डा॰ रविकांत दुबे मारीशस में सम्मानित

बिहार भोजपुरी अकादमी के अध्यक्ष प्रोफेसर डा॰ रविकांत दुबे के २२ नवम्बर का दिने मारीशस का राष्ट्रपति भवन में मारीशस के राष्ट्रपति महामहिम अनिरुद्ध जगन्नाथ जी के हाथे मारीशस भोजपुरी गौरव सम्मान से सम्मानित कइल गइल.

सम्मान पत्र में अंकित गइल बा कि प्रोफेसर डा॰ रविकांत दुबे के ई सम्मान भोजपुरी खातिर कइल उनुकर सेवा कार्य, शोध कृतिअन, आ देश विदेश में भोजपुरी साहित्य आ संस्कृति के उत्थान खातिर कइल बहुमूल्य कोशिशन खातिर दिहलजा रहल बा.

पिछला १६ नवम्बर से २९ नवम्बर ले प्रोफेसर डा॰ रविकांत दुबे मारीशस के यात्रा पर गइल बाड़न जहाँ मारीशस हिंदू महासभा का तरफ से उनुका के ई सम्मान दिहल गइल.

मारीशस आ भोजपुरी

भोजपुरी दुनिया में एगो फैशन बा कहे कि सात समु्न्दर पार गइल गिरमिटीहा मजदूरन के परिवार से बसल मारीशस मे आजुले भोजपुरी भाषा, संस्कार, आ संस्कृति जिन्दा बा. ई बाति कहि के हमनी का अपना आप के तसल्ली दिहिला कि चलऽ कहीं ना कहीं भोजपुरी जिन्दा त बिया ! बाकिर जब एह बात के असल विश्लेषण करे बईठल जाव त पता चल जाई कि भोजपुरी के मौजूदा हाल का बा आ एकर भविष्य का बा. हमनी जइसन कुछ लोग अपना भाषामोह का चलते काल्पनिक दुनिया में जी रहल बा जबकि नयकी पीढ़ी तेजी से भोजपुरी से बिलग होत जात बा.
अपने देश में महुआ चैनल कहेला त अपना के भोजपुरी के चैनल बाकिर ओह पर भौजपुरी के का हाल बा कहियो दू घंटा चैनल चला के देख लीं. के बनी करोड़पति में जब देखनी कि भोजपुरी से कमाये खाये वाला लोग के तरे भोजपुरी से अलगा हो के हिन्दी में बतियावत बा. शो के एंकर चूंकि खालिस भोजपुरी ना बोल सकसु से ऊ अधिकतर डायलाग हिन्दी में मारेले आ बीच बीच में कुछ रटल रटावल भोजपुरी वाक्य छींटत रहेलन. रविकिशन, निरहुआ, मनोज तिवारी जइसन लोग अगर सार्वजनिक कार्यक्रम में, खासकर जब ऊ भोजपुरी में होखल बतावल जात होखे आ भोजपुरी के चैनल होखे के दावा करे वाला चैनल पर देखावल जात होखे, अगर हिन्दी में बोकाव त का कहल जाई ! इहे नू कि भोजपुरियन के बुड़बक बनाके आपन रोटी सेंकल जा रहल बा.

खैर बात बहकि गइल जवन अइसनका मौका पर अक्सर हो जाला. बाति चलत रहुवे मारीशस के. आईं ओही पर लवटल जाव. काहे कि मारीशस के लघु भारत कहल जाला आ मारीशस आ भारत में बेसी के अन्तर नइखे. अन्तर बा त हमनी किहाँ अंग्रेजन के गुलामी के असर जिन्दा बा त ओहिजा फ्रांस के. हमनी किहाँ अंगरेजी फेंटल शब्दन के बहुतायत बा त मारीशस में फ्रेंच के. ओहिजा के मूल भाषा क्रिओल में फ्रेंच, डच, चीनी,हिन्दी, भोजपुरी सभकर थोड़बहुत प्रभाव देखे के मिल सकेला बाकिर क्रिओल के भोजपुरी से सौतिया डाह जग जाहिर बा. त मारीशस में हालही में टीनेजर रिसर्च अनलिमिटेड का तरफ से करावल एगो सर्वे के निष्कर्ष बतावत बा कि मारीशस में करीब एक लाख बासठ हजार टीनेजर भा नवही बाड़न. टीनेजर ओह उमिर के लोग के कहल जाला जवना में टीन लागल होला. थर्टीन, फोर्टीन, फि्फ्टीन होत नाइन्टीन ले के बीच के उमिर के नवही टीन कहाले. त एह टीन के सामाजिक महत्व बहुत बा काहे कि ई देश के भावी पीढ़ी ह आ कुल आबादी के आठवाँ हिस्सा. एह टीनेजर के सर्वे में देखल गइल कि भोजपुरी तेजी से आपन जगहा छोड़ले जात बिया आ घर का भितरो क्रिओल भा अंगरेजी के दखल तेजी से बढ़ रहल बा. करीब ९८ फीसदी नवही अपना घर में क्रिओल बोलेले जबकि भोजपुरी बोलेवालन के संख्या पाँचे फीसदी बा. बिखरत पारिवारिक मूल्य, अंतरसामुदायिक शादी बिआह का चलते हो सकेला कि बाप के भाषा कुछ अउर होखे, माई के कुछ अउर. आ एह परिवारन में क्रिओल भा अंगरेजी के इस्तेमाल बेसी सहज लागत होखे.

कारण भा ओकरा के समुझावल जवना तरह से कइल जाव, सच्चाई इहे बा कि भोजपुरी के महत्व दिन पर दिन घटल जात बा. हमनी के दिन पर दिन भोजपुरी से बिलग होखल जात बानी जा. जरुरत बा कि भोजपुरी के हित चिन्ता करे वाला लोग एहपर विचार करो, रास्ता निकालो कि भोजपुरी के जियतार कइसे बनवले राखल जाव आ एकरा के रोजी रोटी के भाषा कइसे बनावल जाव. जबले भोजपुरी के रोजी रोजगार के भाषा ना बनावल जा सके तबले एकरा भविष्य पर बदरी छवले रही.

भोजपुरी के संवैधानिक मान्यता दिआवे से बेसी जरुरत भोजपुरी में अधिका से अधिका साहित्य रचना के, दोसरा भाषा से ज्ञान विज्ञान के किताबन के भोजपुरी अनुवाद कइला के, भोजपुरी में हर तरह के साहित्य उपलब्ध करवला के बा. कतना बेर एकही बात दोहराईं.भोजपुरी के प्रकाशन कमाई करे के के कहो आपन खरचा तक ना निकाल पाव सँ. अइसना में कवनो प्रकाशन पूरा दुनिया में पसरल भोजपुरियन के अपना दायरा में कइसे ले आवे. इंटरनेट एगो माध्यम हो सकेला जवना के तेजी से विस्तारो हो रहल बा आ रोजे नया नया लोग एकरा से जुड़ल जा रहल बा. एही सोच के ध्यान में राखत अँजोरिया अपना शुरूआते से भोजपुरी साहित्य के निशु्ल्क वितरण में लागल बिया. पहिला बेर भोजपुरी के कवनो किताब अँजोरिये पर पूरा के पूरा निकलल, पहिला बेर अँजोरिये पर कवनो पत्रिका पूरा के पूरा पेश कइल गइल. दुख के बात इहे बा कि ओकरा बाद कवनो नया पत्रिका भा प्रकाशक एह मुफ्त सुविधा के फायदा उठावे ना अइलन. अंजोरिया पर कई गो किताब पूरा के पूरा उपल्बध बा, एक से बढ़ के एक प्रतिनिधि रचना मौजूद बा बाकिर दुख बा त एह बाति के कि अंजोरिया पर आवे वाला पाठकन के एगो बड़हन हिस्सा बस फिलिम वाला पन्ना तक मतलब राखेला. कहियो नइखी देखले पढ़ले कि कवनो साहित्यिक रचना पर सही आ विस्तार से चरचा भइल होखो.

रउरे सही सही बताईं कि अँजोरिया पर के कतना रचना, कतना साहित्य रउरा पढ़ले बानी ?

बात जहाँ से शूरू भइल ओकर संदर्भ ला डिफाई मीडिया के लेख

भोजपुरी जन जागरण अभियान

बिहार भोजपुरी अकादमी के द्वारा चलावल जा रहल “भोजपुरी जन-जागरण अभियान” के लोकप्रियता से प्रभावित होकर के मॉरिशस के वरिष्ठ और प्रसिद्द साहित्यकार डॉ. सरिता बुद्धू, पटना स्थित बिहार भोजपुरी अकादमी के कार्यालय में आज दिनांक २२ जनवरी २०११ के चहुंपली आ अकादमी के अध्यक्ष डॉ. रविकान्त दुबे जी के बधाई दिहली. साथ ही सरिता जी के द्वारा अकादमी के द्वारा चलावल जा रहल “भोजपुरी जन-जागरण” अभियान के बारे में उत्सुकतापूर्वक जानकारी लिहली.

एह अवसर पर अकादमी में आयोजित समारोह में सरिता बुद्धू जी के आगमन पर अकादमी के निदेशक श्री. दीपक कुमार सिंह जी के द्वारा फूल के डलिया से स्वागत करल गईल.

आयोजित समारोह के अध्यक्षता करते हुए डॉ. दुबे जी बतवनी की मनोरंजन के क्षेत्र में भोजपुरी बहुत ही सशक्त हो चुकल बा लेकिन साहित्य सृजन, व्याकरण, शब्दकोष आ पाठ्यक्रम के क्षेत्र में उत्कृष्ट पुस्तक के अभी भी अभाव बा. एह अभाव के अकादमी के द्वारा पूरा प्रयास करल जा रहल बा आ एह विषय में गंभीर चिंतन के साथ ही योजना भी तैयार करल जा रहल बा. साथ ही उहाँ के कहनी की एह विषय में बेहतरी खातिर अकादमी दृढ संकल्प बा आ बहुत जल्दी ही एह विषय में सकारात्मक परिणाम सामने जरुर आई.

बिहार भोजपुरी अकादमी में समारोह के भव्यता आ प्रबुद्धता देखते हुए सरिता जी यह स्वीकार कईनी की आर भारत में जेतना भी संस्था भोजपुरी खातिर काम कर रहल बिया, ओह में बिहार भोजपुरी अकादमी के वर्तमान में चलावल जा रहल “भोजपुरी जन-जागरण अभियान” सबसे सशक्त अउर बेहतर बा. उहाँ के ई भी कहनी की डॉ. रविकांत दुबे जी के अध्यक्षता आ नेतृत्व में, छोट-छोट गाँव, क़स्बा आ छोट शहर सब में एह अभियान के व्यापक असर होई. अभियान के तहत अकादमी साहित्यकार, रचनाकार आ प्रबुद्ध लोग के जोड़े के जे काम कर रहल बा, अईसन पहल भारत में कबहू ना भईल रहल ह.

सरिता जी एह समारोह में भाव विभोर होकर के आपन सुरीला स्वर में एक गीत भी सुनावली “कलकतवा से छुटल जहाज, भंवरिया धीरे चलअ”. साथ ही अकादमी के अनुसन्धान सहायक श्री ब्रज किशोर जी सस्वर “बटोहिया” गीत गाकर के लोग के आनंद विभोर कर दिहले.
एह समारोह के सबसे उल्लेखनीय बात ई रहल की भोजपुरी से जुडल लोग के अलावा बिहार मैथिलि अकादमी, बिहार मगही अकादमी अउर बिहार संस्कृत अकादमी के लोग भी भारी संख्या में एह समारोह में शिरकत कईले. जेह में एह अकादमी सबके कर्मी के साथ ही साहित्यकार लोग भी चहुंपले.

चलते समय डॉ. सरिता बुद्धू जी के द्वारा बिहार भोजपुरी अकादमी के विजिटर-रजिस्टर पर अकादमी के बारे में लिखते हुए ई उल्लेख करल गईल की बिहार भोजपुरी अकादमी द्वारा कईल जा रहल “भोजपुरी जन-जागरण अभियान” बहुत ही महत्वपूर्ण कदम बा. हम उम्मीद कर रहल बानी की भोजपुरी क्षेत्र में लेखक अउर साहित्यकार खातिर ई कदम वरदान साबित होई.
कार्यक्रम के अंत में अकादमी के सहायक निदेशक श्री लालन जी के द्वारा धन्यवाद ज्ञापन दिहल गईल.

भोजपुरी अकादमी के अभियान से अभिप्रेरित होकर के सरिता जी संभवतः ३० जनवरी २०११ के, बिहार भोजपुरी अकादमी के तत्वधान में छपरा में आयोजित होखे वाला कार्यक्रम में भी भाग लीहें.

चौराहा पर ठाढ़ भोजपुरी

– संजीला रामदौर

पिछला दिने मारीशस विश्वविद्यालय तीन दिन के एगो कार्यशाला आयोजित कइले रहुवे जवना में भोजपुरी आ अंगरेजी में पूरा शोध आ प्रमाण का साथे कई गो मनन करे लायक शोधपत्र पेश कइल गइल. कार्यशाला भोजपुरी आ एकरा धरोहर पर केन्द्रित रहुवे जवना में श्रोता आ शोध कर्ता लोग का बीचे जम के विचार मंथन भइल.

एह कार्यशाला से भोजपुरी भाषा आ संस्कृति के संरक्षण आ विकास खातिर आ शोधकर्म प्रोत्साहित करे खातिर कई गो मूल्यवान निष्कर्ष निकलल जवना में सबले खास रहल नर्सरी कक्षा से खेल, नर्सरी राइम, लोकगीतन, आ बुझउवल से भोजपुरी के पेश कइल.

अबही मारीशस विश्वविद्यालय में भोजपुरी के पढ़ाई महात्मा गाँधी संस्थान का सहयोग से एगो वैकल्पिक माड्यूल का रुप में बीए में पढ़ावल जा रहल बा. कार्यशाला में बहुते जोर एह बात पर दिहल गइल कि अब भोजपुरी के मूल विषय के रुप में पढ़ावल जाय आ एकरा बदे पाठ्यपुस्तकन आ शब्दकोषन के रचना कइल जाव जवना से कि पढ़ावे वालन के सहयोग मिल सको.

पिछला दस साल से प्रोफेसर बासुदेव विसूनदयाल कॉलेज में पहिला से चउथा तक पढ़ावल जा रहल बा आ संस्था के मैनेजर रामनाथ जीता एह कोशिश में बाड़न कि कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से एकरा के सेकण्डरी आ हायर सेकण्डरी स्तर पर पढ़ावे के अनुमति मिल जाव. सेकण्डरी स्कूल में अबही करीब एक हजार छात्र छात्रा भोजपुरी पढ़ रहल बाड़े. दोसरा तरफ इण्डियन डायस्पोरा सेण्टर का पहल पर करीब एक सौ अनौपचारिक संध्या विद्यालयन में भोजपुरी पढ़ावल जा रहल बा.

भोजपुरी के संरक्षण आ पसराव खातिर दसियो साल से लागल मारीशस भोजपुरी संस्थान के अमूल्य योगदान के भरपूर प्रशंसो एह कार्यशाला में कइल गइल. कहल गइल कि एह योगदान के सही तरीका से दर्ज करवला के जरुरत बा.

पत्रकार शोभानन्द सीपरसाद के सुझाव रहल कि एगो चारपेजी न्यूज लेटर भोजपुरी में निकालल जाव. डा॰सरिता बुद्धु कहली कि भोजपुरी से जुड़ल अकादमिक शोध पत्रिका निकालल जाव. इहो सुजाव सामने आइल कि बचवन लायक भोजपुरी गीत लिखल जाव आ एकरा खातिर प्रतियोगितो आयोजित कइल जा सकेला.

आप्रवासी घाट ट्रस्ट फण्ड के अध्यक्ष डा॰ विजया तिलक के सुझाव रहल कि जे भोजपुरी भाषा आ संस्कृति के संरक्षण का दिसाईं आत्मा से समर्पित बाड़े ओह लोगन के वैज्ञानिक समर्थन दिहल जाव. बोलचाल में भोजपुरी के प्रयोग से हिचकिचाहट खतम करे खातिर एगो बड़हन आन्दोलन चलावहू के जरुरत महसूस कइल गइल.

अभिभावकन खातिर वयस्क शिक्षा पाठ्यक्रम चलावे के चाहीं जवना से कि ऊ लोग अपना बचवन के भोजपुरी बोले खातिर प्रोत्साहित कर सके. घर में भोजपुरी के अधिकाधिक प्रयोग के बात कहल गइल जवना से कि भोजपुरी अपना स्वाभाविक माहौल में बचावल आ चलावल जा सके. एह बाति के गलत बतावल गइल कि मारीशस के पन्द्रहे फीसदी लोग भोजपुरी बोल भा समुझ सकेला. ई आंकड़ा गलत आधार पर बनावल बा. जरुरत बा कि आँकड़ा बिटोरे वाला लोग अपना सवाल के सही तरीका से पेश करो. आ सामने वाला बेझिझक सही जवाब दे सको.

साल २००६ में आप्रवासी घाट के विश्व धरोहर का रुप में यूनेस्को के मान्यता मिलल रहे. २ नवम्बर १८३४ का बाद से एही घाट के सोलह सीढ़ी चढ़ के भोजपुरिया मजदूर ईख का खेतन में काम करे जात रहलन. भोजपुरियन के बहुते कष्ट आ जलालत झेले पड़ल रहे. अब बरिसन से दोसरा प्रभावी भाषन से कमतरी महसूस करत आ रहल भोजपुरी पर गम्भीर ध्यान दिहल जा रहल बा.
आप्रवासी घाट ट्रस्ट फण्ड के कोरिन फारेस्ट कहलन कि मारीशस के संस्कृति समुझे खातिर जरुरत बा कि हमनी समुझी जाँ कि भोजपुरी क्रिओल के का दिहलसि आ क्रिओल से ओकरा का मिलल. एकर वैज्ञानिक तथ्यपरक शोध कइला के जरुरत बा. हमनी के अपना के पहिचनला के आ अपना धरोहर के बचा के रखला के जरुरत बा,

हमनी पर भइल अत्याचार कई रुप में भइल रहे, बोली पर, संस्कृति पर, कला रुपन पर, खाएपिए का तौर तरीका पर, ज्ञान पर, हस्तकला पर. एह सब के अध्ययन करे के जरुरत बा जवना से हमनी का धरोहर के सही रुप से जानल जा सके. फारेस्ट कहलन कि आप्रवासी घाट एह सच के जानत मानत बा आ यूनेस्को के दिशानिर्देश के पालन कर रहल बा.

कार्यशाला में इहो कहल गइल कि भोजपुरी के धरोहर के बचावे खातिर एगो सांस्कृतिक नीति होखे के चाहीं, शिक्षा का क्षेत्र में भोजपुरी के ओकर जायज जगहा दिआवे खातिर सही शैक्षणिक नीति बनावल जाय, आ भोजपुरी के औपचारिक मान्यता दिहल जाव. कार्यशाला के मकसद रहे कि

१. भोजपुरी पर आधुनिकता के प्रभाव, एकर परिवर्तन आ विकासप्रक्रिया के पहचान
२. विद्वानन आ पेशेवर समुदाय का बीचे समन्वय स्थापित कइल जवना से कि गिरमिटिहा मजदूर मार्गयोजना प्रकल्प में भोजपुरी के शामिल करावे बदे शोध नेटवर्क बने.
३. एह विषय पर अबले भइल शोध के मूल्यांकन आ आगे के दिशा तय कइल.
४. भोजपुरी भाषा संस्कृति के फइलावे का दिशाईं सुझाव दिहल, कार्ययोजना बनावल, आ दोसरा भाषा समूहन से बेहतर तालमेल बइठावल.

जे लोग एह कार्यशाला में आपन शोधपत्र राखल
रविराज बिछूक, प्रवक्ता, मारीशस विश्वविद्यालय
डा॰अर्चना कुमार, सहप्राध्यापक, अंगरेजी विभाग, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय
कोरिने फारेस्ट, तकनीकि प्रमुख, आप्रवासी घाट ट्रस्ट
सत्येन्द्र प्रीथम, ट्रूथ एन्ड जस्टिस कमीशन
देवदत बालकिसून
हदोरी चेट्टन
अरविन्द बिसेसर
जय दावसिंग
शोभानन्द सीपरसाद, मुख्य संपादक, न्यूज आन संडे
डा॰सरिता बुद्धू, निदेशक, मारीशस भोजपुरी इन्स्टीच्यूट
डा॰उदय नारायन गंगू, सचिव, आर्यसभा
डा॰गौतमी रमइयाद. एमजीआई दूरस्थ शिक्षा प्रमुख
डा॰सुचिता रामदीन
किशोर ठकोरी, भोजपुरी गायक
डा॰दर्शन पुरोहित, बड़ौदा विश्वविद्यालय के नाट्य प्राध्यापक

कार्यशाला के आयोजन मारीशस विश्वविद्यालय, रविन्द्ननाथ टैगोर इन्स्टीच्यूट, आ महात्मा गाँधी इन्स्टीच्यूट का साथे मिल के आप्रवासी घाट ट्रस्ट फण्ड कइले रहे. कार्यशाला १३ जुलाई से १५ जुलाई ले चलल.

कार्यशाला के औपचारिक उद्घाटन टर्शियरी शिक्षा मंत्री राजेश जीता आ मारीशस विश्वविद्यालय के कला संकाय के संकायाध्यक्ष प्रो॰एस शोभी का मौजूदगी में मारीशस के कला संस्कृति मंत्री मुक्तेश्वर चूनी कइलें.



डिफाई मीडिया पर प्रकाशित मूल रिपो्र्ट़
के भोजपुरी अनुवाद

मारीशस का चुनाव में अलायन्स आफ द फ्यूचर के जीत


पिछला सात मई के मारीशस में भइल आम चुनाव में प्रधानमंत्री नवीन रामगुलाम का नेतृत्व में बनल अलाययन्स आफ द फ्यूचर शानदार जीत दर्ज कइलस आ संसद के साठ गो सीधे चुनल जाये वाला सीटन में से ४१ गो जीत लिहलसि. एह गठबन्धन में नवीन रामगुलाम के मारीशस लेबर पार्टी, प्रविन्द जगनाथ के मिलिटैन्ट सोशलिस्ट मूवमेंट, आ जेवियर दुवल का नेतृत्व वाली मारीशियन सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी शामिल रहे.

विपक्षी गठबन्धन अलायन्स आफ द हार्ट के १८ गो सीट मिल पावल जबकि ओकरा पक्ष में ४२.३६ फीसदी वोट पड़ल. अलायन्स आफ द फ्यूचर के ४९.३१ फीसदी मत मिलल बा. अलायन्स आफ द हार्ट के नेता पाल बेरेन्जर का पक्ष में कुछ अखबार अइसन हवा बनवले रहलें कि बुझात रहुवे कि बेरेन्जर एक बेर फेर से मारीशस के प्रधानमंत्री बन जइहें. ब्रिटिश गुलामी से मुक्त भइला का बाद साल २००३ से २००५ ले बेरेन्जरे प्रधानमंत्री रहलें आ मारीशस के ऊ अकेला प्रधानमंत्री बनलें जे साउथ एशियन मूल के ना रहुवे.

अलायन्स आफ द हार्ट में पाल बेरेन्जर के मारीशियन मिलिटैन्ट मूवमेन्ट का साथ कई गो छोट छोट पार्टी रहलीं सँ आ चुनाव प्रचार का दौरान कुछ संभावना बनल रहे कि एमएमएम आ एमएसएम का बीच समझौता हो जाई. अगर अइसनका हो जाइत त चुनाव परिणाम कुछ दोसरे रहित. खैर साल २००५ आ साल २०१० के चुनाव जीत के नवीन रामगुलाम मारीशस में भोजपुरी के आस जियतार राख लिहलें. वइसे मारीशस में सबसे बेसी लोग के भाषा होखला का बावजूद भोजपुरी सरकारी उपेक्षा के शिकार बिया.

एहिजा मारीशस के चुनाव प्रणाली का कुछ खास बात के जिक्र कइल जरुरी बा. ६२ सीट पर सीधा चुनाव होला जबकि आठ गो नामांकन अइसन तरीका से कइल जाले कि हर समुदाय के प्रतिनिधित्व मिल जाव आ चुनाव के परिणामो ना बदले. एह सीट पर ओह लोग के नामांकन कइल जाला जवन ओह समुदाय के सबसे बेसी मत पा के हारे वाला उम्मीदवार के दिहल जाला जवना के प्रतिनिधित्व ना मिल पावे. एकरा खातिर हर उम्मीदवार के अपना समुदाय का बारे में जानकारी देबे के पड़ेला. अबकी १०४ गो उम्मीदवार अइसनका जानकारी देबे से इन्कार कर दिहलें एहसे बाकी बाचल ५२९ उम्मीदवारन में से फैसला ले के सात गो नामांकन कइल गइल. एहमें से चार गो अलायन्स आफ द फ्यूचर के मिलल आ दू गो अलायन्स आफ द हार्ट के. एगो नामांकन रोड्रिग पार्टी के मिलल. आठवाँ सीट पर केहू के नामांकन ना हो सकल काहे कि बाकी बचल दू गो पार्टियन में कवनो चाइनीज मारीशियन उम्मीदवार रहबे ना कइल.

एह चुनाव का दौरान विदेशी पर्यवेक्षक चुनाव के मुक्त आ पारदर्शी बतवलें जबकि हारे वाला गठबन्धन सरकार पर आरोप लगवले बा कि ऊ सरकारी टेलीविजन के उपयोग सत्ताधारी गठबन्धन के पक्ष में प्रचार करे खातिर कइलस. जबकि मारीशस के एगो समाचार पत्र खुल के विपक्षी गठबन्धन खातिर प्रचार कइलस जवना में कइ बेर साँच के झूठ आ झूठ के साँच बना दिहल गइल. चुनाव का दौरान साम्प्रदायिक भावना भड़कावहूं के भरपूर कोशिश कइल गइल. आशा कइल जाव कि चुनाव पूरा हो गइला का बाद एह भावना के खतम कर दिहल जाई,


(स्रोत : मारीशस के समाचारपत्रन से मिलल जानकारी का आधार पर )