“लखैरा” लेके आवत बाड़े जीत कुमार

बिहार के छपरा जिला के सुभन छपरा गाँव से आइल जीत कुमार जब मुंबई घूमे अइलन त उनुकर भेंट संजोग से संगीतकार अशोक घायल से हो गइल जे उनुका के फिल्म “गंगा मईया तोहे चुनरी चढईबो” में अभिनय करे के मौका दिहले. एकरा बाद फिलिमन में अभिनय करे के उनुकर दिवानगी बढ़ते गइल आ तब अभिनय के बारीकि सीखे खातिर स्काँन थियेटर ग्रुप से जुड़के बहुते सारा शो करत गइले आ फिल्मों में अभिनय करत रहले. ई सिलसिला आजु ले जारी बा. अब जल्दिये रिलीज होखे वाली फिल्म “लखैरा” से ऊ आपन एगो नया छवि दर्शकन का दिलोदिमाग में बइठावे का इन्तजार में बाड़े.

बकौल जीत कुमार “फिल्म “लखैरा” में उनुकर किरदार दर्शकन के जरूर पसंद आई काहे कि ई एगो अइसन नवही के बा जे पटना शहर में रहके फ़िल्मी हीरो बने के सपना देखत रहऽता. संजोग से एक दिन ऊ सुपर स्टार बनियो जात बा. सपना साँच होखे तक के जवन ड्रामा बा ऊ सगरी दर्शकन के मन मोह ली.

निर्माता कृष्ण यादव, निर्देशक संजय सिन्हा आ मुख्य भूमिका मनोज दाव, कल्पना शाह, मनीष चतुर्वेदी,निरुपमाश्री, तेज नारायण, सुबोध सेठ, बबलू सिंह, राघवेन्द्र सिंह, मनीष महिवाल, श्याम मल्होत्रा, धर्मेद्र सिंह, कमलेश पटेल, अशोक गुप्ता अउर आलोक यादव बाड़े. आईटम नृत्य पर ठुमका लगवले बाड़ी संभावना सेठ.


(अपना न्यूज के रपट से)

“लखैरा” में सपना और मनोज दाव का आइटम सांग

– समरजीत

हाल ही में विक्रमगढ़ के चेतना गार्डन में आइटम गर्ल सपना और फिल्म के नवोदित नायक मनोज दाव पर नृत्य निर्देशक केदार सुब्बा ने एक आइटम सांग भोजपुरी फिल्म “लखैरा” में फिल्माया. सुक्रीत फिल्म्स एवं जन एकता फिल्म्स के बैनर तले बन रही इस भोजपुरी फिल्म के निर्माता कृष्णा यादव, निर्देशक संजय सिन्हा हैं. इस फिल्म के लेखक चुनमुन पंडित, संगीतकार अमन श्लोक, गीतकार मो. जहीरुद्दीन बेग व अरविन्द तिवारी, एक्शन मास्टर गब्बर सिंह तथा कैमरामैन शानू सिन्हा हैं. इस फिल्म में मनोज दाव के अलावा कल्पना शाह, आलोक यादव, सुबोध सेठ, मनीष महिवाल, निरुपमा श्री, मनीष चतुर्वेदी, निलोफर, जीतेन, तेज, रीमा सिंह, श्याम मेहरोत्रा, सुमन मेहरोत्रा, मास्टर चंद्र प्रकाश, मास्टर तबिश व अन्य की प्रमुख भूमिका है.
इस फिल्म को जन एकता कंस्ट्रक्शन सर्विसेस इंडिया लि. ने प्रस्तुत किया है. इस फिल्म की कहानी तीन ऐसे दोस्तों की है, जिसे समाज के लोग लखैरा और पागल कहते हैं. लेकिन बाद में यही तीनों दोस्त कुछ ऐसा कर गुजरते हैं कि समाज के वही लोग जो उनको लखैरा और पागल समझते थे, उन पर गर्व करने लगते हैं. इस फिल्म की शूटिंग मुंबई के अलावा बिहार के सासाराम और पटना में की गई है.

तीन दोस्तों की कहानी है ‘लखैरा’

हमारे समाज में जिन्होंने कुछ अलग हट कर काम किये हैं, समाज के लोग पहले उन्हें पागल और लखैरा कहते हैं, लेकिन ऐसे ही पागल लोग कुछ बन जाते हैं तो पूरा समाज उनके पीछे खड़ा होता है. सुकृत फिल्म्स एवं जन एकता फिल्म के बैनर तले बनी भोजपुर फिल्म ‘लखैरा’ की कहानी भी कुछ इसी तरह से है जिसके निर्माता कृष्णा यादव और निर्देशक संजय सिन्हा हैं. इस फिल्म के लेखक चुनमुन पंडित, संगीतकार अमन श्लोक, गीतकार मो. जहीरुद्दीन बेग और अरविन्द तिवारी हैं. फिल्म के नृत्य निर्देशक केदार सुब्बा, एक्शन मास्टर गब्बर सिंह तथा कैमरामैन शानु सिन्हा हैं. इस फिल्म में मनोज दाव, कल्पना शाह, आलोक यादव, सुबोध सेठ, मनीष महिवाल, निरुपमा श्री, मनीष चतुर्वेदी, निलोफर, जीतेन, तेज, रीमा सिंह, मास्टर चंद्र प्रकाश, मास्टर तबिश व अन्य कलाकार हैं. फिल्म का आइटम गीत इशा पटेल पर फिल्माया गया है. इस फिल्म को जन एकता कंस्ट्रक्शन सर्विसेस इंडिया लि. ने प्रस्तुत किया है. फिल्म के बारे में निर्देशक संजय सिंन्हा ने बताया कि ‘लखैरा’ की कहानी तीन ऐसे दोस्तों की है, जिसे समाज लखैरा कहता है, लेकिन बाद में यही तीनों दोस्त कुछ ऐसा कर गुज़रते हैं कि समाज के लोग उन्हें अपने सर आंखों पर बिठा लेते हैं.


(स्रोत – समरजीत)

ऊ दिन कइसे भूलाएम – कल्पना शाह

पंजाब के लड़की. पिता पायलट हउवें बाकिर ओकरा ऊँचाई से डर लागेला. मेडिकल में जाये के मन रहे बाकिर बीएससी करे के पड़ल. ओकरा बाद डायटिशियन के कोर्स कइली आ एगो अस्पताल में नौकरियो मिल गइल. बाकिर कहल जाला कि आदमी के किस्मत ओकरा के ओहिजा ले के चलिये जाला जहाँ ओकरा जाये के रहेला.

बाति हो ता कल्पना शाह के. जे आजु भोजपुरी सिनेमा में बुकंदी पर चहुंप चुकल बाड़ी. अपना फिल्म में आवे के संजोग का बारे में बतावत कल्पना कहली कि नाचे के शौक रहे से चंडीगढ़ में एगो स्टेज शो में नृत्य कइली. बाद में ऊ परफारमेंस कवनो चैनल पर देखावल गइल त अशोक जैन कहीं से उनकर नम्बर पता कर के उनुका के फोन कइलें आ पुछलें कि एक भोजपुरी फिल्म में काम करोगी ? फिल्म रहे “बड़की माई”. थोड़ हिचकिचाहट का बाद हँ कह दिहली आ जब शूटिंग शुरु भइल त पहिलके शॉट ओके हो गइल.

फिल्म में आवे में घरो वालन के पूरा सहयोग मिलल. फेर त “भईया के साली, जोगी जी धीरे धीरे, प्रधान जी, प्रेम पुजारन, जब केहू दिल में समा जाला, मार देब गोली केहू ना बोली, कसूर, लखैरा, अपने बेगाने, हम हईँ निरहुआ के जीजा, आ निरहुआ अनाड़ी समेत कई गो फिल्म में काम कर चुकल बाड़ी भा करत बाड़ी.

भोजपुरी सिनेमा में अश्लीलता का बारे में कल्पना के कहना बा कि जतना बा ना ओह ले बेसी के शोर बा. सगरी भोजपुरी के बदनाम करे खातिर हो रहल बा. अश्लील सीन भा संवाद कबहियो फिल्म के मुख्य पात्र का बीच ना होखे बलुक ओकरा के एगो अलगे ट्रैक पर राखल जाले. बाकिर ईहो जरुरी नइखे कि वइसनो सीन राखले जाव. दर्शक के बढ़ियो मनोरंजन दिहल जा सकेला.


(स्रोत – संजय भूषण पटियाला)