करप्शन से विकास होला आ रोजगार बढ़ेला

– जयंती पांडेय

गुरू लस्टमानंद मार कुर्ता धोती अपना बेग में से निकाल के बिगत रहले साफ करे के. अतने में राम चेला अइले. दंडवत क के पूछले का ह हो बाबा कई दिन से ना लउकलऽ. कहां चल गइल रहल ? बाबा कहले, दिल्ली गईल रहीं. राम चेला के चेहरा पर सवाल रहे जेकर माने कि काहे के? कहले भ्रष्टाचार पर सेमिनार रहे. गवई भ्रष्टाचार मुख्य विषय रहे. अब ऊ त अण्णा पार्टी बोलवले रहे आ पिटाई के खतरा रहे एही से कवनो चैनली पत्रकार त आइल ना. हार पाछ के हमनी के बोलावल लोग.

ओहिजा का बताई कि चारू ओर से करप्शन के प्रतिनिधि लोग आइल रहे. झारखंड से उत्तराखंड ले आ बंगाल से बनारस ले. सब ओर से भ्रष्टाचार. उहां सेमिनार के आयोजक कहले कि विचार के विषय बा कि, मीडिया में करप्शन के बड़ा बदनामी हो रहल बा. ई बदनामी के हटावे खातिर कुछ करे के चाहीं. सब तरह आ वेराइटी के करप्शनन के, के राय धइल कि मीडिया में सबके बात आवे ला. कभी करप्शन के आपन पीड़ा केहु ना कहल. एगो करप्शन के आपन नजरिया से सम्बद्ध लेख तइयार कइल जाउ आ मीडिया के दिहल जाउ. सब लोग तइयार हो गइल. एह में सबसे बड़हन बात ई बा कि सब बहस इमानदारी के नजरिया से होला. बेइमानी के एंगल से केहु ना देखे. आखिर ओकरो बात त सुने के चाहीं. मीडिया चाहे अण्णा पाटीं के लोग कहेला कि करप्शन बड़ा खराब चीज ह. एकरा से दूर रहे के चाहीं. लेकिन हमरा रात में अचानक करप्शन महराज सपना में अइले. हमरा से कहले लस्टमानंद, भले हम अबहीं तनी कमजोर पड़ गइल बानी, सब लोग कहऽता कि एकरा मेटा के रहब लेकिन केहु ई नइखे पूछत कि ओकर आपन नजरिया का बा.

करप्शन के बड़ा फायदा बा. सबसे बड़हन बात बा कि एह से विकास के गति तेज हो जाला. दासरका फायदा बा कि करप्ट आदमी सुस्त ना हो सकेला. जब देख तब जोगाड़ में लागल रहेला. कबहु शांति से ना बइठ सके. कुछ करे के चक्कर आ ओकरा बाद जवन क देहलस ओकरा के बचावे के आ खुद बांचे के चक्कर. इहे ना करप्शन से डबल विकास होला. जइसे मान ल कि कहीं एगो पुल बनऽता. अब इमानदारी से त पुल बनी लेकिन करप्शन से एगो पुल बनी आ ओही में से थोड़ सीमिंट, छड़, पइसा वगैरह निकाल के कहीं एगो बंगलो बनि जाई. अरे बंगला मान लऽ अपने बनल लेकिन विकास भइल न. एगो बजट में पुलो बन गइल आ बंगलो बन गइल. एतने ना इमानदारी से रोजगार मिलेला आ करप्शन रोजगार के संभावना बढ़ावे ला. अब मान ल कि एगो रोड बनऽता. ओह से एक बेर कुछ लोगन के रोजगार मिल गइल. अब करप्शन का करी कि ओह रोड के अइसन बनाई कि तीने महीना में टूट जाई. अब ओकरा मरम्मत के खातिर कुछ लोग के रोजगार मिल जाई. ओकर बजट आयी त फेर कवनो घर बन जाई चाहे गाड़ी किना जाई आ फेर तीन महीना के बाद सड़क दूट जाई त फेर इहे चालू हो जाई. रोजगार आ आमदनी के प्रचुर इंतजाम एगो सड़क से. हां कुछ लोग कहेला कि करप्शन चुप चोरी होला. अरे भाई अतना चुप चोरी होइत त अतना खबर कइसे फइलित ? एह से मीडिया से निवेदन बा कि ऊ करप्शन के पाछ छोड़ देऊ.

आपन भाषण खतम क के जब लस्टमानंद सांस लेहले तले ठीकदार साहेब उनका के फरका बोला ले गइल. का जाने का बात रहे.


जयंती पांडेय दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में एम.ए. हईं आ कोलकाता, पटना, रांची, भुवनेश्वर से प्रकाशित सन्मार्ग अखबार में भोजपुरी व्यंग्य स्तंभ “लस्टम पस्टम” के नियमित लेखिका हईं. एकरा अलावे कई गो दोसरो पत्र-पत्रिकायन में हिंदी भा अंग्रेजी में आलेख प्रकाशित होत रहेला. बिहार के सिवान जिला के खुदरा गांव के बहू जयंती आजुकाल्हु कोलकाता में रहीलें.

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भोजपुरी भाषियन से केन्द्र सरकार के धोखाधड़ी

संसद के पिछला सत्र में तब के गृहमंत्री पी चिदम्बरम भोजपुरी में एगो वाक्य का पढ़ दिहलन कि लागल सरकार अब भोजपुरी के ओकर जायज हक देइए दिहलसि. चारो ओर से नगाड़ा बाजे लागल. बाकिर अबकी के सत्र में विचार करे वाला विषयन में भोजपुरी के विषय शामिले ना रहल.

बिहार भोजपुरी अकादमी के अध्यक्ष प्रो॰ रविकांत दुबे केन्द्र सरकार के एह आचरण के धोखाधड़ी बतावत खुलासा कइले बाड़न कि केन्द्रीय गृहमंत्रालय भोजपुरी के मान्यता के सवाल लटकावे खातिर बिहार सरकार आ ओकरा माध्यम से भोजपुरी अकादमी से नौ बिन्दूवन पर जानकारी मँगवले बिया. जवन सवाल पूछल गइल बा तवनन के उलूल जलूल बतावत प्रो॰ दुबे कहले बाड़न कि एह तरह के बेमतलब सवाल पूछला से इहे लागत बा कि केन्द्र सरकार भोजपुरी के मसला लमहर दिन ले लटकावल चाहत बिया.

भोजपुरी अकादमी के अध्यक्ष प्रो॰ दुबे ओह सवालन के जानकारी देत कहले बाड़न कि केन्द्र सरकार जानल चाहत बिया कि बिहार सरकार के कवन कवन विभाग भोजपुरी के इस्तेमाल करेले, भोजपुरी लिपि में कतना विद्यार्थी कवन कवन विषय के परीक्षा देबेलें, कतना लोग भोजपुरी बोलेला, कतना प्राथमिक आ मध्य विद्यालयन में भोजपुरी पढ़ावल जाले आ कतना विद्यार्थी एकरा कक्षा में बाड़ें, सरकार कतना भोजपुरी शिक्षक बहाल कइले बिया, आ कवना स्तर ले सरकारी काम में भोजपुरी के इस्तेमाल होला. एह सवालन से केन्द्र सरकार के मनसा साफ पता लागत बा.

एह दिसाईं प्रो॰ दुबे कहले बाड़न कि भोजपुरी अकादमी भोजपुरी इलाका के ओह सांसदन के विरोध करी जे लोग संसद में भोजपुरी के सवाल पुरजोर तरीका से नइखे उठवले.


(भोजपुरी अकादमी के विज्ञप्ति से)

संविधान के अठवीं अनुसूची में भोजपुरी शामिल करावे ला जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन

पिछला २९ अगस्त का दिने दिल्ली के जंतर मंतर पर एगो बड़हन धरना प्रदर्शन कर के जोरदार ढंग से भोजपुरी भाषा के संविधान के अठवीं अनुसूची में शामिल करावे ला सरकार पर दबाव बनावे के कोशिश भइल. ई धरना प्रदर्शन पूर्वांचल एकता मंच, भोजपुरी समाज दिल्ली, अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन आ भोजपुरी के अनेके संगठनन के अगुवाई में भइल. एहमें शामिल होखे ला देश भर से लोग आइल.

याद बा कि संसद के पिछला सत्र में तब गृह मंत्री रहल पी़ चिदम्बरम ई आस धरवले रहलें कि मानसून सत्र में भोजपुरी के संवैधानिक मान्यता खातिर बिल संसद में पेश कर दिहल जाई. बाकिर मानसून सत्र में सरकार एकरा ला कवनो पहल ना कइलसि जवना पर नाराजगी जतावे खातिर जंतर-मंतर पर भोजपुरिया बुद्धिजीवी लोग आ भोजपुरी प्रेमी सामाजिक कार्यकर्ता ई धरना प्रदर्शन कइलें.

एह मौका पर बोलत सांसद उमा शंकर सिंह बतवलें कि एह बाबत ऊ आ सांसद रघुवंश प्रसाद सिंह यूपीए अध्यक्षा सोनिया गांधी से मिलल रहुवे आ उनुका के सरकार के दिहल आस के याद करावल लोग. कहलन कि ई त हंगामा के भेंट चढ गइल लागऽता बाकिर विश्वास जतवले कि अगिला सत्र में ई मांग पूरा हो जाई. सांसद महाबलो मिश्र ने कहलें कि उहो एह मुद्दा पर नजर गड़वले बाड़न आ जी जान से लागल बाड़न अगिला सत्र में बिल जरूर पास हो जाई. भोजपुरी समाज दिल्ली के अध्यक्ष अजीत दुबे कहलें कि पिछलका सत्र में दिहल भरोसा का बावजूद एह सत्र के विचारणीय सूची में शामिल 32 गो बिल में भोजपुरी वाला बिल शामिल नइखे. अजीत दुबे सरकार से निहोरा कइलें कि भोजपुरी के ई माँग अगिला सत्र में जरूर पूरा कर दिहल जाव. पूर्वांचल एकता मंच के अध्यक्ष शिवजी सिंह के कहना रहल कि समय अब आर पार के लडाई के बा. सरकार आपन बात पूरा करे ना त गांव से लगायत दिल्ली ले जनांदोलन कइल जाई. अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन के महामंत्री डॉ. गुरुचरण सिंह कहलन कि पिछला चालीस साल से चलत एह कोशिश के सरकार हलुका मत ले ना त भारी पड़ी. कुँअर वाहिनी के अध्यक्ष प्रो.जीतेन्द्र स्वामीओ धिरवलें कि सरकार भोजपुरी भाषा, साहित्य अउर संस्कृति के कमतर आंके के कोशिश मत करे आ जल्दी से जल्दी भोजपुरी के 8वीं सूची में शामिल कर देव.

एह प्रदर्शन में शामिल हजारों लोग के संबोधित करे वालान में पी़ एऩ पाण्डेय, वी पी सिंह, संतोष पटेल, मनोज भावुक, निगम पार्षद सत्येन्द्र सिंह राणा, मुकेश सिन्हा, संजय सिंह, निर्मल सिंह, मुकेश कुमार सिंह, एल एस प्रसाद, रामेश्वर सिंह, श्रीकांत यादव, श्रीकांत विद्यार्थी, विनोद श्रीवास्तव अउर अमरेन्द्र सिंह वगैरह शामिल रहलें.

प्रदर्शन के आखिर में प्रधान मंत्री, गृह मंत्री आ लोकसभा अध्यक्ष के भोजपुरी भाषा के संविधान के अउवीं अनुसूची में शामिल करावे बाबत ज्ञापन देके धरना खतम भइल.


(स्रोत समाचारन से)

भोजपुरी के एगो नया मनोरंजन चैनल अंजन टीवी

भोजपुरी मनोरंजन के मैदान में क्रांति करे का दिसाईं एगो नया मनोरंजन चैनल डेग बढ़वले बा. भोजपुरी के ई दुसरका मनोरंजन चैनल होखी बाकिर एकर कार्यक्रम के अंदाज अलगे तरह के होखे वाला बा. अंजन टीवी नाम के एह चैनल पर के हर कार्यक्रम संदेशपरक होखी.

अंजन टीवी के चैनल हेड मंजीत हंस के कहना बा कि उनुका चैनल के उद्देश्य दर्शकन के मनोरंजने करल ना, बलुक बल्कि स्वस्थ मनोरंजन कइल बा. एहसे कार्यक्रम बनावत घरी एह बात पर खास ध्यान दिहल गइल बा कि समाज के हर वर्ग के लोग एकर आनंद ले सकसु. अंजन टीवी पर योग, संगीत, फिल्म, धारावाहिक, ट्रेवल, भक्ति, रियलिटी शो, कोमेडी शो, लाइफ स्टाइल आ खाना खजाना से जुड़ल कार्यक्रम पेश होखी आ एह कार्यक्रमन के भोजपुरी फिल्म जगत के कलाकार होस्ट करीहें.

अंजन चैनल के टेग लाइन “जियो हर पल” का बारे में चैनल हेड मंजीत हंस बतवलें कि ई आध्यात्म से जुडल बा आ संदेश देत बा कि जीवन अनमोल ह, एकरा के खुशी, आपसी भाईचारा आ चेहरा पर मुस्कान लिहले बितावे चाहीं. कहलन कि चैनल के लोगो में त्रिनेत्रो के झलक मिलत बा. कहलन कि उत्तर भारत के लोगन के ओह लोग का अपना भाषा में बढ़िया कार्यक्रम दिहले चैनल के अकेला मकसद बा.


(स्रोत – अंजन टीवी)

हाथ के संगे लेकिन हाथ भर फरका

– जयंती पांडेय

सब केह हाथ के संगे बा बाकिर हाथ भर फरका. शरद पवार भईया खिसियाइल बाड़े. उनका के देखि के बुझाला ना कि खिसियइबो करेले. हमशा खुशे लऊकेलें. लेकिन खिसिया गईल बाड़े. ऊ त अईसन जीव हउअन कि यूपीए के आठ बरिस में कबहुओं ना खिसिअइले. ओहु समय ना जब ई कहल गईल कि महंगी से पार पावे नइखे आवत. ओहु समय ना जब उनका पर आरोप लागल कि ऊ दाम बढ़े घटे के भेद व्यापारी लोगन के दे देत रहले, उहो समय ना खिसियइले जब कांग्रेसी भाई लोग कहल कि ऊ खाद्य मंत्रलय नईखन चला पावत त छोड़ि देस हमनी का चला लेब सन. ओहु समय ना जब सबलोग खिसियात रहे, रंज होत रहे. यूपीए के पहिलका समय में लेफ्ट खिसिया के साथ छोड़ दिहलस, द्रमुको कबो- कबो रंज हो जात रहे बाकिर पवार जी ना खिसिअइले.लेकिन अब ऊ खिसिया गईल बाड़े तबो कहतारे कि साथ ना छोड़ेब.

अब देखऽ सभे कि ऊ आठि बरिस ना खिसिअइले लेकिन चुनाव जब दू बरिस बा त खिसिआ तारे. जब खिसिअइले त एकदमे जामा से बाहर हो गइले जइसन बंगाल के दीदी करेली. लेकिन चिंता के कवनो बात ना. काहे कि पवार चाचा कहतारे कि ऊ कांग्रेस के हाथ ना छोड़िहें. भले गारी दिहें, आलोचना करिहें, कमी गिनइहें लेकिन हाथ धईले रहिहें. ऐने सुनल जाता कि दीदीओ चाहे जेतना खिसिआस लेकिन यूपीए में बनल रहिहें. हँ त प्रणव बाबा के वोट दे के ऊ खुस ना भइली आ कहली कि मजबूरी में ई करे के परल. अइसन ना होखो कि एक दिन कहि देस कि यूपीए में मजबूरी में रहतानी. ओकरा से खुस नईखी, ओकर कवनो बात ना मनिहें लेकिन साथहे रहिहें. हालांकि ऊ बंगाल में कांग्रस के संगे नईखी. इहे हाल द्रमुक के बा. हं ईबार वाला यूपीए में ऊ ओइसन नईखी नाराज जईसन पछिलका बेर होत रही. ऊ समय दोसर रहे. ऊ कांग्रेस के धमकाइओ देत रहली आ अलगा होखे के बातो कहि देत रहली. लेकिन अबनी बार ऊ जलवा नईखे. मुलायमो जी यूपीए के संगही रहिहें. हां ई कहऽ कि ओकरा घर में ढुकिहें लेकिन खान पान दिल्लगी ठठ्ठा चलत रही. एहि से जवन पैकेज उनका मिलल ऊ दीदी के ना मिलल. असहीं मायावती जी के देखीं. ऊ मोलायम के साथ ना रहिहें लेकिन यूपीए के हाथ ना छोड़िहें. ई बात दोसर बा कि राहुल बबुआ के गरिआवत रहिहें. लेकिन साथे रहिहें. माने कि घर में झगरा कतनो भारी होखो पर साथे रही लोग, चाहे हाथ भर फरके काहे ना रहे लोग.


जयंती पांडेय दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में एम.ए. हईं आ कोलकाता, पटना, रांची, भुवनेश्वर से प्रकाशित सन्मार्ग अखबार में भोजपुरी व्यंग्य स्तंभ “लस्टम पस्टम” के नियमित लेखिका हईं. एकरा अलावे कई गो दोसरो पत्र-पत्रिकायन में हिंदी भा अंग्रेजी में आलेख प्रकाशित होत रहेला. बिहार के सिवान जिला के खुदरा गांव के बहू जयंती आजुकाल्हु कोलकाता में रहीलें.

धमकावे आ धमकियावे के आपन फायदा

– जयंती पांडेय

बाबा लस्टमानंद एकदम मूड में रहले. आज काल बड़हन नेता लोगन के धमकावे आ ऊहो अपना से छोटकन के धमकावे के मामला पर चर्चा में कहले, जान जा रामचेला कि धमकावे के आपन फायदा होला आ धमकियावे के अलग. जे धमकावे ला ऊ तऽ जान जा कि रातेरात मीडिया में बढ़ि के मसहूर हों जाला आ जेकरा धमकियावल जाला ऊ तऽ भर रात सहानुभूति के छंइटी मूड़ी पर ध के घूमत रहेला. जे धमकावे ला ऊ हीरो हो जाला आ जेकरा के धमकावल जाला ऊ….

रामचेला कहले, जीरो!

बाबा कहले , भाग बुड़बक, आजु मीडिया के जमाना में केहु जीरो ना होला. जेकरा धमकावल जाला ओकर सब दोस माफ. लोग लागेला पुचकारे, सहानुभूति देखलावे. लागे ला लोग कहे कि ‘अरे ऊ कमवा तऽ ठीके करत रहे बाकिर बड़का लोगवा करे देउ तब नु?’ अइसन हालत में ऊ आदमी कम आ बेचारा बेसी लागेला. बस रोआइन मुंह बनवले चुपचाप चारु ओर तिकवत रहेला. शालीनता के मुखौटा लगवले रहेला. अइसन मुखौटा पहिलको जमाना में रहे आ आजुओ बा आ काल्हुओ रही. हर पार्टी के हर बड़हन नेता के अइसन मुखौटा के दरकार होला. काहे कि ऊ अचके बहड़हन त बन ना गइल. जइसे सासो कबहुओं पतोह होली सन, दहीओ कबहुं दूध होला ओसही बड़को नेता छोटका नेता रहेला आ हमेसा बड़कन के आगे छोट बनत रहे के परेला. लेकिन जान जा कि ई मुखौटन के परसानी तब बढ़ जाला जब ऊ अपना के असली चेहरा बूझे लागे. जबले नाप के मुस्काई आ तौल के बोली तबले त ठीक बा जसहीं ऊ अपना के प्राणधारी बूझे लागी ओसहीं संकट चालू हो जाई आ ओकरा के उपेक्षा के गरम कुंड में बिग दियाई.

मुखौटन के परसानी ई बा कि ऊ हमेसा एके नाहिन रहेले सन. ना दुख में दुखी ना सुख में सुखी. आ एने लोकतंत्र के मजबूरी होला कि हमेसा नाटक करे के परे ला आ जब हंसे के चाहे खुशी देखावे के बेरा आवे ला त ऊ लागे ला मुंह बिसूरे. बिना आला कमान के परमिसन के ऊ त कुछ ना कर सके. अइसन मोका पर उहे सफल होला जे आपन चदर देखि के गोड़ पसारी आ जगहि देखि के पांख निकाली. मुखौटा सदा हरान रहेले सन आ रोआइन मुंह बना के कुर्सीमान रहे ले सन. आपन कवनो पहचान ना बने.


जयंती पांडेय दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में एम.ए. हईं आ कोलकाता, पटना, रांची, भुवनेश्वर से प्रकाशित सन्मार्ग अखबार में भोजपुरी व्यंग्य स्तंभ “लस्टम पस्टम” के नियमित लेखिका हईं. एकरा अलावे कई गो दोसरो पत्र-पत्रिकायन में हिंदी भा अंग्रेजी में आलेख प्रकाशित होत रहेला. बिहार के सिवान जिला के खुदरा गांव के बहू जयंती आजुकाल्हु कोलकाता में रहीलें.

नेतवो बिला जइहें लोग त देस में बांची का?

– जयंती पांडेय

सबेरे सबेरे रामचेला बाबा लस्टमानंद के दुअरा अइले आ लगले गादे करे. बाबा अचकचा के उठले, का हो का अतना प्राण तेयगले बाड़ऽ? सब ठीक बा नऽ? का ठीक बा बाबा, तूं त भईंस बेचि के सुतल बाड़ऽ, देस दुनिया के कवनो फिकिर कहाँ बा.

अरे भईल का? बतइबो करबऽ कि बस खाली चिचिआत रहबऽ.

अरे का बताईं बाबा? चारू ओर आंदोलन चल रहल बा. केहु महंगी से परेशान बा त केहु भ्रष्टाचार से हरान. केहु पेट्रोल के दाम बढ़ला से पसेने पसेने त केहु लइकिन के प्रति अपराधन से. जेने देखऽ अशांति बा. आंदोलन चल रहल बा, कवन कवन नेता एह में लागल बाड़े. एक इयोर जेकर गर्दन काटऽता लोग दोसरा ओर ओही के समर्थन में नारेबाजी करऽता लोग.

अब जान जा रामचेला कि नेता आ जनता में सद्गति आ दुर्गति के पुरान परम्परा ह. नेता एलेक्शन लड़ेलें, जनता वोट देले, नेता भाषण देला, जनता ताली बजावेले, नेता झूठ आश्वासन देला जनता ओकरा पर भरोसा करे ले. नेता कुकर्म करेला, जनता फल भोगेले. नेता भारत बंद करावेला, जनता पेट दाब ले ले. नेता गरीबी हटावल चाहे ला, जनता गरीबी के पिंड ना छोड़े ले. साँच त ई बा कि देश में पेट्रोल के जगहा जनता जरऽतिया.

अपना बात से त तूं सीरियस कन्फ्यूजन पैदा कए दिहलऽ. तहरा कहे के माने ई बा कि ई जे बाबा राम देव, ऊ केजरीवाल साहेब, चाहे किरण दीदी जवन करऽता लोग ओकरा से कवनो फायदा नइखे का?

काश अइसन होइत. ऐह में त नेता बा लोग लेकिन केहु अइसन नइखे जे जनता खातिर लाठी खा सको. इहां त हाल ई बा कि लाठी के भय से लोग मेहरारुन के कपड़ा पहिर के भागऽता. ओतना आंदोलन भइल ओह में तूं ही बताव केहु के खरोंच ले लागल?

ई जान जा कि अबसे पहिले आंदोलन नेता के हाथ में रहत रहे अब नेता लोग आंदोलन के हाथ में बा.

तूं त अईसन भूमिका बान्हऽतारऽ, लेकिन ई बतावऽ कि करप्शन आ महंगाई खातिर के जिम्मेदार बा?

ई बात ठीक कहलऽ. करप्शन खातिर त सांचो सरकार जिम्मेदार ह लेकिन महंगी के मामला ओकरा पर ना ठोकाई.

काहे ना ठोकाई, अगर मनमोहन सिंह दोषी ना रहते त एकरा बारे में कुछ बोलते ना.

कइसे बोलिहें? उ कहाउत सुनले बाड़ऽ कि ना कि जवना डाली पर बइठल जाला ओह डार के काटल ना जाला, चाहे जवना थरिया में खाइल जाला ओह में छेद ना कइल जाला.

तब ई बतावऽ कि मंहगी आ भ्रष्टाचार असहीं रही, केहु दूर ना करी?

सांचो रामचेला तूं बुद्धि से एक दम गोल बाड़ऽ, पूरा बकलोल बाड़ऽ. अरे अगर ई दूर हो जाई त नेता के का होई। नेता प्रजाती पर जुलुम काहे करऽतारऽ? अबहीं त बाघे विलुप्त हो रहल बाड़े सन, नेतवो बिला जइहें लोग त देस में बांची का?


जयंती पांडेय दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में एम.ए. हईं आ कोलकाता, पटना, रांची, भुवनेश्वर से प्रकाशित सन्मार्ग अखबार में भोजपुरी व्यंग्य स्तंभ “लस्टम पस्टम” के नियमित लेखिका हईं. एकरा अलावे कई गो दोसरो पत्र-पत्रिकायन में हिंदी भा अंग्रेजी में आलेख प्रकाशित होत रहेला. बिहार के सिवान जिला के खुदरा गांव के बहू जयंती आजुकाल्हु कोलकाता में रहीलें.