भोजपुरी सरोकारन से जुड़ल पत्रिका भोजपुरी पंचायत

आजु जब भोजपुरी के पत्रिका प्रकाशन के स्थिति खराब चलत बा आ शायदे कवनो पत्रिका बिया जवना के नियमित प्रकाशन आ उहो समय पर हो रहल बा. एह दिसाईं दिल्ली से प्रकाशित होखे वाली पत्रिका भोजपुरी पंचायत बधाई के हकदार बिया कि अपना शुरुआत से अबले ओकर चारो अंक एकदम समय पर प्रकाशित होखत आइल बा.

हर नया अंक में एह पत्रिका के जुड़ाव भोजपुरी सरोकारन से बढ़ल जात बा. अलग बात बा कि साथही साथ पत्रिका के अपना व्यावसायिको हित के संरक्षण करे के पड़त बा. सब कुछ का बावजूद पत्रिका के कलेवर आ सामग्री के चयन में सुधार होखत बा. ई बात हम एहसे नइखी कहत कि अब एह पत्रिका में अँजोरिया पर प्रकाशित बतकुच्चनो के चुनल कड़ी प्रकाशित होखत बावे. अब एह पत्रिका में भोजपुरी रचना आ भोजपुरी सरोकार साफ झलके लागल बा. एह सब का बावजूद हमार निहोरा रही कि एह पत्रिका में विचारणीय विषय चाहे जवन राखल जाव साहित्यिक रचना भोजपुरीए में दिहल जाव त नीक रही.

सितम्बर के अंक अगस्त का आखिरी सप्ताह में नेट पर उपलब्ध हो गइल रहे. अगर एकरा के एक हफ्ता अउर विलम्ब से प्रकाशित कइल गइल रहीत त एहमें दिल्ली में पिछला २९ अगस्त के भइल धरना प्रदर्शन के खबर आ रपट सामयिक हो जाइत.

सब कुछ का बावजूद एह पत्रिका के सफलता खातिर अँजोरिया परिवार का तरफ से मंगल कामना हमेशा कइल जाई.

पत्रिका के सितम्बर के अंक पढ़े खातिर रउरा नेट से डाउनलोड कर सकीलें.
अगस्त के अंक
जुलाई के अंक
जून के अंक

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भोजपुरी दिशा बोध के पत्रिका पाती के नयका अंक

पाती के नयका अंक बेहतरीन कागज पर बढ़िया सफाई का साथ प्रकाशित भइल बा. बाकिर कुछ तकनीकि गलती से एकर सूची वाला पन्ना के पीडीएफ पढ़ात नइखे. अह अंक में बावे नया लोकतंत्र के सपना (संपादकीय), लोकतंत्र में लोकभावना के बेमिसाल जीत (अन्ना के आंदोलन पर रिपोर्ताज), राजगुप्त के लिखल व्यंग्य रचना “रउरा अइलीं”, स्व॰ जगदीश ओझा “सुन्दर” के दू गो गीत, रामजियावन दास बावला, हीरालाल हीरा, आनन्द संधिदूत, शिवपूजन लाल विद्यार्थी, हजारीलाल गुप्त, जनार्दन प्र॰ द्विवेदी, आ भागवत पाण्डेय के कविता, विष्णुदेव तिवारी के लिखल कहानी “कायर” आ शंभूनाथ उपाध्याय के लिखल कहानी “आखिरी बेरा के संघाती”, लोकसंस्कृति पर विवेचनात्मक लेख “शंखबाजे बलाय भागे”, शिलिमुख के लिखल “लोक के कथा लोककथा”, ऋचा के लिखल लघुकहानी “सार्वजनिक के समानता”. सुरेश कांटक के लिखल नाटक “तारनहार”, आ पुस्तक चर्चा “कसौटी” में भोला प्रसाद आग्नेय के लिखल कहानी संग्रह “पगला पगली”, जनार्दन प्रसाद द्विवेदी के कविता संग्रह “दुनिया दउर रहल बा”, सुरेश कांटक के लिखल नाटक “पहिला नायक”, सुरेशे कांटक के लिखल कविता संग्रह “का ए बकुला” आ अनिल ओझा नीरद के कविता संग्रह “बेचारा सम्राट” के चरचा.

आशा बा कि हमेशा का तरह “पाती” के नयको अंक पढ़ि के रउरा सभे आनन्दित होखब.

संपादक, अँजोरिया