भउजी हो : तीन गो चोर आ ओकनी के सजा

भउजी हो !
का बबुआ ? बहुत दिन बाद अइनी, जमानत मिल गइल का ?

ना भउजी. तूलोग जवना जेहल में डलले बाड़ू ओहिजा से मुअला का दिन ले जमानत नइखे मिले वाला. हँ बीच बीच में पेरोल पर छूटत रहीलें.
तबो भउजी का लगे आवे में अतना दिन लाग जाला !

अब भउजी , एकर सफाई दीं त का ? साँच बोल ना पाएब आ झूठ बोले के आदत नइखे. खैर एगो बाति बताव ?
ना दीहें !

हम पूछनी ना आ तू जबाबो दे दिहलू. पहिले पूछे त द?
ए बबुआ वकील ना हईं त का, वकील के मेहरारू त हईं नू. जानते बानी कि एने कुछेक अइसन फइसला आइल बा जवना से रउरा दिमाग में एगो सवाल घनघनात होई, कि इस्तीफा दीहें कि ना, देबे के चाहीं कि ना, वगैरह वगैरह. एहसे रउरा पूछे से पहिलहीं कह दिहनी ह कि ना. अब पूछीं.

काहे ?
सीधा जबाब ना देब. घूमा के कहब. पुरनका जमाना के कहानी ह. रउरा सुनले आ पढ़ले होखब. बाकिर फेर दोहरावे में कवनो हरजा नइखे.

एक बेर एगो गाँव में चोरी हो गइल. तीन गो चोर धरइलें. राजा का दरबार में पेशी भइल. राजा तीनो का बारे में पूछले, जनले आ फैसला सुनावल शुरु कइले.
पहिलका से कहले, ” का महाराज रउरो रहीं एहमें ? जाईं”
दोसरका के गाँव के चौराहा पर ले जा के चार कोड़ा मारे के सजा दिहलें.
आ तिसरका के कहलन, तोरा लायक सजा त बुझाते नइखे कि का दीं. फेर सजा सुनवले कि एकर माथ छिल के मुँह पर करीखा पोत के गदहा पर बइठा के जूता से पीटत भर गाँव घुमावल जाव.
दरबारी एह तरह के सजा सुन के सन्न रहि गइले. एगो दरबारी से अड़ाइल ना. कहलसि, महाराज माफी देम. रउरा न्याय कुशलता के आदमी उदाहरण देत रहल हऽ. बाकिर आजु एके अपराध के तीन तरह के सजाय सुनि के नीक ना लागल.
राजा कहलन, हमरो नीक नइखे लागत. बाकिर करीं का. मानत बानी कि पहिलका के बेसी सजाय सुना दिहनी.
ई जबाब सुन के दरबारी चुपा गइल. फेर पूछे के हिम्मत ना भइल ओकर.
अगिला दिने पता चलल कि पहिलका जहर खा के मर गइल. दुसरका कोड़ा से पिटा के गाँव छोड़ दिहलसि. आ तिसरका ? तिसरका के जब भर गाँव घुमावत ओकरा घर का सोझा से ले जात रहले सिपाही त ऊ अपना मेहरी के आवाज लगा के कहलसि, खाना परोस के रखिहे, अब दूइये गो घर बाकी बा !

बबुआ अब त जबाब मिल गइल होखी.

भउजी जबाब त मिल गइल बाकिर सोचत बानी कि अबहीं कई गो घर बाकी बा एह मरदवा के!
छोड़ीं. चलीं ढेर दिन बाद आइल बानी. संजोग से गाजर के हलुआ बनवले बानी. लीं खाईं.

भउजी हो : तीज के व्रत

भउजी हो !

का बबुआ ?

आजु त उपासल होखबू ?

हँ बबुआ आजु तीज के व्रत त सभे औरत करेली.

एही पर एगो सवाल बा भउजी ? तोहरा लोग खातिर त तीज, जिउतिया तरह तरह के व्रत बा बेटा भतार खातिर बढ़िया मनावे के. बाकिर मरदन के एहसे आजाद काहे राखल बा ?

ई दरद रउरा ना बूझ पाएब. मरद हईं मरदे रहब. बाकिर सवाल कइले बानी त हम आपन जबाब त देबे करब. असल बाति ई बा कि हमनी का आपन घर छोड़ के दोसरा का घर में आइले जा आ ओही घर के आपन घर बना के राखीला जाँ. आपन बाप महतारी भाई बहिन सगरी छूटि जाला. अब अगर इहो सहारा छूटि जाव त हमनी का कहाँ जाएब कहाँ के रहि जाएब ! एही चलते औरत हमेशा अपना बेटा भतार के बढ़िया मनावेली. ई विस्थापितन के दरद ह बबुआ. एक जगहा से उखरला का बाद दोसरा जगहा ठौर बनावे के दरद. पार्वती जी के माईओ उनुका के विदाई का बेरा इहे कहले रही कि, “करेहू सदा शंकर पद पूजा, नारि धरम पति देव न दूजा.”

ठीक कहत बाड़ू भउजी. आजु त कुछ खाएब पिएब ना. चलत बानी.

सरकार से सरकावे वाला

भउजी हो !

का बबुआ ?

सुनलू ह ?

हँ, सुने में त आवत बा.

का ? बड़ा अगमजानी बने लागल बाड़ू. हम का कहल चाहत बानी ?

ए बबुआ, रउरा के हम तहिया से देखत बानी जब रउरा बिना जँघियो पहिरले कूदत रहीं. रउरा मन के बात हम ना जानब त के जानी ?

त का जनलू ह, बताइये द ?

इहे नू कि लालू मंत्री बने जा रहल बाड़न.

हँ हो भउजी. इहे कहल चाहत रहीं. बता सकेलू कि का हो गइल कि अचके में लालू के मंत्री बनावे के पड़ रहल बा ?

ए बबुआ, मंत्री मण्डल में हर तरह के लोग चाहीं आ सबले बेसी जरुरत ओह लोग के पड़ेला से सरकार से सरकावे के जानेला. अगर सरका ना पवलसि त सरकार में रहला के फायदा का ? ओ ओही लोग का साथे साथ कुछ उहो लोग सरका लेला जे सरकावे ना जाने. कई गो घोटालेबाज मंत्रियन का हटला से खाली भइल जगहियो त भरे के बा.

ठीक कहत बाड़ू भउजी. बाकिर देखीहऽ तोहरा चलते हम ना अझुरा जाईं.

ए बबुआ, करेजा मे दम ना होखो त बगइचा में डेरा ना डालल जाव !

ठीक बा भउजी, छौड़ऽ ई सब बाति. बाहर बूनी पड़त बा चलऽ पकौड़ी खिआवऽ.

भउजी के डॉगी राजा

भउजी हो !

का बबुआ ?

ई का सुनत बानी ?

हमरा डॉगी राजा के भौं भौं. अउर का.

ई कहिया से पोस लिहलू ?

ए बबुआ, सुनले नइखीं कि देखा देखी पुन्न, देखा देखी पाप.

मतलब का ?

मतलब कि बड़का लोगन का घर में एगो डॉगी राजा हमेशा राखल जाला. काहे कि जरुरत पड़ले पर आवे जाए वालन पर, कुछकहे सुने वालन पर भौंकत रहेले सँ आ लोग पजरी ना सटे.

बाकिर भौंके वाला कुकुरन से बढ़िया त हबके वाला कुकुर होले सँ जे सीधे हबक लेले सँ.

बबुआ वइसन डॉगी रखला मे इहो डर होला कि कबो फुरसत में रउरे के मत हबक लेव. ई डॉगी राजा का बारे में हम बढ़िया से पूरा अता पता लगा के रखले बानी. ई दोसरा कवनो काम लायक नइखे बस भँउके लायक बा. सबेरे साँझ दू गो रोटी दे दिहल करीं, दिन भर भँउकत रही.

भउजी हो : अलकायदा बनाम आलाकमान

भउजी हो !

का बबुआ ?

सुनत बानी कि मनमोहन सिंह आ गिलानी में एगो बात एके लेखा बा.

का बबुआ ?

गिलानी के अपना देश में रहे वाला ओसामा का बारे में पता ना रहे आ मनमोहन के अपना मंत्री ए॰राजा का बारे में.

ई झूठ बा बबुआ.

काहे भउजी ?

मनमोहन के सब मालूम रहे बाकिर ऊ चुप्पी सधले रहले.

केकरा डरे ? एहिजा त कवनो अलकायदा नइखे.

अलकायदा आ आलाकमान में ढेर फरक थोड़े होखेला.

गजब भउजी. एहि तरे ढारत रहऽ.

भागब कि ना !

भउजी हो !

भउजी हो !
का बबुआ ?
सुनलू ह?
हँ.
तब ?
तब का ?
अतना बखेड़ा नकली कप खातिर भइल ?
ना. जवने कप मिलल उहे असली ह.
कइसे ?
लड़िकी कवनो देखावल गइल होखो. जेकरा माँग में सेनूर डलनी आ विदा करवनी उहे असली हो गइल.
मान लिहनी भउजी.

भउजी हो !

का बबुआ ? फगुआ आ गइल का ?

लउकल त ना हऽ केनियो. बाकिर सुने में आवत बा कि आ गइल बा. ओकरे के खोजे निकलल बानी.

चलीं, एही बहाने भउजी त याद आ गइली. ना त अब त जमाना बा अपने मरद मेहरारू में भूलाइल रहे के. बाप महतारी, भाई भउजाई, बहिन बहिनई सब भुलाइल जात बा आदमी.

का भउजी, कम से कम फगुआ का दिने त ई रंग उड़ावे वाली बात मते बतियावल जाव.

ठीक बा बबुआ. आईं रउरा खातिर खास गुझिया बना के रखले बानी.

आवऽ पहिले अबीर मल लेबे दऽ.

मल लीं. हमहूं तइयार बानी मले खातिर. बराबरीए पर छूटल जाई ! ओकरा बाद टीवी का सोझा बइठ के फगुआ मनावल जाई. काहे कि फगुआ त अब टीवी आ अखबारे में लउकत बा.

हँ भउजी, गीत गवनई त सब छूटल जात बा. आजु का दिने शराब का नशा में झूमत पियक्कड़ लउकेले सँ. मुर्गा मीट का दुकान पर सामने से आ शराब का दुकान पर पिछवाड़ा से लाइन लागल लउकेला. लोग फगुआ के पियक्कड़ी के पर्व बना के राख दिहले बा.

धीरे धीरे समाज आ संस्कृति खतम हो रहल बा बबुआ. लोग “सभ्य” होखल जात बा. अब ऊ फगुआ के उल्लास में नइखे रहत, फगुआ के औपचारिकता निबाहऽता.

भउजी हो !

भउजी हो !

का बबुआ ?

हैप्पी वैलेंटाइन डे !

शेम टू यू बबुआ.

अरे भउजी तू सेम का बदला शेम काहे कहताड़ू ?

काहे ना कहीं ? याद बा पिछला बेर कब आइल रहीं. वसन्त पंचमीओ का दिने भउजी याद ना अइली बाकिर वैलेंटाइन दिने आ गइली.

जमाना बदलत बा भउजी. बाप के नाम साग पात बेटा के परोरा. सुनले नइखू ?

सुनले बानी. बाकिर रउरो पर एकर असर पड़ जाई से ना सोचले रहीं. लागऽता कनियवा का फेर में रउरा अंगरेज होखल जात बानी.

ना भउजी, कनियवा के एह सब से कवनो मतलबे ना रहेला. ऊ त अपने दुनिया में मगन रहेली आ हमरो के अझूरवले राखेली. आजु मौका मिलल ह त चलि अइनी ह.

ओकरो के ले के आइल रहतीं. बेचारी हमेशा घर में घेराइल रहेले. रउरा अपना से कतना फुरसत मिलेला हमहू जानीले. चलीं अब आइल बानी त बइठल जाव. ढेर दिन हो गइल बतिववले.

अब चुहानिये में ना नू बात होई ? चलऽ चलल जाव बइठका में.

ए बबुआ हमनी मेहरारुवन के किस्मते में ठोंकाइल बा चूल्हा चउका. सब पढ़ल लिखल बेकार हो जाले रउरा सब मरदन का फेर में. मेहरारू कुछ दोसर करे लागे त रउरा लोग के मरदानगी के ठेस नू पहुँचेला.

बस करऽ भउजी. बात मत बढ़ावऽ. चलऽ कुछ दोसर बतियावल जाव.

भउजी हो….

भउजी हो…..

का बबुआ ?

लालू आ मुलायम के शिकायत बा कि सरकार ओह लोग के तनखाह कमे काहे बढ़वलसि ह ?

ओह लोग के कतनो तनखाह दे दिहल जाई कमे रही. आखिर मास्टरी करत करोड़पति देश के कई जने भइल बाड़न ? जे चपरासीओ लायक ना रहल से आजु करोड़न में खेलत बा. आखिर कुछ त खास बा एह लोगन में.

तबे नू भउजी कुछ मीडिया वाले एह लोग के अउरी लहकावत बाड़े कि अमेरिका में एहूसे तेरह गुना मिलेला.

ऊ देश के शुभचिन्तक होइहें स. काश ई लोग ओतना तनखाह पावे खातिर अमेरिका चलि जाइत त भारत के लोग चैन के साँस लीहित.

बाकिर भउजी, लालू त फेर बिहार के मुख्यमंत्री बने के सपना देखत बाड़न.

जा के प्रभु दारुण दुख दीन्हि ताके मति पहिले हर लीन्हि. अगर बिहारियन का किस्मत में भोगले लिखल होखी त भोगला से के रोक पाई ? आखिर आधी रोटी खायेगें इन्दिरा जी को लायेगें कहि के लोग बाद में भोगल कि ना ?

भउजी तू चुनाव काहे नइखू लड़ि जात ?

हम चुनाव लड़ब त चुहानि के लड़ी ? राउर भईया ?


भउजी हो के पिछला कड़ी

भउजी हो !

भउजी हो !

का बबुआ ?

प्रधानमंत्री जी काश्मीर के बेसी स्वायत्ता देबे के बाति कहले बाड़न.

ओहसे का हो जाई ?

ओहिजा के लोग खुश हो जाई.

एहसे त बढ़िया रहित कि ऊ भारत के काश्मीर से आजाद करा देवे के बाति कहले रहतन.

कुछ गलती नइखे होत तोहरा कहला में ? का कहल चाहत बाड़ू ? काश्मीर के आजाद करावे के नू ?

ना बबुआ. काश्मीर त आजाद पहिलही से बा. मन कइलस त सगरी पण्डितन के मार भगा दिहलस. जब मन करे ला भारत का विरोध में बवाल कर लेला. हम त भारत के काश्मीर से आजाद करावे के बात कहत रहनी. जे हर कदम पर काश्मीरियन के गुलाम का तरह व्यवहार करेला. देश का बाकी हिस्सा का कीमत पर काश्मीरियन के हर तरह के आर्थिक पैकेज देला. जहाँ आजु तक भारत के संविधान के हर पहलू लागू ना हो पावल. ओकरा सुरक्षा पर पता ना कतना धन खर्च करेला, पता ना कतना हिन्दुस्तानी जवान आपन जान दे देबेले हर साल. एक बेर काश्मीर के कह दित कि देखऽ लोग तू आपन व्यवस्था. हम चलनी अपना देशे.

आ जम्मू आ लद्दाख के का होखी?

ऊ लोग त भारत के ह, भारते में रही. बाकिर हमहू जानत बान कि कांग्रेस सरकार एकरा खातिर कबो तइयार ना होखी.

काहे भउजी ?

तब ऊ लोग के सेकूलर वाला सिद्धान्त गलत साबित हो जाई. देश के बँटवारा धार्मिक आधार पर भइल रहे. ओहि घरी एह समस्या के हमेशा खातिर निपटावल जा सकत रहुवे. बाकिर गाँधी आ नेहरु के पाखण्ड का चलते ना हो पावल आ पूरा देश आजु ले ओह गलती के भुगतत बा.

आज तोहरा से बेसी बतियावल ठीक नइखे.

हँ बबुआ सोझ बतिया सोझे करेजा पर नू लागेला.


भउजी हो के पिछला कड़ी.