भोजपुरी के बइठकी गोरखपुर में

गोरखपुर के भोजपुरी संगम के छब्बीसवीं बइठकी पिछला ८ अप्रेल २०१२ के डा॰ सत्यमवदा शर्मा “सत्यम” के शाहपुर आवास पर भइल. एकरे पहिले पारी में युवा कहानीकार अवधेश शर्मा “सेन” के कहानी “बदलाव” पर बातचीत में कवि , साहित्यकार रूद्रदेव नारायण श्रीवास्तव के आलेख पढ़त डा॰ अभिजीत शुक्ल कहलीं कि कहानीकार आजु के राजनैतिक माहौल से दुखी त बा बाकिर निरास नइखे.

बातचीत के आगे बढ़ावत कवि धर्मेन्द्र त्रिपाठी जी कहलीं कि हिन्दी में जवन काम भारतेन्दुजी कइलीं उहे काम भोजपुरी में होखे के चाहता.

छोट कहानी के बड़ समीक्षा पर विरोध दर्ज करत वरिष्ठ गीतकार राजेश राज जी कहलीं कि बनियान के बाँहि लमहर भइला पर बुसैट से बहरा लटकि के बाउर लागल करेला.

हिन्दी के स्थापित समीक्षक श्रीधर मिश्र जी बतवलें कि आजु कहानी खाली किस्सागोई भर नइखे करत. उहाँ के एह कहानी के कौनों उपन्यास के सारांश जइसन मनलीं.

दुसरी पारी में वरिष्ठ गीतकार ओम धीरज, आचार्य ओम प्रकाश पाण्डेय, आचार्य मुकेश, जगदीश खेतान, त्रिलोकी त्रिपाठी “चंचरीक”. लल्लन पाण्डेय “ट्रेन”, नरसिंह बहादुर चन्द्र, केशव पाठक “सृजन”, अजु शर्मा, मेजबान कवियित्री “सत्यम”, धर्मदेव सिंह “आतुर”, सूर्यदेव पाठक “पराग” के रचना पाठ भइल.

अध्यक्षीय संबोधन में प्रो॰ जनार्दन जी कहलीं कि “भोजपुरी मन के मामिला हवे जवन कहीं न कहीं से बिगड़ल जरूर बा एहसे पहिले भोजपुरी के “मन” बनावे के पड़ी, उहो बुद्धि के तालमेल से”.

बइठकी के कामयाबी पर वरिष्ठ भोजपुरी कथाकार गिरिजा शंकर राय “गिरजेश” जी प्रसन्नता व्यक्त कइलीं. संचालन सत्यनारायण मिश्र “सत्तन” के रहे.


(फोटो में उपर वाली कतार में सूर्यदेव पाठक “पराग”, गिरिजा शंकर राय “गिरजेश”, केशव पाठक “सृजन”, नरसिंह बहादुर चन्द, श्रीधर मिश्र, प्रो॰ जनार्दन, जगदीश खेतान, सत्यनारायण मिश्र “सत्तन” आ निचला कतार में पीठ कइले डा” सत्यमवदा शर्मा “”सत्यम”, संजू शर्मा आ धर्मेन्द्र त्रिपाठी.)


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