बा, “जगत रह भईया तूँ सोई मत जईहा” के.

जय हो भोजपुरिया अउर जय हो हमार भोजपुरी.

पवन सिंह के अनोखा रिकार्ड

सावन के पावन महीना में भोजपुरी सिनेमा के सुपर स्टार पवन सिहं के गायकीओ के जलवा दर्शकन आ सुनेवालन के छाप लिहले बा. पवन सिंह के नयका भोजपुरी अलबम आई एम बाबा के काँवरिया एगो अनोखा रिकार्ड बना दिहले बा.


भगवान भोलेनाथ के वंदना आ काँवरिया भक्तन खातिर मनोरंजन के सैलाब लेके आइल एह अलबम के सावन का पहिलके हफ्ता में २ लाख आडियो आ विडियो सीडी बिकाये के रिकार्ड बन गइल बा. टी सीरीज से जारी एह अलबम में पवन सिंह के एगारह गो मधुर गीत बाड़ी स जवना में से सईंया कनवे पर डमरु बजावेलाबीस सौ बारह में धरती ना रही, बता दऽ ए बाबा झूठ हऽ कि सही बहुते पसन्द कइल जा रहल बा.

विनय बिहारी के लिखल गीत आ मधुकर आनन्द के संगीत से सजल एह अलबम के लोकप्रियता के आलम ई बा कि बाबा के नगरिया से ले के बिहार आ यूपी सगरो एकरे धूम मचल बा. टी सीरीज के बिहार वितरक राजू सिंह बतवले कि कैसेट आवे का पहिलके दिने उनका दूकान से पचास हजार कैसेट बिका गइल रहुवे.


(स्रोत : प्रशान्त निशान्त )