भोजपुरी समाज दिल्ली के बसंतोत्सव

बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर भोजपुरी समाज दिल्‍ली, शाखा: आई. एन. ए. कालोनी, नयी दिल्ली हर साल का तरह एहु साल 28 जनवरी 2012 क दिने आई एन ए कालोनी क सामुदायिक भवन में भव्य सरस्वती पूजन समारोह के आयोजन कइलसि.

दिनांक 28 जनवरी के मॉं सरस्‍वती के मूर्ति स्‍थापना के साथ शुरू आ दिनांक 29 जनवरी के यमुना में मूर्ति विसर्जन का साथे पूरा भइल एह उत्‍सव में भारतीय विमानपत्‍तन प्राधिकरण के क्षेत्रीय कार्यपालक निदेशक अनुज अग्रवाल सपरिवार उपस्थित भइलें. एह अवसर पर भोजपुरी समाज, दिल्ली के अध्यक्ष अजीतो दुबे ओहिजा अइलें आ समाज के हर वर्ग के लोगन के बसंत पंचमी के हार्दिक शुभकामना दिहलें. एह पूरा अवधि में पूजा-स्‍थल पर लगातार भजन-कीर्तन चलत रहे आ भजन-कीर्तन के स्‍वर से पूरी कालोनी गुंजायमान होत रहे. भारतीय विमानपत्‍तन प्राधिकरण में वरिष्‍ठ प्रबंधक के पद पर कार्यरत रंजना भूषण आ उनुका सहेलियन के प्रस्‍तुति भजन संध्‍या कार्यक्रम एह पूरे आयोजन में चार चांद लगा दिहलसि. एह अवसर पर भोजपुरी समाज दिल्ली के सदस्यन का साथे-साथ कालोनी के दोसरो निवासी बड़हन संख्या में शामिल भइलें.

भोजपुरी समाज दिल्‍ली, शाखा: आई एन ए कालोनी के महासचिव विनय कुमार सिंह ई जानकारी दिहलें कि भोजपुरी समाज दिल्‍ली, शाखा: आई. एन. ए. द्वारा मॉं सरस्‍वती पूजनोत्‍सव के अवसर पर आयोजित होखे वाले कार्यक्रमन के कड़ी में होखे वाला बौद्धिक अउर सांस्कृतिक कार्यक्रमन के तहत 5 फरवरी 2012 के दिने आई. एन. ए. कालोनी में बड़हन पैमाने पर निबंध लेखन, चित्र कला अउर एही तरह के अनेके प्रतियोगिता क़े आयोजन कइल जाई.

सरस्वती पूजन समारोह में भोजपुरी समाज दिल्‍ली, शाखा: आई. एन. ए. के महासचिव विनय कुमार सिंह आ पदाधिकारियन अउर सदस्य रामजीत शाह, मंगल सिंह, संजीव झा, विभूति झा, अरविन्द मेहता, देवांश मणि, राजेश कुमार, संतोष यादव, शेखर, बनारसी त्रिपाठी, अजय दुबे, शैलेश कुमार, श्‍याम ठाकुर, राम सुमेर यादव, के के प्रजापति, राजेश कुमार, मनीष कुमार, बबीता झा, हसिमुददीन, शमीम अहमद, गणेश ठाकुर आ देवकांत पाण्‍डेय वगैरह अपना अथक प्रयास से सफलता दिअवले.

जातिवाद, जोगाड़वाद आ सम्मानवाद से जूझत भोजपुरी समाज

– डा॰ जनार्दन सिंह

अपना महान भारत देश के भोजपुरी इलाका, पूर्वी यूपी आ पश्चिमोत्तर बिहार, के आपन व्यथा बा, आपन त्रासदी बा. ब्रितानवी हुकुमत इहां के लोगन के बहादुरी देखि के एकरा के ‘‘मजदूर क्षेत्र’’ घोषित कइला के साथ उ॰प्र॰ आ बिहार दु गो प्रान्तन में बॉट के इहॉ के विकास के हमेशा खातिर अवरूद्ध क दिहलसि. ओह बेरा से शुरू भइल लोगन के पलायन के सिलसिला आजुवो ले बदस्तूर जारी बा. कबो एह क्षेत्र के चीनी आ धान के कटोरा कहल जात रहल. इहां के आर्थिक-सामाजिक ढॉंचा उंखी के खेती पर निर्भर रहल बाकिर शासन के बेरूखी का चलते अनइस सौ बयालिसे से आधा चीनी मिल बन्द हो गइल, अब अधवो से कम हो गइल बा. दोसर तमाम उद्योग धन्धा बन्द हो गइल बा. इहॉं के जन प्रतिनिधिओ लोगन के ध्यान विकास का ओरि कम रहेला.

जापानी बुखार से इहां के हजारन बच्चा काल-कवलित हो चुकल बाड़न. जातिवादी, माफियावाद, राजनैतिक अपराधिकरण चरमावस्था पर बा. भोजपुरी भाषा के संवैधानिक मान्यता ना मिलला के प्रमुख कारण भोजपुरी क्षेत्र के सांसद आ विधायक बाड़न. खाली भोजपुरी क्षेत्र के सांसद आपन सगरो दलगत, जातिगत, इगो कम्पलेक्स, सत्तालोलुपता के थोड़ देर खातिर ताक पर राखिके एक हाली ठीक से एक सुर में जहिया आवाज उठइहैं, ओहदिने भारत सरकार भोजपुरी भाषा के अष्टम अनुसूची में शामिल क ली. पिछला दिन लोकसभा में शून्यकाल के दौरान सिने स्टार आ भाजपा सांसद फेरू से भोजपुरी भाषा के संवैधानिक मान्यता खातिर प्रश्न उठवलन आ उनके समर्थन में दर्जन भर सांसदो लोग समर्थन कइल. एकरा खातिर शत्रुघ्न सिन्हा जी के भोजपुरिया अमन परिवार के तरफ से बेर-बेर बधाई आ शुभकामना बा.

अब रहि गइल भोजपुरी भाषा के संवैधानिक मान्यता, भोजपुर राज्य के गठन, भोजपुर रेजीमेंट के स्थापना, भोजपुर विश्वविद्यालय के स्थापना आ भोजपुरी के उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली प्रदेश, झारखण्ड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ आ महाराष्ट्र में दुसरका राजभाषा के दर्जा के मांगो खातिर भोजपुरिया भाई जवन विश्व भोजपुरी, अन्तर्राष्ट्रीय भोजपुरी, राष्ट्रीय भोजपुरी, प्रदेश भोजपुरी, ग्लोबल भोजपुरी आ ब्रह्माण्डीय भोजपुरी के अपने आप के अगुवाई करे वाला मनीषी, विद्धान आ भोजपुरी सम्राट भिन्न-भिन्न ग्लोबल, अन्तर्राष्ट्रीय, विश्व आ राष्ट्रीय अध्यक्ष महासचिव के ओहदा ले के बड़का-बड़का भोजपुरी मठ आ भोजपुरी धाम पर आ भोजपुरी मन्दिरन में बइठ के भोजपुरी के छप्पनों भोग लगावत बालो आ बाजा बजावत बा लोग. कहनाम बा कि – ‘‘जब आजाद पखेरू बनि के कवनो भाषा डोले, तबही बिनु पिंजरा के पंछी मधुरी-मधुरी बोले’’

उत्तर प्रदेश में भोजपुरिया महाराथी लोग इंटरनेशनल बा. बाकिर इहों लोग भोजपुरी अकादमी के बात आज ले जोर शोर से ना उठावल. हँ, हम उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, झारखण्ड, छत्तीसगढ़ आ मध्य प्रदेश, मुंबई ले तमाम विश्व, ग्लोबल, राष्ट्रीय, प्रान्तीय भोजपुरी सम्मेलन में गइल बानीं, पूरा भारत में घूमला-फिरला के बाद भोजपुरी के महारथी लोगन के नजदीक जा के झांकला के बाद इहे देखनी कि चारू ओर जातिवादी आ गोलवाद चरमावस्था पर बा आ जोगाड़वाद हावी बा. जातिवाद में सवर्णवादो आपस में बंटल बा आ उहो मारीशस से लेके भोजपुरिया जिलन ले जाति के पता लगा के लोगन के सम्मान देता आ आरोप से बचे खातिर कोरम पूरा करता. एगो बात बहुते बेबाक आ कड़ुआ सॉंच बा कि भिखारी ठाकुर, संतकबीर, संत रैदास भा चाहे दलित आ पिछड़ा वर्ग आ अल्पसंख्यक वर्ग में भोजपुरी के दोसर बलिदानी, साहित्यकार, कलाकार लोग रहले. उनके नाम पर खूब सम्मेलन होता. ओह सम्मेलनो में एह बलिदानी लोगन के जाति वर्ग के उनके गोतिया छोड़के दोसरा केहू साहित्यकार, कलाकार कार्यकर्ता आ जाव त लोग धीरे से आपन नाक दबा के जोगाड़वाद, जातिवाद आ आपना गोल के आदमी के बड़का-बड़का सम्मान आपना-2 गोतिया लोगन के देके खुश क देला लोग.

देवरिया, रोहतास, सीवान, बलिया, बनारस, आरा, पटना, छपरा, दिल्ली, जमशेदपुर, गोरखपुर, भिलाई, मारीशस, मुंबई कहीं जाई खुलेआम जातिवाद-जोगाड़वाद लउकी. अब एगो नया बेमारी मारीशस के हो गइल बा. जे मारीशस ना जाई उ छोटका भोजपुरिया ह. जोगाड़वाद में मारीशस के राष्ट्रपति मंत्री भारत आ के सम्मान दे दीहे त उ अमर हो जइहें उहे भोजपुरिया मानल जइहैं. ऊ गर्व से कहेलन कि मारीशस से सम्मान पवले बानी, मारीशस रिटर्न हउअन. आ भोजपुरी क्षेत्र के केहू कवनों वर्ग के फटहाल, बदहाल भूखमरी में रहिके एह माटी खातिर आपन सब कुछ गंवा दिहल ओकरा घरे ई ना जइहैं. ओकरा के सम्मान आ सहानुभूति ना दीहें. ओकरा के आपना हीन भावना के शिकार बनाके मनोबल के दबइहें.

एह से भोजपुरिया अमन परिवार रउआ सभन विद्वतजन से एह कटु सांच बात खातिर क्षमा मांगत निहोरा करऽता कि नैतिकता, मानवता, भोजपुरी आ भागवत धर्म के पालन करत अगिला बरिस 2012 में भोजपुरी के सब सम्मानित सम्पादक, साहित्यकार, कलाकार, भोजपुरी संगठन के अन्तर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय, प्रान्तीय अध्यक्ष, मंत्री विश्वविद्यालय के भोजपुरी विभाग के निदेशक, अध्यक्ष तमाम सगरो भोजपुरी के नेही, छोही प्रेमी लोग आपना जातिवादी-जोगाड़वादी के नापाक नीति से ऊपर उठो जेहसे कि आखिरी समय, मरे के बेरा, ओकरा शान्ति मिली. आ ओकर नाम इतिहास में सुनहला अक्षर में लिखाव, जाति आ जोगाड़ में ना लिखाव.


(भोजपुरिया अमन साप्ताहिक के नयका अंक के संपादकीय के कुछ अंश. पूरा संपादकीय पत्रिका में मिली.)
डा॰जनार्दन सिंह के संपर्क सूत्र
09236961379

छठ के आयोजन

पूर्वांचलवासियन के आस्था के महापर्व छठ हर साल का तरह एहू साल भोजपुरी समाज दिल्ली के आइएनए कालोनी शाखा धूमधाम से आयोजित कइलसि. अतवार का दिने नहाय खाय से शुरू होके बुध का भोर में उगते सूरज के अरघ दिहला का साथे छठ व्रत के विधि पूरा भइल. एक तरफ कॉलोनी में जहॉं महापर्व छठ के छटा के विहंगम दृश्य देखे कि मिलत रहे त दोसरा तरफ ‘कांचऽ ही बांस के बहँगिया… आ मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगवा गिरे मुरुझाय..जइसन गीतन से वातावरण संगीतमय बनल रहुवे.

छठ पूजा के उपलक्ष्य में बुध का साँझ एगो सामूहिक रात्रिभोज के आयोजनो कइल गइल जवना में भोजपुरी समाज दिल्ली के अध्यक्ष अजीत दूबे, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के क्षेत्रीय कार्यपालक निदेशक (उत्तरी क्षेत्र) अनुज अग्रवाल, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के कार्यपालक निदेशक (सीएनएस) रवि प्रकाश, भूतपूर्व क्षेत्रीय कार्यपालक निदेशक यू.एन.सिंह आ भोजपुरी समाज, आइएनए कालोनी शाखा के अध्यक्ष वी.के. त्रिपाठी वगैरह समेत समाज के सगरी सदस्य सपरिवार शामिल भइले.

अजीत दुबे सभका के शुभकामना देत भोजपुरी आ पूरबी समाज के सम्मान खातिर दिल्ली में भोजपुरी समाज के प्रयासन का बारे में बतवले. कहलन कि देश में हिंदी का बाद सबले बड़हन भाषा के आजु ना काल्हु संविधान के 8वीं अनुसूची में शामिल करहीं के पड़ी. बाकिर एकरा खातिर पूर्वांचलवासियन के समर्थन मिलत रहल जरूरी बा. आइएनए कालोनी शाखा के अध्यक्ष वी.के. त्रिपाठी सगरी अतिथियन के धन्यवाद दिहलें. मंच संचालन शाखा के सांस्कृतिक सचिव देवकान्त पाण्डेय कइलन.

कार्यक्रम के सफल बनावे में रामजीत साह, बनारसी त्रिपाठी, शैलेश कुमार, के.के. प्रजापति, जयमंगल सिंह, अजय दूबे, विभूति झा, राम सुमेर यादव, अरविन्द कुमार मेहता, गणेश ठाकुर, हसमुद्दीन अंसारी, शमीम अहमद, उमेश शर्मा, मनीष कुमार, देवांशमणि आ भोजपुरी समाज, आइएनए शाखा के बाकी सगरी कार्यकारिणी सदस्य अहम भूमिका निभवले.


(स्रोत – भोजपुरी समाज दिल्ली के आईएनए कॉलोनी शाखा)

भोजपुरी समाज के धरती आ लोग

– डा॰ जनार्दन सिंह

“भोजपुरी समाज के धरती आ लोग” ई अइसन विषय बा कि केतनो आ कुछउ लिखाई त उ समुन्दर के सामने एगो छोटहन नदिये रही. काहे कि जन साधारण अपना भावोद्गार के सामूहिक अभिव्यक्ति के परम्परा से उद्भूत बा, लोक गीत, लोकगाथा, लोककथा, लोकोक्ति अउर लोक नाट्यपरम्परा. ई सबके अभिजातवर्ग के संस्कारित, सुसंस्कृत आ परिमार्जित दिव्य अभिव्यक्ति के श्रेष्ठ आ श्रेयस्कर सिद्ध करे खातिर उनके शिष्ट साहित्य के संज्ञा दिहल गइल. वेद यदि भारत में सबले पुरान उपलब्ध मानवीय भावना के सृजन के प्रमाण ह त ओकरा पहिलहू परम्परा से बोलल, सुनल, गावल, बजावल, नाचल आ सोचे के परम्परा रहल होई. एही सोच के आगे बढ़ावत लोक साहित्य मर्मज्ञ भाषा शास्त्री अउर विद्वान लोग लोक साहित्य के परिभाषित कइले बा.

भोजपुरी के विदेशी भाषा शास्त्री ग्रियर्सन आ स्वदेशी विद्वान सुनीति कुमार चटर्जी, डॉ॰ धीरेन्द्र वर्मा, डॉ॰ उदय नारायण तिवारी वगैरह लोग भोजपुरी के असली सोन्ह माटी भारत के पूर्वी उत्तर प्रदेश के वाराणसी (काशी), बलिया, गाजीपुर, मिर्जापुर, सोनभद्र, गाजीपुर, चन्दौली, संतकबीर नगर, संतरविदास नगर, आजमगढ़, मऊ, जौनपुर, गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, बस्ती आ पश्चिमोत्तर बिहार के सीवान, छपरा (सारण), गोपालगंज, पूर्वी चम्पारण, पश्चिमी चम्पारण, रोहतास, कैमूर, बक्सर, भोजपुर, मध्य प्रदेश के सीधी, जसपुर, आ छत्तीसगढ़ के सरगुजा का साथही नेपाल आ झारखंड के कुछ क्षेत्रन में मनले बा. एही माटी के लोग फिजी, मारीशस, सूरीनाम, त्रिनिदाद आ टोबेगो, ब्रिटिश गुयाना, जमाइका, नीदरलैण्ड, दक्षिण अफ्रीका, थाइलैण्ड आदि देशन में मजदूरी करे गइल. आज ओहु देशन में लोग अपना माटी के संस्कार के ऊँचा उठा दिहले बा. ई धीरे-धीरे एगो अन्तर्राष्ट्रीय भाषा के रूपो धर रहल बा. भोजपुरी भाषा दुनिया में एगो जुझारू, श्रमजीवी प्रतिभा सम्पन्न, स्वाभिमान, पौरूषेय, सदाचारियन के भाषा के रूप में प्रतिष्ठित बा.

वेद, उपनिषदन आ पुराणन में भारत के इतिहास में जवना भोज के उल्लेख बा आ जेकरा पौरूष के पराक्रम से अनादिकाल से आक्रमणकारियन के खदेड़ल जात रहल बा उ शूरवीर, पराक्रमी, जीवट, जिजिविसा मेधा खातिर याद कइल जाला ओहि में भोजपुरी अपराजेय लोगन के भाषा ह.

अब देखी 21वीं सदी में जवन दोसरका दशक हमन के जियतानी जा उहवां बहुते कुछ बदलावो हो गइल बा. इहवां प्रसंगवश बतावे के चाहतानी कि हम भोजपुरी के संरक्षण आ संवर्धन के बातो कर रहल बानी. एगो अउर बात कइल प्रासंगिक होखी कि जवना तरह से कवनो आदमी के लिंग, जाति, क्षेत्र आ वंश ओकरा चाहला से ना मिलेला, आ ओकरा बादो बुद्धिमानी इहे बा कि ओकरा मिलल ए सब चीज के जिनगी भर निभावे के चाहीं. एहसे भाषो महतारी का दूध के साथही आवेला. विकास खातिर रउआ दुनिया के सगरो भाषा के विद्धान बनी बाकिर अपना मातृभाषा के बुनियाद भुलइला के कवनो समझौता ना होखे के चाहीं.

काहे कि अभी हाल के संसद सत्र में भाजपा सांसद कप्तान सिंह सोलंकी के पूछल प्रश्न के जवाब में मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री डॉ॰ पूरनदेश्वरी जी कहलन कि देश में नौ गो भाषा पूर्ण रूप से मर चुकल बा अउर 103 गो भाषा के लुप्त होखे के खतरा मंडराता. एतने नाहीं, यूनेस्कों एटलस ऑफ वर्ल्ड लैग्वेंजिस ऑफ ट्रेंजर के हवाला से कहलन कि 84 गो अइसन भाषा बा जवना के बोले वाला के संख्या लगातार कम हो रहल बा. भाषा कवनो होखे, जब ओकरा के बोलल आ लिखल-पढ़ल ना जाई त ओकर हश्र का होई ? एह आंकड़ा से समुझल जा सकऽता.

“भोजपुरिया अमन पत्रिका” के 9वां अंक में “भोजपुरी समाज के धरती आ लोग” के बारे में गोरखपुर विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग के उपाचार्य आ भोजपुरी के संरक्षण आ संवर्द्धन पर प्रउत गंवेषणा खातिर एगो शोध पर आधारित लेख विद्धान लोगन के प्रतिक्रिया जनला के बाद पुस्तक के रूप में प्रकाशित करे के योजना बहुत पहिले बनवले रहलन बाकिर बाद में ऊ ठंडा गइल. अगिला अंक में बाकी बातन के प्रकाशन होखे जा रहल बा आ क्रमशः शोधार्थी लोगन से एह लेख के आगे बढ़ावे खातिर सहयोग मांगल जा रहल बा. देखी जवन लखनऊ में राष्ट्रीय पुस्तक मेला लागल रहल ह एहमें भोजपुरी, अवधी, ब्रज, मैथिली, बुन्देली, बघेली कवनो भाषा के कहीं बुक स्टाल ना रहल. ई देखिके बड़ा दुख लागल.

अँजोरिया डाट काम के सम्पादक आ सगरी भोजपुरी वेबसाइटन से लिहले सगरी भोजपुरी मीडिया के सम्पादक, लेखक, महोदय, श्रीमान लोग से निहोरा बा कि अब देर ना क के भारत के कवनों शहर बाजार में पुस्तक मेला बुक फेयर लागे त सस्ता साहित्य नो लास, नो प्रोफीट के सिद्धान्त पर भोजपुरी पुस्तक पत्रिका जवन भी होखे ओकर स्टाल लगवा के प्रचार प्रसार करीं सभे.

अंत में इहे कहब कि भोजपुरी समाज धरती एतना समृद्ध सर्वसम्पन सर्वशक्तिशाली बा कि ओह पर कुछऊ लिखाई ऊँट के मुंह में जीरे कहाई. काहे कि नवको पीढ़ी में ओतने जोश बा जेतना पुरानका में रहे. धान के दाम धान के खेत में ना लागेला आ ऊँखी के दाम ऊँखी के खेत में ना लागेला. ऊ लमहरा जब बाजार में चीनी आ चाउर बनेला त महंगा बेचाला. एहसे भोजपुरी के दाम भोजपुरी क्षेत्र के बाहरा ढेर लागेला. ओकर संत, महंत, वैज्ञानिक, दार्शनिक जेही सात समुंदर पार जाला अबहियो अपना क्षेत्र में टॉप कर जात बा.


डा० जनार्दन सिंह
संपादक,
भोजपुरिया अमन,
मकान न० ३८७/१ रामगुलाम टोला (पूर्वी)
शास्त्री नगर, जनपद देवरिया, (उ० प्र०)
मोबाइल: 09793939850,9695325051
Email: bhoj.aman@gmail.com

भोजपुरी के सम्मान के लडाई तेज होई – मनोज


भोजपुरी गायक आ सिने स्‍टार मनोज तिवारी के कहना बा कि ” अब यदि भोजपुरी के संविधान के आठवीं अनुसूची में शामिल कईला में देरी भइल त एकर लडाई तेज होई. 20 करोड़ लोग भोजपुरी भाषा बोलेला, लेकिन सरकार लगातार उनके उपेक्षा कर रहल बिया. अब भोजपुरी के खातिर लड़ाई लड़े के पड़ी. पीछे हटे के कवनो सवाल नइखे”.
मनोज तिवारी ई बाति दिल्ली में २६ दिसम्बर का दिने “भोजपुरी समाज” के आयोजिन “भोजपुरिया शिखर सम्‍मेलन” में कहलन. भोजपुरी भाषा के संविधान के आठवीं अनुसूची में शामिल करावे खातिर “भोजपुरी समाज” के बैनर में आयोजित एह कार्यक्रम में दिल्‍ली के भोजपुरिया बड़हन संख्या में शामिल भइलें. एहमें सांसद, साहित्‍यकार, गायक, गीतकार, सिने कलाकार, समाजसेवी, आ बुद्धिजीवी हर जमात के लोग रहुवे. मनोज तिवारी ने कहलन कि आठवीं अनुसूची में कई गो अइसन भाषा बाड़ी सँ जवना के महज २० से ५० लाख लोग बोलेला. हम एकर विरोध नइखीं करत बाकि ई कहाँ ले जायज बा कि २० करोड़ लोग के भाषा के अनदेखी कइल जाव.
भोजपुरी के लड़ाई के अमलीजामा पहिरावे खातिर सांसद आ फिल्‍म अभिनेता शत्रुध्‍नो सिन्‍हा आइल रहलें. शत्रुध्‍न सिन्‍हा कहलें कि यदि 15 वीं लोकसभा चली त भोजपुरी ओकरा में शामिल रही. भ्रष्‍टाचार का चलते 15 वीं लोकसभा के अंजाम का होखे जा रहल बा, से कहल मुश्किल बा. बाकिर हम वादा करत बानी कि संसद का पटल पर हम भोजपुरी के आठवीं अनुसूची में शामिल करावे खातिर जोरदार माँग रखब. कहलन कि हमरा घर के नाम रामायण ह आ रामायणवासी होखला का नाते हम भोजपुरी के ओकर अधिकार दिलावे के वचन देत बानी.
प्रसिद्ध साहित्‍यकार केदारनाथ सिंह के कहना रहे कि, भोजपुरी हमार घर हौ और हिंदी हमार देश. ना घर के छोड़ल जा सके ना देश के. सरकार के एह बाति के समुझे होखी. वइसे सरकारी संरक्षण से अधिका जरूरी ई बा कि भोजपुरी में बढि़या लेखन होखे आ एह क्षेत्र के बड़का लेखक भोजपुरी में लिखे खातिर आगा आवसु.
कार्यक्रम के अध्‍यक्षता करत “भोजपुरी समाज” के अध्‍यक्ष अजीत दुबे कहलें कि , 30 अगस्‍त 2009 के भोजपुरी के विषय के कॉलिंग अटेंशन मोशन में सांसद संजय निरुपम, रघुवंश प्रसाद सिंह, आ जगदंबिका पाल संसद में उठवलें जवना खातिर भोजपुरी समाज ओह लोग के आभारी बा. भोजपुरी स्‍टार मनोज तिवारी के फिल्म “भोजपुरिया डॉन” इंटरनेशनल फिल्‍म फेस्टिवल में शामिल भइल बा. देश से बहरो मारीशस, सुरीनाम, फिजी वगैरह देशन में भोजपुरी व्यापक रूप से बोलल जाले. मॉरिशस में त एकरा संवैधानिको दर्जा मिलल बा, तबो भारत सरकार के एह भाषा के सुध नइखे. सरकार ना चेतल त भोजपुरी समाज सड़क पर उतरके संघर्ष करे पर मजबूर हो जाई. ई खालि भाषा के संवैधानिक दर्जे के बाति नइखे बलुक भोजपुरियन के मान सम्मान के बाति बा.
कार्यक्रम का संचालन प्रभुनाथ पांडेय कइलें. एहमें पूर्व सांसद जितेंद्र सिंह, गोस्‍वामी पुरी, एच.एन. शर्मा, पूर्वांचल एकता मंच के अध्‍यक्ष शिवजी सिंह, वीर कुंवर सिंह फाउंडेशन के निर्मल सिंह, कारूराम, गरीबदास, पूर्वांचल गण परिषद के निर्मल पाठक, विनयमणि त्रिपाठी, लल्लन तिवारी, मनोज भावुक, एचपी सिंह, एलएस प्रसाद, प्रदीप पांडेय, सनत दुबे, प्रह्लाद सिंह, एपी सिंह, कुलदीप, राकेश परमार वगैरह लोग शामिल रहे.

पेट से जुड़ले बिना भोजपुरी के विकास नइखे होखे वाला

भोजपुरी के विकास खातिर हमनी के अपना के अपटूडेट करे के पड़ी. अंगरेजी आ हिन्दी के फेरवट वाला भोजपुरी अपनावे के पड़ी. पुरनका परम्परा, लोक गीत, लोक साहित्य के बचवले राखत हमनी के नयका जमाना के जरुरत अनुसार बदले के पड़ी, ना त हमनी का बहुते पाछा छूट जायब. हमनी के बीच के रास्ता अख्तियार करे के पड़ी.

पिछला सात दिसम्बर का दिने आरा के हर प्रसाद दास धर्मशाला का सभागार में “भोजपुरी दशा अउर दिशा” नाम के विचार गोष्ठी के संबोधित करत ई बाति भोजपुरी के आधुनिका आ चर्चित साहित्यकार मनोज भावुक कहलें. उनकर कहना रहे कि पेट से जुड़ले बिना भोजपुरी के विकास नइखे होखे वाला. जबले भोजपुरी इलाका के आर्थिक विकास नइखे होखत तबले भोजपुरी भाषा आ समाज के असली विकास ना हो पाई.

भोजपुरी के संविधान के आठवीं अनुसूची में शामिल करवला का बाति पर उनकर कहना रहे कि जबले भोजपुरी से जुड़ल भारत के सगरी संस्था एके दिन एके सुर में आंदोलन ना चलइहें तबले सरकार ना जागी. आ सरकार जहिया जागी तहिया भोजपुरी के ओकर वाजिब हक मिल के रही. टुकड़ा टुकड़ा में आन्दोलन कइला से कवनो फायदा नइखे होखे वाला.

ओही गोष्ठी में बोलत डा॰ रणविजय कुमार भोजपुरी के मान सम्मान खातिर चट्टानी एकता बनावे के बात कहलन त सुधीर कुमार भोजपुरी में बढ़ल जा रहल फूहड़पन चिन्ता जतवलें.

गोष्ठी के आयोजन अखिल विश्व भोजपुरी समाज मंच का बैनर में भइल रहे आ कार्यक्रम में मंच के जिलाध्यक्ष प्रो॰ के॰के॰ सिंह, आ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ब्रजेश सिंह मौजूद रहलें.


(स्रोत – प्रेस विज्ञप्ति)


A comment received in email sent by A.K.Upadhyay :
sir,
I read with interest your report
that in order for bhojpuri to survive,
a recourse to English is necssary.

I do not agree.To make a language rich what is important is the contribution the writers make, the patronage we give.

Take the French or the Russians, they abhor anything english. They believe that their own literature is sufficient to hold the reader’s interst. The same is the case with Tamil or Bengali literature.

What is needed is that more and more Bhojpuri artistic talents stage shows throughout the length and breadth of the country including the film world.
Of course, government’s participation is a must. If programmes like Pardesia can be organised at the Government level, Bhojpuri cannot be left far behind.
Artistic talent can be either writing, singing, drama and so on.

My own experience is sad in this context. I approached several publishers for my bhojpuria novel.
No one came forward to publish it.

I am sorry that I have to write my comments in English. I am hampered by some computer technicality.

ak upadhyay.